Airtel Business के CEO Sharat Sinha बोले, कंपनियों के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र ही सुनिश्चित करेगा AI के लाभ
एयरटेल बिजनेस के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) शरत सिन्हा ने कहा है कि पिछली प्रौद्योगिकियों की तरह कृत्रिम मेधा (एआई) को सुरक्षित रूप से लागू करने की रूपरेखा और तरीके लगातार विकसित होते रहेंगे। उन्होंने आगे कहा कि कंपनियों के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय ही एआई के लाभ सुनिश्चित करेंगे। सिन्हा ने प्रौद्योगिकी सुरक्षा, डीपफेक और मानवीय प्राथमिकताओं जैसे मुद्दों से निपटने के लिए एआई नियमन पर सरकार द्वारा जल्द ही एक परामर्श पत्र जारी करने की योजना को सही दिशा में उठाया गया कदम बताया।
उन्होंने पीटीआई-से कहा, ‘‘हम नियामकों और अपने ग्राहकों दोनों के साथ मिलकर काम करते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हम जो भी करें वह नियमों के अनुरूप हो। हम ऐसे मानक तय करने में सकारात्मक भूमिका निभाते हैं और आगे भी हमारा यही प्रयास रहेगा।’’ सिन्हा ने कहा कि कंपनी ऐसा नियमन चाहती है जो बुनियादी ढांचे को सही कारोबारी नतीजे देने में सक्षम बनाए, और लोग सुरक्षित रूप से एआई का इस्तेमाल कर सकें। उन्होंने कहा कि एयरटेल इसमें सकारात्मक और सक्रिय भूमिका निभाएगी।
उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि सरकार एक महीने के भीतर एआई नियमन पर एक परामर्श पत्र लाएगी, जिसमें एआई सुरक्षा, डीपफेक और मानवीय दृष्टिकोण जैसे प्रमुख पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
Supreme Court ने दिल्ली प्रदर्शन पर केंद्र को भेजा नोटिस, अवैध हिरासत पर रोक
उच्चतम न्यायालय ने रविवार को एक विशेष सुनवाई के दौरान दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के विरोध-प्रदर्शन के कारण मेट्रो और ट्रेन सेवाओं से जुड़े अदालत के आदेश के कथित उल्लंघन पर अवमानना की कार्रवाई के अनुरोध वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी करते हुए कई निर्देश दिए। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए: * शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने वाले लोगों को कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया जाए। * दिल्ली मेट्रो और रेलवे सेवाएं सामान्य रूप से बहाल की जाएं।
प्रतिबंध केवल तभी लगाए जा सकते हैं, जब वे संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत उचित ठहराए जा सकें। * कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए इंटरनेट सेवाएं बहाल की जाएं। * यातायात नियमों के अधीन लोगों की आवाजाही निर्बाध रहे और बैरिकेड लगाने की आवश्यकता की समीक्षा की जाए।
* वकीलों, पत्रकारों और अन्य लोगों को अपने पेशेवर कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा नहीं पहुंचाई जाए। * कानून के अनुसार शांतिपूर्ण सभाओं की अनुमति दी जाए, विशेषकर उन क्षेत्रों के बाहर जहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है। * बड़े पैमाने पर हिरासत में लिए जाने के आरोपों से संबंधित बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं और अन्य संबंधित मामलों पर मुख्य मामलों के साथ 13 अक्टूबर को सुनवाई होगी।
* प्रदर्शनकारियों को याद दिलाया गया कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण होना चाहिए और दूसरों को उकसाने वाला नहीं होना चाहिए। * उच्चतम न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें लागू कराने के लिए बाध्य है।
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