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जरूरत की खबर- युवाओं में निकोटिन पाउच का बढ़ता क्रेज:ये स्मोकिंग की लत छुड़ाता है या नई लत लगाता है? जानें इसके साइड इफेक्ट

आजकल निकोटिन पाउच युवाओं के बीच तेजी से पॉपुलर हो रहा है। सिगरेट और दूसरे तंबाकू प्रोडक्ट्स से अलग, निकोटिन लेने के इस तरीके ने लोगों का ध्यान खींचा है। यह छोटे-से सफेद पाउच में आता है, जिसे होंठ और मसूड़ों के बीच रखकर यूज किया जाता है। इसमें न धुआं निकलता है, न स्मेल आती है। यही वजह है कि कई लोग इसे सिगरेट का सेफ ऑप्शन मानने लगे हैं। हालांकि, इसमें मौजूद निकोटिन की लत लग सकती है। इसके अलावा हार्ट, ब्लड प्रेशर और मेंटल हेल्थ पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ (WHO) ने हाल ही में निकोटिन पाउच की बढ़ती बिक्री और युवाओं में इसके बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताई है। WHO का कहना है कि निकोटिन पाउच के 'टोबैको-फ्री' और 'क्लीन' जैसे दावे युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं। इसलिए आज 'जरूरत की खबर' में निकोटिन पाउच के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. उत्कर्ष भगत, सीनियर कंसल्टेंट, डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम सवाल- निकोटिन पाउच क्या है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- यह कैसे काम करता है? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- निकोटिन पाउच में कौन-से ऑर्गेनिक और केमिकल कंपाउंड्स होते हैं? जवाब- इसमें कई तरह के ऑर्गेनिक और केमिकल कंपाउंड्स होते हैं, जो अलग-अलग काम करते हैं। निकोटिन- नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है और लत का मुख्य कारण है। सेल्यूलोज (प्लांट फाइबर)- पाउच को टेक्सचर और साइज देता है। फ्लेवरिंग एजेंट्स- स्वाद और खुशबू बढ़ाते हैं। स्वीटनर- कड़वाहट कम करते हैं। पीएच रेगुलेटर (सोडियम कार्बोनेट/सोडियम बाइकार्बोनेट)- निकोटिन को मुंह की अंदरूनी स्किन से तेजी से अवशोषित होने में मदद करते हैं। ह्यूमेक्टेंट और स्टेबलाइजर- नमी बनाए रखते हैं और प्रोडक्ट की क्वालिटी को स्थिर रखते हैं। सवाल- युवा इसकी ओर क्यों आकर्षित हो रहे हैं? जवाब- कंपनियां निकोटिन पाउच को अक्सर 'स्मोक-फ्री' और 'कूल लाइफस्टाइल' का हिस्सा बताकर प्रमोट करती हैं। अलग-अलग फ्लेवर, आसानी से जेब में रखने और बिना धुएं के इस्तेमाल होने जैसी बातें भी युवाओं को इसकी ओर आकर्षित करती हैं। ग्राफिक में सभी वजहें देखिए- सवाल- निकोटिन पाउच में निकोटिन की मात्रा कितनी होती है? जवाब- यह अलग-अलग ब्रांड और प्रोडक्ट के अनुसार बदलती है। सवाल- क्या युवा सिगरेट छोड़ने के लिए निकोटिन पाउच ले रहे हैं? जवाब- हां, उन्हें लगता है कि धुआं और तंबाकू न होने की वजह से यह सेफ ऑप्शन है, जबकि यह सेफ नहीं है। इसे बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल करने से एक लत को छोड़ने के चक्कर में दूसरी लत लग सकती है। सवाल- क्या यह नुकसानदायक है? जवाब- हां, इसमें मौजूद निकोटिन शरीर पर नेगेटिव असर डालता है और इसकी लत लग सकती है। सवाल- निकोटिन पाउच के हेल्थ रिस्क क्या हैं? जवाब- निकोटिन पाउच का इस्तेमाल करने से शॉर्ट और लॉन्ग टर्म में कई तरह के हेल्थ रिस्क हो सकते हैं। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या निकोटिन पाउच से कैंसर का रिस्क बढ़ता है? जवाब- मौजूदा साइंटिफिक एविडेंस के मुताबिक, निकोटिन खुद कैंसर पैदा करने वाला (कार्सिनोजेन) पदार्थ नहीं माना जाता। हालांकि, यह शरीर की कुछ सेल्स के काम करने के तरीके को प्रभावित कर सकता है। निकोटिन पाउच से कैंसर के रिस्क को लेकर अभी रिसर्च की जा रही है। सवाल- अगर कोई गलती से निकोटिन पाउच निगल ले तो क्या होता है? जवाब- गलती से निगलने पर निकोटिन पॉइजनिंग हो सकती है। ऐसे में कुछ लक्षण दिखाई देते हैं। ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या निकोटिन पाउच की भी लत लग सकती है? जवाब- हां, इसमें मौजूद निकोटिन एक ‘हाई एडिक्शन सब्सटेंस’ है। इसे बार-बार इस्तेमाल करने पर शरीर और ब्रेन को इसकी आदत हो जाती है, जो समय के साथ ‘निकोटिन डिपेंडेंसी’ में बदल सकती है। सवाल- कैसे पहचानें कि इसकी लत लग गई है? जवाब- कुछ लक्षण बताते हैं कि निकोटिन पाउच की लत लग गई है। ग्राफिक में सभी लक्षण देखिए- सवाल- किन लोगों को निकोटिन पाउच बिल्कुल यूज नहीं करना चाहिए? जवाब- इन लोगों को निकोटिन पाउच का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए- सवाल- निकोटिन पाउच की लत छोड़ने के लिए क्या करें? जवाब- निकोटिन की लत छोड़ना मुश्किल हो सकता है, लेकिन सही प्लानिंग और थेरेपिस्ट की मदद से इसे छोड़ा जा सकता है। इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें- निकोटिन पाउच से जुड़े कॉमन सवाल-जवाब सवाल- क्या निकोटिन पाउच में तंबाकू होता है? जवाब- ज्यादातर निकोटिन पाउच में तंबाकू की पत्तियां नहीं होतीं। हालांकि, बाजार में कुछ ऐसे ओरल निकोटिन प्रोडक्ट भी मिलते हैं, जिनमें तंबाकू होता है। सवाल- एक निकोटिन पाउच को कितनी देर तक मुंह में रखा जाता है? जवाब- आमतौर पर एक निकोटिन पाउच को 20-60 मिनट तक होंठ और मसूड़ों के बीच रखा जाता है। यह समय अलग-अलग ब्रांड और उसमें मौजूद निकोटिन की मात्रा के अनुसार बदल सकता है। सवाल- क्या निकोटिन पाउच से दांत खराब हो सकते हैं? जवाब- हां, इससे दांतों के आसपास के टिश्यू को नुकसान हो सकता है। अगर ओरल हाइजीन का ध्यान न रखा जाए, तो दांतों और मसूड़ों से जुड़ी समस्याओं का रिस्क बढ़ सकता है। सवाल- क्या निकोटिन पाउच खेलने या जिम करने वालों के लिए सेफ है? जवाब- नहीं, निकोटिन कुछ समय के लिए अलर्टनेस बढ़ा सकता है, लेकिन यह हार्ट बीट और ब्लड प्रेशर भी बढ़ाता है। इससे एक्सरसाइज के दौरान शरीर पर एक्स्ट्रा प्रेशर पड़ता है। सवाल- क्या निकोटिन पाउच का इस्तेमाल करने के बाद गाड़ी चलाना सेफ है? जवाब- अगर निकोटिन पाउच लेने के बाद चक्कर, मतली, बेचैनी, सिर हल्का लगना या फोकस करने में दिक्कत महसूस हो रही हो, तो गाड़ी नहीं चलानी चाहिए। …………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- लिवर ने एक चिट्‌ठी लिखी है: बताई है अपनी पसंद-नापसंद, 7 संकेतों से समझें लिवर की नाराजगी, उसे खुश रखने के टिप्स हम अक्सर अपनी पसंद का खाना चुनते हैं। कोई पिज्जा का शौकीन होता है तो कोई मिठाई का। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे बॉडी ऑर्गन्स की भी अपनी पसंद-नापसंद होती है? पूरी खबर पढ़िए…

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फिजिकल हेल्थ- बच्चे के सिर का आकार बड़ा है:इग्नोर न करें, ये हाइड्रोसेफेलस हो सकता है, डॉक्टर से समझें इस बीमारी से बचाव और इलाज

क्या आपने कभी किसी ऐसे बच्चे को देखा है, जिसका सिर सामान्य से ज्यादा बड़ा हो। जन्म के बाद अगर किसी बच्चे का सिर सामान्य से ज्यादा तेजी से बढ़ने लगे, बार-बार उल्टी हो, सुस्ती रहे या उसकी आंखें नीचे की ओर टिकी दिखाई दें तो इसे सामान्य विकास मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह 'हाइड्रोसेफेलस' का संकेत हो सकता है। इसे आम भाषा में 'ब्रेन में पानी भरना' कहते हैं। लेकिन इसमें पानी नहीं, बल्कि CSF (सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड) नाम का तरल जमा होता है। समय पर इलाज न मिले तो यह दिमाग को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन अच्छी बात यह है कि सही समय पर पहचान और उपचार से ज्यादातर मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ’ (NIH) में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, दुनियाभर में हर साल 4 लाख से ज्यादा बच्चों में हाइड्रोसेफेलस के नए मामले सामने आते हैं। वहीं, हर 1 लाख लोगों में औसतन 85 लोग इस बीमारी से प्रभावित होते हैं। इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज हाइड्रोसेफेलस के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. सोनिया लाल गुप्ता, सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट, मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स, नोएडा सवाल- हाइड्रोसेफेलस क्या है? क्या यह सिर्फ 'दिमाग में पानी भर जाना' है या मामला इससे अलग है? जवाब- 'हाइड्रोसेफेलस' शब्द ग्रीक भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है। 'हाइड्रो' यानी पानी और 'सेफेलस' का मतलब है- सिर। इसी वजह से इसे 'दिमाग में पानी भर जाना' कहते हैं, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। इसमें पानी नहीं, बल्कि CSF (सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड) नाम का साफ, कलरलेस फ्लूइड जमा होता है। यह ब्रेन और रीढ़ की हड्डी को प्रोटेक्ट करता है। CSF जमा होने से ब्रेन पर प्रेशर बढ़ने लगता है और उसका सामान्य कामकाज प्रभावित हो सकता है। सवाल- ब्रेन में सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (CSF) क्या काम करता है? जवाब- CSF ब्रेन और रीढ़ की हड्डी के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। नीचे पॉइंटर्स से डिटेल में समझिए- सवाल- हाइड्रोसेफेलस कैसे विकसित होता है? जवाब- सामान्य स्थिति में ब्रेन के अंदर जितना CSF बनता है, उतना ब्लड में अवशोषित हो जाता है। लेकिन अगर किसी वजह से CSF का फ्लो रुक जाए या ब्लड इसे ठीक से अवशोषित न कर पाए, तो यह ब्रेन में जमा होने लगता है। इससे ब्रेन के अंदर मौजूद वेंट्रिकल्स बड़े हो जाते हैं और ब्रेन पर प्रेशर बढ़ने लगता है। यही स्थिति हाइड्रोसेफेलस कहलाती है। सवाल- हाइड्रोसेफेलस कितने प्रकार का होता है? जवाब- हाइड्रोसेफेलस मुख्य रूप से 4 प्रकार का होता है। 1. कम्युनिकेटिंग हाइड्रोसेफेलस इसमें CSF बाहर निकलने के बाद उसका फ्लो रुक जाता है या वह ठीक से एब्जॉर्ब नहीं हो पाता। 2. नॉन-कम्युनिकेटिंग (ऑब्स्ट्रक्टिव) हाइड्रोसेफेलस CSF का रास्ता ब्रेन के अंदर ही ब्लॉक हो जाता है, जिससे फ्लूइड जमा होने लगता है। 3. नॉर्मल प्रेशर हाइड्रोसेफेलस (NPH) CSF धीरे-धीरे जमा होता है। वेंट्रिकल्स बड़े हो जाते हैं, लेकिन दबाव सामान्य रहता है। यह अक्सर बुजुर्गों में होता है। 4. हाइड्रोसेफेलस एक्स-वैकुओ सिर में चोट या स्ट्रोक के बाद ब्रेन सिकुड़ने से बनी खाली जगह में CSF भर जाता है। इसमें आमतौर पर दबाव नहीं बढ़ता। सवाल- किन लोगों को इसका रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- कुछ लोगों में इसका रिस्क ज्यादा होता है। जैसे- सवाल- हाइड्रोसेफेलस क्यों होता है? जवाब- इसके कारणों को 2 हिस्सों में बांटा जाता है। 1. जन्मजात कुछ बच्चों में जन्म से ही यह समस्या होती है। इसकी वजह प्रेग्नेंसी के दौरान जेनेटिक या भ्रूण के विकास से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। 2. जन्म के बाद होने वाला यह किसी भी उम्र में हो सकता है। ग्राफिक में सभी कारण देखिए- सवाल- अलग-अलग उम्र में इसके लक्षण कैसे बदलते हैं? जवाब- हाइड्रोसेफेलस के लक्षण हर उम्र में एक जैसे नहीं होते। शिशुओं, बच्चों, वयस्कों और बुजुर्गों में इसके संकेत अलग-अलग हो सकते हैं। ग्राफिक में उम्र के अनुसार इसके सभी संकेत देखिए। सवाल- कौन-से शुरुआती संकेत ऐसे हैं, जिन्हें लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं? जवाब- कई बार लोग सिरदर्द, मतली, लड़खड़ाकर चलने या भूलने जैसी समस्याओं को सामान्य परेशानी या बढ़ती उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। ग्राफिक में सामान्य संकेत देखिए- सवाल- डॉक्टर हाइड्रोसेफेलस की पुष्टि कैसे करते हैं? इसके लिए कौन से टेस्ट किए जाते हैं? जवाब- डॉक्टर मरीज के लक्षणों के आधार पर जरूरत के अनुसार ये टेस्ट कराते हैं- सवाल- हाइड्रोसेफेलस का इलाज क्या है? क्या यह दवा से ठीक हो सकता है? जवाब- इसका इलाज बीमारी के कारण, गंभीरता और मरीज की उम्र पर निर्भर करता है। ज्यादातर मामलों में यह सिर्फ दवाओं से ठीक नहीं होता। जब ब्रेन में CSF ज्यादा जमा हो जाता है, तो उसे बाहर निकालने के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ती है। जैसेकि– सवाल- इलाज में देरी हो तो क्या कॉम्प्लिकेशंस हो सकते हैं? जवाब- समय पर इलाज न होने पर कई तरह के कॉम्प्लिकेशंस हो सकते हैं, जैसेकि- सवाल- सर्जरी के बाद किन बातों का ध्यान रखना पड़ता है? क्या मरीज उसके बाद सामान्य जीवन जी सकता है? जवाब- हां, लेकिन सर्जरी के बाद कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। जैसेकि- सवाल- क्या हाइड्रोसेफेलस को होने से रोका जा सकता है? किन मामलों में जोखिम कम हो सकता है? जवाब- हर मामले में हाइड्रोसेफेलस को रोका नहीं जा सकता, खासकर अगर यह जेनेटिक हो। लेकिन कुछ उपायों से इसका रिस्क कम किया जा सकता है। इसके लिए- सवाल- किन लक्षणों को मेडिकल इमरजेंसी मानना चाहिए और तुरंत हॉस्पिटल जाना चाहिए? जवाब- इन स्थितियों में तुरंत अस्पताल जाना चाहिए- सवाल- इस बीमारी से जुड़े कॉमन मिथ क्या हैं और उनकी सच्चाई क्या है? जवाब- हाइड्रोसेफेलस को लेकर लोगों के मन में कई गलतफहमियां हैं। इनकी वजह से कई बार बीमारी की पहचान और इलाज में देरी हो जाती है। ग्राफिक में इससे जुड़े मिथ और उनकी सच्चाई देखिए- हाइड्रोसेफेलस एक गंभीर बीमारी है, लेकिन लाइलाज नहीं है। समय पर पहचान और सही इलाज से इसके कारण होने वाली कई जटिलताओं से बचा जा सकता है। ………………………… ये खबर भी पढ़ें… फिजिकल हेल्थ- फूड प्रिजर्वेटिव से हार्ट डिजीज का रिस्क:डॉक्टर से जानें- हाई प्रिजर्वेटिव्स फूड की लिस्ट, खरीदने से पहले लेबल पढ़ें पैकेज्ड और अल्ट्राप्रोसेस्ड फूड हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। इन फूड्स को लंबे समय तक खाने योग्य बनाए रखने के लिए इनमें अलग-अलग प्रिजर्वेटिव मिलाए जाते हैं। ये प्रिजर्वेटिव फूड की शेल्फ लाइफ बढ़ाते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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टेस्ट मैच में सबसे ज्यादा बार 10 विकेट लेने का रिकॉर्ड, इकलौता गेंदबाज जिसने 22 बार किया कारनामा

Muttiah Muralitharan Most 10 Wicket Haul Record in Test: टेस्ट क्रिकेट में एक पारी में 5 विकेट लेना किसी भी गेंदबाज के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, लेकिन एक ही टेस्ट मैच में 10 या उससे ज्यादा विकेट बॉलर के आंकड़ों को खास बनाता है. टेस्ट इतिहास में कई महान गेंदबाज आए, लेकिन श्रीलंका के महान ऑफ स्पिनर मुथैया मुरलीधरन ने इस मामले में ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जिसे तोड़ना आज भी बेहद मुश्किल माना जाता है. उन्होंने अपने करियर में सबसे ज्यादा बार एक टेस्ट मैच में 10 या उससे ज्यादा विकेट लेकर इतिहास रचा. उनके बाद भी कई दिग्गज आए, लेकिन अब तक कोई भी इस आंकड़े के करीब तक नहीं पहुंच सका. Tue, 4 Aug 2026 10:00:47 +0530

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