डेटिंग रूमर्स के बीच Mrunal Thakur ने तोड़ी चुप्पी, बताया कौन हैं एक्ट्रेस के फेवरेट सेलिब्रिटी क्रश
Mrunal Thakur Crush: टीवी से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक अपनी खास पहचान बनाने वाली मृणाल ठाकुर इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म दो दीवाने सहर में के प्रमोशन में व्यस्त हैं. इस फिल्म में उनके साथ सिद्धांत चतुर्वेदी नजर आएंगे. ट्रेलर रिलीज के बाद से ही फिल्म को लेकर फैंस में अच्छा खासा क्रेज दिख रहा है. इसी बीच मृणाल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है. जिसमें वह अपने सेलिब्रिटी क्रश के बारे में बात करती दिख रही हैं.
इंटरव्यू में किया क्रश का खुलासा
हाल ही में एक इंटरव्यू में मृणाल ठाकुर नजर आईं. बातचीत के दौरान उनसे उनके सेलिब्रिटी क्रश को लेकर सवाल किया गया. जवाब में एक्ट्रेस ने साफ और बेझिझक अपनी पसंद जाहिर की. उन्होंने बताया कि उनका सिर्फ एक नहीं, बल्कि दो सेलिब्रिटी क्रश हैं.
मृणाल ने कहा कि उनके पहले सेलिब्रिटी क्रश ऋतिक रोशन हैं. वहीं दूसरे क्रश का नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि वह शाहरुख खान को बेहद पसंद करती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि वह शाहरुख खान से बहुत प्यार करती हैं. इस बयान के बाद उनका वीडियो तेजी से वायरल हो गया.
धनुष संग नाम जुड़ने पर बढ़ी थीं अफवाहें
पिछले कुछ समय से मृणाल ठाकुर का नाम साउथ सुपरस्टार धनुष के साथ जोड़ा जा रहा था. दोनों को एक इवेंट में साथ देखे जाने के बाद डेटिंग की खबरें सामने आई थीं. यहां तक कि शादी की चर्चाएं भी शुरू हो गई थीं. हालांकि इन खबरों पर न तो मृणाल और न ही धनुष ने कोई प्रतिक्रिया दी.
बाद में मृणाल से जुड़े सूत्रों ने साफ किया कि शादी की खबरें सिर्फ एक अफवाह हैं. एक्ट्रेस इस समय पूरी तरह अपने करियर पर ध्यान दे रही हैं. वह फिल्मों के चुनाव और अपने काम को प्राथमिकता दे रही हैं.
इस दिन रिलीज होगी फिल्म
वर्कफ्रंट की बात करें तो मृणाल ठाकुर की फिल्म ‘दो दीवाने सहर में’ 20 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है. फिल्म को लेकर दर्शकों में पहले से ही अच्छा खासा बज बना हुआ है.
पीएम मोदी ने मलेशिया में आईएनए के पूर्व सैनिक से मुलाकात की, सुभाष चंद्र बोस को दी श्रद्धांजलि
कुआलालंपुर, 8 फरवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मलेशिया के अपने दो दिन के आधिकारिक दौरे के तहत कुआलालंपुर में आजाद हिंद फौज के पुराने सैनिकों से मुलाकात की। आजाद हिंद फौज को इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) के नाम से भी जाना जाता है। इस दौरान उन्होंने फोर्स के ऐतिहासिक योगदान और साउथ-ईस्ट एशिया में रहने वाले भारतीय लोगों के बीच इसकी विरासत का जिक्र किया।
अपनी एक बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी आईएनए के पुराने सैनिक जयराज राजा राव से मिले और इस मुलाकात को बहुत प्रेरणा देने वाला बताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बातचीत की तस्वीरें शेयर करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आईएनए के पुराने सैनिक जयराज राजा राव से मिलना बहुत खास था। उनका जीवन बहुत हिम्मत और त्याग से भरा है। उनके अनुभव सुनना बहुत प्रेरणा देने वाला था।”
प्रधानमंत्री ने आईएनए और इसके संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विरासत को भी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने आगे कहा, “हम नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आईएनए की बहादुर महिलाओं और पुरुषों के हमेशा कर्जदार रहेंगे, जिनकी बहादुरी ने भारत की किस्मत बनाने में मदद की।”
विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) पेरियासामी कुमारन ने भी पुराने सैनिकों के साथ प्रधानमंत्री की बातचीत के महत्व के बारे में बात की और इसे एक यादगार पल बताया।
प्रधानमंत्री के दौरे पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अगुवाई वाली इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) के दो जीवित पुराने सैनिकों के साथ उनकी मुलाकात सच में खास थी।”
इससे पहले शनिवार को पीएम मोदी ने मलेशिया में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित किया, जहां उन्होंने भारत की आजादी की लड़ाई के दौरान इस इलाके में भारतीय मूल के लोगों द्वारा दिए गए ऐतिहासिक बलिदानों को माना।
उन्होंने कहा, “भारत को एक आजाद देश बनाने के लिए, आपके हजारों पूर्वजों ने बड़ी कुर्बानियां दीं। उनमें से कई ने कभी भारत नहीं देखा था, लेकिन वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस की इंडियन नेशनल आर्मी में शामिल होने वाले पहले लोगों में से थे।”
मलेशिया में नेताजी की विरासत को बचाने की कोशिशों का जिक्र करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा, “उनके सम्मान में, हमने मलेशिया में इंडियन कल्चरल सेंटर का नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर रख दिया। मैं इस मौके पर मलेशिया में नेताजी सर्विस सेंटर और नेताजी वेलफेयर फाउंडेशन की कोशिशों को भी सलाम करता हूं।”
नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 1943 में दक्षिण-पूर्व एशिया में इंडियन नेशनल आर्मी की लीडरशिप संभाली और जर्मनी से इस इलाके में आने के बाद फोर्स को फिर से खड़ा किया। सिंगापुर और मलाया (जिसे अब मलेशिया के नाम से जाना जाता है) में अपने बेस से उन्होंने आईएनए को फिर से बनाया और बढ़ाया, इसके लिए उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पकड़े गए भारतीय नागरिकों और युद्धबंदियों को इकट्ठा किया।
बता दें, नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 21 अक्टूबर, 1943 को आजाद हिंद की प्रांतीय सरकार भी बनाई, जिसने भारत की आजादी के आंदोलन में एक सिंबॉलिक भूमिका निभाई। आईएनए का ऐतिहासिक महत्व आज के मलेशिया और सिंगापुर में रहने वाले भारतीय समुदाय से बहुत करीब से जुड़ा हुआ है, क्योंकि यह फोर्स ज्यादातर इन्हीं इलाकों में बनाई गई थी।
हालांकि शुरू में युद्धबंदियों ने सेना का ट्रेंड कोर बनाया था, लेकिन दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय सिविलियन आबादी ने आंदोलन को मजबूत करने के लिए बड़ी संख्या में वॉलंटियर्स का योगदान दिया। आईएनए के अंदर खास फॉर्मेशन में रानी झांसी रेजिमेंट थी, जो दक्षिण-पूर्व एशिया में रहने वाली भारतीय महिलाओं से बनी एक पूरी तरह से महिला इकाई थी।
इनमें से कई महिलाएं कभी भारत नहीं आई थीं, लेकिन पिछली पीढ़ियों से मिली भारतीय विरासत, संस्कृति और मूल्यों से उनका गहरा जुड़ाव बना रहा। यह रेजिमेंट भारत के आजादी के संघर्ष में महिलाओं की भागीदारी और सशक्तीकरण का प्रतीक बन गई और आईएनए की विरासत में इसका ऐतिहासिक महत्व बना हुआ है।
--आईएएनएस
केके/एएस
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