सुरक्षा सहयोग से द्विपक्षीय भुगतान संबंधों तक, भारत और मलेशिया ने छह प्रमुख समझौतों पर लगाई मुहर
कुआलालंपुर, 8 फरवरी (आईएएनएस)। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने रविवार को कुआलालंपुर में द्विपक्षीय मुलाकातों के दौरान भारत और मलेशिया के बीच छह बड़े समझौतों पर साइन किए। इस दौरान दोनों देशों ने सांस्कृतिक, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए।
पीएम मोदी के मलेशिया के दो दिन के आधिकारिक दौरे के दौरान दोनों नेताओं के बीच पूरी बातचीत के बाद इस समझौते पर मुहर लगाई है। विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यह दौरा दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में एक अहम पड़ाव था।
अपनी बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, सेमीकंडक्टर, रक्षा, सुरक्षा, मैरीटाइम सहयोग, ऊर्जा, नवीकरणीय संसाधन, पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, साथ ही डिजिटल और नई तकनीक जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के रास्ते तलाशे।
दोनों नेताओं ने आपसी फायदे के पारंपरिक और नए जमाने के दोनों सेक्टर में सहयोग बढ़ाने का इरादा शेयर किया। इस दौरे के दौरान कई जरूरी द्विपक्षीय समझौते और एमओयू एक्सचेंज किए गए। इसमें सुरक्षा सहयोग, संयुक्त राष्ट्र शांति पहल में हिस्सा लेना, सेमीकंडक्टर डेवलपमेंट, हेल्थकेयर और मेडिसिन, आपदा प्रबंधन, एंटी-करप्शन कोशिशें, ऑडियो-विजुअल को-प्रोडक्शन, व्यावसायिक शिक्षा और मलेशिया में भारतीय श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्र शामिल थे।
इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यूनिवर्सिटी मलाया में एक खास तिरुवल्लुवर केंद्र बनाने और तिरुवल्लुवर स्कॉलरशिप शुरू करने की भी घोषणा की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस पहल का मकसद पुराने तमिल कवि और फिलॉसफर तिरुवल्लुवर की शिक्षाओं और फिलॉसफी को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही भारत और मलेशिया के बीच कल्चरल एक्सचेंज और लोगों के बीच संबंधों को भी मजबूत करना है।
प्रधानमंत्री ने मलेशिया में अपना पहला कॉन्सुलेट खोलने के भारत के फैसले की भी घोषणा की। इस कदम से डिप्लोमैटिक जुड़ाव बढ़ने, द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और देश में रहने वाले या वहां आने वाले भारतीय नागरिकों को बेहतर समर्थन मिलने की उम्मीद है।
दोनों देशों के बीच जिन समझौतों पर हस्ताक्षर किया गया है, उनमें साइबरजया यूनिवर्सिटी और आईटीआरए जामनगर के बीच सहयोग को एक अहम विकास के तौर पर हाईलाइट किया गया। एमईए के मुताबिक यह साझेदारी पारंपरिक मेडिसिन पर फोकस करेगी और इससे आयुर्वेद में रिसर्च और एकेडमिक एक्सचेंज को आसान बनाने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच होलिस्टिक हेल्थकेयर प्रैक्टिस और ज्ञान साझा करने तक पहुंच बढ़ाने की उम्मीद है।
कनेक्टिविटी और आर्थिक एकीकरण को बेहतर बनाने की कोशिशों के तहत, नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया की सब्सिडियरी, एनआईपीएल और मलेशिया की पेनेट ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए एकीकरण सहित द्विपक्षीय पेमेंट लिंकेज बनाने पर मिलकर काम करने पर सहमति जताई है।
इस पहल से बिजनेस करने में आसानी बढ़ेगी और दोनों देशों के बीच काम करने वाले पर्यटन, छात्र और बिजनेस समुदाय को आसान, कम लागत वाले रेमिटेंस और पेमेंट सॉल्यूशन मिलेंगे।
इसके अलावा, इस दौरे के दौरान दोनों नेताओं को 10वें इंडिया-मलेशिया सीईओ फोरम की रिपोर्ट भी दी गई। फोरम की रिपोर्ट से बिजनेस-टू-बिजनेस सहयोग को मजबूत करने और भारत और मलेशिया के बीच व्यापार और निवेश के मौकों को बढ़ाने के लिए सुझाव और जानकारी मिलने की उम्मीद है, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक जुड़ाव और गहरा होगा।
--आईएएनएस
केके/एएस
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दक्षिण एशिया में ‘फोर नेशन कार्ड’:पाकिस्तान का नया पैंतरा; बांग्लादेश, चीन और म्यांमार के साथ नई धुरी बनाने की कोशिश
बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव से पहले पाकिस्तान और चीन ने ‘फोर नेशन कार्ड’ खेला है। दोनों देश बांग्लादेश और म्यांमार को साथ जोड़कर चार देशों का एक क्षेत्रीय फोरम बनाना चाहते हैं, जिसे दक्षिण एशिया में नए ‘पावर ब्लॉक’ की दिशा में कदम माना जा रहा है। पाकिस्तान चुनाव से पहले इसकी पहली बैठक चाहता है। चीन ने पहले पाक व बांग्लादेश के साथ त्रिपक्षीय फोरम की कोशिश की थी, पर ढाका की उदासीनता के कारण वह योजना सफल नहीं हो सकी। अब पाकिस्तान ने म्यांमार को जोड़कर नया प्रस्ताव रखा है। बांग्लादेश ने इस पर सकारात्मक संकेत दिए हैं। हालांकि चुनाव के चलते अंतरिम सरकार किसी उच्चस्तरीय बैठक के लिए तैयार नहीं है। विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने कहा, ‘हमने उन्हें बताया है कि इस पर बैठक नई सरकार के गठन के बाद ही हो सकती है।’ बांग्लादेश फूंक-फूंक कर रख रहा हर कदम, जल्दबाजी में फैसला नहीं फिलहाल बांग्लादेश ने संकेत दिया है कि इस प्रस्ताव पर कोई भी फैसला नई सरकार के गठन के बाद ही लिया जाएगा। वहीं, पाकिस्तान चाहता है कि चुनाव से पहले ही बैठक हो जाए। यह फोरम आगे बढ़ेगा या नहीं, यह बांग्लादेश के चुनाव बाद के रुख और क्षेत्रीय हालात पर निर्भर करेगा। एक राजनयिक के शब्दों में, ‘ढाका की सक्रिय भागीदारी के बिना न तो त्रिपक्षीय और न ही चार पक्षों का फोरम आगे बढ़ सकता है।’ प्रस्ताव भारत के प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश 2024 में अवामी लीग सरकार के पतन के बाद पाकिस्तान ने बांग्लादेश में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। दूसरी ओर, चीन ने भी पिछले 18 महीने में बांग्लादेश में अपनी कूटनीतिक और कारोबारी स्थिति मजबूत की है। विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रस्ताव इस क्षेत्र में भारत के प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश है। हालांकि बांग्लादेश की सतर्कता यह दिखाती है कि वह घरेलू राजनीतिक हालात को ध्यान में रखकर ही कोई फैसला लेना चाहता है। पाकिस्तान रोहिंग्या का मुद्दा सुलझाने का लालच भी दे चुका जनवरी में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने बांग्लादेश के विदेश सलाहकार से कई बार बातचीत की। 24 जनवरी को दोनों के बीच 15 मिनट से ज्यादा बातचीत हुई, जो म्यांमार के विदेश मंत्री की इस्लामाबाद यात्रा से दो दिन पहले हुई थी। डार ने म्यांमार यात्रा के दौरान रोहिंग्या मुद्दे को उठाने पर भी ढाका की राय मांगी थी। इस पर हुसैन ने पाकिस्तान से इस संकट के समाधान में रचनात्मक भूमिका निभाने को कहा था। चीन 3 साल से कर रहा नया फोरम बनाने की कोशिश चीन लंबे समय से बांग्लादेश को क्षेत्रीय फोरम में शामिल करना चाहता है। जून 2023 में चीन और पाकिस्तान ने कुनमिंग में एक अनौपचारिक बैठक की थी, बांग्लादेश ने यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि बिना चौथे देश (जैसे श्रीलंका या नेपाल) के यह फोरम संतुलित नहीं होगा। इसके बाद भी ढाका और कुआलालंपुर में कई प्रयास हुए, लेकिन त्रिपक्षीय योजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब पाकिस्तान ने इसे आगे बढ़ाया है।
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