दलाई लामा के दफ्तर ने जेफरी एपस्टीन से किसी भी तरह के जुड़ाव के दावों को किया खारिज
धर्मशाला, 8 फरवरी (आईएएनएस)। एपस्टीन फाइल में ऐसे-ऐसे विश्व प्रसिद्ध लोगों के नाम सामने आए हैं, जिसने सबको हैरान कर दिया। इस बीच दलाई लामा के ऑफिस ने रविवार को इस संबंध में एक बयान जारी किया है। बयान में उन मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है, जिनमें तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा और यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के बीच किसी भी तरह के संबंध की बात कही गई है।
दरअसल, कई मीडिया आउटलेट्स ने संयुक्त राज्य अमेरिका न्याय विभाग (डीओजे) के डॉक्यूमेंट्स का हवाला देते हुए कहा था कि दलाई लामा का नाम बहुत चर्चित एपस्टीन फाइलों में 169 बार आया है। हालांकि, तिब्बती धर्मगुरु के दफ्तर ने ऐसे किसी भी आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है।
कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक बौद्ध धर्मगुरु का नाम कथित तौर पर कई व्यक्तिगत ईमेल और ‘मसाज फॉर डमीज’ नाम की किताब के इंडेक्स में आया था, जिसे एपस्टीन केस रिकॉर्ड के हिस्से के तौर पर पहले जारी फाइलों में स्कैन किए गए डॉक्यूमेंट के तौर पर शामिल किया गया था।
इन दावों की चर्चा होने के बाद दलाई लामा के ऑफिस ने एक बयान जारी कर किसी भी कथित लिंक को साफ तौर पर खारिज किया और कहा, “‘एपस्टीन फाइलों’ से जुड़ी कुछ हालिया मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स दलाई लामा को जेफरी एपस्टीन से जोड़ने की कोशिश कर रही हैं।”
इसमें आगे कहा गया, “हम पक्के तौर पर पुष्टि कर सकते हैं कि लामा कभी भी जेफरी एपस्टीन से नहीं मिले हैं और न ही उन्होंने अपनी तरफ से किसी को उनसे मिलने या बातचीत करने की इजाजत दी है।”
कुछ रिपोर्ट्स में अक्टूबर 2012 के ईमेल का जिक्र है, जिनमें कथित तौर पर तिब्बती आध्यात्मिक गुरु और एपस्टीन के बीच मीटिंग का जिक्र था और यह भी इशारा किया गया था कि दलाई लामा के उनके साथ एक कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद थी। इसके अलावा, यूरोपीय मीडिया आउटलेट नेक्स्टा टीवी ने दावा किया कि दलाई लामा के फॉलोअर्स बताए जाने वाले लोग एपस्टीन से मिले होंगे, जिससे इनडायरेक्ट लिंक के बारे में अटकलें और तेज हो गईं।
यह मुद्दा पिछले साल भी तब सुर्खियों में आया जब पत्रकार माइकल वोल्फ ने डेली बीस्ट पॉडकास्ट पर अपनी मौजूदगी में दावे किए। वोल्फ ने उन मुलाकातों के बारे में बात की जिन्हें सैलून बताया गया, जो कथित तौर पर एपस्टीन के घर पर आयोजित किया गया था और जिनमें कई जानी-मानी हस्तियां शामिल हुई थीं।
शामिल होने वालों के नाम बताते हुए वोल्फ ने दलाई लामा को भी शामिल किया और अंदाजा लगाया कि आध्यात्मिक गुरु की मौजूदगी, अगर कोई थी, तो फंडरेजिंग या समाज सेवा से जुड़ी हो सकती है, क्योंकि कई लोगों के बारे में पता चला था कि उन्होंने पैसे के लिए एपस्टीन से संपर्क किया था।
स्वतंत्र पत्रकार जैकब सिल्वरमैन ने बाद में “दलाई लामा जेफरी एपस्टीन के घर पर क्यों थे?” शीर्षक वाले लेख में वोल्फ के दावों का उल्लेख किया। अपनी रिपोर्ट में, सिल्वरमैन ने बताया कि दलाई लामा के ऑफिस ने उस समय इस बारे में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया कि क्या संगठन को एपस्टीन से कोई दान मिला था या उसका उनसे किसी तरह का कोई लेना-देना था।
यह विवाद तब फिर से सामने आया जब अमेरिकी न्याय विभाग ने हाल ही में एपस्टीन से जुड़े रिकॉर्ड्स का एक बड़ा कलेक्शन जारी किया। इस रिकॉर्ड में फंडिंग की गतिविधि से जुड़ी तीन मिलियन से ज्यादा फाइलें, 2,000 से ज्यादा वीडियो और लगभग 1,80,000 तस्वीरें शामिल हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नए जारी किए गए डॉक्यूमेंट्स में अलग-अलग सेक्टर्स के कई प्रभावशाली लोगों का जिक्र है, जिनमें नेताओं, बिजनेस से जुड़े लोग और दुनिया भर में जाने-माने लोग शामिल हैं। अलग-अलग रिपोर्ट्स में डोनाल्ड ट्रंप और बिल क्लिंटन जैसे मौजूदा और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ-साथ बिल गेट्स और एलन मस्क जैसे बिजनेस लीडर्स के नाम भी शामिल हैं।
--आईएएनएस
केके/एएस
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Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के मौके पर शिवलिंग पर अभिषेक करते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना पूरी नहीं होगी पूजा
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का सबसे पावन पर्व माना जाता है. यह दिन भक्ति, संयम और आत्मशुद्धि का प्रतीक है. साल 2026 में फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की शाम 05 बजकर 04 मिनट से शुरू होगी. यह तिथि 16 फरवरी को शाम 05 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी. पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा. इस दिन महादेव की पूजा करते समय कुछ नियमों का पालन जरूरी होता है. छोटी सी गलती भी पूजा के फल को कम कर सकती है. इसलिए सही विधि और सावधानी बेहद जरूरी है.
शिवलिंग पर न चढ़ाएं ये वस्तुएं
शिव पूजा में कुछ चीजों का उपयोग वर्जित माना गया है. शिवलिंग पर कभी भी सिंदूर या कुमकुम अर्पित नहीं करना चाहिए. भगवान शिव वैरागी स्वरूप हैं और ये वस्तुएं सौभाग्य से जुड़ी मानी जाती हैं. इसके अलावा, शंख का प्रयोग भी शिव पूजा में नहीं किया जाता. शंख से जल चढ़ाना भी मना है. तुलसी के पत्ते भी शिवलिंग पर अर्पित नहीं करने चाहिए. सही सामग्री से की गई पूजा ही पूर्ण फल देती है.
अभिषेक करते समय रखें ये ध्यान
शिवलिंग का अभिषेक करते समय तांबे के लोटे से जल चढ़ाना शुभ माना जाता है. लेकिन तांबे के बर्तन में दूध भरकर अभिषेक नहीं करना चाहिए. दूध के लिए स्टील या चांदी के पात्र का इस्तेमाल करें. अभिषेक के दौरान जल की धारा धीमी और लगातार होनी चाहिए. शिवलिंग पर चढ़ाया गया प्रसाद खुद न खाएं. उसे जरूरतमंदों में बांटना बेहतर माना जाता है.
व्रत में खानपान का रखें ख्याल
महाशिवरात्रि के व्रत में साधारण भोजन करना चाहिए. इस दिन प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन से दूरी बनाएं. फलाहार और हल्का भोजन ही करें.
व्रत के दौरान मन को शांत रखें. किसी से झगड़ा न करें और अपशब्द न बोलें. नकारात्मक विचार व्रत की पवित्रता को प्रभावित करते हैं. महादेव सच्ची भावना और शुद्ध मन से प्रसन्न होते हैं.
पूजा के अन्य नियम
शिवलिंग की पूजा में पूरी परिक्रमा नहीं की जाती. जहां से जल बाहर निकलता है, यानी जलाधारी, उसे कभी लांघना नहीं चाहिए. आधी परिक्रमा कर वहीं से लौट आना सही माना जाता है. भगवान शिव को टूटे हुए चावल अर्पित न करें. पूजा के समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का सही उच्चारण करें. पूजा बीच में छोड़कर न उठें. श्रद्धा और नियमों के साथ की गई पूजा से महादेव की कृपा प्राप्त होती है.
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