Delhi में कड़े सुरक्षा पहरे के बीच Jantar Mantar प्रदर्शन, बंद रास्तों से परेशान रहे लोग
(शशि रंजन ठाकुर) नयी दिल्ली, 10 अक्टूबर गाजियाबाद में वैशाली स्थित अपने घर से बड़ा आशंकित होकर निकला था कि पता नहीं आज ऑफिस कैसे पहुंचा जाएगा। हमारा कार्यालय तो मुख्य प्रदर्शन स्थल जंतर मंतर के बेहद करीब ही स्थित है जहां कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन होना था। पूरी दिल्ली सुरक्षाकर्मियों के घेरे में थी और सुरक्षा की ऐसी चाकचौबंद व्यवस्था कि परिंदा भी पर न मार सके।
मेट्रो में ही ऑफिस के कुछ और सहकर्मी मिल गए तो थोड़ा तसल्ली हुई कि किसी न किसी तरह तो पहुंच ही जाएंगे। अमित पांडे वसंधुरा से आ रहे थे, दिलीप लक्ष्मीनगर से और सुभाष दक्षिणी दिल्ली के साकेत से। राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर हम उतरे और इसके बाद असली समस्या शुरू हुई।
स्टेशन के प्रवेश और निकास द्वार बंद थे तथा समस्या थी कि बाहर कैसे निकला जाए। हम लोगों ने सुरक्षाकर्मियों से संपर्क किया और उन्हें अपने परिचय पत्र दिखाए कि हम लोग पीटीआई (प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया) से हैं तथा हम लोगों का ऑफिस पंहुचना बहुत जरूरी है। पहले उन्होंने मना कर दिया, लेकिन बाद में उनकी मदद से ही हम सभी राजीव चौक मेट्रो स्टेशन से बाहर निकले।
राजीव चौक से बाहर निकलते ही सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक असर साफ दिखने लगा। कनॉट प्लेस, संसद मार्ग, जंतर मंतर, जनपथ, टालस्टाय मार्ग, अशोक रोड, खड़ग सिंह मार्ग, पंचकुइयां रोड, मिंटो रोड, बाराखंभा रोड-जिधर देखो, भारी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे। जगह-जगह दंगा रोधी वाहन दिख रहे थे।
इसी गहमागहमी के बीच दिल्ली पुलिस का एक मानवीय चेहरा भी सामने आया, जिसने गर्मी और ऑफिस नहीं पहुंचने की परेशानी से जूझ रहे हम पत्रकारों को न केवल पानी पिलाया, बल्कि दफ्तर पहुंचने के लिए आगे जाने का रास्ता भी सुझाया। जब हम जनपथ बाजार से ससंद मार्ग की तरफ बढ़ने लगे तो वहां पुलिसकर्मियों ने हमें आगे जाने से रोक दिया और वापस जाने को कहा। हमारी परेशानी से सहानुभूति जताते हुए पुलिसकर्मियों ने टिप्पणी की कि देखो “कल से नवरात्र शुरू हो रहा है और आज बाजार बंद है।
लोगों का काफी नुकसान हुआ है… बेहद दुखद है।’’ उन्होंने हमारी ओर देखते हुए कहा ‘‘हम भी नहीं चाहते कि लोगों को परेशानी हो और बाजार बंद हों।’’ हमें लग रहा था कि दफ्तर ज्यादा दूर नहीं है लेकिन हर बैरिकेड पर पुलिसकर्मियों का लगभग एक ही जवाब मिलता कि ‘‘यह रास्ता बंद है, आपको इस तरफ से जाने की अनुमति नहीं मिलेगी।’’ राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के निकट तो एक पुलिसकर्मी ने कहा कि आज तो सभी कार्यालय बंद हैं, और संसद मार्ग पर ऐसा कौन सा ऑफिस है, जो आज खुला है, कोई कार्यालय खुला नहीं है। हम समझ गए कि इन्हें समझाना बेकार है। हम निराश होते उससे पहले जनपथ मार्ग पर एक पुलिसकर्मी से बातचीत हुई।
पुलिस अधिकारी ने हमारी परेशानी समझी, हम सभी के परिचय पत्र देखे, हमें पानी पिलाया और आगे जाने की अनुमति दे दी। अब तक रास्ता तलाशते-तलाशते करीब एक घंटा बीत चुका था। जब हम लोगों के परिचय पत्र और बैग की जांच की जा रही थी तो हमारे एक साथी ने पुलिसकर्मियों से कहा कि आप अपनी गाड़ी से ही हमें हमारे कार्यालय पहुंचा दें, तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि ‘‘हमारी गाड़ी में तो आप सीधे छत्रसाल स्टेडियम पंहुचेंगे।’’ उनकी इस टिप्पणी ने समस्या तो कम नहीं की पर कुछ देर के लिए तनाव जरूर कम किया।
नेहरू विहार से ऑटो से आ रहे हमारे एक अन्य साथी रविकांत का अनुभव और भी खराब रहा। जब वह नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन के निकट पहुंचे, तो पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पहचान पत्र देखने के बावजूद उन्हें पैदल निकलने की भी अनुमति नहीं दी। जब उन्होंने कहा कि उनका ऑफिस जल्दी पहुंचना जरूरी है तो अधिकारी ने लगभग चेतावनी वाले अंदाज में कहा कि “अगर अधिक बहस करोगे, तो हम तुम्हें हिरासत में ले लेंगे।’’ रविकांत ने इस पर भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी से कहा कि आपको लगता है कि “मैं कोई अपराधी हूं या असामाजिक तत्व हूं, आप बैग, परिचय पत्र आदि की जांच कर लें” तो उन्होंने कहा कि “एक बार मैंने कह दिया कि बहस मत करो, हम इधर से जाने की अनुमति नहीं देंगे।’’ कुछ पुलिसकर्मियों ने बताया कि वे स्वयं दूर से आए हैं और उन्हें भी आगे की स्थिति की पूरी जानकारी नहीं है।
रास्तों को लेकर समस्या का सामना करने वाले एक बजुर्ग ने कहा, ‘‘सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक हो सकती है, लेकिन उसका उद्देश्य नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी होना चाहिए। जरूरत ऐसी व्यवस्था की है, जिसमें संवेदनशीलता व्यक्तिगत प्रयास तक सीमित न रहे, बल्कि पुलिस के समन्वय, यातायात प्रबंधन और सार्वजनिक सूचना व्यवस्था में भी दिखाई दे।
दिल्ली में Jantar Mantar की घेराबंदी, 3000 प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए
(वर्षा सागी) नयी दिल्ली, 10 अक्टूबर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम और फॉर्म-6 से जुड़ी गड़बड़ियों के विरोध में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर शनिवार को दिल्ली में जुटे प्रदर्शनकारियों की योजना तो जंतर-मंतर पर एकत्र होने की थी, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका। खाकी और नीले-हरे रंग की वर्दी में बड़ी संख्या में तैनात सुरक्षाकर्मियों, अवरोधकों और सड़कों पर बसों पर खड़ी आड़ी-तिरछी बसों ने शनिवार को विरोध-प्रदर्शन के प्रमुख केंद्र जंतर-मंतर को एक किले में तब्दील कर दिया। इस वजह से प्रदर्शनकारी पूरी दिल्ली में बिखर गए और हिरासत में लिए जाने से पहले छोटे-छोटे समूहों में नारेबाजी करते, रास्ते बदलते तथा दोबारा एकत्र होने का प्रयास करते दिखे।
शाम पांच बजे तक कम से कम 3,000 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका था। नयी दिल्ली में बीते सप्ताह हुए विरोध-प्रदर्शनों की कड़ी में यह प्रदर्शन भी शामिल है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी पिछले दिनों विरोध प्रदर्शन किया था।
वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया का एक नया विरोध-प्रदर्शन सोमवार को प्रस्तावित है। इससे पहले जुलाई में आयोजित कॉजपा के प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए सरकार ने शनिवार को मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी थी। जिसके तहत मेट्रो सेवाएं बंद कर दी गईं, दिल्ली में आने-जाने वाली कई ट्रेनें रद्द कर दी गई और मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित रहीं।
कनॉट प्लेस और गुरुद्वारा बंगला साहिब से लेकर दिल्ली हाट, गोल मार्केट, आईएनए मार्केट और मिंटो ब्रिज तक प्रदर्शनकारी एक जगह से दूसरी जगह जाते दिखे। वे एकत्र होने के लिए जगहों की तलाश कर रहे थे और उन लोगों से मिलने की कोशिश कर रहे थे जो जंतर-मंतर के लिए निकले थे। कई जगहों पर पुलिसकर्मियों के पहुंचने और प्रदर्शनकारियों को खदेड़कर हिरासत में लेने से पहले नारेबाजी हुई।
हालांकि, जुलाई के प्रदर्शनों के विपरीत पुलिस ने बल प्रयोग नहीं किया और किसी प्रकार की हिंसा की खबर नहीं मिली। जुलाई के प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों के लिए इस बार स्थितियां बिल्कुल अलग थीं। तब वे मार्च करने से पहले जंतर-मंतर पर एकत्र हुए थे, लेकिन इस बार तो एकत्र होने की जगह तय करना ही एक बड़ी चुनौती बन गया था।
जुलाई के प्रदर्शन में शामिल रहे एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि प्रतिभागी यह समझने के लिए संघर्ष कर रहे थे कि कहां एकत्र होना है, क्योंकि अधिकतर जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट और संदेशों के जरिए ही मिल पा रही थी। प्रदर्शनकारी ने कहा, पिछली बार हम जंतर-मंतर पर एकत्र हुए थे और फिर हमने मार्च किया था। इस बार इस बात को लेकर काफी असमंजस है कि कब और कहां आना है।
हमें केवल ट्वीट और पोस्ट के जरिए ही जानकारी मिल रही है। हम यह कैसे तय करें कि कब आना है और कहां जाना है? अगर हममें से कुछ लोग एकत्र हो भी जाते हैं तो हमें तुरंत हिरासत में लिया जा सकता है।
लेकिन हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। हम अपने लोकतंत्र के लिए लड़ेंगे। दोपहर तक जंतर-मंतर पर होने वाला प्रदर्शन पूरी दिल्ली में छोटे-छोटे प्रदर्शनों के रूप में बिखर गया।
बार-बार हटाए जाने और हिरासत में लिए जाने के बावजूद सड़कों और चौराहों पर प्रदर्शनकारी एक-दूसरे को ढूंढते, नारे लगाते और प्रदर्शन को जारी रखने की कोशिश करते नजर आए। प्रदर्शन सुबह 10:30 बजे शुरू होना था, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने प्रतिभागियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोक दिया, जहां निषेधाज्ञा (बीएनएस की धारा 163) लागू थी। कुछ प्रदर्शनकारियों को आयोजन स्थल के पास ही हिरासत में ले लिया गया, जबकि अन्य लोग किसी अन्य स्थान पर प्रदर्शन जारी रखने के इरादे से आसपास के इलाकों में बिखर गए।
कनॉट प्लेस का आउटर सर्किल, हनुमान मंदिर के पास का इलाका, संसद मार्ग, रायसीना रोड, इम्तियाज खान रोड, एच के एस सुरजीत भवन, सफदरजंग हवाईअड्डा फ्लाईओवर के आसपास का हिस्सा और शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशन के आसपास के इलाके वे स्थान थे जहां प्रदर्शनकारी एकत्र हुए या जुटने का प्रयास किया। कई लोगों को कनॉट प्लेस में रीगल सिनेमा के पास हिरासत में लिया गया, जबकि अन्य को दोबारा एकत्र होने की कोशिश करते समय खदेड़ दिया गया। सुबह यही क्रम चलता रहा, प्रदर्शनकारी नए स्थान पर एकत्र होते, नारेबाजी करते और अन्य लोगों को जोड़ने का प्रयास करते, लेकिन अंततः उन्हें खदेड़ दिया जाता या हिरासत में ले लिया जाता।
मूल स्थल से पूरी तरह कट जाने के कारण प्रदर्शनकारी सोशल मीडिया पोस्ट और संदेशों पर निर्भर थे ताकि यह जान सकें कि अन्य लोग कहां एकत्र हो रहे हैं और उन्हें आगे कहां जाना है। गुरुद्वारा बंगला साहिब में स्थिति उस समय अस्थिर हो गई जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने गुरुद्वारे के भीतर शरण लेने की कोशिश की। बाहर निकलने वालों पर संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में हिरासत में लिए जाने का खतरा मंडरा रहा था।
अन्य स्थानों पर प्रदर्शनकारी अवरोधकों को जबरन पार करने का प्रयास करते दिखे, जबकि पुलिसकर्मी एक स्थान से दूसरे स्थान जा रहे समूहों का पीछा कर रहे थे। जंतर-मंतर और उसके आसपास कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के बाद ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने अपने प्रदर्शन का स्थान बदलकर दिल्ली हाट करने की घोषणा की। संगठन की अध्यक्ष नेहा बोरा ने नए स्थान की ओर रुख किया और अन्य लोगों से भी वहां पहुंचने की अपील की।
बोरा ने एक्स पर लिखा, आज दिल्ली हाट ही जंतर-मंतर बन गया है! वहीं मिलते हैं! इस आह्वान से उन प्रदर्शनकारियों को एक नया ठिकाना मिला जो जंतर-मंतर नहीं पहुंच सके थे।
हालांकि, दोबारा एकत्र होने का यह प्रयास भी विफल रहा और प्रदर्शनकारियों के अनुसार बोरा को भी हिरासत में ले लिया गया। वैकल्पिक स्थान तलाशने की एक अन्य कोशिश में राज्यसभा सांसद ए ए रहीम ने स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं के साथ नांगलोई स्टेडियम में जंतर-मंतर 2.0 की घोषणा की।
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