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दिल्ली में Jantar Mantar की घेराबंदी, 3000 प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए

(वर्षा सागी) नयी दिल्ली, 10 अक्टूबर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम और फॉर्म-6 से जुड़ी गड़बड़ियों के विरोध में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर शनिवार को दिल्ली में जुटे प्रदर्शनकारियों की योजना तो जंतर-मंतर पर एकत्र होने की थी, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका। खाकी और नीले-हरे रंग की वर्दी में बड़ी संख्या में तैनात सुरक्षाकर्मियों, अवरोधकों और सड़कों पर बसों पर खड़ी आड़ी-तिरछी बसों ने शनिवार को विरोध-प्रदर्शन के प्रमुख केंद्र जंतर-मंतर को एक किले में तब्दील कर दिया। इस वजह से प्रदर्शनकारी पूरी दिल्ली में बिखर गए और हिरासत में लिए जाने से पहले छोटे-छोटे समूहों में नारेबाजी करते, रास्ते बदलते तथा दोबारा एकत्र होने का प्रयास करते दिखे।

शाम पांच बजे तक कम से कम 3,000 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका था। नयी दिल्ली में बीते सप्ताह हुए विरोध-प्रदर्शनों की कड़ी में यह प्रदर्शन भी शामिल है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी पिछले दिनों विरोध प्रदर्शन किया था।

वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया का एक नया विरोध-प्रदर्शन सोमवार को प्रस्तावित है। इससे पहले जुलाई में आयोजित कॉजपा के प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए सरकार ने शनिवार को मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी थी। जिसके तहत मेट्रो सेवाएं बंद कर दी गईं, दिल्ली में आने-जाने वाली कई ट्रेनें रद्द कर दी गई और मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित रहीं।

कनॉट प्लेस और गुरुद्वारा बंगला साहिब से लेकर दिल्ली हाट, गोल मार्केट, आईएनए मार्केट और मिंटो ब्रिज तक प्रदर्शनकारी एक जगह से दूसरी जगह जाते दिखे। वे एकत्र होने के लिए जगहों की तलाश कर रहे थे और उन लोगों से मिलने की कोशिश कर रहे थे जो जंतर-मंतर के लिए निकले थे। कई जगहों पर पुलिसकर्मियों के पहुंचने और प्रदर्शनकारियों को खदेड़कर हिरासत में लेने से पहले नारेबाजी हुई।

हालांकि, जुलाई के प्रदर्शनों के विपरीत पुलिस ने बल प्रयोग नहीं किया और किसी प्रकार की हिंसा की खबर नहीं मिली। जुलाई के प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों के लिए इस बार स्थितियां बिल्कुल अलग थीं। तब वे मार्च करने से पहले जंतर-मंतर पर एकत्र हुए थे, लेकिन इस बार तो एकत्र होने की जगह तय करना ही एक बड़ी चुनौती बन गया था।

जुलाई के प्रदर्शन में शामिल रहे एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि प्रतिभागी यह समझने के लिए संघर्ष कर रहे थे कि कहां एकत्र होना है, क्योंकि अधिकतर जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट और संदेशों के जरिए ही मिल पा रही थी। प्रदर्शनकारी ने कहा, पिछली बार हम जंतर-मंतर पर एकत्र हुए थे और फिर हमने मार्च किया था। इस बार इस बात को लेकर काफी असमंजस है कि कब और कहां आना है।

हमें केवल ट्वीट और पोस्ट के जरिए ही जानकारी मिल रही है। हम यह कैसे तय करें कि कब आना है और कहां जाना है? अगर हममें से कुछ लोग एकत्र हो भी जाते हैं तो हमें तुरंत हिरासत में लिया जा सकता है।

लेकिन हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। हम अपने लोकतंत्र के लिए लड़ेंगे। दोपहर तक जंतर-मंतर पर होने वाला प्रदर्शन पूरी दिल्ली में छोटे-छोटे प्रदर्शनों के रूप में बिखर गया।

बार-बार हटाए जाने और हिरासत में लिए जाने के बावजूद सड़कों और चौराहों पर प्रदर्शनकारी एक-दूसरे को ढूंढते, नारे लगाते और प्रदर्शन को जारी रखने की कोशिश करते नजर आए। प्रदर्शन सुबह 10:30 बजे शुरू होना था, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने प्रतिभागियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोक दिया, जहां निषेधाज्ञा (बीएनएस की धारा 163) लागू थी। कुछ प्रदर्शनकारियों को आयोजन स्थल के पास ही हिरासत में ले लिया गया, जबकि अन्य लोग किसी अन्य स्थान पर प्रदर्शन जारी रखने के इरादे से आसपास के इलाकों में बिखर गए।

कनॉट प्लेस का आउटर सर्किल, हनुमान मंदिर के पास का इलाका, संसद मार्ग, रायसीना रोड, इम्तियाज खान रोड, एच के एस सुरजीत भवन, सफदरजंग हवाईअड्डा फ्लाईओवर के आसपास का हिस्सा और शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशन के आसपास के इलाके वे स्थान थे जहां प्रदर्शनकारी एकत्र हुए या जुटने का प्रयास किया। कई लोगों को कनॉट प्लेस में रीगल सिनेमा के पास हिरासत में लिया गया, जबकि अन्य को दोबारा एकत्र होने की कोशिश करते समय खदेड़ दिया गया। सुबह यही क्रम चलता रहा, प्रदर्शनकारी नए स्थान पर एकत्र होते, नारेबाजी करते और अन्य लोगों को जोड़ने का प्रयास करते, लेकिन अंततः उन्हें खदेड़ दिया जाता या हिरासत में ले लिया जाता।

मूल स्थल से पूरी तरह कट जाने के कारण प्रदर्शनकारी सोशल मीडिया पोस्ट और संदेशों पर निर्भर थे ताकि यह जान सकें कि अन्य लोग कहां एकत्र हो रहे हैं और उन्हें आगे कहां जाना है। गुरुद्वारा बंगला साहिब में स्थिति उस समय अस्थिर हो गई जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने गुरुद्वारे के भीतर शरण लेने की कोशिश की। बाहर निकलने वालों पर संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में हिरासत में लिए जाने का खतरा मंडरा रहा था।

अन्य स्थानों पर प्रदर्शनकारी अवरोधकों को जबरन पार करने का प्रयास करते दिखे, जबकि पुलिसकर्मी एक स्थान से दूसरे स्थान जा रहे समूहों का पीछा कर रहे थे। जंतर-मंतर और उसके आसपास कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के बाद ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने अपने प्रदर्शन का स्थान बदलकर दिल्ली हाट करने की घोषणा की। संगठन की अध्यक्ष नेहा बोरा ने नए स्थान की ओर रुख किया और अन्य लोगों से भी वहां पहुंचने की अपील की।

बोरा ने एक्स पर लिखा, आज दिल्ली हाट ही जंतर-मंतर बन गया है! वहीं मिलते हैं! इस आह्वान से उन प्रदर्शनकारियों को एक नया ठिकाना मिला जो जंतर-मंतर नहीं पहुंच सके थे।

हालांकि, दोबारा एकत्र होने का यह प्रयास भी विफल रहा और प्रदर्शनकारियों के अनुसार बोरा को भी हिरासत में ले लिया गया। वैकल्पिक स्थान तलाशने की एक अन्य कोशिश में राज्यसभा सांसद ए ए रहीम ने स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं के साथ नांगलोई स्टेडियम में जंतर-मंतर 2.0 की घोषणा की।

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Manipur के कामजोंग और उखरुल में armed groups के बीच झड़प, पांच लोगों की मौत

मणिपुर के कामजोंग और उखरुल जिलों में सशस्त्र समूहों के बीच फिर से हुई झड़पों में एक महिला सहित पांच लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि नगा बहुल कामजोंग जिले के कुकी बहुल चसाद गांव में 22 वर्षीय एक युवक और 42 वर्षीय महिला की मौत हो गई।

उन्होंने बताया कि मृतका पांच बच्चों की मां थी। शुक्रवार रात महिला के गर्दन के पास गोली मारी गई थी, जिसके बाद कुछ ही मिनटों में उसकी मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि हत्या के बाद कुकी और नगा समुदायों के सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई, जो शनिवार सुबह तक जारी रही।

इसके बाद हुई झड़पों में उक्त युवक की मौत हो गई और इस दौरान 10 घरों में आगजनी की गई। जिले के अधिकारियों ने हिंसा को और फैलने से रोकने के लिए चसाद पुलिस गेट चौराहे के 400 मीटर के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 162 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी। अधिकारियों ने बताया कि एक अन्य घटना में, संदिग्ध उग्रवादियों ने म्यांमा सीमा के पास तंगखुल नगा समुदाय की बस्ती वाले कामजोंग के निंगचौ गांव में घुसकर गोलीबारी शुरू कर दी।

उन्होंने बताया कि इस घटना में नगाचांसो निंगशेन (35) और लीशिशां लीशादांग (48) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद सुरक्षा बल ने गांव में पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। स्थानीय ग्रामीणों ने दावा किया कि हमलावर गोलीबारी करने के बाद म्यांमा सीमा की ओर भाग गए।

अधिकारियों ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए कामजोंग जिला अस्पताल भेज दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, उखरुल जिले में एक अन्य घटना में संदिग्ध उग्रवादियों ने चेपु याओलेन के पास एक वाहन पर गोलीबारी की, जिसमें वाहन चालक संदीप राय (40) की मौत हो गई। कांगपोकपी जिले के मकुई अशांग और तापन इलाकों में भी सशस्त्र गुटों के बीच भारी गोलीबारी की सूचना मिली है।

इस वर्ष फरवरी में कुकी और नगा समुदायों के बीच हिंसा शुरू होने के बाद से 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई घरों को आग के हवाले कर दिया गया है। यह हिंसा मुख्य रूप से उखरुल, कामजोंग, कांगपोकपी, तामेंगलांग और नोनी जिलों के साथ-साथ सेनापति जिले के कुछ हिस्सों में केंद्रित है। मणिपुर में तीन साल पहले जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से सुरक्षा बल सभी जिलों के सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में तलाशी अभियान चला रहे हैं और क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए गश्त कर रहे हैं।

मई 2023 से मेइती और कुकी-जो समुदायों के बीच जारी जातीय संघर्ष में 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग बेघर हो गए हैं।

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  Sports

भारत पसंद नहीं तो दूसरे देश में कमेंट्री करो… जंतर-मंतर प्रदर्शन के सपोर्ट में आए संजय मांजरेकर को लोगों ने धो डाला

Sanjay Manjrekar trolls: कॉकरोच जनता पार्टी के जंतर-मंतर प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने 7000 लोगों को हिरासत में लिया है. मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे इस प्रदर्शन पर पुलिस ने रोक लगाते हुए लोगों को हिरासत में लिया. इस बीच पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने शांतिपूर्ण विरोध को लोकतांत्रिक अधिकार बताया, जिसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया. Sat, 10 Oct 2026 20:46:29 +0530

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