Responsive Scrollable Menu

IND vs WI: इंदौर में किसके नाम है सबसे ज्यादा T20I रन बनाने का रिकॉर्ड? रोहित या राहुल, देखें टॉप-5 की लिस्ट

IND vs WI: भारत और वेस्टइंडीज के बीच 5 मैचों की टी20 सीरीज जारी है. सीरीज का तीसरा मुकाबला 11 अक्टूबर को खेला जाएगा. दोनों टीमें इंदौर के होलकर स्टेडियम में आमने-सामने होंगी. भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज फिलहाल 1-1 की रोमांचक बराबरी पर है. पहले मैच में भारत जीता था, तो दूसरे मुकाबले में वेस्टइंडीज ने जोरदार वापसी की. अब तीसरा मैच जीतकर दोनों टीमें सीरीज में बढ़त हासिल करने के इरादे से उतरेंगी. तो चलिए, इससे पहले जानते हैं कि होलकर में सबसे ज्यादा टी20 इंटरनेशनल रन बनाने वाले टॉप-5 बल्लेबाज कौन हैं. 

नंबर-1 हैं केएल राहुल

इंदौर के होलकर क्रिकेट स्टेडियम में सबसे ज्यादा टी20 इंटरनेशनल रन बनाने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड भारतीय बल्लेबाज केएल राहुल के नाम दर्ज है. उन्होंने इस मैदान पर अब तक कुल 2 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं, जिसमें उन्होंने विपक्षी गेंदबाजों की जमकर क्लास लेते हुए शानदार 134 रन बटोरे हैं. इस मैदान पर उनका बल्लेबाजी औसत और स्ट्राइक रेट बेहद लाजवाब रहा है, जिसमें 89 रन उनकी सबसे सर्वश्रेष्ठ और यादगार पारी रही है. 

रोहित शर्मा दूसरे नंबर पर काबिज

भारतीय टीम के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर हैं. उन्होंने इंदौर के होल्कर स्टेडियम में 3 टी20 मैच खेले हैं और उनके नाम कुल 118 रन दर्ज हैं. मजेदार बात यह है कि इस मैदान पर उनका सबसे बड़ा स्कोर भी 118 रन ही है. उन्होंने साल 2017 में श्रीलंका के खिलाफ सिर्फ 35 गेंदों में एक तूफानी शतक ठोक दिया था, जो टी20 क्रिकेट इतिहास के सबसे तेज शतकों में से एक है. रोहित की उस पारी में इंदौर के मैदान पर चौके-छक्कों की भयंकर बरसात हुई थी. 

तीसरे नंबर पर हैं कुसल परेरा 

श्रीलंका के धाकड़ बल्लेबाज कुसल परेरा इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर हैं. परेरा को भारतीय पिचों पर खेलना हमेशा से बहुत पसंद रहा है और इंदौर का रिकॉर्ड भी यही कहता है. उन्होंने इस मैदान पर 2 टी20 मैच खेले हैं और भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ शानदार बल्लेबाजी करते हुए कुल 111 रन बनाए हैं. इस मैदान पर उनका सबसे बड़ा स्कोर 77 रन रहा है, जिसमें उन्होंने चौके-छक्कों की बरसात कर फैंस का दिल जीत लिया था.

नंबर-4 पर हैं राइली रूसो

साउथ अफ्रीका के विस्फोटक बल्लेबाज राइली रूसो इस लिस्ट में चौथे नंबर पर हैं. रूसो के नाम इस मैदान पर एक अनोखा और 100% परफेक्ट रिकॉर्ड दर्ज है. उन्होंने साल 2022 में भारत के खिलाफ इंदौर में अपना इकलौता टी20 मैच खेला था और पहली ही पारी में टीम इंडिया के गेंदबाजों की धुनाई करते हुए नाबाद 100 रन ठोक दिए थे. 

टॉप-5 में हैं क्विंटन डी कॉक

इस लिस्ट में पांचवें नंबर पर साउथ अफ्रीका के धाकड़ विकेटकीपर बल्लेबाज क्विंटन डी कॉक हैं, जिन्होंने यहां खेले अपने इकलौते टी20 मैच में 68 रनों की तूफानी पारी खेली थी. मजेदार बात यह है कि टीम इंडिया के युवा स्टार ओपनर यशस्वी जायसवाल भी 68 रनों के साथ बराबरी पर इसी नंबर पर मौजूद हैं. जायसवाल ने साल 2024 में अफगानिस्तान के खिलाफ इंदौर के मैदान पर सिर्फ 34 गेंदों में 68 रन कूटकर फैंस का दिल जीत लिया था.

यह भी पढ़ें:  'भुवी का चयन मुझे चिंतित...', मोहम्मद शमी ने भुवनेश्वर कुमार की टीम इंडिया में वापसी को लेकर कह दी ये बड़ी बात

Continue reading on the app

फ्रांस से भारत तक Gen Z आंदोलन का ग्लोबल कनेक्शन? 2.2 करोड़ डॉलर की फंडिंग और नेविल रॉय सिंघम पर क्यों उठ रहे सवाल

Explainer: युवाओं के विरोध-प्रदर्शन अब केवल किसी एक देश की सड़कों तक सीमित नहीं रह गए हैं. सोशल मीडिया के दौर में एक देश में उठने वाला मुद्दा कुछ ही घंटों में अंतरराष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बन सकता है. फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्रों का आंदोलन हो या भारत में मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर युवाओं की नाराजगी, इन घटनाओं ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि क्या दुनिया भर के युवा आंदोलनों के बीच कोई साझा रणनीति भी काम करती है?

इसी बहस के केंद्र में अमेरिकी मूल के कारोबारी और एक्टिविस्ट नेविल रॉय सिंघम, उनसे जुड़े संगठनों की फंडिंग और वामपंथी विचारधारा वाले मीडिया नेटवर्क आ गए हैं. हालिया मीडिया रिपोर्ट्स में आरोप लगाया गया है कि अंतरराष्ट्रीय संगठनों का एक नेटवर्क फ्रांस के छात्र प्रदर्शनों को व्यापक राजनीतिक विमर्श से जोड़ रहा है.

 इन रिपोर्ट्स में भारत सहित कई देशों के युवाओं के आंदोलनों का भी जिक्र है. हालांकि, इन दावों को समझने के लिए वास्तविक विरोध के कारणों, संगठनों की भूमिका और फंडिंग के सबूतों को अलग-अलग देखना जरूरी है.

फ्रांस में क्यों सड़कों पर उतरे छात्र?

फ्रांस में सितंबर 2026 के अंतिम सप्ताह से छात्र प्रदर्शनों में तेजी आई. छात्रों की प्रमुख शिकायतें स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, जरूरत के मुकाबले कम शिक्षकों और पढ़ाई के लिए खराब होते हालात से जुड़ी बताई गई हैं.

सशस्त्र संघर्ष या किसी विदेशी साजिश से अलग, इन प्रदर्शनों का तत्काल कारण शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं हैं. एसोसिएटेड प्रेस और रॉयटर्स की रिपोर्टिंग में भी स्कूलों की स्थिति, संसाधनों की कमी और पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद का उल्लेख किया गया है.

संघर्ष बढ़ने के साथ छात्र संगठनों के अलावा शिक्षक यूनियनों, श्रमिक संगठनों और राजनीतिक समूहों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया. ACLED के अनुसार, 28 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 के बीच फ्रांस में छात्रों के नेतृत्व में 800 से अधिक प्रदर्शन दर्ज किए गए. यह 2020 के बाद वहां के बड़े छात्र आंदोलनों में से एक रहा.

इससे स्पष्ट होता है कि आंदोलन का विस्तार केवल ऑनलाइन प्रचार तक सीमित नहीं था. बड़ी संख्या में छात्र और दूसरे समूह वास्तव में सड़कों पर उतरे. लेकिन आंदोलन में विभिन्न संगठनों की भागीदारी अपने आप में यह साबित नहीं करती कि सभी को किसी एक केंद्र से निर्देश मिल रहे थे.

कौन हैं नेविल रॉय सिंघम?

नेविल रॉय सिंघम अमेरिकी मूल के टेक कारोबारी हैं, जिन्होंने अपनी कंपनी Thoughtworks की बिक्री के बाद सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े संगठनों को आर्थिक सहायता दी. वह चीन के शंघाई में रहते हैं और वामपंथी विचारधारा से जुड़े विभिन्न समूहों के साथ उनके संबंधों पर अमेरिका में राजनीतिक विवाद होता रहा है.

सिंघम से जुड़े नेटवर्क में राजनीतिक शिक्षा, मीडिया, शोध और सामाजिक आंदोलनों से जुड़े  संगठन काम करते हैं. अमेरिका में इन संगठनों की फंडिंग और विदेशी प्रभाव को लेकर जांच-पड़ताल भी हुई है. अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की Ways and Means Committee ने जुलाई 2026 में द पीपल्स फोरम, BreakThrough News और Tricontinental से संबंधित दस्तावेजों की मांग के लिए समन जारी किए थे. जांच का उद्देश्य फंडिंग के स्रोत, वित्तीय संबंधों और विदेशी संस्थाओं से संभावित संपर्कों की पड़ताल करना था.

हालांकि, किसी जांच या समन का जारी होना अपने आप में गैरकानूनी गतिविधि का प्रमाण नहीं है. इसी तरह, किसी कारोबारी के चीन में रहने या चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति कथित वैचारिक समर्थन के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसके वित्तपोषित सभी संगठन किसी विदेशी सरकार के निर्देश पर काम कर रहे हैं.

2.2 करोड़ डॉलर की फंडिंग का मामला क्या है?

फ्रांस के छात्र आंदोलन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर प्रकाशित हालिया रिपोर्ट में करीब 2.2 करोड़ डॉलर की फंडिंग का आंकड़ा चर्चा में है. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा है कि यह रकम मुख्य रूप से अमेरिका के द पीपल्स फोरम से जुड़ी बताई गई है.

अमेरिकी कांग्रेस की समिति ने भी सिंघम से जुड़े संगठनों की वित्तीय व्यवस्था, दानदाताओं और विदेशी संबंधों से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं. समिति का कहना है कि वह यह जांचना चाहती है कि गैर-लाभकारी संगठनों के माध्यम से आने वाली रकम के स्रोत और इस्तेमाल को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता है या नहीं.

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है. किसी संगठन को लाखों डॉलर का दान मिलने और उस रकम का किसी खास देश में छात्र आंदोलन आयोजित करने में इस्तेमाल होने के बीच सीधा संबंध साबित करना अलग-अलग बात है.

इसके लिए बैंकिंग रिकॉर्ड, अनुदान के दस्तावेज, आयोजकों के साथ संवाद और खर्च के विवरण जैसे प्रमाणों की जरूरत होगी. उपलब्ध रिपोर्टों में सामने आए वित्तीय संबंधों को गंभीरता से जांचा जा सकता है, लेकिन उनसे अकेले यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि फ्रांस के छात्र आंदोलन को उसी पैसे से संचालित किया गया.

फ्रांस के आंदोलन में अंतरराष्ट्रीय संगठनों की क्या भूमिका है?

फॉक्स न्यूज डिजिटल की एक जांच में फ्रांस के छात्र आंदोलन और उसके समर्थक नेटवर्क से जुड़ी 50 संस्थाओं का उल्लेख किया गया है. इनमें छात्र संगठन, श्रमिक यूनियन, वामपंथी राजनीतिक समूह, नागरिक अधिकार संगठन और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान शामिल हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ संगठनों ने छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन आयोजित करने, हड़ताल का आह्वान करने और आंदोलन की तस्वीरें व वीडियो अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने का काम किया.

यह डिजिटल दौर की राजनीति का महत्वपूर्ण पहलू है. किसी आंदोलन को मीडिया में किस तरह पेश किया जाता है, इससे उसकी छवि, समर्थन और राजनीतिक संदेश प्रभावित हो सकते हैं.

भारत के Gen Z आंदोलनों से क्या है कनेक्शन?

भारत में युवाओं के विरोध-प्रदर्शन अलग-अलग मुद्दों पर सामने आते रहे हैं. इनमें शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित सवाल शामिल हैं. अक्टूबर 2026 में दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन की घोषणा भी इसी व्यापक बहस का हिस्सा बनी.

फ्रांस में छात्र आंदोलन और भारत में युवाओं के विरोध के बीच समानता तलाशने वाले कुछ अंतरराष्ट्रीय सोशल मीडिया अकाउंट और संगठनों का उल्लेख हालिया रिपोर्टों में किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस स्थित Indian Alliance Paris ने फ्रांसीसी छात्रों के आंदोलन को भारत में युवाओं के प्रदर्शनों से जोड़ते हुए सोशल मीडिया पोस्ट साझा की.

इस तरह की पोस्ट से यह पता चल सकता है कि अलग-अलग देशों में सक्रिय समूह एक-दूसरे के आंदोलनों के प्रति समर्थन व्यक्त कर रहे हैं. लेकिन केवल सोशल मीडिया पर समर्थन जताने से यह साबित नहीं होता कि दोनों देशों के आंदोलनों का संचालन एक ही संगठन कर रहा है या उन्हें एक ही स्रोत से धन मिल रहा है.

भारत में किसी संगठन या व्यक्ति के विदेशी फंडिंग नेटवर्क से संबंध का दावा करने के लिए भी अलग से दस्तावेजी प्रमाणों की आवश्यकता होगी. केवल वैचारिक समानता, साझा नारे या सोशल मीडिया पर एक-दूसरे का समर्थन करना पर्याप्त सबूत नहीं है.

सोशल मीडिया कैसे बदल रहा है आंदोलनों का स्वरूप?

आज किसी प्रदर्शन की तस्वीर या वीडियो कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच सकता है. हैशटैग, छोटे वीडियो, लाइव प्रसारण और प्रभावशाली सोशल मीडिया अकाउंट किसी स्थानीय मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला सकते हैं.

इस प्रक्रिया के तीन प्रमुख चरण हो सकते हैं. पहला, किसी स्थानीय समस्या को लेकर लोगों का जुटना. दूसरा, राजनीतिक दलों, यूनियनों और सामाजिक संगठनों का उससे जुड़ना. तीसरा, मीडिया और डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से उस आंदोलन का व्यापक राजनीतिक संदेश के रूप में प्रसार होना.

इस प्रक्रिया में संगठित प्रचार की भूमिका हो सकती है, लेकिन वायरल सामग्री हमेशा किसी सुनियोजित अभियान का हिस्सा नहीं होती. कई बार वास्तविक जन-असंतोष, लोगों के व्यक्तिगत अनुभव और घटनाओं की व्यापक मीडिया कवरेज भी आंदोलनों को तेजी से फैलाते हैं.

इसीलिए किसी आंदोलन की पड़ताल करते समय उसके मूल कारणों, आयोजकों, वित्तीय स्रोतों और डिजिटल प्रचार को अलग-अलग समझना जरूरी है.

क्या विदेशी फंडिंग से आंदोलनों को प्रभावित किया जा सकता है?

विदेशी फंडिंग किसी सामाजिक या राजनीतिक अभियान की पहुंच बढ़ाने में मदद कर सकती है. इससे शोध, मीडिया निर्माण, कार्यक्रमों, कार्यालयों और संगठनात्मक गतिविधियों को संसाधन मिल सकते हैं. यदि आर्थिक सहायता देने वाला व्यक्ति किसी खास विचारधारा को बढ़ावा देना चाहता है, तो यह सहायता उसके प्रभाव को बढ़ाने का माध्यम भी बन सकती है.

दूसरी ओर, सामाजिक आंदोलनों को मिलने वाली हर आर्थिक सहायता को विदेशी हस्तक्षेप मान लेना भी सही नहीं है. कई संगठन कानूनी रूप से दान प्राप्त करते हैं और अपने घोषित उद्देश्यों के लिए उसका इस्तेमाल करते हैं.

असल सवाल यह है कि पैसा कहां से आया, किसे दिया गया, उसका इस्तेमाल किस काम में हुआ और क्या किसी विदेशी संस्था ने राजनीतिक गतिविधियों को निर्देशित किया. इन सवालों का उत्तर अनुमान के बजाय प्रमाणों से ही दिया जा सकता है.

आरोपों से आगे बढ़कर सबूतों पर नजर जरूरी

फ्रांस के छात्र प्रदर्शनों, भारत के युवा आंदोलनों और नेविल रॉय सिंघम से जुड़े वित्तीय नेटवर्क की चर्चा ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में फंडिंग और डिजिटल प्रचार की भूमिका पर नई बहस छेड़ दी है.

एक तरफ फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों के कारण हजारों छात्र और समर्थक सड़कों पर उतरे. दूसरी तरफ मीडिया रिपोर्टों ने आंदोलन को व्यापक वैचारिक नेटवर्क से जोड़ने वाले संगठनों और आर्थिक संबंधों पर सवाल उठाए हैं.

इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या अंतरराष्ट्रीय संगठन केवल आंदोलनों को समर्थन और प्रचार दे रहे हैं, या उनके आयोजन और दिशा तय करने में भी उनकी प्रत्यक्ष भूमिका है? इसका जवाब आरोपों या राजनीतिक नारों से नहीं, बल्कि पारदर्शी वित्तीय रिकॉर्ड, विश्वसनीय दस्तावेजों और स्वतंत्र जांच से ही मिल सकता है.

य़ह भी पढ़ें - Explainer: महज 6 शब्दों से कैसे CJP के साथ जुड़ गए थे लाखों युवा? कॉकरोच से 'राष्ट्रीय नेता' बन गए अभिजीत दिपके

Continue reading on the app

  Sports

AFG vs BAN: कप्तान रहमत शाह ने क्रीज पर गाड़ा खूंटा, बांग्लादेश के खिलाफ अफगानिस्तान का पलटवार

Afghanistan Strong reply Bangladesh: अबू धाबी टेस्ट के दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक अफगानिस्तान ने अपनी पहली पारी में चार विकेट पर 211 रन बना लिए थे. इससे पहले बांग्लादेश की पहली पारी 346 रन पर सिमट गई थी. अफगानिस्तान की शुरुआत खराब रही और 139 रन तक उसके चार प्रमुख बल्लेबाज आउट हो गए थे. इसके बाद रहमत शाह और इकराम अलीखिल ने मोर्चा संभाला. स्टंप्स के समय रहमत 84 रन बनाकर नाबाद हैं और टीम अभी भी 135 रन पीछे है. Sat, 10 Oct 2026 23:03:13 +0530

  Videos
See all

CM Yogi on Akhilesh Yadav: CM योगी का अखिलेश को खुला चैलेंज, देखें कितना है दम | BJP | SP | UP #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-10T18:15:32+00:00

Congress Protest News : 12 अक्टूबर को दिल्ली में कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-10T18:14:43+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers