Responsive Scrollable Menu

मनीषा कोइराला से ब्रेकअप के बाद टूट गए थे नाना पाटेकर, सालों तक सताता रहा दर्द

Manisha Koirala and Nana Patekar Relationship Breakup: नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला का ये अधूरा प्यार बॉलीवुड की उन कहानियों में शामिल हो गया है जो कभी पूरी तरह सामने नहीं आईं। नाना के भावुक बयान से साफ है कि ब्रेकअप उनके लिए आसान नहीं था।

Continue reading on the app

कानून तोड़ने वाले बच्चों के नाम Internet पर सार्वजनिक न हों: प्रधान न्यायाधीश

भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि ‘कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चों’ के नाम समाचारों एवं इंटरनेट पर सार्वजनिक नहीं किए जाने चाहिए, क्योंकि यह वाक्यांश उसकी परिस्थिति को दर्शाता है, न कि उसकी पहचान को। प्रधान न्यायाधीश ने उच्चतम न्यायालय की किशोर न्याय समिति द्वारा संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के सहयोग से आयोजित ‘किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के 10 वर्ष: प्रगति, चुनौतियां और अगले दशक की प्राथमिकताएं’ विषय पर राष्ट्रीय वार्षिक हितधारक परामर्श कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद कहा कि किसी कानून के लिए 10 वर्ष का समय कम होता है लेकिन यह किसी बच्चे के बचपन के आधे से भी अधिक समय के बराबर है। उन्होंने कहा कि 2015 का यह अधिनियम इस सोच पर आधारित है कि किसी बच्चे पर अपराधी का ठप्पा लगाने के बजाय उसे दूसरा मौका दिया जाए तो उसके समाज का एक उपयोगी सदस्य बनने की संभावना कहीं अधिक होती है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह यात्रा वास्तव में तभी पूरी होती है, जब अतीत की छाया भविष्य पर पड़नी बंद हो जाए। इसके लिए हमें पुराने रिकॉर्ड समय पर नष्ट करने होंगे और कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चों के नाम समाचारों और इंटरनेट पर सार्वजनिक होने से रोकने होंगे, क्योंकि एक बार इंटरनेट पर आने के बाद ये नाम वर्षों तक वहां बने रह सकते हैं।’’ प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि जनवरी 2016 में जब यह अधिनियम लागू हुआ था, तब किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किए गए 15 वर्षीय बच्चे की उम्र आज लगभग 25 वर्ष होगी और इस अधिनियम ने उस बच्चे से जो पहला वादा किया था, वह इसमें इस्तेमाल किए गए शब्दों में ही निहित है। उन्होंने कहा, ‘‘ ‘कानून का उल्लंघन करने वाला बच्चा’ वाक्यांश उस बच्चे की परिस्थिति को दर्शाता है, न कि उसकी पहचान को।’’ प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे बच्चों की परिस्थितियां आमतौर पर कठिन होती हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी कहानियों में अक्सर पढ़ाई बीच में छूटने, परिवारों के मुश्किल हालात से गुजरने और गरीबी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यदि किसी बच्चे से बातचीत करने और उसकी ओर से बोलने वाला कोई नहीं है, तो उसे अपनी बात रखने का अधिकार देने का कोई विशेष मतलब नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि इसी कारण राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की 2024 की बाल-अनुकूल विधिक सेवा योजना में पुलिस थानों में बच्चों के लिए वकील और प्रत्येक किशोर न्याय बोर्ड में विधिक सेवा क्लिनिक की व्यवस्था की गई है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘इसके बावजूद कई बोर्ड में अब भी ऐसे क्लिनिक नहीं हैं। इनके अभाव में बच्चे की देखभाल और कल्याण से जुड़े शुरुआती फैसले उचित कानूनी प्रतिनिधित्व के बिना लिए जाने की संभावना है।’’ उन्होंने विधिक सेवा संस्थानों से बच्चों के लिए प्रशिक्षित बचाव पक्ष के वकीलों का एक अलग प्रकोष्ठ बनाने पर भी विचार करने का आग्रह किया, ताकि प्रत्येक बच्चे को शुरुआत से ही एक समर्पित वकील मिल सके। प्रधान न्यायाधीश ने नियमित और स्वतंत्र मूल्यांकन की आवश्यकता पर भी जोर दिया ताकि निजता का उचित ध्यान रखते हुए यह पता लगाया जा सके कि कितने बच्चे दोबारा विद्यालय गए, कितनों को रोजगार मिला और कितनों को फिर कभी किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश नहीं होना पड़ा।

उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश बी. वी. नागरत्ना ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह परामर्श कार्यक्रम इस महत्वपूर्ण कानून की समीक्षा करने और यह समझने का अवसर है कि पिछले 10 वर्ष में इस कानून का उन बच्चों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा है, जिनके लिए इसे बनाया गया था। उन्होंने कहा कि किशोर न्याय बोर्ड का उद्देश्य किसी ‘‘छोटी आपराधिक अदालत’’ की तरह काम करना नहीं है। उन्होंने कहा कि इसकी भूमिका एक अलग सोच पर आधारित है, जो यह स्वीकार करती है कि बच्चों में विकास करने और बदलने की क्षमता होती है तथा न्याय व्यवस्था को उनके विकास से जुड़ी इस वास्तविकता को गंभीरता से लेना चाहिए।

न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि यह अधिनियम अंततः भविष्य से जुड़ा कानून है। उन्होंने कहा, ‘‘जब कोई बच्चा कानून तोड़ता है, तो कानून को उस बच्चे को नहीं तोड़ना चाहिए।

Continue reading on the app

  Sports

IND vs WI: ये लड़का बॉल नहीं मिसाइल फेंकता है... 150 की रफ्तार वाले मयंक यादव के कायल गावस्कर-गंभीर

IND vs WI Ranchi T20: टीम इंडिया की हार के बावजूद मयंक यादव ने अपनी रफ्तार और धारदार गेंदबाजी से प्रभावित किया. वेस्टइंडीज के खिलाफ रांची टी20 में उन्होंने तीन ओवर में 36 रन देकर तीन विकेट झटके और भारतीय गेंदबाजों में सबसे सफल रहे. पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर का मानना है कि मयंक को 17वां ओवर नहीं देना भारत को भारी पड़ा. Sat, 10 Oct 2026 19:49:58 +0530

  Videos
See all

Little girl falls into a 40-foot-deep sewer! | #viralvideo #viralnews #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-10T14:41:30+00:00

Starlink मामले में Elon Musk को भारत का जवाब! Rahul Gandhi के बयान पर सियासी घमासान #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-10T14:41:46+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers