CEC ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग, सुरिंदर चौधरी ने दिल्ली में पाबंदियों पर उठाए सवाल
जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉजपा के विरोध प्रदर्शन के आह्वान के बीच दिल्ली में लगाई गई पाबंदियों का जिक्र करते हुए शनिवार को सवाल उठाया कि क्या आज के हालात आपातकाल के समय से कम गंभीर हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) नेताओं को हिरासत में लिए जाने को ‘‘गलत’’ बताते हुए उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने और संस्थाओं की आजादी बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कुमार के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों की जांच कराने की भी मांग करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त को नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।
उपमुख्यमंत्री ने यहां एक कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से कहा, ‘‘कॉजपा नेताओं को हिरासत में लेना गलत है और ऐसा नहीं होना चाहिए। प्रदर्शन करना उनका अधिकार है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ गंभीर आरोप हैं और ये आरोप किसी राजनीतिक दल ने नहीं, बल्कि उनके दो सहयोगियों ने लगाए हैं।
इसलिए इस मामले की जांच होनी चाहिए।’’ उन्होंने कॉजपा के प्रमुख नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिए जाने तथा दिल्ली में लोगों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोकने की कोशिशों से जुड़े सवाल के जवाब में यह बात कही। चौधरी ने राष्ट्रीय राजधानी में लगाई गई पाबंदियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे कदम लोकतांत्रिक स्वतंत्रता को लेकर चिंता पैदा करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘आज देश में जो कुछ हो रहा है, वह कई मायनों में गलत है।
आप (भाजपा) बार-बार आपातकाल की बात करते हैं... क्या आज की स्थिति आपातकाल के समय से कम गंभीर है? जब आपने दिल्ली को पूरी तरह ठप कर दिया है और राजधानी को पंगु बना दिया है, तो इसका क्या मतलब है?’’ पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया और मजबूत लोकतंत्र की जरूरत पर जोर देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव प्रणाली में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त को नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम लोकतंत्र को जीवंत और मजबूत बनाए रखना चाहते हैं और अपने मतों की गिनती में पारदर्शिता सुनिश्चित करना चाहते हैं, तो मुख्य निर्वाचन आयुक्त को नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।
Flydubai Flight में Captain Smit Machchhar पर हमला मामले की जाँच NIA ने संभाली, अब सामने आयेगा साजिश का पूरा सच
फ्लाईदुबई की विमान में हुई घटना की जांच अब एनआईए करेगी। देखा जाये तो दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार पर हुआ जानलेवा हमला अब अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा के साथ-साथ भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर जांच का विषय बन गया है। हम आपको बता दें कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 30 सितंबर 2026 को हुई इस सनसनीखेज घटना की जांच के लिए 9 अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों के मुताबिक, मामला एंटी-हाइजैकिंग एक्ट, 2016 और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA, 1967 की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। अब जांच का दायरा इस सवाल तक पहुंचेगा कि यह हमला केवल एक आरोपी की कथित हरकत थी या इसके पीछे कोई व्यापक साजिश भी थी।
हम आपको याद दिला दें कि घटना फ्लाइट FZ1073 की है, जो दुबई से तेल अवीव जा रही थी। विमान के ओमानी सह-पायलट ने कॉकपिट में कैप्टन मच्छार पर धारदार उपकरण से हमला किया था। संयुक्त अरब अमीरात के अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आरोपी का कथित इरादा विमान को इजराइल के बेन गुरियन हवाई अड्डे पर दुर्घटनाग्रस्त करना था। हालांकि, इस हमले के सभी पहलुओं की जांच जारी है।
हम आपको यह भी बता दें कि हमले में गंभीर रूप से घायल कैप्टन मच्छार को पहले ताबुक में प्राथमिक उपचार दिया गया और बाद में बेहतर चिकित्सा के लिए अबू धाबी स्थानांतरित किया गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 7–8 अक्टूबर को बताया था कि उनकी हालत में सुधार हो रहा है और वह इलाज पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहे हैं। भारतीय दूतावास उनके परिवार, चिकित्सकों और स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है। 10 अक्टूबर तक उपलब्ध रिपोर्टों में उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर कोई नई, विस्तृत आधिकारिक चिकित्सकीय जानकारी सामने नहीं आई है।
उधर, कैप्टन मच्छार की बहादुरी की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। इजराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने कैप्टन मच्छार को Presidential Award for Civilian Heroism से सम्मानित किए जाने की घोषणा की है। यह सम्मान विमान में यात्रियों की जान बचाने में उनकी भूमिका के लिए दिया जायेगा।
दूसरी ओर, NIA की जांच अब इस घटना को केवल विमान के भीतर हुई हिंसा तक सीमित नहीं रखेगी। विमान के कॉकपिट तक पहुंच, सह-पायलट की पृष्ठभूमि, सुरक्षा जांच की प्रभावशीलता और संभावित वैचारिक या अन्य संपर्कों की पड़ताल अहम होगी। यह भी स्पष्ट करना होगा कि क्या किसी स्तर पर पहले से चेतावनी के संकेत मौजूद थे और क्या उन्हें नजरअंदाज किया गया। देखा जाये तो इस घटना का रणनीतिक महत्व इसलिए भी बड़ा है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में एक व्यक्ति की कार्रवाई कई देशों की सुरक्षा को एक साथ प्रभावित कर सकती है। भारत, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इजराइल के बीच जांच संबंधी सहयोग तथा खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान महत्वपूर्ण होगा। NIA की जांच यह समझने में मदद कर सकती है कि विमानन सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई और भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए किन उपायों की जरूरत है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi







/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
