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पाकिस्तान की राजकोषीय नीति उत्पादक वर्ग को निराश करने वाली, जनता पर बढ़ रहा टैक्स का बोझ

नई दिल्ली, 7 फरवरी (आईएएनएस)। कई वर्षों से आर्थिक संकट झेल रहा, पाकिस्तान अपनी जनता पर लगातार टैक्स बढ़ा रहा है और ऐसी नौकरशाही को बढ़ावा दे रहा है, जो कि आम जनता की सेवा करने असक्षम है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।

पाकिस्तानी बिजनेस न्यूजपेपर बिजनेस रिकॉर्डर में जारी हुई रिपोर्ट में कहा गया कि देश की राजकोषीय नीति उत्पादक वर्ग का शोषण करके ऐसी विशाल नौकरशाही की फंडिंग करने पर केंद्रित बनी हुई है, जो कि अनुत्पादक है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया, हम एक कल्याणकारी राज्य नहीं हैं; हमारे पास इसे बनाए रखने के लिए संस्थागत तंत्र, दस्तावेजीकरण और नैतिक अनुबंध की कमी है।

रिपोर्ट में बताया गया कि पाकिस्तान में केवल 34 लाख करदाता हैं, जो कि देश की कुल 8.56 करोड़ की वर्कफोर्स का 4 प्रतिशत हैं।

रिपोर्ट में खेद व्यक्त करते हुए कहा गया कि इस बंधुआ अल्पसंख्यक वर्ग को अरबों रुपए के घाटे को पूरा करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि अनौपचारिक अभिजात वर्ग अछूता बना हुआ है। हमने उत्कृष्टता को कर योग्य अपराध और पारदर्शिता को दिवालियापन का मार्ग बना दिया है।

जब एक वेतनभोगी पेशेवर पर 35 प्रतिशत कर लगाया जाता है, लेकिन उसे निजी सुरक्षा, बिजली और शिक्षा के लिए अपनी जेब से भुगतान करना पड़ता है, तो सरकार प्रभावी रूप से उस सामाजिक अनुबंध के लिए विलासिता का प्रीमियम वसूल रही है जिसका वह पहले ही उल्लंघन कर चुकी है।

रिपोर्ट के अनुसार, “इसका परिणाम हमारी अर्थव्यवस्था के 8 लाख कुशल निर्माताओं पर देखा जा रहा है जो 2025 तक पाकिस्तान छोड़ देंगे, जिनके पास हमारी वर्तमान नीतियों के तहत कुचले जाने या निर्वासन में जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।”

हालांकि, आईएमएफ और सरकारी तकनीकी विशेषज्ञों का तर्क है कि राजकोषीय घाटे ने हमारे पास कोई विकल्प नहीं छोड़ा है।

उनका कहना है कि ऋण चुकाने की जरूरतें लगभग 9 ट्रिलियन रुपए तक पहुंचने के साथ, सरकार को पंजीकृत क्षेत्र से हर संभव रुपया निकालना ही होगा।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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केरल को मिला पहला समर्पित अंग प्रत्यारोपण अस्पताल, मुख्यमंत्री ने रखी आधारशिला

कोझिकोड, 7 फरवरी (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री पी. विजयन ने शनिवार को कहा कि केरल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन की स्थापना राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए सबसे बेहतरीन और सराहनीय कदमों में से एक है।

सीएम स्वास्थ्य विभाग के तहत कोझिकोड के चेवायूर में बनाए जा रहे पहले अंग प्रत्यारोपण अस्पताल की आधारशिला रख रहे थे।

यह संस्थान अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ बनाया जा रहा है, ताकि अंग प्रत्यारोपण से जुड़ी सभी गतिविधियां, सभी प्रकार की ट्रांसप्लांट सर्जरी एक ही स्थान पर की जा सकें।

अस्पताल में हर साल लगभग 1,100 कॉर्निया, 520 किडनी, 320 लिवर, 15 आंतों, 15 पैंक्रियास, 50 हृदय, 40 फेफड़े, 120 बोन मैरो और 300 सॉफ्ट टिशू/उंगली/हाथ/हड्डी/चेहरे के प्रत्यारोपण का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अंग प्रत्यारोपण अस्पताल अपने आप में एक अनोखा संस्थान बनेगा, जिसकी कोई बराबरी नहीं होगी। ऐसे समय में जब स्वास्थ्य क्षेत्र तेजी से बदल रहा है, अंग प्रत्यारोपण सर्जरी बहुत जरूरी हो गई है।

निजी अस्पतालों में इन सर्जरियों का खर्च बहुत ज्यादा होता है और एक ही सर्जरी का खर्च अलग-अलग अस्पतालों में अलग-अलग होता है। कई परिवारों के लिए इतना खर्च उठाना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसी स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों ने ऐसे अस्पताल की स्थापना का सुझाव दिया था।

मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि यह परियोजना समय पर पूरी होगी और इसे सफल बनाने के लिए सभी वर्गों के सहयोग की अपील की।

स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने कहा कि यह दिन केरल के स्वास्थ्य क्षेत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। राज्य सरकार ने इस अहम जरूरत को समझते हुए चेवायूर में केरल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन स्थापित करने का फैसला किया।

मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार जल्द ही एक योजना की घोषणा करेगी, जिसके तहत प्रत्यारोपण के बाद मरीजों को देश में सबसे कम कीमत पर दवाइयां उपलब्ध कराई जाएंगी।

यह अस्पताल चेवायूर स्किन डिजीज हॉस्पिटल परिसर में 20 एकड़ जमीन पर बनाया जाएगा। इसका निर्माण दो चरणों में होगा। पहले चरण की लागत 299 करोड़ रुपए होगी। उपकरणों के लिए अतिरिक्त 99 करोड़ रुपए रखे गए हैं।

पहले चरण में अस्पताल में आईसीयू और एचडीयू सुविधाओं सहित 350 बेड, एक डायलिसिस केंद्र और 10 ऑपरेशन थिएटर होंगे।

यहां 14 विशेष विभाग और डिवीजन होंगे और पूरी इमारत आठ मंजिलों में बनाई जाएगी।

यह संस्थान प्रत्यारोपण के क्षेत्र में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए प्रशिक्षण और शोध केंद्र के रूप में भी काम करेगा, जहां 31 शैक्षणिक पाठ्यक्रम चलाने की योजना है। अस्पताल का निर्माण केआईआईएफबी के फंड से किया जा रहा है।

--आईएएनएस

एएमटी/एबीएम

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