CJP के Jantar Mantar प्रदर्शन पर भड़की BJP, Sambit Patra बोले- राजधानी को बंधक बनाने की साजिश हुई फ्लॉप
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के विरोध प्रदर्शन को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन देश की भावना को नहीं दिखाता और आरोप लगाया कि अराजक ताकतों ने राष्ट्रीय राजधानी में अशांति फैलाने की कोशिश की थी। पात्रा ने कहा कि जंतर-मंतर की कहानी भारत की कहानी नहीं है। जंतर-मंतर पर जो हो रहा है, जो आप टीवी और कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स पर देख सकते हैं, वह भारत की कहानी नहीं है। भारत शांत है और अच्छे शासन के तहत आगे बढ़ रहा है।
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उन्होंने कहा कि हम देख रहे हैं कि कुछ अराजक ताकतें पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के एक कोने में अराजकता फैला रही हैं। लेकिन आज अराजकतावादी विफल हो गए हैं। अराजक तत्वों का फ्लॉप शो पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है। देश की राजधानी भारत को बंधक बनाने की कोशिश की गई; ताकि यहां आगजनी हो, हिंसा हो। लेकिन आज 'लोकतंत्र' की 'भीड़तंत्र' पर जीत हुई है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि कल कुछ नेता राष्ट्रपति भवन गए थे। राष्ट्रपति भवन से बाहर आने के बाद राहुल गांधी का बयान एक 'नालायक नेता' जैसा था।
उन्होंने कहा कि इससे पहले कभी राष्ट्रपति को सड़क पर हो रहे विरोध-प्रदर्शन में घसीटने की कोशिश नहीं की गई थी। लेकिन एक 'नालायक नेता' ने ऐसा करने की कोशिश की। अराजकतावादी राहुल गांधी ने भारत के राष्ट्रपति को उस अराजकता की ओर खींचने की कोशिश की, जिसे वे भारत की सड़कों पर फैलाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। स्टारलिंक पर विपक्ष के नेताओं के ट्वीट पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने कहा कि यह लड़ाई मोदी बनाम मीर जाफ़र की है। ये वे लोग हैं जो सत्ता के लिए देश को भी गिरवी रख सकते हैं। सड़कों पर अराजकता फैलाने की यह कोशिश - देश को पता होना चाहिए कि वे बिना चुनाव जीते, बिना चुनाव लड़े सत्ता में आना चाहते हैं। वे बिना मेहनत किए पीएम बनना चाहते हैं, भले ही इसके लिए उन्हें देश को गिरवी रखना पड़े। मीर जाफ़र दोहरे मापदंड अपनाने को तैयार हैं। यह लड़ाई मोदी बनाम मीर जाफ़र की है।
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यह बयान तब आया जब जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे। इस ग्रुप ने चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। इस विरोध-प्रदर्शन ने चुनाव आयोग की समीक्षा प्रक्रिया को फिर से राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है; विपक्षी नेता चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं और चुनाव आयोग से ज़्यादा जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) विवाद को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली में लागू किए गए कड़े सुरक्षा इंतजामों और पाबंदियों पर केंद्र सरकार से सवाल किया। तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने राजधानी में 22,000 पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती को "युद्ध जैसी तैनाती" करार दिया। उन्होंने 250 ट्रेनों के रद्द होने और मेट्रो सेवाओं के बंद किए जाने पर भी चिंता जताई।
कांग्रेस नेता ने लिखा कि मैं रात 2 बजे के बाद राजधानी लौटा और मैंने शायद ही कभी ऐसा कुछ देखा हो जैसा दिल्ली में अभी हो रहा है—हर कुछ सौ मीटर पर चेकपॉइंट, सड़कों पर कंक्रीट बैरियर और स्पाइक स्ट्रिप्स, शहर भर में 22,000 पुलिस और पैरामिलिट्री जवानों की युद्ध जैसी तैनाती, 250 ट्रेनें रद्द और 45 मेट्रो स्टेशन बंद, और दिल्ली व उसके आस-पास के इलाकों में युवाओं को उनके घरों और सड़कों से हिरासत में लिए जाने की खबरें—और यह सब इसलिए ताकि नागरिक हमारे चुनावों की निष्पक्षता पर शांतिपूर्ण ढंग से सवाल न उठा सकें।
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शशि थरूर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि लोगों की आवाजाही पर रोक लगी हुई है और जंतर-मंतर जाने वाली सड़कें बंद हैं। उन्होंने कहा कि सबसे ज़्यादा दमनकारी (और लोगों की आवाज़ दबाने वाला) कदम राष्ट्रीय राजधानी के बीचों-बीच इंटरनेट बंद करना है। लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। जंतर-मंतर को खास तौर पर इसलिए तय किया गया था ताकि नागरिक दिल्ली के बीचों-बीच अपनी असहमति ज़ाहिर कर सकें, और आज वहाँ जाने वाली सड़कों को भी बंद कर दिया गया है।
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CJP सदस्यों को हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाते हुए थरूर ने आगे कहा कि यह पूछना जायज़ है कि जब हमारी राजधानी में महिलाओं को सुरक्षा की ज़रूरत होती है, तब इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बल और तत्परता कहाँ गायब हो जाती है? हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करना होगा। और अगर प्रदर्शनकारी सोमवार को फिर से लौटते हैं, तो क्या अधिकारी राष्ट्रीय राजधानी में फिर से लॉकडाउन लगा देंगे? हमारी GenZ (नई पीढ़ी) 'अघोषित इमरजेंसी' से बेहतर की हकदार है।
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