EC के खिलाफ विपक्षी प्रदर्शन बेअसर साबित होगा, Himanta Biswa Sarma ने साधा निशाना
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को कहा कि चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन का कोई असर नहीं होगा; उन्होंने इसे विपक्ष की हताशा का नतीजा बताया। उत्तराखंड के हरिद्वार में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब विपक्ष हताश होता है, तो वे इस तरह के तमाशे करते हैं... इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। लोगों के लिए काम करते रहिए, और लोग आपको आशीर्वाद देते रहेंगे।
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बीजेपी नेता मृत्युंजय तिवारी ने माना कि संविधान विरोध करने का अधिकार देता है, लेकिन इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रदर्शनों से अव्यवस्था नहीं फैलनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर चुनाव आयोग को निशाना बनाने और लोकतंत्र व संविधान को कमज़ोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष विदेशी ताकतों के प्रभाव में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस देश में संविधान हर किसी को विरोध करने का अधिकार देता है, लेकिन किसी को भी अराजकता फैलाने का अधिकार नहीं है। विरोध का मतलब अराजकता नहीं हो सकता... छात्रों को किसी के दबाव में नहीं आना चाहिए और न ही किसी के बहकावे में आना चाहिए।
तिवारी ने विपक्ष के उस दावे की आलोचना की जिसमें उन्होंने प्रश्न-पत्र लीक होने और छात्रों के भविष्य के लिए विरोध करने की बात कही थी, और साथ ही पुलिस व आम जनता के खिलाफ हुई हिंसा का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि अब आप चुनाव आयोग पर सवाल उठाने लगे हैं... यह लोकतंत्र और खुद संविधान को कुचलने और बदनाम करने की कोशिश है... वे विदेशी ताकतों के इशारे पर काम कर रहे हैं।
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ये टिप्पणियां CJP द्वारा शनिवार को किए जाने वाले उस विरोध-प्रदर्शन के आह्वान के साथ आईं, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और 'स्पेशल समरी रिविज़न' (विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण) प्रक्रिया का विरोध किया गया है। यह प्रस्तावित प्रदर्शन, 'वोट चोरी' के आरोपों और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर विपक्ष और भारत के चुनाव आयोग के बीच चल रहे राजनीतिक तनाव के माहौल में हो रहा है।
Delhi में CEC के खिलाफ प्रदर्शन से पहले SFI सदस्य और वकील हिरासत में
कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले शनिवार को दिल्ली पुलिस ने ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (एसएफआई) और अन्य छात्र संगठनों के कई सदस्यों के साथ-साथ उच्चतम न्यायालय से जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे वकीलों को हिरासत में ले लिया। कॉजपा ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची में हेरफेर और मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 से जुड़ी गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है।
दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं और जरूरी प्रक्रियाओं का हवाला देते हुए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। एसएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदर्श एम. साजी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि संगठन के 400 से अधिक सदस्यों को पूर्वाह्न करीब 10 बजे मार्च शुरू करने के बाद हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों को पूर्वाह्न करीब 11 बजे हिरासत में लिया गया।
हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिस की बस के अंदर से एक प्रदर्शनकारी को यह कहते सुना जा सकता है, ‘‘प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया है। हम लोकतंत्र बचाने के लिए यहां आए हैं। यह तानाशाही और लोकतंत्र के बीच की लड़ाई है।
यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। ज्ञानेश कुमार को उनकी कुर्सी से हटाया जाएगा।’’ एसएफआई और ‘डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (डीवाईएफआई) के नेताओं ने गोल मार्केट स्थित एके गोपालन भवन से जंतर-मंतर तक रैली निकालने की योजना बनाई थी। उच्चतम न्यायालय के पास भगवान दास रोड पर कई वकीलों को भी हिरासत में लिया गया।
वे जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने अवरोधक लगाकर उन्हें रोक दिया। इससे पहले वकीलों ने नारे लगाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले पोस्टर लहराए।
एक वकील ने कहा, ‘‘हमें उच्चतम न्यायालय के गेट सी के ठीक पास हिरासत में लिया गया है। हमें कुछ दूरी तक मार्च करने दिया गया, फिर रोक दिया गया। मेरे कई साथी आगे निकल गए।
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