व्हाइट हाउस की नई प्रेस सेक्रेटरी बनीं केटी जकारिया:ट्रम्प बोले- वे मेरी वफादर समर्थक; 7 बार से इस पद पर महिला चुनी गईं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को केटी जकारिया को व्हाइट हाउस की नई प्रेस सेक्रेटरी बनाने का ऐलान किया। कैरोलिना लेविट के पद छोड़ने के बाद करीब दो महीने से यह पद खाली था। जकारिया कैलिफोर्निया की वकील और कंजर्वेटिव विचारों वाली कमेंटेटर हैं। वह ट्रम्प की बड़ी समर्थक हैं और कई बार उनकी जमकर तारीफ कर चुकी हैं। ट्रम्प ने नियुक्ति का ऐलान करते हुए कहा कि जकारिया का उनके समर्थन का रिकॉर्ड बेदाग है। ट्रम्प ने उन्हें वफादार और प्रतिभाशाली समर्थक बताया। केटी जकारिया से पहले लगातार 6 महिलाएं इस पद की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। आखिरी पुरुष प्रेस सेक्रेटरी शॉन स्पाइसर थे, जिन्होंने 2017 में ट्रम्प के पहले कार्यकाल की शुरुआत में यह पद संभाला था। ट्रम्प ने फैसला लेने से पहले लेविट से भी सलाह ली ट्रम्प ने यह फैसला लेने से पहले अपने कई करीबी सलाहकारों से बात की थी। इनमें पूर्व प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिना लेविट भी शामिल थीं। लेविट ने अपने दूसरे बच्चे को जन्म देने के बाद अगस्त के आखिर में प्रशासन छोड़ दिया था। उनकी जगह लेने के लिए CNN के कंजर्वेटिव कमेंटेटर स्कॉट जेनिंग्स, ट्रम्प की पूर्व वकील अलीना हब्बा और डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी एना केली के नाम भी चर्चा में थे। करीब दो महीने तक प्रेस सेक्रेटरी का पद खाली रहने के कारण व्हाइट हाउस के प्रेस ब्रीफिंग रूम में आखिरी औपचारिक ब्रीफिंग 3 सितंबर को हुई थी। जकारिया ट्रम्प की कंपनी में भी काम कर चुकी हैं 42 साल की केटी जकारिया के चार बच्चें हैं। वे कैलिफोर्निया के वेस्टलेक विलेज में रहती हैं। उन्होंने ग्रेजुएशन और कानून की पढ़ाई पेपरडाइन यूनिवर्सिटी से की है। जून से वह ट्रम्प मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप में सीनियर कम्युनिकेशन एडवाइजर के तौर पर काम कर रही थीं। यह वही कंपनी है जो ट्रम्प के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' को चलाती है। इसके अलावा पिछले एक साल में फॉक्स न्यूज और न्यूजमैक्स पर वह कई बार नजर आई हैं। जकारिया खुद को फॉक्स न्यूज की कमेंटेटर बता चुकी हैं। हालांकि, चैनल ने साफ किया है कि वह वहां कभी कर्मचारी नहीं रहीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प ने जकारिया को टीवी पर देखने के बाद पसंद किया। जकारिया ने टीवी कार्यक्रमों में ही नहीं, बल्कि लंबे लेख लिखकर भी ट्रम्प के नेतृत्व और उनकी राजनीतिक उपलब्धियों की तारीफ की है। जकारिया ने नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट का विरोध किया था जकारिया फॉक्स न्यूज जैसे बड़े अमेरिकी न्यूज चैनलों पर ट्रम्प की नीतियों का बचाव करती रही हैं। उन्होंने ट्रम्प को अमेरिकी राजनीति का अब तक का सबसे बड़ा खिलाड़ी बताया था और उनकी तुलना खेल जगत के दिग्गजों से की थी। जकारिया के विचार ट्रम्प से काफी मिलते हैं। उन्होंने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के गिरफ्तारी वारंट का भी विरोध किया था। वह ईरान के खिलाफ भी सख्त रुख रखती हैं। जुलाई में जकारिया ने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी की आलोचना की थी। ममदानी ने कहा था कि नेतन्याहू के न्यूयॉर्क आने पर उन्हें गिरफ्तार कराने के कदम उठाए जा सकते हैं। इस पर जकारिया ने कहा था कि ममदानी ऐसे व्यवहार करते हैं, जैसे वह किसी स्वतंत्र देश के शासक हों।
अब चीन पर टूट पड़े बलूच लड़ाके, फूंक डाला कार्गो काफिला, मची तबाही!
पाकिस्तान में इन दिनों चारों तरफ ऐसा विद्रोह भड़का हुआ है उसे काबू पाने में शहबाज और मुनीर नाकाम दिख रहे हैं। पाकिस्तान के खिलाफ खुली बगावत करने वाले विद्रोही अब तक तो मुनीर की सेना को ही ठोक रहे थे। लेकिन अब उन्होंने उस चीन को भी निशाने पर ले लिया है जो शहबाज मुनीर के साथ मिलकर उनके लड़ाकों को मार रहा था। बलूच लड़ाकों ने पाकिस्तान की सेना के साथ ही अब चीन को भी भारी जख्म दे डाला है। पिछले कुछ समय के अंदर बलूच विद्रोहियों ने पाकिस्तान के सैकड़ों सैनिकों को मार डाला है। लेकिन अब चीन भी उनके टारगेट पर आ गया है। खबर है कि हथियारों से लैस बलूच विद्रोहियों ने ग्वादर पोर्ट की तरफ जा रहे एक बड़े कार्गो काफिलों को फूंक डाला है। यानी कि बलूचों ने अब चीन के हाथ भी जलाने शुरू कर दिए हैं। दरअसल भारी गोलीबारी करते हुए बलूच लड़ाकों ने वाहनों को जबरन रोका। चालकों को बंदूक की नोक पर बाहर निकाला और फिर सामान से लदे दो बड़े हैवी ट्रेलरों को फूंक डाला। इस भीषण हमले के दौरान हमलावरों ने एक ड्राइवर का भी अपहरण कर लिया है और सुरक्षा बलों के पहुंचने से पहले ही वह आसपास की दुर्गम पहाड़ियों में गायब हो गए। आग इतनी भयानक थी कि ग्वादर बंदरगाह के लिए भेजा जा रहा कीमती सामान जलकर पूरी तरह से राख हो गया। इस हमले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी कि सीबीसी की रीड माने जाने वाले गदर प्रोजेक्ट पर बलूच विद्रोहियों का खौफ किस तरह हावी है और अब पाकिस्तान के साथ-साथ सीधे चीन के हाथ भी जलाने शुरू कर दिए हैं।
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सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि घटना के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की नाकामी रही। जानकारी के मुताबिक जब हमलावर कारगो गाड़ियों पर गोलियां बरसा रहे थे और ट्रकों को फूंक रहे थे तो उस दौरान पाकिस्तानी सेना या पुलिस का कोई भी जवान मौके पर नहीं पहुंचा| जब तक सुरक्षा बल पहुंचे तब तक हमलावर ड्राइवर को अगवा कर आराम से फरार हो चुके थे। दरअसल ग्वादर पोर्ट केवल पाकिस्तान का एक साधारण बंदरगाह नहीं है बल्कि चीन के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव यानी बीआरआई और चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर का सबसे अहम दिल माना जाता है। अरब सागर के तट पर बसा यह गर्म पानी का गहरा बंदरगाह पारस की खाड़ी के मुहाने पर और स्टेट ऑफ फॉर्मुज के ठीक बाहर स्थित है। जहां से दुनिया का सबसे बड़ा तेल व्यापार गुजरता है। ग्वादर पोर्ट का मालिकाना हक भले ही पाकिस्तान सरकार के पास हो लेकिन इसका प्रबंध और संचालन पूरी तरह से चीनी कंपनी चाइनीज ओवरसीज पोर्ट होल्डिंग कंपनी के हाथों में है। पाकिस्तान सरकार और चीन पर आरोप लगते आए हैं कि वो बलूच से तेल, गैस और खनिजों जैसे प्राकृतिक संसाधनों को लूट रहे हैं और बदले में स्थानीय बलूच लोगों को केवल गरीबी, बेरोजगारी और सैन्य दमन मिला है। यह वजह है कि बलूच विद्रोही ग्वादर से जुड़ी हर सड़क, हर काफिले और वहां काम करने वाले चीनी नागरिकों को लगातार निशाना बना रहे हैं।
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नया हमला इस बात का साफ-सा संकेत है कि बलूच उग्रवादीयों ने अब अपनी रणनीति पूरी तरह बदल ली है। वो केवल सुरक्षा बलों की चौकियों पर ही हमले नहीं कर रहे। बल्कि ग्वादर को पूरे पाकिस्तान से जोड़ने वाले [संगीत] आर्थिक और व्यापारिक रास्ते को तबाह कर रहे हैं। क्योंकि जब ग्वादर जाने वाले सामान से लदे ट्रेलरों को इस तरह सरेआम फूंका जाएगा और ड्राइवरों का अपहरण किया जाएगा तो कोई भी निजी ट्रांसपोर्ट कंपनी या ड्राइवर इस रूट पर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा।
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