भारत ने डेयरी सेक्टर को व्यापार समझौते से बाहर रखा, कई उत्पादों का जीरो ड्यूटी पर होगा निर्यात : पीयूष गोयल
नई दिल्ली, 7 फरवरी (आईएएनएस)। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का अंतरिम ढांचा सामने आने के बाद, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि भारत ने इस समझौते से डेयरी सेक्टर को बाहर रखा है और शर्तों के साथ भी कोई अनुमति अमेरिका को नहीं दी गई है।
वाणिज्य भवन में पत्रकारों से संबोधित करते हुए गोयल ने कहा,भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में डेयरी सेक्टर में किसी प्रकार की कोई छूट नहीं दी गई है। साथ ही, मांस, मुर्गी पालन, सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, अनाज, चीनी, बाजरा, केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी जैसे फल, खट्टे फल, हरी मटर, मूंग, चना, तिलहन, पशु आहार उत्पाद और तंबाकू पर भी कोई राहत नहीं दी गई है।
सेब और कपास के आयात पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में इन उत्पादों की खपत, उत्पादन के मुकाबले काफी अधिक है। इस कारण से पहले से ही इन उत्पादों का आयात होता आया है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देश में करीब 6 लाख टन सेब का आयात होता है। मौजूदा समय में आयात का बेस प्राइस 50 रुपए है और इस पर 50 प्रतिशत टैरिफ है, जिससे घरेलू बाजार में आयातित सेब की कीमत 75 रुपए होती है।
उन्होंने आगे बताया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील में आयातित सेब का बेस प्राइस 80 रुपए रखा गया है। वहीं, टैरिफ 25 प्रतिशत है, जिससे आयातित सेब की कीमत 100 रुपए हो जाती है। इसके साथ ही, आयात के लिए एक कोटा भी निर्धारित किया गया है। ऐसे में घरेलू किसानों को डरने की कोई आवश्यकता नहीं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कपास के साथ भी ऐसा ही है। भारत में कुछ विशेष प्रकार की कपास का हमेशा से आयात होता आया है। इस कारण किसानों के लिए कोई चिंता की बात नहीं है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि सरकार लगातार किसानों के हितों को सर्वोपरि रखकर कार्य कर रही है। इस व्यापार समझौते के तहत कई कृषि उत्पादों जैसे मसालों, चाय, कॉफी और उससे जुड़े उत्पाद, नारियल और नारियल तेल, काजू और अन्य उत्पादों का जीरो ड्यूटी पर अमेरिका को निर्यात होगा।
इसके अलावा, रत्न और आभूषण, फार्मा उत्पादों और स्मार्टफोन के निर्यात पर भी जीरो ड्यूटी लगेगी।
गोयल ने आगे कहा कि भारत-अमेरिका का लक्ष्य आपसी द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक ले जाना है। इससे आने वाले समय में दुनिया की सबसे बड़ी 30 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था में भारतीय निर्यातकों के लिए काफी सारे नए अवसर खुलेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि इससे देश को विकसित भारत 2047 का लक्ष्य पाने में मदद मिलेगी।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा केंद्रों पर दागे 400 ड्रोन और 40 मिसाइलें: जेलेंस्की
कीव, 7 फरवरी (आईएएनएस)। यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोडिमीर जेलेंस्की ने दावा किया है कि रूस ने यूक्रेन के एनर्जी सेक्टर पर 400 ड्रोन और 40 मिसाइलों से हमला किया है।
कीव के मुताबिक मास्को ने पावर ग्रिड, बिजली केंद्रों और डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशनों को निशाना बनाया।
जेलेंस्की ने एक्स पोस्ट पर कुछ तस्वीरों के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा, हर दिन, रूस कूटनीति से काम ले सकता है, लेकिन वह नए हमले चुनता है। यह जरूरी है कि त्रिपक्षीय बातचीत का समर्थन करने वाला हर कोई इस पर प्रतिक्रिया दे। मास्को से यूक्रेन के खिलाफ ठंड को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की क्षमता छीन लेनी चाहिए।
इसके साथ ही यूक्रेन के राष्ट्रपति ने स्थिति को नियंत्रण में लाने की बात कही। उन्होंने कहा कि सुरक्षा को ध्यान में रख रूसी हमलों वाली जगहों पर बचाव और मरम्मत का काम जारी है। शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात किए गए हमले में 400 से ज्यादा ड्रोन और अलग-अलग तरह की लगभग 40 मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। पावर ग्रिड, बिजली केंद्र और डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशन निशाने पर थे।
जेलेंस्की ने नुकसान के क्षेत्रों का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि वोलिन, इवानो-फ्रैंकिवस्क, लविव और रिव्ने क्षेत्रों में नुकसान की खबर है। रिव्ने में एक अपार्टमेंट बिल्डिंग को नुकसान पहुंचा है। विन्नित्सिया क्षेत्र के लेडीझिन में, ड्रोन ने एक रेगुलर एग्रीकल्चर कॉलेज की प्रशासनिक इमारत पर हमला किया। कीव और खार्किव क्षेत्रों में भी हमले हुए। कुछ क्षेत्रों में एयर डिफेंस ऑपरेशन जारी हैं।
दोनों देशों के बीच स्थाई समाधान निकालने के लिए 4 और 5 फरवरी को संयुक्त अरब अमीरात के अबुधाबी में अमेरिका की मध्यस्थता में बैठक भी हुई थी। इस बातचीत में दोनों देशों ने बड़े पैमाने पर कैदियों की अदला-बदली पर सहमति जताई, लेकिन क्षेत्रीय व्यवस्था और युद्धविराम जैसे मुख्य मुद्दों पर कोई ठोस सफलता नहीं मिल पाई थी। बातचीत के बाद रूस और यूक्रेन ने लगभग पांच महीने बाद पहली बार बड़े पैमाने पर कैदियों की अदला-बदली की। दोनों देशों ने 157-157 लोगों को रिहा किया था, जिनमें सैन्यकर्मी और आम नागरिक दोनों शामिल थे।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के सचिव रुस्तम उमेरोव के हवाले से बताया था कि यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल ने सम्मानजनक और स्थायी शांति की मांग की, लेकिन उन्होंने किसी खास नतीजे का खुलासा नहीं किया।
गुरुवार को बातचीत खत्म हुई, लेकिन रूस और यूक्रेन की ओर से कोई संयुक्त राजनीतिक या सुरक्षा बयान जारी नहीं किया गया था। इससे साफ है कि दोनों देशों के बीच जमीन विवाद, युद्धविराम और सुरक्षा की गारंटी जैसे मुद्दों पर मतभेद बरकरार हैं।
--आईएएनएस
केआर/
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