Shai Hope का शुभमन गिल को जवाब, लिखा- ‘250? Cool’, सोशल मीडिया पर छिड़ी मजेदार जंग
क्रिकेट के मैदान पर भारत और वेस्टइंडीज के बीच मुकाबले के बाद अब सोशल मीडिया पर भी दिलचस्प अंदाज में जवाबी पोस्ट देखने को मिल रही हैं। भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने 406 रन के लक्ष्य का जिक्र करते हुए सोशल मीडिया पर ‘406? Cool’ लिखा था। अब वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने भी …
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कमल हासन के बाद इलॉन मस्क को कंगना का जवाब:एक्ट्रेस बोलीं- किसी भी अरबपति को किसी देश की नीतियां तय नहीं करनी चाहिए
अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनोट ने इलॉन मस्क और भारत में स्टारलिंक को लाइसेंस मिलने में हो रही देरी को लेकर चल रही बहस पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अभिनेता और राज्यसभा सांसद कमल हासन के बयान का समर्थन किया। कंगना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर हासन की टिप्पणी की तारीफ की। कंगना ने कमल हासन की पोस्ट पर लिखा, “ओह!! यह तो चुभ गया होगा, ।” इसके बाद उन्होंने इलॉन मस्क को संबोधित करते हुए लिखा, “किसी भी अरबपति को किसी देश की नीतियां तय नहीं करनी चाहिए, चाहे वह भारत हो या अमेरिका। बहुत अच्छी बात कही और इसे अच्छी तरह समझाया। तीखा, सटीक और व्यंग्यात्मक।” कमल हासन ने इलॉन मस्क को दिया था जवाब दरअसल, इलॉन मस्क ने भारत में स्टारलिंक को लाइसेंस मिलने में हो रही देरी पर सवाल उठाए थे। इसके जवाब में कमल हासन ने भारत के नीतिगत और नियामक अधिकारों का समर्थन किया था। हासन ने कहा था कि किसी भी देश की नीतियां वहां के लोगों को तय करनी चाहिए, न कि अरबपतियों या विदेशी हितों को। उन्होंने सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और दूरदराज के इलाकों में लोगों को सस्ता इंटरनेट उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी जोर दिया। कमल हासन ने यह भी कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का स्वागत करता है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने लिखा, “भारत एक लोकतंत्र है, कोई उपनिवेश नहीं। हम दुनिया का स्वागत करते हैं, लेकिन अपना भविष्य हम भारतीय तय करेंगे।” क्या है स्टारलिंक लाइसेंस विवाद? यह विवाद तब शुरू हुआ, जब इलॉन मस्क ने भारत में अपनी कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को लाइसेंस मिलने में हो रही देरी पर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी सवाल किया कि भारतीय कारोबारी हितों का लाइसेंस प्रक्रिया पर कितना प्रभाव है। स्टारलिंक लो-अर्थ ऑर्बिट यानी पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट सेवा देती है। इससे उन इलाकों में भी इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है, जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड नेटवर्क उपलब्ध नहीं है। हालांकि, भारत में सेवा शुरू करने के लिए कंपनी को जरूरी नियामक मंजूरियां हासिल करनी होंगी। साथ ही, दूरसंचार नियमों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी शर्तों को भी पूरा करना होगा। कमल हासन ने अपने बयान में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा के अवसर, सस्ते इंटरनेट और देश के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की बात कही थी।
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