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भाई-बहन की मर्यादा लांघ स्काउट ओपी ने पार की हदें? भड़कीं काम्या पंजाबी, बोलीं- 'यहां चल क्या रहा है?'

Love Gill Scoutop Relationship: बिग बॉस 20 में इन दिनों लड़ाई-झगड़ों और घरवालों के बीच बढ़ते तनाव के साथ एक नया विवाद भी चर्चा में है. शो में लव गिल और स्काउट ओपी की नजदीकियों को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. दोनों एक-दूसरे को भाई-बहन कहते हैं, लेकिन घर के अंदर उनके बीच दिखाई देने वाली फिजिकल नजदीकियों ने दर्शकों का ध्यान खींच लिया है. अब टीवी एक्ट्रेस और बिग बॉस की एक्स कंटेस्टेंट काम्या पंजाबी ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने दोनों के बिहेवियर पर सवाल उठाते हुए कहा कि रियलिटी शो में भी कुछ सीमाएं होनी चाहिए.

स्काउट और लव गिल की बॉन्डिंग

लव गिल और स्काउट ओपी के बीच की बॉन्डिंग को लेकर पहले भी चर्चा होती रही है, लेकिन हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो के बाद ये मामला और बढ़ गया. सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने दोनों के बिहेवियर पर सवाल उठाए, तो कुछ लोगों ने इसे उनकी आपसी मस्ती बताया. इस बीच स्काउट ओपी की गर्लफ्रेंड काशवी हीरानंदानी का बयान भी सामने आया है. उन्होंने बताया कि वो बाहर की परिस्थितियों को संभालने की कोशिश कर रही हैं और दिल से स्काउट के लिए अच्छा चाहती हैं. ऐसे में चलिए जनते हैं कि आखिर बिग बॉस 20 के घर में लव गिल और स्काउट ओपी को लेकर विवाद क्यों बढ़ रहा है और काम्या पंजाबी ने क्या कहा है.

काम्या पंजाबी ने उठाए सवाल

बिग बॉस के घर में कंटेस्टेंट्स के बीच दोस्ती, दुश्मनी और बदलते रिश्ते अक्सर दर्शकों का ध्यान खींचते हैं. कई बार घरवालों की छोटी-सी बात भी सोशल मीडिया पर बड़ा मुद्दा बन जाती है. इस बार चर्चा लव गिल और स्काउट ओपी की बॉन्डिंग को लेकर हो रही है. दोनों शो में एक-दूसरे के साथ काफी समय बिताते और कई मौकों पर जरूरत से ज्यादा करीब नजर आते हैं. उनके इसी व्यवहार पर अब काम्या पंजाबी ने सवाल उठाए हैं.

काम्या पंजाबी ने अपने X अकाउंट पर पोस्ट शेयर करते हुए दोनों के बीच दिखाई देने वाली नजदीकियों पर आपत्ति जताई. उन्होंने लिखा, "स्काउट और लव गिल के बीच 'भाई-बहन' वाली वाइब से लेकर फिजिकल नजदीकियों तक का बदलाव देखने को मिला है... एक रियलिटी शो में भी कुछ सीमाएं होनी चाहिए. आखिर यहां चल क्या रहा है? ये कैजुअल मजाक है या हद पार करना?" काम्या की इस प्रतिक्रिया के बाद लव और स्काउट का मामला फिर चर्चा में आ गया है. काम्या पंजाबी खुद भी बिग बॉस का हिस्सा रह चुकी हैं और शो के घर के माहौल को अच्छी तरह समझती हैं. वो अक्सर शो के कंटेस्टेंट्स के बिहेवियर और उनके गेम को लेकर अपनी राय रखती हैं. इस बार उन्होंने दोनों की बॉन्डिंग को लेकर सवाल उठाया है. 

क्यों चर्चा में आई लव और स्काउट की नजदीकियां?

दरअसल, बिग बॉस 20 के घर से लव गिल और स्काउट ओपी का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. इस क्लिप में दोनों एक-दूसरे के काफी करीब नजर आए. वीडियो को लेकर कुछ दर्शकों ने आपत्ति जताई और उनके भाई-बहन वाले रिश्ते पर सवाल उठाने शुरू कर दिए. वायरल क्लिप में स्काउट ओपी के पैरों से लव गिल को छूने के तरीके पर भी यूजर्स ने सवाल उठाए. इसके बाद सोशल मीडिया पर स्काउट को आलोचना का सामना करना पड़ा. 

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Sarvapitru Amavasya Katha: आज सर्वपितृ अमावस्या पर जरूर पढ़ें यह पौराणिक व्रत कथा

Sarvapitru Amavasya Katha: आज यानी 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या मनाई जा रही है. यह पितृपक्ष की अंतिम तिथि होती है. इस दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध तथा तर्पण किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि मालूम नहीं होती या किसी कारण पितृपक्ष में उनका तर्पण नहीं हो पाया और अमावस्या तिथि पर दिवंगत होने वाले लोगों का. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पितरों के निमित्त पूजा-पाठ, दान-पुण्य और तर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है. सर्वपितृ अमावस्या की पौराणिक कथा का संबंध अग्निषवात्त पितरों, उनकी मानस कन्या अक्षोदा और अमावसु से जुड़ी हुई है. चलिए पढ़ते हैं यह पौराणिक कहानी.

सर्वपितृ अमावस्या 2026 शुभ मुहूर्त (Sarvapitru Amavasya 2026 Shubh Muhurat)

द्रिक पंचांग के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या शनिवार, 10 अक्टूबर को मनाई जा रही है. बता दें कि अमावस्या की तिथि का प्रारंभ 9 अक्टूबर की रात 09:35 मिनट पर हुआ है और इसका समापन 10 अक्टूबर को रात 09:19 मिनट पर हुआ है. 

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सर्वपितृ अमावस्या कुतुप मुहूर्त

  • कुतुप मुहूर्त- सुबह 11:45 से लेकर दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक
  • रौहिण मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 31 मिनट से दोपहर 1 बजकर 18 मिनट तक
  • अपराह्नम काल- दोपहर  1:18 मिनट से दोपहर 3:37 बजे तक

सर्वपितृ अमावस्या की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूतजी कहते हैं कि ऋषियों, मरीचि के वंशज देवताओं के पितृगण जहां निवास करते हैं, वे लोक सोमपथ के नाम से विख्यात हैं. देवता लोग उन पितरों का ध्यान किया करते हैं. वे यज्ञापरायण पितृगण अग्रिष्वात्त नाम से प्रसिद्ध हैं. जहां वे रहते हैं, वहीं पर अच्छोदा नाम की एक नदी बहती है, जो उन्हीं पितरों की मानसी कन्या है. प्राचीन काल में पितरों ने वहीं एक अच्छोद नामक सरोवर का भी निर्माण किया था. पूर्वकाल में अच्छोदा ने एक सहस्त्र दिव्य वर्षों तक घोर तपस्या की. उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर पितृगणों ने उसे वर प्रदान करने के लिए उनके समीप पधारने का वरदान दिया था. वे सब के सब पितर दिव्य रूपधारी थे. उनके शरीर पर दिव्य सुगध का अनुलेप लगा हुआ था तथा गले में दिव्य पुष्प माला लटक रही थी. वे सभी नवयुवक, बल संपन्न एवं कामदेव के सदृश देखकर वर की अभिलाषा वाली सुंदरी अच्छोदा व्यग्र हो उठी और उनके साथ रहने की याचना करने लगी.

इस मानसिक कदाचार के कारण सुंदरी अच्छोदा योग से भ्रष्ट हो गई और उसके परिणामस्वरूप वह स्वर्गलोक से सीधे भूतलपर गिर पड़ी. उसने पहले कभी पृथ्वी को स्पर्श नहीं किया था. जिस तिथि को अमावसु ने अच्छोदा के साथ निवास करने की अनिच्छा प्रकट की, वह तिथि उनके धैर्य के प्रभाव से लोगों द्वारा अमावस्या नाम से प्रसिद्ध हो गई. इसी कारण यह तिथि पितरों को परम प्रिय है. इस तिथि में किया हुआ श्राद्ध कार्य अत्यधिक फलदायक होता है.

इस प्रकार तपस्या के नष्ट हो जाने से अच्छोदा लज्जित हो जाती है. वह अत्यंत दीन होकर नीचे मुख किए हुए देवपुर में पुनः अपनी प्रसिद्धि के लिए पितरों से प्रार्थना करने लगी. तब रोती हुई उस तपस्विनी को पितरों ने सांत्वना दी. वे महाभाग पितर भावी देव-कार्य का विचार कर प्रसन्नता एवं मंगल से परिपूर्ण वाणी द्वारा उससे इस प्रकार बोले-'वरवर्णिनि! बुद्धिमान लोग स्वर्गलोक में दिव्य शरीर द्वारा जो कुछ शुभाशुभ कर्म करते हैं, वे उसी शरीर से उन कर्मो के फल का उपभोग करते हैं; क्योंकि देवयोनि में कर्म तुरंत फलदायक हो जाते हैं. उसके विपरीत 'मानव-योनि में मृत्यु के पश्चात् कर्मफल भोगना 'पड़ता है. इसलिए पुत्रि! तुम मृत्यु के पश्चात् जन्मान्तर में अपनी तपस्या का पूर्ण फल प्राप्त करोगी.

मत्स्य योनि में लिया जन्म

अठ्ठाईसवें द्वापर में तुम मत्स्य-योनि में उत्पन्न हो पाओगी. पितृ कुल का व्यतिक्रमण करने के कारण तुम्हें उस कष्टदायक योनि की प्राप्ति होगी. पुनः उस योनि से मुक्त होकर तुम राजा वसु की कन्या बनोगी. कन्या होने पर तुम अपने दुर्लभ लोकों को अवश्य प्राप्त करोगी. उस कन्यावस्था में तुम्हें बदरी के वृक्षों से व्याप्त द्वीप में महर्षि पराशर से एक ऐसे पुत्र की प्राप्ति होगी, जो बादरायण नाम से प्रसिद्ध होगा और कभी अपने कर्म से च्युत न होने वाले नारायण का अवतार होगा.

महाभारत से रहा संबंध

तुम्हारा वह पुत्र एक ही वेद को अनेक (चार) भागों में विभाजित करेगा. तदनन्तर समुद्र के अंश से उत्पन्न हुए पुरुवंशी राजा शांतनु के संयोग से तुम्हें विचित्रवीर्य एवं महाराज चित्रांगद नामक दो पुत्र प्राप्त होंगे. बुद्धिमान् विचित्रवीर्य के दो क्षेत्रज धृतराष्ट्र और पाण्डु-पुत्रों को उत्पन्न कराकर तुम प्रौष्ठपदी (भाद्रपद की पूर्णिमा और पौष कृष्ण की अष्टमी इस प्रकार मनुष्य-लोक में सत्यवती और पितृलोक में आयु एवं आरोग्य प्रदान करने वाली तथा नित्य सम्पूर्ण मनोवांछित फलों की प्रदात्री अष्टका नाम से तुम्हारी ख्याति होगी. कालान्तर में तुम मनुष्य लोक में नदियों में श्रेष्ठ पुण्यसलिला अच्छोदा नाम से नदी रूपमें जन्म धारण करोगी.' ऐसा कहकर पितरों का वह समुदाय वहीं अन्तर्हित हो गया तथा अच्छोदा को अपने उन समस्त कर्मफलों की प्राप्ति हुई, जो पहले कहे जा चुके हैं.

श्री पितृ जी की आरती (Shree Pitru Dev Ji ki Aarti Lyrics in Hindi)

जय जय पितरजी महाराज, मैं शरण पड़यो हूं थारी।
शरण पड़यो हूं थारी बाबा, शरण पड़यो हूं थारी॥

आप ही रक्षक आप ही दाता, आप ही खेवनहारे।
मैं मूरख हूं कछु नहि जाणू, आप ही हो रखवारे॥

जय जय पितरजी महाराज।

आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी, करने मेरी रखवारी।
हम सब जन हैं शरण आपकी, है ये अरज गुजारी॥

जय जय पितरजी महाराज।

देश और परदेश सब जगह, आप ही करो सहाई।
काम पड़े पर नाम आपको, लगे बहुत सुखदाई॥

जय जय पितरजी महाराज।

भक्त सभी हैं शरण आपकी, अपने सहित परिवार।
रक्षा करो आप ही सबकी, रटूं मैं बारम्बार॥

जय जय पितरजी महाराज।

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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