परिवृत्त बद्ध पार्श्वकोणासन क्या है? जानिए फायदे और सावधानियां
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय योग परंपरा में शारीरिक लचीलापन, मानसिक एकाग्रता को एक साथ साधने वाले आसनों में परिवृत्त बद्ध पार्श्वकोणासन का विशेष स्थान है। यह आसन मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी के ट्विस्ट और हाथों की बंध स्थिति का एक अनूठा संगम है। यह आसन पार्श्वकोणासन का ही एक अधिक चुनौतीपूर्ण और लाभकारी रूप है।
संस्कृत में परिवृत्त का अर्थ है घूमा हुआ, बद्ध का अर्थ है बंधा हुआ और पार्श्वकोण का अर्थ है बगल का कोण। इस आसन में शरीर को एक तरफ घुमाते हुए गहरा बंध लगाया जाता है, जो शरीर को एक नया आकार और ऊर्जा देता है। यह न सिर्फ शरीर के निचले हिस्से (पैरों और जांघों) को मजबूती प्रदान करता है, बल्कि पाचन तंत्र की गहरी मालिश कर शरीर को अंदर से डिटॉक्सिफाई (विषमुक्त) करने में भी सहायक होता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन शरीर में संतुलन, मानसिक दृढ़ता और आंतरिक अंगों की शुद्धि के लिए बेहद प्रभावी माना गया है। यह सिर्फ एक स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज नहीं है बल्कि यह पाचन तंत्र को सक्रिय करने, रीढ़ की हड्डी में लचीलापन लाने और शरीर के भीतर जमा टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का एक शक्तिशाली अभ्यास है। यह आसन पार्श्वकोणासन का ही एक अधिक चुनौतीपूर्ण और लाभकारी रूप है।
यह आसन पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाता है। इसे करने के दौरान पेट के अंगों पर गहरा दबाव पड़ता है, जिससे मेटाबॉलिज्म तेज होता है, कब्ज व ब्लोटिंग दूर होती है और शरीर से टॉक्सिन्स आसानी से बाहर निकलते हैं। यह रीढ़ की हड्डी के रोटेशन को बढ़ाता है, जिससे पीठ और कमर की जकड़न दूर होती है। यह क्वाड्रिसेप्स, हैमस्ट्रिंग, घुटनों और टखनों को मजबूत करता है।
हाथों के बंधने और छाती के खुलने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बेहतर होती है और गहरी सांस लेने में मदद मिलती है। यह आसन शरीर में मणिपुर चक्र को सक्रिय करता है, जिससे व्यक्ति में आत्मविश्वास, इच्छाशक्ति और मानसिक एकाग्रता का विकास होता है।
यदि किसी व्यक्ति के घुटनों, कंधों, रीढ़ की हड्डी या गर्दन में कोई हालिया चोट या गंभीर दर्द हो, तो इस आसन को बिल्कुल न करें।
--आईएएनएस
एनएस/पीएम
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दिल्ली में CJP प्रोटेस्ट के चलते बदला स्कूल-कॉलेजों का शेड्यूल, कहीं ऑनलाइन पढ़ाई तो कहीं टले एग्जाम
जंतर-मंतर पर शनिवार को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली के कई स्कूलों और कॉलेजों ने अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों में बदलाव किया है. विद्यार्थियों की सुरक्षा और राजधानी के नई दिल्ली इलाके में संभावित यातायात व मेट्रो संबंधी परेशानियों को ध्यान में रखते हुए कुछ स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई कराने का फैसला लिया है. वहीं, कई शिक्षण संस्थानों ने परीक्षाएं स्थगित करने के साथ खेल गतिविधियों और अन्य कार्यक्रमों को भी टाल दिया है.
सरदार पटेल विद्यालय में ऑनलाइन होंगी कक्षाएं
नई दिल्ली स्थित सरदार पटेल विद्यालय ने शनिवार को छठी से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई ऑनलाइन कराने का निर्णय लिया है. स्कूल प्रबंधन के मुताबिक, इलाके में बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. इसके अलावा, शुक्रवार को विद्यार्थियों के स्कूल परिसर में रुकने की सुविधा भी बंद कर दी गई. शनिवार को आयोजित होने वाला एक्टिविटी वीक का उद्घाटन समारोह भी स्थगित कर दिया गया है.
पीटीएम स्थगित, खेल अभ्यास और अतिरिक्त कक्षाएं भी रद्द
रघुबीर सिंह जूनियर मॉडर्न स्कूल ने शनिवार को प्रस्तावित अभिभावक-शिक्षक बैठक (पीटीएम) को आगे बढ़ा दिया है. बैठक की नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी. इसी तरह, कस्तूरबा गांधी मार्ग स्थित भारतीय विद्या भवन के मेहता विद्यालय ने भी एहतियाती कदम उठाए हैं. स्कूल में नौवीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए शनिवार को होने वाला खेल अभ्यास और अतिरिक्त कक्षाएं रद कर दी गई हैं.
कॉलेजों ने भी बदला परीक्षाओं का कार्यक्रम
प्रदर्शन को देखते हुए कॉलेजों ने भी अपने परीक्षा कार्यक्रम में बदलाव किया है. पश्चिम विहार स्थित भारती विद्यापीठ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ने शनिवार को होने वाली मिड-टर्म परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं. अब ये परीक्षाएं सोमवार को आयोजित की जाएंगी। हालांकि, परीक्षा का समय पहले की तरह ही रहेगा. वहीं, रोहिणी स्थित महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने शनिवार की परीक्षाएं टालकर 12 अक्टूबर को कराने का फैसला लिया है.
45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद रखने का अनुरोध
जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) से 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद रखने का अनुरोध किया है. यह व्यवस्था शुक्रवार रात नौ बजे से अगले आदेश तक लागू रखने के लिए कही गई है. मेट्रो सेवाओं में संभावित व्यवधान, बैरिकेडिंग और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए स्कूलों और कॉलेजों ने अपने कार्यक्रमों में बदलाव किया है. इन फैसलों का उद्देश्य विद्यार्थियों को आने-जाने में होने वाली संभावित परेशानी से बचाना और शैक्षणिक गतिविधियों को व्यवस्थित रखना है.
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