Muzaffarnagar में 11वीं की छात्रा से छेड़छाड़, Principal मोहित सिंघल पर POCSO एक्ट
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक स्कूल के प्रधानाचार्य को 11वीं कक्षा की एक छात्रा का कथित रूप से यौन उत्पीड़न करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार यह घटना शुक्रवार शाम नयी मंडी थाना क्षेत्र की है और आरोपी की पहचान मोहित सिंघल के रूप में हुई है।
सदर के पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) सुनील कुमार ने बताया कि पुलिस ने प्रधानाचार्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार छात्रा की मां द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, प्रधानाचार्य ने उसे अपने कार्यालय में बुलाया था, जहां उसका कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया गया। इसके बाद लड़की ने घटना के बारे में अपने परिजनों को बताया।
पुलिस ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
Muthanga case में हिरासत में प्रताड़ित शिक्षक को 12.5 लाख रुपये मुआवजा देगी Kerala सरकार
केरलम सरकार ने वायनाड में 2003 में आदिवासियों के भूमि आंदोलन से जुड़े मुथंगा मामले में पुलिस हिरासत में कथित तौर पर प्रताड़ित किए गए एक शिक्षक को 12.5 लाख रुपये का मुआवजा देने की मंजूरी दी है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। गृह विभाग ने आठ अक्टूबर को जारी आदेश में राज्य के पुलिस प्रमुख को निर्देश दिया कि वह के. के. सुरेंद्रन को मुआवजे की राशि दें।
सुरेंद्रन घटना के समय सुल्तान बथेरी स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डीआईईटी) में वरिष्ठ व्याख्याता थे। आदेश में यह भी कहा गया कि उनकी अवैध गिरफ्तारी और हिरासत में प्रताड़ना के लिए जिम्मेदार ठहराए गए दो पुलिस अधिकारियों की निजी संपत्तियों से मुआवजे की राशि वसूल की जाए। मुथंगा आंदोलन 2003 में आदिवासी गोत्र महासभा के नेतृत्व में चलाया गया भूमि अधिकार आंदोलन था।
इसमें भूमिहीन आदिवासी परिवारों को जमीन देने के तत्कालीन संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार के वादे को पूरा करने की मांग की गई थी। आंदोलन के तहत सैकड़ों आदिवासी परिवारों ने मुथंगा वन्यजीव अभयारण्य में प्रवेश किया और वन भूमि पर अस्थायी झोपड़ियां बनाकर वहां कब्जा कर लिया। प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए 19 फरवरी, 2003 को पुलिस और वन अधिकारियों ने अभियान चलाया, जिसके दौरान प्रदर्शन हिंसक हो गया।
अधिकारियों ने बताया कि पुलिस पर आरोप था कि उसने 22 फरवरी, 2003 को सुरेंद्रन को उनके स्टाफ रूम से जबरन उठाया और सुल्तान बथेरी पुलिस थाने में उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की। अधिकारियों ने बताया कि मुथंगा आदिवासी आंदोलन के संबंध में दर्ज तीन आपराधिक मामलों में सुरेंद्रन को आरोपी बनाया गया था, लेकिन बाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने उन्हें क्लीन चिट दे दी और तीनों मामलों में आरोपियों की सूची से उनका नाम हटा दिया। इसके बाद सुरेंद्रन ने अवैध गिरफ्तारी, हिरासत में प्रताड़ना, प्रतिष्ठा को नुकसान और अन्य क्षति के लिए 15,00,647 रुपये का मुआवजा मांगते हुए मुकदमा दायर किया।
सुल्तान बथेरी की अधीनस्थ अदालत ने शुरुआत में उन्हें पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था। साथ ही, मुकदमा दायर करने की तारीख से लेकर मुआवजे की पूरी राशि मिलने तक तीन प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया था। अधिकारियों के अनुसार, अदालत ने सुल्तान बथेरी के तत्कालीन उपनिरीक्षक पी. विश्वंभरन और तत्कालीन क्षेत्र निरीक्षक वी. देवराज को सुरेंद्रन की अवैध गिरफ्तारी, हिरासत में प्रताड़ना और उन्हें आईं चोटों के लिए जिम्मेदार ठहराया था।
राज्य सरकार और दोनों पुलिस अधिकारियों ने अदालत के इस फैसले को चुनौती दी थी। हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि कलपेट्टा की द्वितीय अतिरिक्त जिला अदालत ने अपीलें खारिज करते हुए मुआवजे की राशि बढ़ाकर 12.5 लाख रुपये कर दी। अदालत ने मूल मुकदमा दायर करने की तारीख से लेकर मुआवजे की पूरी राशि मिलने तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया।
अपीलीय अदालत ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि संबंधित कानून के तहत दोनों पुलिस अधिकारियों की निजी संपत्तियों से संयुक्त रूप से और व्यक्तिगत रूप से मुआवजे की राशि वसूल की जाए।
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