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Muthanga case में हिरासत में प्रताड़ित शिक्षक को 12.5 लाख रुपये मुआवजा देगी Kerala सरकार

केरलम सरकार ने वायनाड में 2003 में आदिवासियों के भूमि आंदोलन से जुड़े मुथंगा मामले में पुलिस हिरासत में कथित तौर पर प्रताड़ित किए गए एक शिक्षक को 12.5 लाख रुपये का मुआवजा देने की मंजूरी दी है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। गृह विभाग ने आठ अक्टूबर को जारी आदेश में राज्य के पुलिस प्रमुख को निर्देश दिया कि वह के. के. सुरेंद्रन को मुआवजे की राशि दें।

सुरेंद्रन घटना के समय सुल्तान बथेरी स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डीआईईटी) में वरिष्ठ व्याख्याता थे। आदेश में यह भी कहा गया कि उनकी अवैध गिरफ्तारी और हिरासत में प्रताड़ना के लिए जिम्मेदार ठहराए गए दो पुलिस अधिकारियों की निजी संपत्तियों से मुआवजे की राशि वसूल की जाए। मुथंगा आंदोलन 2003 में आदिवासी गोत्र महासभा के नेतृत्व में चलाया गया भूमि अधिकार आंदोलन था।

इसमें भूमिहीन आदिवासी परिवारों को जमीन देने के तत्कालीन संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार के वादे को पूरा करने की मांग की गई थी। आंदोलन के तहत सैकड़ों आदिवासी परिवारों ने मुथंगा वन्यजीव अभयारण्य में प्रवेश किया और वन भूमि पर अस्थायी झोपड़ियां बनाकर वहां कब्जा कर लिया। प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए 19 फरवरी, 2003 को पुलिस और वन अधिकारियों ने अभियान चलाया, जिसके दौरान प्रदर्शन हिंसक हो गया।

अधिकारियों ने बताया कि पुलिस पर आरोप था कि उसने 22 फरवरी, 2003 को सुरेंद्रन को उनके स्टाफ रूम से जबरन उठाया और सुल्तान बथेरी पुलिस थाने में उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की। अधिकारियों ने बताया कि मुथंगा आदिवासी आंदोलन के संबंध में दर्ज तीन आपराधिक मामलों में सुरेंद्रन को आरोपी बनाया गया था, लेकिन बाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने उन्हें क्लीन चिट दे दी और तीनों मामलों में आरोपियों की सूची से उनका नाम हटा दिया। इसके बाद सुरेंद्रन ने अवैध गिरफ्तारी, हिरासत में प्रताड़ना, प्रतिष्ठा को नुकसान और अन्य क्षति के लिए 15,00,647 रुपये का मुआवजा मांगते हुए मुकदमा दायर किया।

सुल्तान बथेरी की अधीनस्थ अदालत ने शुरुआत में उन्हें पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था। साथ ही, मुकदमा दायर करने की तारीख से लेकर मुआवजे की पूरी राशि मिलने तक तीन प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया था। अधिकारियों के अनुसार, अदालत ने सुल्तान बथेरी के तत्कालीन उपनिरीक्षक पी. विश्वंभरन और तत्कालीन क्षेत्र निरीक्षक वी. देवराज को सुरेंद्रन की अवैध गिरफ्तारी, हिरासत में प्रताड़ना और उन्हें आईं चोटों के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

राज्य सरकार और दोनों पुलिस अधिकारियों ने अदालत के इस फैसले को चुनौती दी थी। हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि कलपेट्टा की द्वितीय अतिरिक्त जिला अदालत ने अपीलें खारिज करते हुए मुआवजे की राशि बढ़ाकर 12.5 लाख रुपये कर दी। अदालत ने मूल मुकदमा दायर करने की तारीख से लेकर मुआवजे की पूरी राशि मिलने तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया।

अपीलीय अदालत ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि संबंधित कानून के तहत दोनों पुलिस अधिकारियों की निजी संपत्तियों से संयुक्त रूप से और व्यक्तिगत रूप से मुआवजे की राशि वसूल की जाए।

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Haridwar Severe Hailstorm | हरिद्वार से देहरादून तक बिगड़े हालात, मूसलाधार बारिश और भीषण ओलावृष्टि से हाहाकार, मौसम विभाग का 'येलो अलर्ट' जारी

उत्तराखंड के धर्मनगरी हरिद्वार और उसके आसपास के इलाकों में शुक्रवार (9 अक्टूबर) को मौसम ने अचानक ऐसा भयंकर रूप दिखाया कि आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। मूसलाधार बारिश के बाद हुई भीषण ओलावृष्टि ने शहर में भारी तबाही मचाई है। मुट्ठी के आकार के ओले गिरने से न केवल किसानों की फसलें और सब्जियां तबाह हो गईं, बल्कि सड़कों पर खड़ी गाड़ियों के शीशे टूट गए और कई घरों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तुरंत हस्तक्षेप किया, वहीं राजनीतिक दलों ने सरकार से प्रभावितों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।

बीजेपी नेता ने प्रभावित किसानों से मुलाकात की और उनकी फसलों को हुए नुकसान के बारे में जानकारी ली। उन्होंने उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया और अधिकारियों को फसलों को हुए नुकसान का तुरंत विस्तृत सर्वे करने, नुकसान का आकलन करने और किसानों के लिए राहत उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

धामी ने कहा, "संबंधित अधिकारियों को फसलों को हुए नुकसान का तुरंत विस्तृत आकलन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि नियमों के अनुसार प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए ज़रूरी कार्रवाई की जा सके।"

दिन की शुरुआत हल्की बारिश के साथ हुई, लेकिन मौसम तेज़ी से खराब हो गया और मुट्ठी के आकार के ओले गिरने लगे, जिससे लोगों को चोट से बचने के लिए शरण लेनी पड़ी। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में लोगों को खराब मौसम के बाद अपनी क्षतिग्रस्त गाड़ियों का जायज़ा लेते हुए देखा गया।

एक यूज़र ने कहा, "इन ओलों का आकार चौंकाने वाला है। मौसम कुछ ही मिनटों में खतरनाक हो सकता है।" वहीं दूसरे ने कहा: "आज रुड़की और हरिद्वार के बीच अब तक की सबसे भयानक ओलावृष्टि देखी गई। यहाँ आमतौर पर ऐसी ओलावृष्टि नहीं होती है।"

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ओलावृष्टि ने हरिद्वार सहित राज्य के कई हिस्सों को प्रभावित किया है, जिससे फसलों और सब्जियों के साथ-साथ गाड़ियों और घरों की खिड़कियों के शीशे भी टूट गए। उन्होंने राज्य सरकार से नुकसान का सर्वे करने और भारी नुकसान झेलने वालों को उचित मुआवज़ा देने की अपील की।

रावत ने कहा, "आज हरिद्वार और राज्य के कई अन्य हिस्सों में ज़बरदस्त ओलावृष्टि हुई है। आम लोग जलवायु परिवर्तन के बुरे असर का खामियाजा भुगत रहे हैं।" "लोगों की फ़सलें और सब्ज़ियाँ बर्बाद हो गई हैं, कारों और घरों की खिड़कियाँ टूट गई हैं, और लोगों को कई तरह के नुकसान हुए हैं। सरकार को ठीक से सर्वे करना चाहिए और जिन लोगों को ज़्यादा नुकसान हुआ है, उन्हें उचित मुआवज़ा और मदद देनी चाहिए।"

मौसम विभाग ने देहरादून, नैनीताल और पिथौरागढ़ ज़िलों में कुछ जगहों पर भारी बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। तापमान गिर गया है, जिससे सुबह और शाम काफ़ी ठंडी हो गई हैं। मौसम का यह हाल अगले दो दिनों तक बने रहने की संभावना है।

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