बीएमसी चुनावों में महायुति गठबंधन के शानदार प्रदर्शन के बाद भाजपा नेता रितु तावड़े ने महापौर पद के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। तावड़े घाटकोपर के वार्ड 132 से पार्षद हैं और इस सीट से दोबारा चुनी गई हैं। शिवसेना (शिंदे गुट) की नेता संजय शंकर घाड़ी गठबंधन की ओर से उप महापौर पद की उम्मीदवार हैं। उन्होंने भी अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। परिणाम 11 फरवरी को घोषित किए जाएंगे, लेकिन आंकड़ों से दोनों उम्मीदवारों की आरामदायक जीत का संकेत मिलता है।
पार्टी में ऋतु तावड़े नागरिकों के साथ प्रभावी संवाद और स्थानीय नागरिक मुद्दों को सुलझाने की क्षमता के लिए जानी जाती हैं। मराठा समुदाय से होने के बावजूद, ऋतु तावड़े ने गुजराती मतदाताओं के बहुल वार्ड से जीत हासिल की है। भाजपा नेताओं के अनुसार, वह जमीनी स्तर पर सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं और जनता की शिकायतों का समाधान करने में पूरी तरह सक्षम हैं। ऋतु तावड़े लगातार तीसरी बार घाटकोपर से पार्षद चुनी गई हैं। इससे पहले वह बृहन्मुंबई नगर निगम की शिक्षा समिति की अध्यक्ष रह चुकी हैं और वर्तमान में महाराष्ट्र प्रदेश महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष हैं।
ऋतु तावड़े ने कांग्रेस छोड़ने के बाद 2012 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुईं। महाराष्ट्र भर में नगर निगम चुनाव, जिनमें बहुचर्चित बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) भी शामिल है, 15 जनवरी को हुए और परिणाम अगले दिन घोषित किए गए। इन चुनावों के नतीजों ने मुंबई नगर निगम में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन को मामूली लेकिन स्पष्ट बढ़त दिला दी है। भाजपा-शिवसेना गठबंधन 227 सदस्यीय बीएमसी में सबसे बड़ा गठबंधन बनकर उभरा, जिसने 118 सीटें जीतीं। इससे गठबंधन को बहुमत से चार सीटें अधिक मिल गईं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), जो महायुति गठबंधन का हिस्सा है लेकिन स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रही थी, ने तीन सीटें हासिल कीं। इन सीटों को भी जोड़ दें तो बीएमसी में महायुति की कुल संख्या 121 हो जाती है।
विपक्षी दलों में, शिवसेना ने 65 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को 24 सीटें ही मिलीं। राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) को छह सीटें मिलीं, और एनसीपी (शरद पवार गुट) को सिर्फ एक सीट से संतोष करना पड़ा। गठबंधन की बात करें तो, शिवसेना और एमएनएस ने चुनाव में गठबंधन किया था। वहीं, कांग्रेस और एनसीपी (एसपी) दोनों ने अकेले चुनाव लड़ने का विकल्प चुना।
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अमेरिका और भारत ने आज अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनने की घोषणा की। इसके तहत अमेरिका, भारत पर शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। अमेरिका ने साथ ही कहा है कि भारत ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रूस से कच्चे तेल का आयात बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसके बाद भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका द्वारा लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क को सात फरवरी से हटा लिया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय 'व्हाइट हाउस' की तरफ से जारी एक कार्यकारी आदेश के मुताबिक, भारत ने अगले 10 वर्षों के लिए अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग विस्तार के एक ढांचे पर भी सहमति जताई है।
साथ ही दोनों देशों के संयुक्त बयान में कहा गया है कि भारत, अमेरिका के सभी औद्योगिक सामानों और सूखे अनाज, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट तथा अन्य उत्पादों सहित कई प्रकार के अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों पर शुल्क समाप्त या कम करेगा। दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान में कहा, ‘‘अमेरिका और भारत को पारस्परिक और द्विपक्षीय रूप से लाभकारी व्यापार से संबंधित एक अंतरिम समझौते के लिए रूपरेखा तैयार करने की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है।’’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी कहा है कि अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौता किसानों और उद्यमियों के लिए नए अवसर खोलकर ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूत करेगा तथा महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार पैदा करेगा। प्रधानमंत्री ने भारत और अमेरिका के बीच मजबूत संबंधों के प्रति अपनी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को धन्यवाद भी दिया।
शुल्क में कमी से भारत के कपड़ा और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबड़, जैविक रसायन, घरेलू सजावट, हस्तशिल्प उत्पाद और कुछ मशीनरी के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धी क्षमता और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को और मजबूती मिलेगी। संयुक्त बयान में यह भी कहा गया है कि भारत की अगले पांच साल में अमेरिका से 500 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य का सामान खरीदने की योजना है। इसमें ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान के कल-पुर्जे, बहुमूल्य धातु, तकनीकी उत्पाद और कोकिंग कोयला शामिल हैं।
हम आपको बता दें कि भारत ने व्यापार समझौते के तहत मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पॉल्ट्री, दूध, पनीर, एथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियों और मांस जैसे संवेदनशील कृषि एवं डेयरी उत्पादों के मामले में अमेरिका को कोई शुल्क रियायत नहीं दी है और इन क्षेत्रों को पूरी तरह संरक्षण दिया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, "यह समझौता किसानों के हितों की रक्षा करने और ग्रामीण आजीविका को बनाए रखने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके तहत मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पॉल्ट्री, दूध, पनीर, एथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस सहित संवेदनशील कृषि एवं डेयरी उत्पादों को पूरी तरह से संरक्षित किया गया है।" इन वस्तुओं का संबंध भारत के छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका से जुड़ा होने के कारण इन्हें संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है।
दोनों देशों के संयुक्त बयान के मुताबिक, भारत अमेरिका के कई खाद्य एवं कृषि उत्पादों पर शुल्क समाप्त करेगा या कम कर देगा। इनमें सूखे अनाज, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब एवं स्पिरिट तथा अन्य उत्पाद शामिल हैं। यह कदम परस्पर प्रतिबद्धताओं का हिस्सा है, जिसका मकसद व्यापार तनाव घटाना और दोनों ओर बाजार पहुंच बढ़ाना है। साझा बयान में दोनों देशों ने कहा कि वे परस्पर लाभकारी व्यापार के लिए रूपरेखा पर सहमत हुए हैं।
व्यापार समझौते की रूपरेखा के तहत जो अमेरिकी उत्पाद भारत में सस्ते होंगे यदि उनका जिक्र करें तो आपको बता दें कि इसमें सुखाए गए आसव अवशेष अनाज, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, पेड़ वाले मेवे, ताजे फल, प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल और शराब शामिल हैं।
जहां तक इस व्यापार समझौते से भारत के किसानों को होने वाले फायदे की बात है तो आपको बता दें कि जहां एक ओर कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए दरवाजा खुला है, वहीं भारत ने अपने कृषि बाजार के चारों ओर मजबूत घेरा बना दिया है। सरकार ने साफ कहा है कि संवेदनशील कृषि और दुग्ध उत्पादों पर कोई शुल्क रियायत नहीं दी जाएगी। पूरी तरह सुरक्षित रखे गए प्रमुख उत्पादों में मुख्य अनाज और मोटे अनाज, राजगीरा, रागी, गेहूं, कोदो, सांवा, मक्का, चावल, जौ, ज्वार, कुट्टू, बाजरा, कंगनी, जई, बिना पालिश अनाज, मैदा, विभिन्न प्रकार का आटा, दुग्ध उत्पाद, दूध, दूध पाउडर, केसिन, पनीर के विभिन्न रूप, क्रीम, मक्खन तेल, मक्खन और घी, दही, मठा, मट्ठा उत्पाद, सब्जियां और दालें, जमी हुई सब्जियां, आलू, मटर, बीन्स, अन्य दालें और सब्जियां, मिली जुली जमी सब्जियां, अस्थायी रूप से सुरक्षित सब्जियां, खीरा, खीरा छोटा प्रकार का, मशरूम, मिक्स सब्जियां शामिल हैं। इसके अलावा मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर, इथेनाल ईंधन, तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस जैसे उत्पादों पर भी कोई रियायत नहीं दी गई है।
इसका किसानों को सीधा लाभ है। देश का दुग्ध और अनाज क्षेत्र करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों पर टिका है। यदि इन पर सस्ते आयात का दबाव आता तो घरेलू दाम टूटते, खेती घाटे का सौदा बनती और ग्रामीण आय पर चोट पड़ती। सुरक्षा घेरा बनाकर सरकार ने संदेश दिया है कि गांव की रीढ़ पर सौदा नहीं होगा।
वैसे कुल मिलाकर देखा जाये तो यह समझौता एक तेज धार वाली तलवार है। एक ओर सरकार बाजार खोलकर उपभोक्ता को सस्ता सामान देना चाहती है, दूसरी ओर किसान को बचाए रखना भी मजबूरी है। अब तक जो रूपरेखा दिखती है, उसमें सरकार ने संतुलन साधने की कोशिश की है। परन्तु सवाल यह है कि क्या सीमित कृषि खुलापन धीरे धीरे बड़े दरवाजे में बदलेगा? मोदी सरकार को साफ और कड़ा रुख बनाए रखना होगा। किसान केवल वोट बैंक नहीं, देश की खाद्य सुरक्षा की नींव है। अगर गांव कमजोर हुआ तो शहर की थाली भी डगमगाएगी। साथ ही यह भी सच है कि दुनिया से कटा बाजार देश को महंगा और पिछड़ा भी बना सकता है।
बहरहाल, व्यापार समझौता तभी सफल कहलाएगा जब उपभोक्ता को राहत मिले, निर्यातक को बाजार मिले और किसान को नुकसान न हो। सरकार ने पहली चाल चल दी है। अब देश देखेगा कि यह दूरदर्शिता है या जोखिम भरा दांव।
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