Responsive Scrollable Menu

मर्दानी 3 में विलेन बनीं अम्मा बोलीं:रानी मुखर्जी नहीं, शिवानी रॉय सामने थीं, एक्ट्रेस की एक बात दिल में रह गई

फिल्म मर्दानी 3 में ‘अम्मा’ के किरदार ने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया है। इस किरदार को निभाने वाली अभिनेत्री मल्लिका प्रसाद सिन्हा ने अपनी दमदार अदाकारी से एक ऐसी विलेन रची, जिससे नफरत भी होती है और सोचने पर मजबूर भी होना पड़ता है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में मल्लिका ने अपने किरदार की तैयारी, मानसिक प्रक्रिया, रानी मुखर्जी के साथ अनुभव और अपने अभिनय सफर पर खुलकर बात की। मर्दानी 3 में आपका किरदार बेहद डार्क और लार्जर दैन लाइफ है। जब पहली बार स्क्रिप्ट आपके पास आई, तो क्या प्रतिक्रिया थी? असल में जब कोई एक्टर स्क्रिप्ट पढ़ता है, तो सबसे पहले वह उस किरदार का ग्राफ देखता है। उसकी अंदरूनी दुनिया, उसका आर्क और उसकी सोच। मुझे हमेशा ऐसे किरदार आकर्षित करते हैं जो बिल्कुल सही या बिल्कुल गलत नहीं होते, बल्कि राइट और रॉन्ग की सीमा पर खड़े होते हैं। ‘अम्मा’ एक मेगा विलेन है, लेकिन उसके अपने विश्वास हैं, उसकी अपनी स्पिरिट है। ऐसे कॉम्प्लेक्स किरदार को निभाना एक बेहद रोमांचक प्रक्रिया होती है। मल्लिका से ‘अम्मा’ बनने के इस ट्रांजिशन में कितना वक्त लगा और क्या चुनौतियां रहीं? यह प्रक्रिया कभी भी अकेले नहीं होती। यह हमेशा कोलैबोरेशन में होती है डायरेक्टर, कॉस्ट्यूम, हेयर, मेकअप टीम सब मिलकर किरदार को आकार देते हैं। हमने बहुत समय लुक टेस्ट में लगाया ज्वेलरी से लेकर हाथ पैर तक हर चीज पर बारीकी से काम हुआ। यह सब बहुत प्रेम और संवेदनशीलता के साथ बनाया गया किरदार है। मेरा काम किरदार का बिहेवियर और उसकी ह्यूमैनिटी लाना है, लेकिन जो कुछ भी आप स्क्रीन पर देखते हैं, वह सबकी मेहनत का नतीजा है। दर्शकों को आपके किरदार से नफरत हो गई है। जब आपने खुद को बड़े पर्दे पर देखा, तो कैसा महसूस हुआ? एक्टर के तौर पर हम किसी किरदार से नफरत नहीं कर पाते, क्योंकि हमें उसकी ह्यूमैनिटी दिख जाती है। हां, काम पूरा होने के बाद हम थोड़ा अलग हो जाते हैं और दर्शकों की प्रतिक्रिया देखने में मजा आता है। तब यह जानना दिलचस्प होता है कि लोगों ने उसे कैसे लिया। कुछ सीन इतने डरावने हैं कि कोई उस माहौल में रहना नहीं चाहेगा। क्या उस किरदार से बाहर निकलना मुश्किल था? नहीं, ऐसा होना भी नहीं चाहिए। यह हमारा प्रोफेशन है। हमारा काम ऐसा माहौल रचना है कि दर्शक उसे महसूस करें, लेकिन अगर हम खुद उसमें डूब जाएं तो वह खतरनाक हो सकता है। दुनिया में वैसे ही बहुत दर्द और तनाव है युद्ध, भूख, बच्चों की पीड़ा। वही असली तनाव की वजह है। किरदार को निभाना एक क्राफ्ट है, और उसी तरह उससे बाहर निकलना भी। मर्दानी फ्रेंचाइजी के विलेन में आपका फेवरेट कौन है पहले पार्ट के ताहिर या दूसरे के विशाल जेठवा? यह बहुत अनफेयर सवाल है। दोनों ही शानदार अभिनेता हैं। हर एक्टर अपने किरदार में अपनी यूनिकनेस लाता है। मैं खुद एक्टर्स को पढ़ाती हूं और उनसे बहुत मोहब्बत करती हूं। रानी मुखर्जी के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? हमारे आमने-सामने के सीन बहुत कम थे, इसलिए ज्यादातर काम अलग-अलग ही हुआ। मेरे जहन में हमेशा शिवानी रॉय का किरदार ही सामने रहता था, इसलिए ऑन-स्क्रीन कई रिएक्शन मेरे लिए भी सरप्राइज रहे, जो फिल्म में बेहद खूबसूरती से काम कर गए। शूट की शुरुआत में रानी जी ने मुझे बहुत वॉर्म वेलकम किया और मुस्कुराते हुए कहा, ‘एवरीबडी लव्स यू ऑलरेडी।’ इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि ‘हमारी आंखों का रंग भी एक जैसा है।’ वह पल मेरे लिए वाकई बहुत खास था। क्या आपको डर है कि कहीं यह विलेन वाला रोल आपको टाइपकास्ट न कर दे? नहीं। एक्टर के पास हमेशा चॉइस होती है। मैं अलग-अलग भाषाओं में काम करती हूं और विविध किरदार निभा चुकी हूं। हां, यह खुशी जरूर है कि इस किरदार को इतना ऑर्गेनिक एक्सेप्टेंस और प्यार मिला है। अपने अब तक के सफर को कैसे देखती हैं? मजा आया है… और अभी भी मजा आ रहा है। मेरा परिवार हमेशा बहुत सपोर्टिव रहा है। मेरे पिता ने मुझे एनएसडी के फॉर्म के बारे में बताया, मेरे जीजाजी इंटरव्यू के दिनों में बाहर इंतजार करते रहे। यह जर्नी वाकई बेहद खूबसूरत रही है और मैं कुछ भी बदलना नहीं चाहूंगी। आगे आने वाले समय और अपने भविष्य के सपनों को आप किस तरह देखती हैं? सपने तो रोज देखती हूं। सपने देखने के पैसे नहीं लगते। हर कोई क्रिएटिवली ग्रो करना चाहता है, चैलेंज चाहता है और एक सम्मानजनक माहौल चाहता है। बस वही चाह है। सिनेमा को लेकर आप कौन-सा ऐसा बदलाव देखना चाहेंगी, जो आपको सबसे ज्यादा जरूरी लगता है? सबसे पहले यह पूछना बंद होना चाहिए कि ‘औरतें कहां हैं?’ यह सवाल ही गलत है। हम हर जगह हैं। नए और युवा स्टोरीटेलर्स को सपोर्ट करना चाहिए, भले ही उनकी कहानियां थोड़ी अनकम्फर्टेबल क्यों न हों। रिस्क लेने से ही सिनेमा का इकोसिस्टम आगे बढ़ता है। दर्शकों के लिए मर्दानी 3 को लेकर आप क्या संदेश देना चाहेंगी? यह फिल्म कुछ बहुत जरूरी सवाल उठाती है। इसे सिर्फ एंटरटेनमेंट की तरह नहीं, बल्कि आत्ममंथन की तरह देखें। सोचिए कि समाज के तौर पर हमने कहां चूक की है। फिल्म भारी जरूर है, लेकिन मैं वादा करती हूं आपको मजा भी आएगा और सोचने पर भी मजबूर करेगी।

Continue reading on the app

वैलेंटाइन डे पर रिलीज होगी शाहिद-तृप्ति की ‘ओ रोमियो’:एक्टर ने कहा- रोमांस जिंदगी की सबसे खूबसूरत चीज, एक्ट्रेस बोलीं- थोड़ी रोमांटिक और रियलिस्ट हूं

वैलेंटाइन डे पर रिलीज हो रही शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी की फिल्म ‘ओ रोमियो’ सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि गहराई, इमोशन और जटिल किरदारों की दुनिया है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत के दौरान शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी ने विशाल भारद्वाज के साथ काम करने का अनुभव साझा किया। तृप्ति ने बताया कि फिल्म में अफ्शा जैसे इंटर्नल किरदार को पर्दे पर उतारना कितना चुनौतीपूर्ण था। शाहिद ने अपने अभिनय के नजरिए, रोमांस की परिभाषा और ‘कबीर सिंह’ व ‘एनिमल पार्क’ को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी बेबाकी से बात की, वहीं तृप्ति ने को-एक्टर के तौर पर शाहिद से मिली सीख और अपने सफर की खूबसूरत झलक साझा की। पेश है बातचीत के कुछ और खास अंश.. सवाल:'ओ रोमियो’ की स्क्रिप्ट जब पहली बार सुनी, तो उस वक्त आपके मन में क्या चल रहा था और आपको इस फिल्म के बारे में किसने बताया? जवाब/तृप्ति डिमरी: मुझे विशाल सर का कॉल आया था और मैं उनसे मिलने ऑफिस गई थी। मैं पहले से ही बहुत एक्साइटेड थी क्योंकि मैं हमेशा से उनके साथ काम करना चाहती थी। जब उन्होंने कहानी सुनाई, तो मुझे तुरंत लगा कि यह कुछ अलग है। कहानी से भी जुड़ाव हुआ और मेरे किरदार अफ्शा से भी। उस दिन से लेकर आखिरी शूट तक पूरी जर्नी बहुत खूबसूरत रही। कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जिनमें काम करते हुए आप चाहते हैं कि यह सफर कभी खत्म ही न हो। ‘ओ रोमियो’ मेरे लिए वैसी ही फिल्म है। सवाल: शाहिद जब आपने ने स्क्रिप्ट सुनी तब आपका पहला रिएक्शन क्या था? जवाब/शाहिद कपूर: मेरे और विशाल भारद्वाज सर के बीच रिश्ता बहुत पुराना है, लेकिन करीब सात आठ साल बाद हम किसी फिल्म के लिए फिर साथ आए। इसके बावजूद मैं हर स्क्रिप्ट को बिल्कुल न्यूट्रल नजरिए से सुनता हूं। मेरे लिए सबसे जरूरी यह होता है कि कहानी और किरदार मुझसे जुड़ें। अगर वह कनेक्शन नहीं बनता, तो फिल्म करना मुझे ईमानदार नहीं लगता। जब विशाल सर ने ‘ओ रोमियो’ की स्क्रिप्ट खत्म की, तो मुझे लगा कि इसमें वह गहराई और इमोशनल लेयर है, जो मुझे एक एक्टर के तौर पर एक्साइट करती है। इस बार उन्होंने मास और क्लास दोनों को ध्यान में रखते हुए कहानी कही है। सवाल: तृप्ति, आपने कई बार कहा है कि शाहिद से आपने बहुत कुछ सीखा। एक को-एक्टर के तौर पर उनकी कौन सी बातें आपको सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं? जवाब/तृप्ति डिमरी: सिर्फ दो खूबियां गिनाना मुश्किल है। लेकिन सबसे पहले उनकी डिसिप्लिन। वह एक परफेक्शनिस्ट हैं। अगर उन्हें लगता है कि सीन और बेहतर हो सकता है, तो वह तब तक करते रहते हैं जब तक खुद पूरी तरह संतुष्ट न हों। दूसरी बात यह है कि वह हर टेक में कुछ नया लेकर आते हैं। कभी ऐसा नहीं लगता कि वही चीज दोहराई जा रही है। इससे सामने वाले एक्टर की परफॉर्मेंस भी बेहतर हो जाती है। और सबसे अहम बात यह है कि वह अपने को एक्टर को बहुत सिक्योर और रिलैक्स महसूस कराते हैं। एक एक्टर और एक इंसान, दोनों रूपों में उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। सवाल: अफ्शा का किरदार निभाते वक्त आपके लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या रही? जवाब/तृप्ति डिमरी: अफ्शा एक बहुत इंटर्नल किरदार है। उसके भीतर दर्द, गुस्सा और उदासी है, लेकिन वह बाहर बहुत कम दिखाई देती है। उस बैलेंस को पकड़ना आसान नहीं था। मेरे एक्टिंग कोच अतुल मोंगिया और विशाल सर के साथ कई लंबे सेशन्स हुए। शुरुआत में मुझे उसे समझने में वक्त लगा, लेकिन जैसे जैसे शूट आगे बढ़ा, वैसे वैसे मैं किरदार के और करीब जाती गई। मुझे लगता है कि अगर कोई किरदार आपको चैलेंज नहीं करता, तो उसमें मजा नहीं है। एक्टर के तौर पर ग्रोथ वहीं से शुरू होती है। सवाल: आप दोनों की पहली मुलाकात और शुरुआती कामकाजी रिश्ता कैसा रहा? जवाब/तृप्ति डिमरी: हम पहली बार रीडिंग के दौरान मिले थे। उस वक्त सबका फोकस सिर्फ स्क्रिप्ट और किरदार पर था। किसी को जज करने का सवाल ही नहीं था। शाहिद कपूर: पहले ही दिन हमारा एक अहम सीन था और मैंने देखा कि तृप्ति पूरी तरह अपने किरदार में थीं। जब आप किसी एक्टर को इतने कमिटमेंट के साथ काम करते देखते हैं, तो एक अलग तरह की संतुष्टि मिलती है। सवाल:फिल्म वैलेंटाइन डे पर रिलीज हो रही है। लोग जानना चाहते हैं कि एक हार्डकोर रोमांटिक इंसान की क्या-क्या खूबियां होती हैं। क्या आप खुद को रोमांटिक मानते हैं? जवाब/शाहिद कपूर: मैं अपने बारे में खुद कमेंट नहीं कर सकता। इसके लिए आपको किसी और से पूछना पड़ेगा। मुझे नहीं पता मैं कितना रोमांटिक हूं। लेकिन हां, रोमांस एक बहुत खूबसूरत चीज है। मोहब्बत जिंदगी की सबसे खूबसूरत चीजों में से एक है, बिना किसी शक के। तो अगर पूछें, तो मैं कहूंगा कि हां, मैं रोमांटिक हूं। तृप्ति डिमरी: मैं रोमांटिक भी हूं और थोड़ी रियलिस्ट भी। दोनों का बैलेंस जरूरी है। सवाल: आप दोनों का एक कॉमन कनेक्शन संदीप रेड्डी वांगा भी हैं। फैंस लगातार कहते हैं कि अगर एनिमल पार्क बनी, तो उसमें कबीर सिंह की एंट्री होनी चाहिए। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे? जवाब/शाहिद कपूर: पता नहीं यार, शायद मैं इस सवाल का जवाब देने के लिए सही इंसान नहीं हूं। लेकिन सच यह है कि जब एनिमल बन रही थी, तब संदीप मुझसे मिलने आए थे। उनकी इच्छा थी कि कबीर सिंह का एक सीन उस दुनिया में हो। कुछ वजहों से, डेट्स और बाकी चीजों की वजह से, वह हो नहीं पाया। लेकिन उनके दिमाग में यह ख्याल जरूर था। आगे क्या होगा, यह पूरी तरह संदीप पर है। वह दुनिया उनकी है, किरदार उनके हैं। वह जो सही समझेंगे, वही करेंगे। फैंस चाहते हैं, यह बात अच्छी भी लगती है। तृप्ति डिमरी: जब दर्शक किसी किरदार को इतने समय तक याद रखते हैं और दोबारा देखना चाहते हैं, तो यह दिखाता है कि वह किरदार उनके दिल में बस चुका है। सवाल: हाल ही में अरिजीत सिंह ने इंडस्ट्री से ब्रेक लिया। इस पर आपकी क्या राय है? जवाब/शाहिद कपूर: हर कलाकार की अपनी निजी यात्रा होती है। आर्ट बहुत पर्सनल चीज है। अगर कोई कलाकार अपने लिए थोड़ा सुकून चाहता है, तो वह उसका हक है। अरिजीत ने दुनिया को बहुत सुकून दिया है। तृप्ति डिमरी: यह फैसले बहुत निजी होते हैं और हमें उन्हें समझदारी के साथ देखना चाहिए। सवाल: कबीर सिंह आज भी आपके सबसे चर्चित किरदारों में से एक है। एनिमल पार्क में उसकी एंट्री को लेकर जो चर्चा है, उसे आप कैसे देखते हैं? जवाब/शाहिद कपूर: यह सच है कि जब एनिमल बन रही थी, तब संदीप रेड्डी वांगा मुझसे मिलने आए थे। वह चाहते थे कि कबीर सिंह का एक सीन उस फिल्म की दुनिया में हो। लेकिन कई बार हालात ऐसे बनते हैं कि चीजें चाहकर भी नहीं हो पातीं। कुछ डेट्स का इशू था, कुछ दूसरी वजहें थीं। यह पूरी तरह डायरेक्टर का फैसला होता है। वह उनकी दुनिया है, उनके किरदार हैं। अगर उन्हें लगेगा कि किसी किरदार की एंट्री कहानी को और मजबूत करती है, तो वह जरूर करेंगे। एक एक्टर के तौर पर यह जानकर अच्छा लगता है कि लोग आज भी उन किरदारों से इतना जुड़ाव महसूस करते हैं।

Continue reading on the app

  Sports

T20 वर्ल्ड कप के बीच टीम इंडिया से जुड़ेगा ये खिलाड़ी, दिल्ली में साथ आएगा नजर

T20 World Cup 2026: टी20 वर्ल्ड कप 2026 में टीम इंडिया अपना दूसरा मैच 12 फरवरी को दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में नामीबिया के खिलाफ खेलेगी. इस मुकाबले से पहले टीम के साथ एक स्टार खिलाड़ी जुड़ने वाला है. Sun, 08 Feb 2026 06:30:11 +0530

  Videos
See all

Non Stop News Live | अबतक की 100 बड़ी खबरें | Top 100 News | PM Modi | Rahul Gandhi | BJP | Congress #tmktech #vivo #v29pro
2026-02-08T01:33:54+00:00

Surajkund Mela Jhula : फरीदाबाद के सूरजकुंड मेला हादसे में एक्शन | Faridabad | Breaking | R.Bharat #tmktech #vivo #v29pro
2026-02-08T01:41:48+00:00

Super Fast 100 News LIVE: सुबह की 100 बड़ी खबरें | US Tariff | Iran America War | PM Modi | Trump #tmktech #vivo #v29pro
2026-02-08T01:33:01+00:00

Pappu Yadav : कब्जा कांड...पप्पू गिरफ्तार1995 का केस, 2026 में गिरफ्तार | Breaking #tmktech #vivo #v29pro
2026-02-08T01:38:50+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers