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गांधी का पुनर्जन्म ही नहीं, गांधी-दृष्टि का पुनर्जागरण हो

महात्मा गांधी को याद करना केवल अतीत के एक महान व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि देना नहीं है, बल्कि अपने वर्तमान की दिशा और भविष्य की दशा पर विचार करना भी है। गांधी किसी एक कालखंड, राजनीतिक दल या विचारधारा की संपत्ति नहीं हैं। वे एक ऐसे जीवन-दर्शन का नाम हैं, जिसकी धुरी सत्य, अहिंसा, आत्मानुशासन, स्वावलंबन, सेवा, स्वदेशी, ग्रामोदय, सामाजिक समरसता और मानव-मर्यादा है। इसलिए आज आवश्यकता गांधी के पुनर्जन्म की ही नहीं, गांधी-दृष्टि के पुनर्जागरण की है। गांधी को जितना इतिहास में खोजेंगे, उतना ही वे अतीत के लगेंगे; उन्हें वर्तमान के प्रश्नों से जोड़ेंगे तो वे भविष्य के मार्गदर्शक बन जाएंगे। क्योंकि महात्मा गांधी बीसवीं शताब्दी में दुनिया के सबसे सशक्त, बड़े एवं प्रभावी नेता के रूप में उभरे, वे बापू एवं राष्ट्रपिता के रूप में लोकप्रिय हुए, वे एक रचनात्मक व्यक्तित्व थे जिन्होंने अपने ही मूल्यों के बल पर देश को आजादी दिलाई, नैतिक एवं स्वस्थ मूल्यों को स्थापित किया। उनके द्वारा निरुपित सिद्धान्त आज की दुनिया की चुनौतियों एवं समस्याओं के समाधान के सबसे सशक्त माध्यम है। लेकिन वक्त की विडम्बना देखिये कि गांधी को हम बार-बार कटघरे में खड़ा करते हैं और उनकी छवि को धुंधलाने की कोशिश में कोई कमी नहीं छोड़ते। जो मानसिकता गोली मार सकती है, वह गाली दे तो क्या आश्चर्य? पर महात्मा गांधी भारत के अकेले ऐसे महापुरुष हैं जिन्हें कोई गोली या गाली नहीं मार सकती।

आज भारत ‘नए भारत’ और ‘विकसित भारत’ के निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा में गांधी को नए संदर्भ में देखने की जरूरत है। गांधी का स्वदेशी केवल चरखे तक सीमित नहीं था; उसका मूल भाव आत्मनिर्भरता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 जनवरी 2026 को गांधीजी की पुण्यतिथि पर भी स्वदेशी को विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का आधारस्तंभ बताते हुए उनके कर्तव्य-बोध को स्मरण किया। आज जब भारत स्थानीय उत्पादन, आत्मनिर्भरता, नवाचार, डिजिटल क्षमता और उद्यमिता को आगे बढ़ाने की बात करता है, तब गांधी का स्वावलंबन एक नए आर्थिक और सामाजिक संदर्भ में दिखाई देता है। गांधी के लिए विकास का अर्थ केवल उत्पादन और संपन्नता बढ़ाना नहीं था। विकास का अंतिम लक्ष्य मनुष्य था। उनकी दृष्टि में सबसे कमजोर व्यक्ति की चिंता विकास की कसौटी थी। आज ‘सबका साथ, सबका विकास’ और अंतिम व्यक्ति तक सुविधाओं तथा अवसरों की पहुंच की चर्चा इसी व्यापक मानवीय विकास के संदर्भ में की जा सकती है। गांधी का ‘अंत्योदय’ किसी सरकारी योजना का नाम नहीं, बल्कि विकास की नैतिक कसौटी है-जिसके केंद्र में वह व्यक्ति हो जो सबसे पीछे है।

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गांधी की सबसे बड़ी शक्ति यह थी कि उन्होंने राजनीति को केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं माना। उनके लिए राजनीति का नैतिक आधार सेवा था। आज लोकतंत्र को केवल चुनावों और संस्थाओं तक सीमित न रखकर संवाद, सहभागिता, उत्तरदायित्व और जनविश्वास से जोड़ने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की लोकतांत्रिक परंपरा, संवाद और सहभागिता की विरासत को रेखांकित किया है। 2023 के जी-20 सम्मेलन में उन्होंने भारत की प्राचीन सभा-परंपराओं और सामूहिक निर्णय की ऐतिहासिक परंपरा का उल्लेख किया था।  यह दृष्टि गांधी की उस राजनीति से संवाद करती है जिसमें जनता केवल शासन की प्रजा नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण की सहभागी थी। भारत की विदेश नीति और वैश्विक भूमिका में भी गांधी-दृष्टि के नए संकेत दिखाई देते हैं। 2023 में भारत की जी-20 अध्यक्षता का सूत्र था-‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य।’ प्रधानमंत्री ने इसे भारतीय सभ्यता के ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के भाव से जोड़ा और विश्व की समस्याओं के समाधान के लिए सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। नई दिल्ली में जी-20 नेताओं का राजघाट जाकर गांधी को श्रद्धांजलि देना भी प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण था। उस अवसर पर गांधी के शांति, सेवा, करुणा और अहिंसा के आदर्शों को सामंजस्यपूर्ण और समावेशी वैश्विक भविष्य से जोड़ा गया।

सचमुच आज विश्व को गाँधीजी के जीवन-मूल्यों की ज्यादा आवश्यकता है । आज धार्मिक कट्टरता बढ़ रही है। कुछ लोग जेहाद के नाम पर घृणित कृत्यों को अंजाम दे रहे हैं। कहीं दंगे हो रहे हैं तो कहीं महिलाओं और बच्चों के साथ अत्याचार की घटनाएँ हो रही हैं। धर्म और संप्रदाय के नाम पर समाज में विष घोला जा रहा है। दुनिया में शस्त्रों की होड़ चल रही है। आतंकवाद जीवन का अनिवार्य सत्य बन गया है। ऐसे में गाँधी बहुत याद आते हैं। इनके विचारों को फैलाकर ही दुनिया में शांति लाई जा सकती है। यहां गांधी की प्रासंगिकता एक और बड़े आयाम में सामने आती है। दुनिया आज युद्ध, आतंकवाद, धार्मिक कट्टरता, आर्थिक असमानता, जलवायु संकट और अविश्वास की चुनौतियों से गुजर रही है। तकनीक ने मानव की शक्ति बढ़ाई है, लेकिन क्या उसने मानवता बढ़ाई है-यह बड़ा प्रश्न है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लेकर परमाणु हथियारों तक, मनुष्य ने अभूतपूर्व शक्ति हासिल की है; लेकिन शक्ति के साथ संयम, करुणा और नैतिकता न हो तो वही शक्ति विनाश का कारण बन सकती है। गांधी का संदेश इसलिए आज और महत्वपूर्ण है कि उन्होंने साधन और साध्य की पवित्रता को एक-दूसरे से अलग नहीं किया। गांधी को किसी एक राजनीतिक खेमे में बांधना उनके विराट व्यक्तित्व को छोटा करना है। गांधी को केवल कांग्रेस, केवल स्वतंत्रता आंदोलन, केवल खादी या केवल किसी एक राजनीतिक व्याख्या तक सीमित करना उनके वैश्विक स्वरूप के साथ न्याय नहीं है। गांधी भारत की आत्मा से निकले और मानवता की चेतना का हिस्सा बने। वे सीमाओं से आबद्ध नहीं हैं। वे अतीत के हैं, लेकिन केवल अतीत के नहीं हैं। वे आज के हैं और आने वाले हर कल के लिए उपयोगी हैं।

भारत जब विश्व में अपनी भूमिका का विस्तार कर रहा है, तब गांधी-दर्शन उसके लिए नैतिक पूंजी बन सकता है। आर्थिक शक्ति भारत को प्रभावशाली बना सकती है, तकनीकी शक्ति उसे सक्षम बना सकती है और सामरिक शक्ति उसे सुरक्षित कर सकती है; लेकिन नैतिक शक्ति ही भारत को विश्वसनीय बना सकती है। विश्वगुरु होने का अर्थ दुनिया पर प्रभुत्व स्थापित करना नहीं, बल्कि दुनिया के सामने ऐसा जीवन-मूल्य प्रस्तुत करना है जिससे मानवता लाभान्वित हो। गांधी इसी नैतिक नेतृत्व की सबसे बड़ी भारतीय संभावनाओं में से एक हैं। प्रधानमंत्री द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं, लोकतांत्रिक मूल्यों और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ को प्रस्तुत करना इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा सकता है। नए भारत की वास्तविक उपलब्धि केवल यह नहीं होगी कि भारत कितना बड़ा आर्थिक राष्ट्र बनता है; बड़ी उपलब्धि यह होगी कि उसकी विकास यात्रा कितनी मानवीय, समावेशी, संवेदनशील और टिकाऊ होती है। सड़कें, उद्योग, डिजिटल क्रांति, अंतरिक्ष अभियान, स्टार्टअप और आर्थिक विकास आवश्यक हैं, लेकिन इनके साथ सत्य, नैतिकता, सामाजिक समरसता, स्वच्छता, पर्यावरण-संरक्षण और कमजोर के प्रति संवेदना भी आवश्यक है। यही वह स्थान है जहां गांधी आधुनिक भारत की विकास-यात्रा के साथ खड़े दिखाई देते हैं।

गांधी की प्रासंगिकता का सबसे बड़ा प्रमाण शायद यही है कि उन्हें समाप्त करने की जितनी कोशिश हुई, वे उतने ही व्यापक होते गए। आज गांधी केवल भारत के नहीं, विश्व के नैतिक विमर्श का हिस्सा हैं। हिंसा से भरी दुनिया में अहिंसा, विभाजन के बीच संवाद, उपभोगवाद के बीच संयम, केंद्रीकरण के बीच विकेंद्रीकरण, निराशा के बीच सत्य और सत्ता-केंद्रित राजनीति के बीच सेवा-ये गांधी के वे सूत्र हैं जिनकी जरूरत भविष्य की सभ्यता को भी रहेगी। इसलिए इस गांधी जयंती पर हमें केवल गांधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित नहीं करने हैं; हमें यह देखना है कि हमारे जीवन, समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था और विश्व-दृष्टि में गांधी के कितने मूल्य जीवित हैं। गांधी का पुनर्जन्म किसी व्यक्ति के रूप में नहीं हो सकता; गांधी का पुनर्जन्म तभी होगा जब सत्य फिर से साहस बने, अहिंसा फिर से शक्ति बने, स्वदेशी फिर से आत्मविश्वास बने, सेवा फिर से राजनीति का संस्कार बने और मानवता फिर से विकास का केंद्र बने। नया भारत यदि विकसित भारत बनना चाहता है और भारत यदि विश्व में नैतिक नेतृत्व की भूमिका निभाना चाहता है, तो उसे आधुनिकता और आध्यात्मिकता, विज्ञान और विवेक, शक्ति और शांति, विकास और करुणा का संतुलन साधना होगा। गांधी इस संतुलन के सबसे प्रखर भारतीय प्रतीकों में हैं। गांधी को अतीत की तस्वीर से निकालकर भविष्य की दृष्टि बनाना होगा। यही गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी और यही उस भारत की पहचान होगी जो केवल विकसित नहीं, बल्कि संवेदनशील, शांतिप्रिय, नैतिक और मानवता के कल्याण का मार्गदर्शक भारत बनना चाहता है।

- ललित गर्ग
लेखक, पत्रकार, स्तंभकार

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कार-बाइक छोड़िए, इन इलेक्ट्रिक स्कूटर्स से पहुंचें ऋषिकेश, मिलेगी दमदार रेंज

इलेक्ट्रिक स्कूटर अब केवल शहर के छोटे सफर तक सीमित नहीं रह गए हैं। बेहतर बैटरी क्षमता और लंबी रेंज के साथ बाजार में ऐसे कई मॉडल मौजूद हैं, जिन्हें लंबी दूरी की यात्रा के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यही वजह है कि अब EV यूजर्स के बीच रोड ट्रिप को लेकर भी दिलचस्पी बढ़ रही है।

दिल्ली से ऋषिकेश की दूरी करीब 260 किलोमीटर है। ऐसे में अगर आपके पास लंबी रेंज वाला इलेक्ट्रिक स्कूटर है, तो फुल चार्ज बैटरी के साथ यह सफर पूरा करना संभव हो सकता है। हालांकि वास्तविक रेंज सड़क, ट्रैफिक, स्पीड, वजन और मौसम जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

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260KM का सफर, अब EV से भी मुमकिन

कुछ साल पहले इलेक्ट्रिक स्कूटर मुख्य रूप से शहर के भीतर आने-जाने के लिए पसंद किए जाते थे। कम बैटरी क्षमता और सीमित रेंज के कारण लंबी दूरी की यात्रा चुनौतीपूर्ण होती थी। अब 300 किलोमीटर से ज्यादा दावा की गई रेंज वाले स्कूटर बाजार में मौजूद हैं, जिससे लंबी दूरी के सफर का विकल्प खुल गया है।

Komaki SE Ultra: 418KM की जबरदस्त रेंज

लंबी रेंज वाले इलेक्ट्रिक स्कूटरों की सूची में Komaki SE Ultra प्रमुख नाम है। इसमें 7.2 kWh की बैटरी दी गई है और कंपनी के अनुसार यह सिंगल चार्ज में 418 किलोमीटर तक की रेंज देता है। इस दावे के आधार पर दिल्ली से ऋषिकेश का सफर एक चार्ज में पूरा किया जा सकता है और बैटरी में कुछ रेंज शेष भी रह सकती है। स्कूटर में LED फ्रंट लाइट्स, LED DRLs, एंटी-स्किड टेक्नोलॉजी, पार्किंग असिस्ट और रिवर्स असिस्ट जैसे फीचर्स मिलते हैं।

Simple Ultra: स्पीड के साथ लंबी रेंज

Simple Ultra भी लंबी दूरी के लिए आकर्षक विकल्प है। इसमें 6.5 kWh बैटरी दी गई है और यह 400 किलोमीटर तक की रेंज का दावा करता है। इसकी टॉप स्पीड 115 km/h है। कंपनी के अनुसार यह 0-40 km/h की रफ्तार 2.77 सेकंड में पकड़ सकता है। 0 से 80 प्रतिशत चार्ज होने में करीब 2 घंटे 15 मिनट लगते हैं।

Komaki XR7: 322KM रेंज और बड़ा बूट

Komaki XR7 करीब 322 किलोमीटर की दावा की गई रेंज के साथ आता है। इसकी टॉप स्पीड 55 km/h है। इसमें 35 लीटर का बूट स्पेस मिलता है, जो रोड ट्रिप के दौरान सामान रखने के लिए उपयोगी हो सकता है। स्कूटर में 12-इंच के व्हील्स और डिस्क ब्रेक्स भी दिए गए हैं।

Ola S1 X+: 125 km/h की टॉप स्पीड

Ola S1 X+ का 5.2 kWh बैटरी वाला वेरिएंट 320 किलोमीटर तक की रेंज का दावा करता है। इसकी टॉप स्पीड 125 km/h है। इस रेंज के आधार पर यह भी दिल्ली से ऋषिकेश की दूरी एक बार फुल चार्ज करने पर तय करने में सक्षम हो सकता है।

सफर से पहले रेंज जरूर जांचें

हालांकि कंपनियों द्वारा बताई गई रेंज आदर्श परिस्थितियों में प्राप्त हो सकती है। हाईवे पर लगातार तेज रफ्तार, चढ़ाई, अतिरिक्त वजन और मौसम वास्तविक रेंज को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए दिल्ली से ऋषिकेश जैसी यात्रा पर निकलने से पहले बैटरी प्रतिशत, चार्जिंग विकल्प और रूट की स्थिति जरूर जांचना बेहतर रहेगा।

- डॉ. अनिमेष शर्मा

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IND vs WI 3rd T20: हार के बाद टीम इंडिया ने बदली प्लेइंग-11, सूर्यवंशी को फिर भी नहीं मिला मौका

IND vs WI Playing 11: भारतीय टीम ने पिछले दोनों मैच में एक ही प्लेइंग-11 को मैदान पर उतारा था लेकिन दूसरे मैच की शिकस्त ने भारतीय मैनेजमेंट को बदलाव के लिए मजबूर कर दिया. विंडीज टीम में भी एक बदलाव है Sun, 11 Oct 2026 18:56:33 +0530

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