पाकिस्तान में शिक्षा उपेक्षित, करीब 2 करोड़ बच्चे अब भी स्कूल से बाहर
इस्लामाबाद, 6 फरवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान में शिक्षा अब भी सरकार की प्राथमिकता नहीं बन पाई है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश में स्कूल जाने की उम्र के करीब 28 प्रतिशत बच्चे लगभग 2 करोड़ अब भी स्कूल से बाहर हैं। यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था की गहरी संरचनात्मक विफलताओं को उजागर करती है, जिन्हें सिर्फ राजनीतिक नारों से दूर नहीं किया जा सकता।
पाकिस्तान के अख़बार बिज़नेस रिकॉर्डर में प्रकाशित एक संपादकीय में कहा गया है कि हाउसहोल्ड इंटीग्रेटेड इकोनॉमिक सर्वे (एचआईईएस) के ताजा आंकड़े देश की शिक्षा और मानव विकास की दिशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। भले ही सरकार बार-बार ‘एजुकेशन इमरजेंसी’ की घोषणा करती रही हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि आज भी करीब एक-तिहाई बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।
हालांकि 2019 में स्कूल से बाहर बच्चों की संख्या 2.53 करोड़ थी, जो अब घटकर 2 करोड़ के आसपास आई है, लेकिन छह साल में हुई यह प्रगति बेहद धीमी और असमान रही है। संपादकीय के अनुसार, यह दिखाता है कि मौजूदा नीतियां जमीनी चुनौतियों से निपटने में नाकाम रही हैं।
रिपोर्ट में असमानता की निरंतरता भी सामने आई है। ग्रामीण इलाकों की लड़कियां, खासकर सिंध और बलूचिस्तान में, अब भी शिक्षा से सबसे ज्यादा वंचित हैं। पाकिस्तान में जहां हर चार में से एक लड़का स्कूल से बाहर है, वहीं लगभग हर तीन में से एक लड़की शिक्षा से वंचित है।
लिंग आधारित यह अंतर गहरी सामाजिक रूढ़ियों, व्यापक गरीबी और कमजोर सरकारी शिक्षा व्यवस्था को दर्शाता है। आर्थिक दबाव के चलते कई लड़कों को कम उम्र में काम करना पड़ता है, जबकि लड़कियों की पढ़ाई पारिवारिक बंदिशों, शिक्षा को बेकार समझने की सोच या आर्थिक तंगी के कारण रुक जाती है।
संपादकीय में यह भी बताया गया है कि करीब 20 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने कभी स्कूल में दाखिला ही नहीं लिया, जो यह दर्शाता है कि व्यवस्था प्रवेश के पहले ही चरण में विफल हो रही है। पंजाब में स्कूल से बाहर बच्चों की दर सबसे कम 21 प्रतिशत है, लेकिन 2019 के बाद से इसमें कोई सुधार नहीं हुआ है। यह ठहराव नीतियों की घटती प्रभावशीलता और कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों तक पहुंचने में नवाचार की कमी को दर्शाता है।
अन्य प्रांतों की स्थिति और भी खराब है, जिससे साफ होता है कि पाकिस्तान के बड़े हिस्सों में शिक्षा अब भी एक निम्न प्राथमिकता बनी हुई है।
एचआईईएस के आंकड़े यह भी बताते हैं कि व्यापक सामाजिक-आर्थिक हालात के कारण शिक्षा में सुधार क्यों थम गया है। ऊंची महंगाई और कमजोर आर्थिक विकास ने परिवारों की सहनशक्ति तोड़ दी है। देश के लगभग एक-चौथाई परिवार मध्यम से गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, जिनमें बलूचिस्तान और सिंध सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
संपादकीय के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा में भी खाद्य असुरक्षा में काफी बढ़ोतरी हुई है, जबकि बलूचिस्तान में यह पिछले छह वर्षों में लगभग दोगुनी हो गई है। ऐसे हालात में, जहां परिवारों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो रहा है, वहां शिक्षा एक संवैधानिक अधिकार की बजाय एक लग्ज़री बनती जा रही है।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
सरसों, नीम, अरंडी और बादाम: जानें नाभि पर कौन सा तेल लगाने से मिलेगा ज्यादा फायदा
नई दिल्ली, 6 फरवरी (आईएएनएस)। आयुर्वेद में शरीर के हर एक अंग का अपना महत्व है। इसी कड़ी में नाभि को ऊर्जा का केंद्र बताया गया है। गर्भावस्था में नाभि ही वह बिंदु है, जिससे माता और शिशु दोनों को पोषण मिलता है। यह हर उम्र के व्यक्ति की सेहत को बनाए रखने में अहम होती है। अगर रोजाना नाभि में तेल लगाया जाए तो यह पाचन, त्वचा, नींद और मानसिक संतुलन को सुधारने में मदद करता है। विज्ञान और आयुर्वेद दोनों मानते हैं कि नाभि के आसपास सैकड़ों नसें और रक्त वाहिकाएं जुड़ी होती हैं, इसलिए यहां तेल लगाना पूरे शरीर को पोषण देने जैसा होता है।
रोजाना नाभि में तेल लगाना शरीर को भीतर से संतुलित रखने में मदद करता है। इसके अनेकों फायदे हैं, जिनमें पाचन तंत्र को मजबूत बनाना, पेट की सूजन या गैस की समस्या को कम करना, मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त करना, और मानसिक तनाव को कम करना शामिल हैं। इसके अलावा, यह हार्मोनल असंतुलन को सुधारता है और नींद की गुणवत्ता को सुधारता है। सही तेल का चयन करना बहुत जरूरी है क्योंकि हर तेल की अपनी खासियत होती है।
सरसों का तेल नाभि में लगाने से पाचन तंत्र मजबूत होता है। यह पेट की सूजन, गैस और भारीपन को कम करने में सहायक होता है। ठंडे मौसम में या जिन लोगों की कफ प्रकृति ज्यादा होती है, उनके लिए यह तेल विशेष रूप से लाभकारी है। नाभि में सरसों का तेल हल्के हाथों से मालिश करने से पेट के अंग सक्रिय होते हैं और भोजन आसानी से पचता है।
नीम या नारियल का तेल शरीर की गर्मी कम करने और रक्त शुद्ध करने में मदद करता है। यह त्वचा को साफ और हेल्दी बनाता है और मुंहासों जैसी समस्याओं में राहत देता है। संवेदनशील त्वचा वाले लोग नारियल तेल को प्राथमिकता दे सकते हैं। नाभि में नीम या नारियल तेल की मालिश से शरीर में ठंडक बनी रहती है और त्वचा प्राकृतिक चमक पाती है।
अरंडी का तेल नाभि पर लगाने से जोड़ों के दर्द, अकड़न और सूजन में आराम मिलता है।
शुद्ध देसी गाय का घी नाभि में लगाने से शरीर को पोषण मिलता है और नर्वस सिस्टम शांत रहता है। यह हार्मोनल असंतुलन, मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन कम करने में मदद करता है। महिलाओं के लिए यह खासतौर से लाभकारी है। अनियमित पीरियड्स या कमजोरी की स्थिति में घी की मालिश से शरीर को मजबूती मिलती है।
बादाम का तेल नाभि में लगाने से नींद बेहतर आती है और चिंता कम होती है। यह मानसिक शांति देता है और तनाव को दूर करता है। सोने से पहले बादाम तेल की हल्की मालिश न केवल नींद की गुणवत्ता बढ़ाती है, बल्कि अगले दिन ऊर्जा और ताजगी भी प्रदान करती है।
--आईएएनएस
पीके/डीकेपी
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