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ट्रंप बोले- मिडटर्म इलेक्शन से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा अमेरिका, कच्चे तेल की कीमतों पर जताई चिंता

अमेरिका मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा. राष्ट्रपति ट्रंप ने बातचीत के जरिए तनाव सुलझाने की संभावना जताई है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान पर अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहेगी. जानिए उनके इस फैसले से कच्चे तेल की कीमतों पर क्या हो असर?

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Uncovered With Manoj Gairola: ईरान की दहशत से अमेरिका परेशान, ब्रिटेन से ट्रंप ने उड़ाए B1 बॉम्बर्स

Uncovered With Manoj Gairola: ईरान युद्ध की तस्वीर बड़ी तेजी से बदल रही है. अमेरिका के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. हर कुछ दिनों में एक ऐसी खबर आ जाती है, जिससे अमेरिका जैसी महाशक्ति शर्मसार हो जाती है. सबसे लेटेस्ट ये है कि अमेरिकन मिलिट्री को अपने B1 बॉम्बर्स और उसके लिए तैनात सभी सैनिकों को लेकर इंग्लैंड के एयर-बेस से RAF Fairford से आनन-फानन में भागना पड़ा. ये सब इतना जल्दबाजी में हुआ कि इन B1 बॉम्बर्स को पेट्रोल भरने तक का टाइम नहीं मिला पाया. 

आपको लगेगा कि ये ईरान की फौज की एक और कामयाबी है. वैसे भी ईरान मिडल ईस्ट में अमेरिका के अधिकतर सैन्य अड्डे तबाह कर चुका है. वहाँ से भी तो अमेरिकी फौज काफी हद तक भाग चुकी है. 

लेकिन इस वाकये के बाद पेंटागन साइकोलॉजिकल पूरी तरह टूट चुका है. अमेरिका की पब्लिक को समझ नहीं आ रहा कि आखिर हो क्या रहा है. यहां तक कि अमेरिकन कांग्रेस की लेटेस्ट रिपोर्ट जिसमे कहा गया है कि इस युद्ध में अभी तक अमेरिका के ८१ एयरक्राफ्ट नष्ट हो चुके हैं. उसकी कोई चर्चा नहीं है, जिसमें ५th generation F३५, से ले कर - F १५ तक शामिल हैं. कोई और वक्त होता तो अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट पर हल्ला मच गया होता.

अमेरिकी एयरफोर्स के लिए ब्रिटेन का एयरबेस क्यों महत्वपूर्ण

अब आपको बताते हैं कि इस घटना की महत्ता क्या है. RAF Fairford इंग्लैंड का एक ऐतिहासिक एयरबेस है. इसे सेकंड वर्ल्ड वॉर में इंग्लैंड और अमेरिका ने मिल कर बनाया था. ये १९४४ में ऑपरेशनल हो गया था. दोनों ने मिल कर यहाँ से जर्मनी की फ़ौज पर कई आक्रमण किए. इंग्लैंड और अमेरिका की एयरफ़ोर्स के कई बहादुरी किस्से-कहानी कहानी इसी एयरबेस के साथ जुड़े हैं. यानी, सेकंड वर्ल्ड वॉर में जर्मनी को हराने में इस एयर बेस ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई.

वहीं, आज हालत ये है कि जब अमेरिकी फौज ने अपने B1 बॉम्बर्स RAF Fairford से हटाये तो ट्रम्प ने इंग्लैंड की इंटेलिजेंस, पुलिस और डिफेंस का धन्यवाद किया. अगर इंग्लैंड ने ठीक समय पर इनफोर्मेशन नहीं दी होती की ईरान इस एयरबेस पर हमला करने वाला है तो उसके सारे B १ बॉम्बर्स नष्ट हो गये होते. यहाँ तक कि ट्रम्प को स्टेटमेंट भी देना पड़ा कि उनके पास पुख़्ता जानकारी थी कि इस एयरबेस को ईरान से ख़तरा है.

आगे बढ़ने से पहले आपको इस युद्ध का अभी तक का स्टेटस बताते हैं. पूरे मिडल ईस्ट से अमेरिका के अधिकतर सैन्य अड्डे नष्ट हो चुके हैं. सिर्फ़ जॉर्डन में ही बाकी हैं. और वो भी ईरान की रेंज में हैं. पिछले महीने, इराक से अमेरिकी फ़ौज चुपचाप भाग गई. वहाँ पर अमेरिकी सेना सद्दाम को हराने के बाद से मौजूद थी. जहां तक नेवी की बात है तो अमेरिका का जो सबसे नजदीक एयरक्राफ्ट करियर है वो भी ईरान की सीमा से १००० किमी की दूरी पर है.

इंग्लैंड का RAF Fairford ही अकेला एयरबेस था जहां से अमेरिका B १ बॉम्बर्स उड़ा सकता था और ईरान पर हमला कर सकता था. लेकिन अब अमेरिका को ईरान के डर से वो भी ख़ाली करना पड़ा. अब अगर अमेरिका को B १ बॉम्बर्स का इस्तेमाल करना पड़ा तो उसे अमेरिका में अपने किसी एयरबेस से ही उड़ाना पड़ेगा. और ये बहुत ही मुश्किल है, और महँगा भी है. आपको याद होगा कि अमेरिका ने युद्ध की शुरुआत ही ईरान पर B १ बॉम्बर्स से हमला कर के की थी. इससे ईरान की एयरफ़ोर्स नष्ट हो गई थी. उसके मिलिट्री अड्डों, बंकर्स और मिसाइल फेसिलिटीज को बहुत नुकसान पहुँचा.

अफगानिस्तान-लीबिया के युद्धों में भारी तबाही मचा चुके हैं बी-1 बॉम्बर्स

ये B १ बॉम्बर्स इंग्लैंड के RAF Fairford एयरबेस से उड़े थे. वो इसलिए कि ये बॉम्बर्स बिना रुके ७,५०० किमी तक की दूरी तय कर सकते हैं. ब्रिटेन औऱ ईरान की दूरी लगभग 4,500 Km है. इनकी स्पीड करीब 1500 km/hr तक होती है. इनमें हवा में  पेट्रोल भी भरा जा सकता है. अगर ये अमेरिका के एयरबेस से उड़ान भरते तो इन्हें वहाँ से ईरान आने और वापस जाने में काफ़ी वक्त लगता और इनके हमले भी काफ़ी कम हो जाते. B1 बॉम्बर्स अपने साथ 56 हजार 700 kg तक के बम और मिसाइल ले जा सकते हैं. ये पहले अफगानिस्तान और लीबिया के युद्धों में भी भारी तबाही मचा चुके हैं. इनको हवा में मारना बेहद मुश्किल है.

तो अमेरिका को जैसे ही खबर मिली कि ईरान इनको ब्रिटेन के RAF Fairford एयरबेस में हमला करके ख़त्म कर देगा तो वो आनन फ़ानन में ही दर्जन भर बी-1 बॉम्बर्स को ले कर भाग गये. उन्हें अमेरिका शिफ्ट कर दिया गया. अमेरिका के एक बड़े अख़बार न्यूयार्क टाइम्स की खबर है कि अमेरिका को ईरान के हमले का इतना ज्यादा खौफ था कि इनको ईंधन भी नहीं भरने दिया. बाद में हवा में ही उनमें पेट्रोल डाला गया.

भले ही अमेरिका का इंग्लैंड के एयरबेस को ख़ाली करके भागने से उसकी पूरी दुनिया में बेइज्जती हो रही हो, लेकिन अगर सच में ईरान हमला कर देता तो पूरी दुनिया में ट्रंप का मजाक बनता. हमने अनकवर्ड के अपने एक एपिसोड में आपको बताया था कि कैसे जब ट्रम्प टर्की गये तो अमेरिकी इंटेलिजेंस को information मिली कि ईरान ट्रम्प को मार सकता है. ट्रम्प टर्की से फ़ूड कंटेनर में खाने के डब्बों और बर्तनों के बीच चुप कर भागा.

वैसे इन बी-1 बॉम्बर्स का ब्रिटेन से अमेरिका जाना एक और बात कन्फर्म कर रहा है. वो ये कि हाल-फिलहाल में अब ट्रंप का ईरान पर हमला करने का कोई इरादा नहीं लगता है.

अमेरिका को इस जंग से कितना नुकसान हुआ ये इस बात से पता चलता है कि अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट ने बताया है कि इस युद्ध में अभी तक अमेरिका के ८१ एयरक्राफ्ट नष्ट हो चुके हैं. और इनका total cost 3.3 billion dollars है. यानी, करीब 30,000 करोड़ रुपए. इनमें शामिल हैं – 

  1. •  लड़ाकू जेट (Fighter Jets): 15
  2. • F-15E Strike Eagle: 12
  3. • A-10 Warthog (ग्राउंड अटैक जेट): 2
  4. • F-35A Lightning II (5th Gen Stealth): 1
  5. •  सपोर्ट व खुफिया विमान (Support & Surveillance): 10
  6. • KC-135 Stratotanker (हवा में ईंधन भरने वाले): 7
  7. • MC-130J Commando II (विशेष ऑपरेशन्स): 2
  8. • E-3 Sentry (जासूसी/AWACS प्लेन): 1 (अकेले इसकी कीमत लगभग $270M है)
  9. •  हेलिकॉप्टर (Helicopters): 7
  10. • AH-6 Little Bird / Apache / Sea Hawk / Jolly Green II: 7
  11. MQ-9 Reaper (रीपर ड्रोन): 45 (सबसे बड़ा नुकसान)
  12. • MQ-1 / MQ-4C Triton: 4

एक और इंपोर्टेंट बात ये है कि अमेरिका को नये एयरक्राफ्ट्स को बनाने और मिलिट्री में शामिल करने में कई साल लग जाएँगे. इन सब से ये ये मिथक पूरी तरह टूट गया है कि अमेरिका की मिलिट्री अजय है. उसे कोई हरा नहीं सकता.  लेकिन अब ना सिर्फ़ पेंटागन परेशान है बल्कि NATO के अमेरिका के सारे साथी भी चिंता में आ गये हैं जो की अमेरिका की ताकत के भरोसे बैठे हुए थे.

 

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