Noida Authority ने Sector 150 स्पोर्ट्स सिटी का रिवाइज्ड प्लान स्वीकारा, 4 प्रोजेक्ट्स को मिला OC
नोएडा, नौ अक्टूबर नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-150 स्थित स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के संशोधित मास्टर प्लान को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही, बकाया राशि का पूरा भुगतान करने वाली चार परियोजनाओं को सशर्त उपयोग प्रमाणपत्र (ओसी) जारी किए गए हैं। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने कहा कि संशोधित योजना में परियोजना के कुल क्षेत्रफल का 70 प्रतिशत हिस्सा खेल, मनोरंजन, संबंधित सुविधाओं, संस्थागत उपयोग और खुले स्थानों के लिए रखा गया है। आवासीय विकास के लिए 29.5 प्रतिशत और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए 0.5 प्रतिशत क्षेत्र निर्धारित किया गया है। प्राधिकरण के निदेशक मंडल की इस साल तीन जनवरी और छह अप्रैल को हुई बैठकों के बाद संशोधित मास्टर प्लान को मंजूरी दी गई थी।
इसकी औपचारिक स्वीकृति छह मई को जारी की गई। परियोजना के तहत करीब 8,000 घर खरीदार निर्माण कार्य की प्रगति का इंतजार कर रहे हैं। परियोजना में जमीन आवंटन में कथित अनियमितताओं और अनिवार्य खेल सुविधाओं के विकास में देरी को लेकर जांच होती रही है।
अधिकारी ने बताया कि संशोधित मास्टर प्लान की मंजूरी के दो महीने के भीतर डेवलपर, उसकी अनुषंगी कंपनियों और गठजोड़ के सदस्यों ने कुल बकाया राशि का 20 प्रतिशत जमा किया। शेष बकाया राशि की सुरक्षा के लिए प्राधिकरण ने 20 प्रतिशत इकाइयों पर अपना पहला प्रभार और अधिकार सुरक्षित रखा है। बकाया राशि का पूरा भुगतान करने के बाद चार परियोजनाओं को सशर्त उपयोग प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं।
इनमें ब्रिक राइज डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (एससी-02/एच एवं आई), ऐस इन्फ्रासिटी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (एससी-02/एफ), लैंड कार्ट बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड (एससी-02/ए-1) और समृद्धि इन्फ्रा स्क्वायर प्राइवेट लिमिटेड (एससी-02/डी) शामिल हैं। अधिकारी के मुताबिक, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट से संबंधित प्राधिकरण के रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा की लोक लेखा समिति ने 29 अगस्त, 2024 की बैठक में स्पोर्ट्स सिटी से जुड़ी कैग की सभी टिप्पणियों का निस्तारण कर दिया था। अधिकारी ने कहा कि समाधान योजना का उद्देश्य स्पोर्ट्स सिटी का विकास आगे बढ़ाना और इसमें निवेश करने वाले हजारों घर खरीदारों के हितों की रक्षा करना है।
Zoho प्रमुख Sridhar Vembu ने भारतीय IT प्रोफेश्नल्स से की अपील, US छोड़ भारत लौटकर बनाएं देश
अमेरिका में काम कर रहे भारतीय तकनीकी पेशेवरों के भविष्य को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने उनसे भारत लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारतीयों ने अमेरिका की तकनीकी तरक्की में बड़ा योगदान दिया है, लेकिन अब वहां के एक बड़े वर्ग में उनके प्रति पहले जैसा समर्थन नहीं दिख रहा है। ऐसे में भारतीय पेशेवरों को देश लौटकर भारत के तकनीकी क्षेत्र को मजबूत बनाने में योगदान देना चाहिए।
श्रीधर वेम्बु ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारतीयों ने अमेरिका की तकनीकी क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। इसके बावजूद अब अमेरिका का एक बड़ा हिस्सा भारतीयों को वहां नहीं देखना चाहता। उन्होंने कहा कि अमेरिकी वीजा पर रह रहे कई भारतीयों के सामने ऐसी स्थिति बन गई है, जिसमें उन्हें मेहनत से बनाई गई अपनी जिंदगी को छोड़कर भविष्य के बारे में दोबारा सोचना पड़ रहा है।
वेम्बु ने भारतीय पेशेवरों से अपील की कि वे इस मुश्किल दौर को एक नए अवसर के रूप में देखें। उनके मुताबिक, भारत लौटकर देश के विकास में योगदान देने का यह सही समय हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय पेशेवरों को मिलकर देश में तकनीकी क्षेत्र का विस्तार करना चाहिए और एक नए भविष्य की नींव रखनी चाहिए।
बता दें कि वेम्बु की यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की ओर से 8 बड़ी तकनीकी और आउटसोर्सिंग कंपनियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बाद आई है। अमेरिकी प्रशासन ने इन कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया से जुड़े स्थायी लेबर प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस, विप्रो, एचसीएल, कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी शामिल हैं।
इस कार्यक्रम को आमतौर पर पीईआरएम कहा जाता है। अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों के लिए रोजगार आधारित स्थायी निवास हासिल करने की प्रक्रिया में यह एक अहम कदम है। निलंबन के बाद संबंधित कंपनियां नए आवेदन जमा नहीं कर सकेंगी और पहले से लंबित आवेदनों की प्रक्रिया भी रोक दी गई है।
अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सॉन्डरलिंग ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुवाई में हुई प्रेस वार्ता के दौरान इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह कदम जारी आपराधिक और संघीय जांच के बीच उठाया गया है। उनके मुताबिक, संबंधित कंपनियों ने 2009 से अब तक कुल मिलाकर करीब 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए अनुरोध किया था। इन कंपनियों को 2.3 लाख से अधिक एच-1बी वीजा की मंजूरी और 1 लाख से ज्यादा स्थायी लेबर सर्टिफिकेशन मिले थे।
वहीं, जेडी वेंस ने आरोप लगाया कि कुछ कंपनियां एच-1बी वीजा कार्यक्रम का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को रखने के लिए कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे कुशल विदेशी पेशेवरों को लाना है, जिनके काम के लिए अमेरिका में उपयुक्त कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं।
गौरतलब है कि अमेरिका में एच-1बी वीजा और ग्रीन कार्ड से जुड़े नियमों में सख्ती का असर भारतीय तकनीकी पेशेवरों पर पड़ सकता है। ऐसे में श्रीधर वेम्बु की अपील ने भारत में रोजगार, तकनीकी अवसरों और देश की कंपनियों को मजबूत बनाने की जरूरत पर फिर से चर्चा शुरू कर दी है।
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