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UP Cabinet ने भदोही का नाम बदलकर ‘संत रविदास नगर भदोही’ करने को दी मंजूरी

लखनऊ, नौ अक्टूबर उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को भदोही जिले का नाम बदलकर ‘संत रविदास नगर भदोही’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। सरकार ने संत शिरोमणि गुरु रविदास के सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से यह फैसला लिया।

मुख्यमंत्री ने हाल में भदोही में जिले का नाम संत रविदास के नाम पर रखने की घोषणा की थी। प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने पत्रकारों को बताया कि भारतीय संत परंपरा के प्रमुख संत और समाज सुधारक गुरु रविदास की स्मृति व सम्मान में जिले का नाम बदलकर ‘संत रविदास नगर भदोही’ रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि नाम परिवर्तन से जिले की सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक पहचान को अभिव्यक्ति मिलेगी।

खन्ना ने कहा कि इससे पहले भी भदोही का नाम ‘संत रविदास नगर भदोही’ करने का प्रयास किया गया था लेकिन समाजवादी पार्टी की सरकार ने नाम बदलने के फैसले को पलट दिया था। नए नाम में संत रविदास का नाम शामिल होने के साथ ही भदोही की पहचान भी बरकरार रहेगी। उन्होंने बताया कि नाम परिवर्तन की प्रक्रिया उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के तहत निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप है।

इसके तहत राज्य सरकार को अधिसूचना जारी कर राजस्व क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव करने और उनका नामकरण करने का अधिकार है।

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Navi Pillay को Nobel Peace Prize मिलने पर भारतीय कार्यकर्ताओं ने दी बधाई

नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी विधिवेत्ता नवनेथम ‘नवी’ पिल्लई को शुक्रवार को नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की घोषणा के बाद भारत के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें बधाई दी और पिल्लई के ‘साहस और दृढ़ विश्वास’ तथा ‘न्याय के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता’ की सराहना की। संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार प्रमुख और अंतरराष्ट्रीय अदालत की न्यायाधीश पिल्लई को यह पुरस्कार शांति एवं अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने में उनके योगदान के लिए प्रदान करने की घोषणा की गई है। तेईस सितंबर, 1941 को डरबन में तमिल मूल के भारतीय माता-पिता के घर जन्मीं पिल्लई का बचपन रंगभेद के दौर में बीता।

उन्होंने आगे चलकर रंगभेद विरोधी कार्यकर्ताओं का बचाव करने तथा मानवाधिकारों और समानता को बढ़ावा देने के क्षेत्र में अपना करियर बनाया। इससे पहले दो भारतीयों - कैलाश सत्यार्थी (2014) और मदर टेरेसा (1979) - को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुका है। सत्यार्थी ने पिल्लई को पुरस्कार मिलने पर बधाई देते हुए कहा कि मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय न्याय के प्रति उनकी आजीवन प्रतिबद्धता साहस और दृढ़ विश्वास का प्रमाण है।

सत्यार्थी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘न्यायमूर्ति नवी पिल्लई को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार मिलने पर हार्दिक बधाई। मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय न्याय के प्रति उनकी आजीवन प्रतिबद्धता साहस और दृढ़ विश्वास का प्रमाण है। न्यायमूर्ति नवी की असाधारण यात्रा हमें याद दिलाती है कि न्याय के बिना स्थायी शांति संभव नहीं है और साहस संस्थानों को बदलने तथा पीढ़ियों को प्रेरित करने की शक्ति रखता है।’’ वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता वृंदा ग्रोवर ने कहा कि यह पुरस्कार इस बात को साबित करता है कि न्याय और मानवाधिकार हमारे समाज के आधार स्तंभ हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे समय में जब दुनिया संघर्षों से घिरी है और अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था कमजोर हो रही है, विधिवेत्ता नवी पिल्लई को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दोना इस बात का संदेश है कि न्याय एवं मानवाधिकार आज भी हमारे समाज के आधार स्तंभ हैं।’’ ग्रोवर ने कहा, ‘‘न्यायमूर्ति पिल्लई हमें दक्षिण अफ्रीका में भेदभाव और रंगभेद से लेकर फलस्तीन में नरसंहार के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने तक, अन्याय के हर रूप के खिलाफ दृढ़ता से खड़े होने की प्रेरणा देती हैं।’’ सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने वर्ष 2006 में पिल्लई से अपनी मुलाकात को याद करते हुए उन्हें ‘‘ग्लोबल साउथ की अग्रणी आवाज’’ बताया। हाशमी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘अगर मुझे सही याद है, तो मैं पहली बार 2006 में डरबन में नवी पिल्लई से मिली थी। वहां इला गांधी द्वारा सत्याग्रह के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक शताब्दी सम्मेलन आयोजित किया गया था।

दक्षिण अफ्रीका में बाद के सम्मेलनों में उनसे दोबारा मुलाकात ने न्याय के प्रति उनकी आजीवन प्रतिबद्धता के लिए मेरे सम्मान को और बढ़ाया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ग्लोबल साउथ की एक अग्रणी आवाज के रूप में पिल्लई को मिला यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत साहस और कानूनी विरासत को सम्मान है, बल्कि ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय कानून एवं मानवीय गरिमा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जब दुनिया को इनकी सबसे अधिक आवश्यकता है।’’ कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘नवनेथम ‘नवी’ पिल्लई को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार मिलने पर बधाई। मानवाधिकारों, अंतरराष्ट्रीय न्याय और पूरी दुनिया में कानून के शासन को मजबूत करने के प्रति उनकी आजीवन प्रतिबद्धता हम सभी को प्रेरित करती है।

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  Sports

किस मिट्टी के बने हैं शाई होप? 38.3 ओवर मैदान पर बिताकर भी नहीं थके, सेंचुरी जड़ किया रिकॉर्ड की बारिश

वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने भारत के खिलाफ के दूसरे टी20 मैच में दमदार खेल का प्रदर्शन करते हुए नाबाद 102 रन बनाए. उनकी इस शतकीय पारी से वेस्टइंडीज ने रांची में 6 विकेट से मैच जीतकर 1-1 से सीरीज में बराबरी कर ली है. इसके साथ ही शाई होप और वेस्टइंडीज के नाम कई बड़े रिकॉर्ड भी दर्ज हो गए हैं. Sat, 10 Oct 2026 05:01:03 +0530

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