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Toyota का मास्टरस्ट्रोक! Koji Sato की जगह अब Kenta Kon संभालेंगे CEO का पद, जानें क्या है नई रणनीति।

टोयोटा मोटर कॉर्प ने अपने शीर्ष नेतृत्व में बड़ा बदलाव किया है। बता दें कि कंपनी ने अपने मौजूदा फाइनेंस चीफ केंटा कोन को नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने का ऐलान किया है। यह बदलाव एक अप्रैल से लागू होगा, जब वर्तमान सीईओ कोजी साटो पद छोड़कर वाइस चेयरमैन और नए बनाए गए चीफ इंडस्ट्री ऑफिसर की भूमिका संभालेंगे।

गौरतलब है कि केंटा कोन टोयोटा के चेयरमैन अकियो टोयोडा के बेहद करीबी माने जाते हैं और लंबे समय तक उनके निजी सचिव भी रह चुके हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार, कोन को लागत नियंत्रण और सख्त वित्तीय अनुशासन के लिए जाना जाता है। उन्हें टोयोटा की फोर्कलिफ्ट इकाई टोयोटा इंडस्ट्रीज़ के प्रस्तावित बायआउट का मुख्य रणनीतिकार भी माना जा रहा है, हालांकि इस सौदे को लेकर कुछ अल्पांश शेयरधारकों ने पारदर्शिता और मूल्यांकन पर सवाल उठाए हैं।

केंटा कोन ने 2009 से 2017 तक अकियो टोयोडा के सचिव के रूप में काम किया था। इसके बाद उन्हें अकाउंटिंग डिवीजन का प्रमुख बनाया गया। अकियो टोयोडा ने करीब 14 वर्षों तक टोयोटा का नेतृत्व करने के बाद 2023 में कोजी साटो को सीईओ बनाया था। साटो के कार्यकाल के दौरान कंपनी को इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा, लेकिन हाइब्रिड तकनीक पर फोकस ने टोयोटा को प्रतिस्पर्धियों से बेहतर स्थिति में बनाए रखा।

नेतृत्व बदलाव की घोषणा तीसरी तिमाही के नतीजों के साथ की गई, जिसमें कंपनी ने पूरे साल के ऑपरेटिंग प्रॉफिट अनुमान को करीब 12 प्रतिशत तक बढ़ा दिया। कमजोर येन और लागत में कटौती इसका मुख्य कारण रहे। इस घोषणा के बाद टोयोटा के शेयरों में तेजी देखी गई और कारोबारी दिन के अंत में शेयर करीब दो प्रतिशत ऊपर बंद हुए।

ऑटो उद्योग में इस समय चीनी कंपनियां तेजी से बाजार में पकड़ बना रही हैं। जहां कई वैश्विक कार निर्माता इलेक्ट्रिक वाहनों में भारी निवेश के चलते नुकसान झेल रहे हैं, वहीं टोयोटा की हाइब्रिड रणनीति अब दूरदर्शी साबित होती दिख रही है। पिछले साल भी टोयोटा दुनिया की सबसे ज्यादा कारें बेचने वाली कंपनी बनी रही।

नई जिम्मेदारियों के तहत केंटा कोन आंतरिक प्रबंधन और वित्तीय फैसलों पर ध्यान देंगे, जबकि कोजी साटो उद्योग से जुड़े बड़े रणनीतिक मुद्दों पर काम करेंगे। विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव तेजी से फैसले लेने और गैर-ऑटोमोटिव क्षेत्रों में मजबूत रणनीति बनाने के लिए किया गया है। केंटा कोन का मोबिलिटी टेक यूनिट ‘वोवन बाय टोयोटा’ में वित्तीय अनुभव भी सॉफ्टवेयर और तकनीकी दौड़ में कंपनी के लिए अहम साबित हो सकता है।

हालांकि बीते कुछ वर्षों में टोयोटा के शेयरों ने मजबूत रिटर्न दिया है, फिर भी दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे बाजारों में कंपनी की हिस्सेदारी कुछ हद तक चीनी ब्रांड्स के हाथों घटी है। ऐसे में यह नेतृत्व बदलाव आने वाले समय में टोयोटा की दिशा और रफ्तार तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, ऐसा उद्योग जगत का मानना है और फिलहाल कंपनी इसी नई रणनीति के साथ आगे बढ़ रही हैं।

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  Sports

WPL Final: 103 डिग्री बुखार में Smriti Mandhana का जलवा, RCB ने जीती दूसरी Trophy.

महिला प्रीमियर लीग के फाइनल में स्मृति मंधाना ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए उस वक्त मोर्चा संभाला, जब टीम को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 204 रन के मुश्किल लक्ष्य का पीछा करते हुए मंधाना ने सिर्फ 41 गेंदों में 87 रन की तूफानी पारी खेली।

गौरतलब है कि यह पारी इसलिए और खास मानी जा रही है क्योंकि फाइनल से एक रात पहले स्मृति मंधाना तेज बुखार से जूझ रही थीं। मौजूद जानकारी के अनुसार उनका तापमान 103 डिग्री तक पहुंच गया था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने फाइनल खेलने का फैसला किया और मैदान पर उतरकर मैच का रुख ही बदल दिया।

आरसीबी ड्रेसिंग रूम में कोच मलोलन रंगराजन ने फाइनल से पहले पूरी टीम को मंधाना की तबीयत के बारे में बताया था। उन्होंने कप्तान की तारीफ करते हुए कहा कि स्मृति ने बिना किसी शिकायत के खुद को फिट करने की पूरी कोशिश की और टीम के लिए उपलब्ध रहीं। कोच के शब्दों में यह सिर्फ एक पारी नहीं, बल्कि नेतृत्व और प्रतिबद्धता की मिसाल है।

मैच में मंधाना को जॉर्जिया वोल का भरपूर साथ मिला। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 165 रन की साझेदारी कर दिल्ली के गेंदबाज़ों पर जबरदस्त दबाव बनाया हैं। वोल ने भी 79 रन की अहम पारी खेली, जिससे लक्ष्य का पीछा आसान होता नजर आया। हालांकि दोनों बल्लेबाज़ सेट होने के बाद आउट हो गईं, जिससे मुकाबला आखिरी ओवर तक खिंच गया।

अंतिम ओवर में आरसीबी को 10 रन चाहिए थे और क्रीज पर राधा यादव और नादिन डी क्लार्क मौजूद थीं। राधा ने दबाव में संयम दिखाते हुए लगातार दो चौके लगाए और टीम को जीत दिला दी। जैसे ही जीत पक्की हुई, मंधाना डगआउट में खुशी से उछलती नजर आईं और साथी खिलाड़ियों ने उन्हें गले लगा लिया।

इस खिताबी जीत के साथ आरसीबी ने दूसरी बार महिला प्रीमियर लीग ट्रॉफी अपने नाम की हैं। यह सफलता इसलिए भी खास रही क्योंकि टूर्नामेंट शुरू होने से पहले एलिस पेरी निजी कारणों से बाहर हो गई थीं। इसके बावजूद टीम ने संतुलित प्रदर्शन किया और खिताब तक का सफर तय किया हैं।

पूरे टूर्नामेंट में मंधाना का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने नौ मैचों में 377 रन बनाए और सबसे ज्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज़ रहीं हैं। फाइनल के बाद मंधाना ने एक बार फिर आरसीबी के समर्थकों का शुक्रिया अदा किया और कहा कि हर मैदान पर उन्हें जिस तरह का समर्थन मिलता है, वह टीम को खास बनाता हैं।

बीमारी, दबाव और बड़े मंच के बावजूद स्मृति मंधाना की यह पारी सिर्फ एक मैच जिताने वाली पारी नहीं रही, बल्कि यह बताती है कि क्यों वह भारतीय महिला क्रिकेट की सबसे भरोसेमंद कप्तानों में गिनी जाती हैं और क्यों आरसीबी की यह जीत लंबे समय तक याद रखी जाएगी।
Fri, 06 Feb 2026 21:13:57 +0530

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