J&K के Kishtwar में PDP Leader Abdul Kabir गिरफ्तार, Burhan Wani को शहीद बता कर खड़ा किया था विवाद
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हिजबुल मुजाहिद्दीन कमांडर बुरहान वानी को ‘शहीद’ बताने वाले पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेता अब्दुल कबीर को गिरफ्तार कर लिया गया। किश्तवाड़ के उपायुक्त पंकज शर्मा ने कहा, ‘‘उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और इस संबंध में कानूनी कार्रवाई जारी है।’’ इससे पहले अब्दुल कबीर ने बुरहान वानी को ‘‘शहीद’’ कहकर नया विवाद खड़ा कर दिया था। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा के कुछ नेताओं पर मारे गए आतंकवादी के घर जाने और उसके परिवार को आर्थिक मदद देने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए थे।
हम आपको याद दिला दें कि कश्मीर घाटी में कभी आतंकवाद का चेहरा रहा बुरहान वानी आठ जुलाई 2016 को दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के कोकरनाग इलाके में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया था। कबीर ने पार्टी कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से कहा, ‘‘बुरहान वानी के साथ जो हुआ मैंने उस पर कोई खास बात नहीं की थी। मेरे कहने का मतलब यह था कि जब बुरहान वानी शहीद हुआ या मारा गया, तब उस समय हमारे भाजपा नेता उसके घर गए थे और उसके परिवार को मुआवजा दिया था। इसकी क्या वजह थी? यह आप खुद समझ सकते हैं।’’ जब उनसे पूछा गया कि क्या एक आतंकवादी को ‘‘शहीद’’ कहना सही है, तो कबीर ने कहा कि किसी व्यक्ति के लिए इस्तेमाल की जाने वाली शब्दावली अलग विषय है।
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उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारी अपनी बात है। हम किसी को शहीद कहें, मारा गया कहें या कोई और शब्द इस्तेमाल करें—यह एक अलग बात है। हमें आजादी है। हम एक लोकतांत्रिक देश में रहते हैं।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या बुरहान वानी को शहीद कहना उनकी निजी राय है, कबीर ने सहमति जताते हुए कहा, ‘‘हां, यह मेरी निजी राय है।’’ कबीर ने यह भी दावा किया कि जब पीडीपी भाजपा के साथ गठबंधन सरकार में थी, तब उसने भाजपा को पूरी तरह से अपने चंगुल में रखा हुआ था।
उन्होंने कहा, ‘‘2014 में जब जम्मू-कश्मीर में भाजपा हमारे साथ गठबंधन सरकार में थी, तब महबूबा मुफ्ती ने उन्हें सरकार में सिर उठाने का मौका तक नहीं दिया। आप जानते हैं कि बुरहान वानी के मामले में क्या हुआ। आप यह भी जानते हैं कि नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा बेची गई बिजली परियोजना पर उस समय कोई सवाल नहीं उठा सका।’’ उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भाजपा को अनुच्छेद 370 को हटाने की बात तो दूर, उस पर चर्चा तक करने की इजाजत नहीं दी थी। पीडीपी नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा ने उनकी पार्टी की पीठ में छुरा घोंपा और सरकार गिरा दी।
इस बीच, पीडीपी ने इस पूरे विवाद से खुद को अलग करने की कोशिश की है। पार्टी प्रवक्ता वीरेंद्र सिंह सोनू ने कहा कि कबीर पार्टी के एक नेता हैं, न कि कोई पदाधिकारी। उन्होंने कहा, ‘‘यह उनकी निजी राय है, पार्टी का आधिकारिक रुख नहीं।’’ वहीं, पीडीपी के किश्तवाड़ जिलाध्यक्ष शेख नासिर ने कहा कि कबीर ने पार्टी कार्यक्रम के दौरान कोई विवादित बात नहीं कही थी, बल्कि बाद में पत्रकारों से अलग से बातचीत में यह टिप्पणी की थी। दूसरी ओर, भाजपा नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने पीडीपी की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कबीर की गिरफ्तारी को सही ठहराया है।
कार्यवाहक पद की अनिश्चितता खत्म, Punjab में IPS Gaurav Yadav को मिला 2 साल का कार्यकाल
पंजाब सरकार ने शुक्रवार को 1992 बैच के IPS अधिकारी गौरव यादव को रेगुलर डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DGP) नियुक्त किया, जिससे इस पद को लेकर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता खत्म हो गई। एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, यादव जुलाई 2022 से कार्यवाहक DGP के तौर पर काम कर रहे थे और रेगुलर DGP के तौर पर उनका कार्यकाल पद संभालने की तारीख से कम से कम दो साल का होगा। यह नियुक्ति पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश के कुछ दिनों बाद हुई है, जिसमें कोर्ट ने एक PIL पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को रेगुलर DGP की नियुक्ति पर सही फ़ैसला लेने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा कि कामचलाऊ व्यवस्था अनिश्चित काल तक नहीं चलनी चाहिए और मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर तय की। याचिकाकर्ता ने कहा था कि जुलाई 2022 से यह पद अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था के ज़रिए चलाया जा रहा था।
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राज्य के गृह विभाग के आदेश के अनुसार, यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) ने 1 जुलाई के अपने पत्र के ज़रिए, राज्य सरकार द्वारा भेजे गए पैनल में से तीन IPS अधिकारियों को DGP पद पर नियुक्ति के लिए उपयुक्त माना। राज्य सरकार द्वारा भेजे गए 14 सीनियर IPS अधिकारियों के पैनल में से UPSC द्वारा चुने गए तीन अधिकारियों में यादव का नाम भी शामिल था। UPSC पैनल में अन्य दो अधिकारी स्पेशल DGP शरद सत्य चौहान और सीनियर IPS अधिकारी हरप्रीत सिंह सिद्धू थे। आदेश में कहा गया है कि UPSC से मिले पैनल पर विचार करने के बाद यादव को राज्य पुलिस बल का प्रमुख नियुक्त किया गया। नियमों के तहत, जब कोई राज्य रेगुलर DGP की नियुक्ति के लिए अधिकारियों की सूची भेजता है, तो UPSC की एम्पैनलमेंट कमेटी तीन अधिकारियों का पैनल वापस भेजती है, जिनमें से एक को चुना जाता है।
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चार्ज संभालने के बाद, यादव ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाकात की और उन्हें राज्य में आंतरिक सुरक्षा की स्थिति और कानून-व्यवस्था के बारे में जानकारी दी। पंजाब पुलिस ने एक्स पर बताया कि यादव ने पुलिस बल के प्रमुख, यानी डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DGP) का पद संभाल लिया है। एक्स पर एक पोस्ट में यादव ने कहा कि आज मैंने पंजाब के माननीय मुख्यमंत्री एस भगवंत मान से मुलाकात की और उन्हें राज्य में आंतरिक सुरक्षा की स्थिति और कानून-व्यवस्था के बारे में जानकारी दी। बैठक में पंजाब के मुख्य सचिव भी मौजूद थे। उन्होंने आगे कहा कि पंजाब पुलिस शांति, सद्भाव और जन-सुरक्षा बनाए रखने और एक सुरक्षित व नशा-मुक्त पंजाब बनाने में मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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