TCS और Wipro समेत IT कंपनियों पर अमेरिकी Green Card रोक का भारत ने किया विरोध
नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर भारत ने शुक्रवार को अमेरिका के उस फैसले की आलोचना की, जिसमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और विप्रो जैसी बड़ी वैश्विक एवं भारतीय आईटी कंपनियों के लिए अहम ग्रीन-कार्ड प्रक्रिया कार्यक्रम पर रोक लगा दी गई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस कदम से दोनों देशों के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद नहीं मिलेगी। इसके साथ ही, भारत ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा विदेशी पेशेवरों को ‘बंधुआ मज़दूर’ बताए जाने को पूरी तरह ‘‘निराधार और अत्यंत अपमानजनक’’ करार दिया।
अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों की संख्या कम करने की व्यापक कोशिशों के तहत, ट्रंप प्रशासन ने आठ बड़ी आईटी कंपनियों के लिए ‘स्थायी श्रम प्रमाणन’ (पीईआरएम) कार्यक्रम को निलंबित कर दिया और कई विश्वविद्यालयों में जांच शुरू कर दी। यह निर्णय भारत और अमेरिका के रिश्तों में जारी तनाव के बीच लिया गया। जिन कंपनियों पर कार्रवाई हो रही है, उनमें इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, माइक्रोसॉफ्ट, एडोब, कैपजेमिनी और कॉग्निजेंट शामिल हैं।
पीईआरएम को अमेरिका में स्थायी निवास और नागरिकता पाने का एक रास्ता माना जाता है। अमेरिका के इस कार्यक्रम को रोकने के फ़ैसले का असर हज़ारों भारतीय प्रौद्योगिकी पेशेवरों पर पड़ने की उम्मीद है, जो एच1बी वीज़ा पर अमेरिका आने के बाद वहाँ स्थायी रूप से रहने के लिए नियोक्ता प्रायोजित ग्रीन कार्ड पर निर्भर रहते हैं। अपनी प्रतिक्रिया में, माइक्रोसॉफ्ट ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में उसने जो 6,000 एच1-बी वीज़ा आवेदन जमा किए थे, उनमें से 80 प्रतिशत मौजूदा कर्मचारियों का स्तर बढ़ाने या बदलने के लिए थे, न कि नए लोगों को नौकरी पर रखने के लिए।
इसने कहा, ‘‘हमें अमेरिकी कार्यबल की ताकत और प्रतिभा पर भरोसा है। इसीलिए अमेरिका में माइक्रोसॉफ्ट के अधिकतर कर्मचारी अमेरिकी ही हैं। हम प्रशासन को और जानकारी देने के लिए तैयार हैं।’’ कंपनी ने कहा, ‘‘उदाहरण के लिए पिछले वित्त वर्ष में एच-1बी वीजा के लिए दाखिल किए गए लगभग 6,000 आवेदनों में से 80 प्रतिशत माइक्रोसॉफ्ट के मौजूदा कर्मचारियों की वीजा अवधि बढ़ाने या उनकी स्थिति में बदलाव के लिए थे।
ये आवेदन नए लोगों को नौकरी पर रखने के लिए नहीं थे।’’ नए कर्मचारियों के लिए किए गए शेष आवेदन उन लोगों के लिए थे जो पहले से ही कानूनी रूप से अमेरिका में रह रहे थे और जिन्होंने कंपनी के लिए काम करने का फैसला किया। ऐसे लोग अमेरिकी कार्यबल का केवल एक प्रतिशत हिस्सा ही हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने कहा, ‘‘वे हमारे देश में आने वाले नए लोग नहीं हैं।’’ कंपनी ने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट एच-1बी वीजा के लिए केवल उन्हीं लोगों के आवेदन दाखिल करती है, जो इस वीजा श्रेणी के कड़े मानकों पर खरे उतरते हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘यह भी साफ़ होना चाहिए कि प्रतिभा गतिशीलता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए फ़ायदेमंद है। इससे भारतीयों के लिए तो मौके बनते ही हैं, साथ ही यह अमेरिकी कंपनियों को बेहतरीन प्रतिभा, नवोन्मेष, अनुसंधान, उत्पादकता, प्रतिस्पर्धात्मकता और नौकरी के मौके पैदा करने में भी मदद करता है, तथा इसके अलावा अमेरिका में शेयर धारकों की संपत्ति भी बढ़ाता है।’’ इसने कहा, ‘‘इसलिए, यह दोनों देशों के लिए बहुत अधिक आपसी लाभ वाला क्षेत्र है और हमें उम्मीद है कि इस प्रक्रिया से जुड़े सभी पक्ष इस बात को समझेंगे। अमेरिका की ओर से घोषित किए गए कदम दोनों देशों की साझा महत्वाकांक्षाओं को आगे नहीं बढ़ाते हैं।’’ भारत ने दिल्ली ने अमेरिका में काम कर रहे विदेशी पेशेवरों के बारे में वेंस की टिप्पणियों पर भी कड़ी आपत्ति जताई।
विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘हमने इस संदर्भ में अमेरिकी उपराष्ट्रपति की कुछ टिप्पणियां भी देखी हैं। हमारा मानना है कि ऐसी बातें बेबुनियाद हैं और इस तथ्य की अनदेखी करती हैं कि अमेरिका में भारतीय पेशेवर वहां की अर्थव्यवस्था और नवोन्मेष तंत्र में उच्च शिक्षित और कुशल योगदानकर्ता हैं।’’ इसने एक बयान में कहा, ‘‘सच तो यह है कि खुद अमेरिका का इतिहास उन पीढ़ियों के प्रवासियों से बना है, जिनकी मेहनत, उद्यम और नयी सोच ने इसके विकास और समृद्धि में योगदान दिया है।’’ बयान में कहा गया, ‘‘ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल करना, जो दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत की याद दिलाती हो, बेहद अपमानजनक है।’’ विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह इस मामले से जुड़ी गतिविधियों पर लगातार नजर रखेगा। अमेरिका के श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने बृहस्पतिवार को नए उपायों की घोषणा करते हुए कहा, ‘‘हम इन कंपनियों से जुड़े किसी भी नए स्थायी श्रम प्रमाणन आवेदन को स्वीकार नहीं करेंगे और न ही किसी लंबित आवेदन पर कोई कार्रवाई करेंगे।’’ वेंस ने विदेशी कर्मचारियों को भर्ती करने वाली आईटी कंपनियों की आलोचना करते हुए कहा, ‘‘मुझे यकीन है कि यहाँ मौजूद हर कोई उस खेल को समझता है, जो खेला जा रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आप देश के बाहर से बंधुआ मज़दूरों को लाते हैं, अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकालते हैं और अगर आप एक कॉर्पोरेशन हैं, तो अमेरिकी कर्मचारियों की मज़दूरी कम करके और उनकी जगह ऐसे लोगों को रखकर बहुत सारा पैसा कमाते हैं, जिन्हें शायद शुरू से ही अमेरिका में नहीं होना चाहिए था।
J&K के Kishtwar में PDP Leader Abdul Kabir गिरफ्तार, Burhan Wani को शहीद बता कर खड़ा किया था विवाद
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हिजबुल मुजाहिद्दीन कमांडर बुरहान वानी को ‘शहीद’ बताने वाले पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेता अब्दुल कबीर को गिरफ्तार कर लिया गया। किश्तवाड़ के उपायुक्त पंकज शर्मा ने कहा, ‘‘उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और इस संबंध में कानूनी कार्रवाई जारी है।’’ इससे पहले अब्दुल कबीर ने बुरहान वानी को ‘‘शहीद’’ कहकर नया विवाद खड़ा कर दिया था। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा के कुछ नेताओं पर मारे गए आतंकवादी के घर जाने और उसके परिवार को आर्थिक मदद देने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए थे।
हम आपको याद दिला दें कि कश्मीर घाटी में कभी आतंकवाद का चेहरा रहा बुरहान वानी आठ जुलाई 2016 को दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के कोकरनाग इलाके में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया था। कबीर ने पार्टी कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से कहा, ‘‘बुरहान वानी के साथ जो हुआ मैंने उस पर कोई खास बात नहीं की थी। मेरे कहने का मतलब यह था कि जब बुरहान वानी शहीद हुआ या मारा गया, तब उस समय हमारे भाजपा नेता उसके घर गए थे और उसके परिवार को मुआवजा दिया था। इसकी क्या वजह थी? यह आप खुद समझ सकते हैं।’’ जब उनसे पूछा गया कि क्या एक आतंकवादी को ‘‘शहीद’’ कहना सही है, तो कबीर ने कहा कि किसी व्यक्ति के लिए इस्तेमाल की जाने वाली शब्दावली अलग विषय है।
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उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारी अपनी बात है। हम किसी को शहीद कहें, मारा गया कहें या कोई और शब्द इस्तेमाल करें—यह एक अलग बात है। हमें आजादी है। हम एक लोकतांत्रिक देश में रहते हैं।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या बुरहान वानी को शहीद कहना उनकी निजी राय है, कबीर ने सहमति जताते हुए कहा, ‘‘हां, यह मेरी निजी राय है।’’ कबीर ने यह भी दावा किया कि जब पीडीपी भाजपा के साथ गठबंधन सरकार में थी, तब उसने भाजपा को पूरी तरह से अपने चंगुल में रखा हुआ था।
उन्होंने कहा, ‘‘2014 में जब जम्मू-कश्मीर में भाजपा हमारे साथ गठबंधन सरकार में थी, तब महबूबा मुफ्ती ने उन्हें सरकार में सिर उठाने का मौका तक नहीं दिया। आप जानते हैं कि बुरहान वानी के मामले में क्या हुआ। आप यह भी जानते हैं कि नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा बेची गई बिजली परियोजना पर उस समय कोई सवाल नहीं उठा सका।’’ उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भाजपा को अनुच्छेद 370 को हटाने की बात तो दूर, उस पर चर्चा तक करने की इजाजत नहीं दी थी। पीडीपी नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा ने उनकी पार्टी की पीठ में छुरा घोंपा और सरकार गिरा दी।
इस बीच, पीडीपी ने इस पूरे विवाद से खुद को अलग करने की कोशिश की है। पार्टी प्रवक्ता वीरेंद्र सिंह सोनू ने कहा कि कबीर पार्टी के एक नेता हैं, न कि कोई पदाधिकारी। उन्होंने कहा, ‘‘यह उनकी निजी राय है, पार्टी का आधिकारिक रुख नहीं।’’ वहीं, पीडीपी के किश्तवाड़ जिलाध्यक्ष शेख नासिर ने कहा कि कबीर ने पार्टी कार्यक्रम के दौरान कोई विवादित बात नहीं कही थी, बल्कि बाद में पत्रकारों से अलग से बातचीत में यह टिप्पणी की थी। दूसरी ओर, भाजपा नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने पीडीपी की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कबीर की गिरफ्तारी को सही ठहराया है।
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