ओलंपिक 2028 से पहले हॉकी टीम में होंगे बड़े बदलाव:इंडियन टीम के चीफ सेलेक्टर आरपी सिंह बोले- एशिया में हम चैंपियन
एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हॉकी इंडिया चयन समिति के चेयरमैन डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि ओलंपिक में यूरोपियन स्टाइल की हॉकी देखने को मिलेगी, जहां एक गलती भी भारी पड़ सकती है। यही वजह है कि टीम अब केवल नाम के आधार पर नहीं, बल्कि सख्त फिटनेस और प्रदर्शन के मानकों पर ही खिलाड़ियों को जगह मिलेगी। मानकों पर खरे न उतरने वाले खिलाड़ियों की जगह नए और युवा चेहरों को मौका दिया जाएगा। हम एशिया में चैंपियन हैं। अब यूरोप की बारी है। ओलंपिक की तैयारी में हम कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। चयन प्रक्रिया में नया नियम और निगरानी डॉ. आरपी सिंह ने शुक्रवार को लखनऊ के केडी सिंह बाबू स्टेडियम में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसके बाद दैनिक भास्कर से बताया कि खिलाड़ियों के प्रदर्शन का सटीक आकलन करने के लिए चयन समिति का एक सदस्य अब भारतीय टीम के हर विदेशी या घरेलू दौरे पर साथ रहेगा। यह सदस्य मैदान पर खिलाड़ियों के खेल और फिटनेस पर नजर रखेगा और अपनी रिपोर्ट सीधे चयन समिति को सौंपेगा। इस नए प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है, जिससे चयन प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा सकेगा। एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के लिए बनी टीम पंजाब में 27 अक्तूबर से 5 नवंबर तक आयोजित होने वाली इस ट्रॉफी के लिए मुख्य टीम का कैंप 18 अक्तूबर से जालंधर में शुरू होगा। न्यूजीलैंड दौरे के लिए एक अलग 'इंडिया-ए' टीम बनाई जा रही है। इसके लिए 11 अक्तूबर से बेंगलुरु में 33 खिलाड़ियों का कोर ग्रुप कैंप आयोजित किया जाएगा। 11 अक्तूबर से झांसी में शुरू हो रही सीनियर नेशनल हॉकी चैंपियनशिप में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी राष्ट्रीय कैंप में जगह बनाने का अवसर दिया जाएगा। हॉकी इंडिया के चुनाव और नई कार्यकारिणी हॉकी इंडिया की नई कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। स्पोर्ट्स बिल के कारण चुनाव प्रक्रिया में कुछ समय लगा, लेकिन अब सभी राज्यों से 15 अक्तूबर तक पुरुष और महिला प्रतिनिधियों के नाम मांगे गए हैं। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद 5 दिसंबर तक हॉकी इंडिया की नई कार्यकारिणी की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी।
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रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में एक करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी कुल आवासीय बिक्री में 50 फीसदी रही। रोजगार के बड़े केंद्र होने के कारण इन शहरों में अतिरिक्त मांग का असर पहले दिखाई दे सकता है।
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