SSC Selection Post 14th Answer Key 2026 for 3003 Post
SSC Selection Post Recruitment 2026: Answer Key for 3003 Post Post Update Date: 09-10-2026 Short Description : SSC Selection Post 14th Admit Card 2026 Released on the official website of the Staff Selection Commission. Candidates who applied for this recruitment can download their admit card online. The Exam Date is 16 -26 September 2026 and this ...
मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, केंद्र और दिल्ली पुलिस को मेट्रो और ट्रेनों पर लगी पूर्ण रोक हटाने का SC ने दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र और दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वे शनिवार को दिल्ली में प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शनों से पहले मेट्रो और रेलवे सेवाओं पर लगी पूरी तरह से रोक को हटा लें। कोर्ट ने साफ़ किया कि सुरक्षा उपायों के नाम पर सार्वजनिक परिवहन पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती और इससे लाखों आम नागरिकों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की बेंच ने कहा कि अधिकारी गैर-कानूनी भीड़ को रोकने के लिए ट्रेनों की आवाजाही को रेगुलेट कर सकते हैं, लेकिन पूरे सिस्टम को रोक नहीं सकते। बेंच ने इस बात पर ज़ोर दिया कि दिल्ली के निवासियों के सार्वजनिक सुविधाओं का इस्तेमाल करने और आज़ादी से आने-जाने के अधिकार की भी सुरक्षा ज़रूरी है। बेंच ने कहा कि किसी चीज़ को रोकना और उसे रेगुलेट करना दो अलग-अलग बातें हैं। रेगुलेट तो किया जा सकता है, लेकिन सब कुछ रोक देना बिल्कुल अलग बात है... आप सब कुछ नहीं रोक सकते।
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अदालत ने कहा मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं किया जाता।" अदालत ने समझाया कि अधिकारियों को हालात के हिसाब से कदम उठाने चाहिए, न कि बहुत ज़्यादा पाबंदियां लगानी चाहिए। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा चूंकि आयोजक हमारे सामने नहीं हैं, इसलिए कोर्ट के सामने सीमित मुद्दा यह है कि क्या मेट्रो और ट्रेनों को पूरी तरह से रोकने के फैसले पर फिर से विचार करने की ज़रूरत है। हमारे इस सुझाव पर कि मेट्रो और ट्रेनों पर पूरी तरह रोक लगाने और उन्हें रेगुलेट करने के बीच अंतर है, सॉलिसिटर जनरल ने उचित रूप से सहमति जताई है कि वे रोक पर फिर से विचार करेंगे और मेट्रो ट्रेनों व अन्य ट्रेनों के संचालन की ऐसी रेगुलेटेड व्यवस्था करेंगे जिससे दिल्ली के नागरिकों को कोई असुविधा न हो, साथ ही आनुपातिकता के सिद्धांत का भी ध्यान रखा जाएगा।
आदेश में यह भी कहा गया भरोसे के आधार पर, हम निर्देश देते हैं कि मेट्रो और दूसरी ट्रेनों के चलने के बारे में सोच-समझकर फ़ैसला लिया जाए, ताकि लोगों को कोई परेशानी न हो और इसकी व्यापक जानकारी भी दी जाए। इसी तरह, नई एडवाइज़री जारी की जाए ताकि शहर में आने-जाने के दौरान जनता को कोई तकलीफ़ न हो।
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केंद्र पाबंदियों पर फिर से विचार करने को तैयार
कोर्ट ने यह आदेश तब दिया जब केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, बेंच की चिंताओं (कि क्या पाबंदियां ज़रूरत के हिसाब से हैं) के जवाब में पाबंदियों पर फिर से विचार करने को तैयार हो गए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि मेट्रो और दूसरी ट्रेनों को रेगुलेटेड तरीके से चलाने की इजाज़त देने के बारे में सोच-समझकर फ़ैसला लिया जाए, ताकि यात्रियों को कोई परेशानी न हो। बदली हुई एडवाइज़री का भी बड़े पैमाने पर प्रचार किया जाना चाहिए।
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