57 दिल्ली मेट्रो बंद होने पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी, कहा- आम लोगों का परिवहन रोकना मंजूर नहीं
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी का बड़ा प्रदर्शन होने वाले है, जिसे देखते हुए दिल्ली मेट्रो ने 57 मेट्रो स्टेशन को बंद करने का फैसला किया है. मामले में दायर की गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों को बंद करने के फैसले पर चिंता जताई. वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में सवाल उठाते हुए कहा कि सभी ट्रेनें रद्द हैं, मेट्रो स्टेशन बंद किए जा रहे हैं. आखिर मेरे देश में क्या हो रहा है?
बता दें, शनिवार को होने वाले सीजेपी का प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ है. सीजेपी उनका इस्तीफा मांग रही है. दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं की वजह से प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है.
JNU ने प्रोफेसर-कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजाम को बर्खास्त किया:यूनिवर्सिटी ने स्टूडेंट से यौन उत्पीड़न मामले में दोषी पाया; आंतरिक समिति की सिफारिश पर कार्रवाई
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) ने प्रोफेसर और इनर मणिपुर से कांग्रेस लोकसभा सांसद डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजाम को बर्खास्त कर दिया है। यूनिवर्सिटी ने उन्हें छात्राओं के यौन उत्पीड़न का दोषी पाया। बर्खास्तगी तत्काल प्रभाव से लागू की गई है। यह कार्रवाई यूनिवर्सिटी की इंटरनल कमेटी (IC) की जांच के निष्कर्षों के आधार पर की गई। IC ने बिमोल अकोइजाम के खिलाफ बड़ी सजा की सिफारिश की थी। 11 छात्राओं ने यौन उत्पीड़न का आरोप अकोइजाम को हटाने की कार्रवाई से पहले दिल्ली कमीशन फॉर विमेन (DCW) ने मामले पर JNU प्रशासन से रिपोर्ट मांगी थी। आयोग ने 11 छात्राओं के आरोपों पर सितंबर में यह रिपोर्ट मांगी थी। छात्राओं ने आरोप लगाया था कि उन्होंने मई 2026 में JNU की वाइस चांसलर संतिश्री धुलिपुड़ी पंडित को प्रोफेसर के खिलाफ शिकायत दी थी। छात्राओं का आरोप था कि उस समय उनकी शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं की गई। गुप्ता ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से तीन दिन में रिपोर्ट देने को कहा था। 2023 मे मणिपुर हिंसा के बाद सक्रिय अंगोम बिमोल अकोइजाम जेएनयू (JNU) के प्रोफेसर और सामाजिक कार्यकर्ता रहे हैं। वे मणिपुर के रहने वाले हैं और राज्य के सामाजिक व मानवाधिकार मुद्दों पर लंबे समय से मुखर आवाज रहे हैं। 2023 में मणिपुर हिंसा के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में वे कांग्रेस पार्टी के टिकट पर 'इनर मणिपुर' सीट से लड़े और भाजपा उम्मीदवार को 1 लाख से अधिक वोटों से हराकर सांसद चुने गए। संसद में वे मणिपुर में शांति बहाली, पीड़ितों के पुनर्वास और पूर्वोत्तर के अधिकारों पर अपने तीखे व प्रभावशाली भाषणों के लिए जाने जाते हैं।
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