वैश्विक व्यापार नियमों के बदलते दौर में मजबूत कानूनी सोच की जरूरत: वाणिज्य सचिव
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा है कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था तेजी से बदल रही है और सस्टेनेबिलिटी आधारित व्यापार उपायों तथा डिजिटल व्यापार के बढ़ते प्रभाव के कारण स्थापित नियमों को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में भारत को मजबूत और गहन कानूनी सोच विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि वह बदलते वैश्विक व्यापार ढांचे को केवल समझे ही नहीं बल्कि उसे आकार देने में भी भूमिका निभा सके।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि अग्रवाल ने सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ (सीटीआईएल) की 9वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने सरकार, उद्योग जगत और व्यापार कानून समुदाय के बीच विश्वास स्थापित करने में सीटीआईएल की भूमिका की सराहना की।
उन्होंने कहा कि सीटीआईएल ने वाणिज्य विभाग को कानूनी विश्लेषण, मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) वार्ताओं, विवाद निपटान प्रक्रियाओं तथा संस्थागत ज्ञान निर्माण में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा ने कहा कि भारत को ऐसे संस्थानों की आवश्यकता है जो केवल अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कानून में हो रहे बदलावों का अनुसरण न करें, बल्कि उन्हें प्रभावित और आकार देने की क्षमता भी रखते हों।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय निवेश कानून समय के साथ विकसित हुआ है। शुरुआती दौर में इसका प्रमुख उद्देश्य विदेशी निवेश की सुरक्षा था, लेकिन अब इसमें देशों की नियामकीय स्वतंत्रता को भी अधिक महत्व दिया जा रहा है।
न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा कि यह क्षेत्र अब ऐसे चरण में प्रवेश कर रहा है जहां संस्थागत ढांचे, वैधता और निवेश तथा सार्वजनिक नीति के बीच संतुलन जैसे प्रश्न अधिक महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। उन्होंने निवेश संरक्षण और सरकारों के नियामकीय अधिकारों के बीच संतुलन कायम रखने वाले टिकाऊ अंतरराष्ट्रीय निवेश कानून ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया।
मंत्रालय के अनुसार, सीटीआईएल ने अब तक 4,000 से अधिक कानूनी राय प्रदान की हैं। इसके अलावा उसने लगभग 10 मुक्त व्यापार समझौतों की वार्ताओं में भाग लिया है और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) से जुड़े कई मुद्दों, अधिसूचनाओं, प्रस्तुतियों और विवाद निपटान प्रक्रियाओं में योगदान दिया है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव यशवीर सिंह ने कहा कि सीटीआईएल ने भारत के प्रमुख व्यापारिक समझौतों, डब्ल्यूटीओ चर्चाओं और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कूटनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में संगठन ने जी20, ब्रिक्स, मुक्त व्यापार समझौतों और डब्ल्यूटीओ वार्ताओं सहित कई महत्वपूर्ण बहुपक्षीय एवं द्विपक्षीय मंचों पर भारत की भागीदारी को कानूनी और रणनीतिक समर्थन प्रदान किया है।
यशवीर सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि सीटीआईएल ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कानून के क्षेत्र में मानव संसाधन विकास और क्षमता निर्माण में भी योगदान दिया है, जिससे भारत की व्यापार वार्ता क्षमता और नीति निर्माण को मजबूती मिली है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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West Bengal: वोटर लिस्ट से नाम कटने के बाद SC पहुंचे 5 लोग, अपीलों पर जल्द फैसले की मांग
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट से बाहर किए गए पांच लोगों ने अदालत में याचिका दायर कर अपीलीय न्यायाधिकरणों से उनके मामलों पर जल्द फैसला कराने की मांग की है. इन लोगों का कहना है कि अगर उनकी अपीलों का समय रहते निपटारा नहीं हुआ, तो वे कोलकाता और हावड़ा में होने वाले आगामी नगर निकाय चुनावों में मतदान करने से वंचित रह सकते हैं.
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब राज्य में नवंबर के आखिरी सप्ताह में नगर निगम चुनाव होने की संभावना है. ऐसे में मतदाता सूची से जुड़े विवादों का समय पर समाधान करना जरूरी माना जा रहा है.
बिना स्पष्ट जानकारी नाम हटाने का आरोप
सुप्रीम कोर्ट में यह आवेदन पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े पहले से चल रहे मामले में दाखिल किया गया है. आवेदकों की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण पेश हुए हैं.
आवेदकों का आरोप है कि उनके नाम मतदाता सूची से हटाने से पहले उन्हें उचित सूचना नहीं दी गई. उनका कहना है कि नाम हटाने के फैसले के पीछे के कारण भी उन्हें स्पष्ट रूप से नहीं बताए गए.
इन लोगों के मुताबिक, उन्होंने मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ा अपना गणना फॉर्म सही तरीके से भरा था. इसके बाद उनके नाम प्रारंभिक मतदाता सूची में भी शामिल थे. हालांकि, जनवरी में उन्हें कथित तार्किक विसंगतियों के आधार पर सुनवाई के लिए बुलाया गया.
आवेदकों का कहना है कि वे सुनवाई में शामिल हुए थे, लेकिन इसके बावजूद उनके मामलों को विचाराधीन रखा गया. बाद में अप्रैल में उन्हें पता चला कि उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं.
अपीलीय न्यायाधिकरण में लंबित हैं मामले
आवेदकों ने दावा किया है कि संबंधित अधिकारियों ने उन्हें ऐसा स्पष्ट आदेश नहीं दिया, जिसमें नाम हटाने के कारणों का विस्तार से उल्लेख हो. इसी वजह से उन्होंने अप्रैल के दूसरे सप्ताह में अपीलीय न्यायाधिकरणों के सामने अपनी अपीलें दाखिल कीं.
उनकी मांग है कि इन अपीलों पर जल्द सुनवाई की जाए, ताकि पात्र मतदाताओं को आगामी चुनावों में अपना वोट डालने का अवसर मिल सके.
याचिका में यह भी कहा गया है कि पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से कथित तार्किक विसंगतियों की पहचान के लिए स्पष्ट मानदंड तय करने वाला कोई आदेश जारी नहीं किया गया. आवेदकों ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए हैं.
1.70 लाख अपीलों का किया गया उल्लेख
आवेदन में निर्वाचन आयोग के हलफनामों का हवाला देते हुए कहा गया है कि कोलकाता और हावड़ा में करीब 1.70 लाख अपीलें लंबित हैं. इन दोनों शहरों में आगामी नगर निकाय चुनाव होने हैं. बड़ी संख्या में मामले लंबित रहने से उन लोगों की चिंता बढ़ सकती है, जो मतदाता सूची में अपना नाम दोबारा शामिल कराने के लिए कानूनी रास्ता अपना रहे हैं.
आवेदकों ने विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग भी की है. वे चाहते हैं कि SIR की निर्णय प्रक्रिया और इस प्रक्रिया को शुरू करने से संबंधित मूल रिकॉर्ड की जांच की जाए.
चुनाव से पहले फैसले की उम्मीद
आवेदन में यह मुद्दा भी उठाया गया है कि SIR के बाद मतदाता सूची में दोबारा नाम जोड़ने की प्रक्रिया उन लोगों को राहत नहीं दे सकती, जिनकी अपीलें पहले से न्यायाधिकरणों में लंबित हैं. ऐसे में केवल दूसरी प्रक्रिया पर निर्भर रहने से इन मतदाताओं की समस्या का समाधान नहीं होगा. आवेदकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान भी कुछ मतदाता अपने नाम हटाए जाने के कारण मतदान नहीं कर पाए थे. अब वे नहीं चाहते कि आगामी नगर निकाय चुनावों में भी ऐसी स्थिति दोहराई जाए.
फिलहाल इस आवेदन में की गई मांगों और आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ दायर अपीलों का निपटारा कितनी जल्दी होता है और पात्र मतदाताओं को चुनाव से पहले राहत मिल पाती है या नहीं.
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