West Bengal: वोटर लिस्ट से नाम कटने के बाद SC पहुंचे 5 लोग, अपीलों पर जल्द फैसले की मांग
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट से बाहर किए गए पांच लोगों ने अदालत में याचिका दायर कर अपीलीय न्यायाधिकरणों से उनके मामलों पर जल्द फैसला कराने की मांग की है. इन लोगों का कहना है कि अगर उनकी अपीलों का समय रहते निपटारा नहीं हुआ, तो वे कोलकाता और हावड़ा में होने वाले आगामी नगर निकाय चुनावों में मतदान करने से वंचित रह सकते हैं.
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब राज्य में नवंबर के आखिरी सप्ताह में नगर निगम चुनाव होने की संभावना है. ऐसे में मतदाता सूची से जुड़े विवादों का समय पर समाधान करना जरूरी माना जा रहा है.
बिना स्पष्ट जानकारी नाम हटाने का आरोप
सुप्रीम कोर्ट में यह आवेदन पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े पहले से चल रहे मामले में दाखिल किया गया है. आवेदकों की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण पेश हुए हैं.
आवेदकों का आरोप है कि उनके नाम मतदाता सूची से हटाने से पहले उन्हें उचित सूचना नहीं दी गई. उनका कहना है कि नाम हटाने के फैसले के पीछे के कारण भी उन्हें स्पष्ट रूप से नहीं बताए गए.
इन लोगों के मुताबिक, उन्होंने मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ा अपना गणना फॉर्म सही तरीके से भरा था. इसके बाद उनके नाम प्रारंभिक मतदाता सूची में भी शामिल थे. हालांकि, जनवरी में उन्हें कथित तार्किक विसंगतियों के आधार पर सुनवाई के लिए बुलाया गया.
आवेदकों का कहना है कि वे सुनवाई में शामिल हुए थे, लेकिन इसके बावजूद उनके मामलों को विचाराधीन रखा गया. बाद में अप्रैल में उन्हें पता चला कि उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं.
अपीलीय न्यायाधिकरण में लंबित हैं मामले
आवेदकों ने दावा किया है कि संबंधित अधिकारियों ने उन्हें ऐसा स्पष्ट आदेश नहीं दिया, जिसमें नाम हटाने के कारणों का विस्तार से उल्लेख हो. इसी वजह से उन्होंने अप्रैल के दूसरे सप्ताह में अपीलीय न्यायाधिकरणों के सामने अपनी अपीलें दाखिल कीं.
उनकी मांग है कि इन अपीलों पर जल्द सुनवाई की जाए, ताकि पात्र मतदाताओं को आगामी चुनावों में अपना वोट डालने का अवसर मिल सके.
याचिका में यह भी कहा गया है कि पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से कथित तार्किक विसंगतियों की पहचान के लिए स्पष्ट मानदंड तय करने वाला कोई आदेश जारी नहीं किया गया. आवेदकों ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए हैं.
1.70 लाख अपीलों का किया गया उल्लेख
आवेदन में निर्वाचन आयोग के हलफनामों का हवाला देते हुए कहा गया है कि कोलकाता और हावड़ा में करीब 1.70 लाख अपीलें लंबित हैं. इन दोनों शहरों में आगामी नगर निकाय चुनाव होने हैं. बड़ी संख्या में मामले लंबित रहने से उन लोगों की चिंता बढ़ सकती है, जो मतदाता सूची में अपना नाम दोबारा शामिल कराने के लिए कानूनी रास्ता अपना रहे हैं.
आवेदकों ने विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग भी की है. वे चाहते हैं कि SIR की निर्णय प्रक्रिया और इस प्रक्रिया को शुरू करने से संबंधित मूल रिकॉर्ड की जांच की जाए.
चुनाव से पहले फैसले की उम्मीद
आवेदन में यह मुद्दा भी उठाया गया है कि SIR के बाद मतदाता सूची में दोबारा नाम जोड़ने की प्रक्रिया उन लोगों को राहत नहीं दे सकती, जिनकी अपीलें पहले से न्यायाधिकरणों में लंबित हैं. ऐसे में केवल दूसरी प्रक्रिया पर निर्भर रहने से इन मतदाताओं की समस्या का समाधान नहीं होगा. आवेदकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान भी कुछ मतदाता अपने नाम हटाए जाने के कारण मतदान नहीं कर पाए थे. अब वे नहीं चाहते कि आगामी नगर निकाय चुनावों में भी ऐसी स्थिति दोहराई जाए.
फिलहाल इस आवेदन में की गई मांगों और आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ दायर अपीलों का निपटारा कितनी जल्दी होता है और पात्र मतदाताओं को चुनाव से पहले राहत मिल पाती है या नहीं.
नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम से जाना जाएगा जेवर हवाई अड्डा, सीएम योगी का बड़ा ऐलान
उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले में बन रहे जेवर एयरपोर्ट का नाम बदलने का फैसला लिया गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की कैबिनेट बैठक में एयरपोर्ट का नाम बदलने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है.
नरेंद्र मोदी के नाम पर होगा जेवर एयरपोर्ट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, जेवर हवाई अड्डे का नाम अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखने का प्रस्ताव पारित किया गया है. इसके तहत एयरपोर्ट का नाम ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ रखने को मंजूरी दी गई है.
कैबिनेट बैठक में लिया गया फैसला
राजधानी लखनऊ में कैबिनेट बैठक समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री ने प्रेस वार्ता में यह घोषणा की. उन्होंने बताया कि बैठक में जेवर एयरपोर्ट का नाम बदलने के प्रस्ताव पर सहमति बनी है. इस फैसले के साथ ही हवाई अड्डे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से पहचान देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
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