SC पहुंचा ट्रेन-मेट्रो में पाबंदी का मामला, जज ने कहा- हमें सभी के हितों का देखना है
राष्ट्रीय राजधानी में शनिवार को प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन के मद्देनजर मेट्रो और रेल सेवाओं को रोके जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी, प्रशांत भूषण, गोपाल शंकरनारायणन और वृंदा ग्रोवर पेश हुए। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि शहर में यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप कर दी गई है और नागरिक अधिकारों पर पाबंदी लगाई जा रही है। इस पर पीठ ने टिप्पणी की कि अदालत को पहले यह देखना होगा कि प्रस्तावित प्रदर्शन को विधिवत कानूनी मंजूरी मिली है या नहीं। वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क रखा कि सिर्फ आशंकाओं के आधार पर पूरी व्यवस्था बंद नहीं की जा सकती। अदालत ने आयोजकों की पहचान और अनुमानित भीड़ का ब्योरा मांगते हुए कहा कि आंदोलन के अधिकार के साथ-साथ आम जनता की आवाजाही और सुविधाओं का ध्यान रखना भी जरूरी है। पीठ ने पुलिस द्वारा अनुमति खारिज किए जाने संबंधी आदेश की प्रति तलब करते हुए स्पष्ट किया कि अदालत दोनों पक्षों के हितों में संतुलन बनाकर ही कोई निर्देश जारी करेगी। वहीं, अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता केवल पूर्व-निर्धारित स्थल पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की अनुमति चाहते हैं।
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इंडियन रेलवे ने 10 अक्टूबर को 10 घंटे के दौरान दिल्ली के दो बड़े स्टेशनों पर आने वाली मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द करने का आदेश दिया है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार रात से 57 मेट्रो स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट बंद करने का अनुरोध किया है। स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शन से पहले की गई सख्ती के बीच ट्रांसपोर्ट से जुड़ी ये पाबंदियां बढ़ाई गई हैं।
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रेलवे द्वारा रद्द की गई ट्रेनों में वे मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल हैं, जिन्हें शनिवार सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली और हज़रत निज़ामुद्दीन स्टेशनों पर पहुँचना था। 9 अक्टूबर के रेलवे आदेश के अनुसार, जो ट्रेनें शुक्रवार को दोपहर 2 बजे के बाद अपने शुरुआती स्टेशनों से चलेंगी और उस समय-सीमा के दौरान किसी भी स्टेशन पर पहुँचने वाली होंगी, उन्हें उनके शुरुआती स्टेशन पर ही रद्द कर दिया जाएगा। रेलवे ने स्टेशनों के आसपास भारी ट्रैफिक जाम की आशंका को इसका कारण बताया है। ये पाबंदियां कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और कई छात्र व युवा संगठनों द्वारा SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जंतर-मंतर पर बुलाए गए विरोध प्रदर्शन से पहले लगाई गई हैं। मेट्रो से जुड़ी पाबंदियों के लिए, दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ट्रांसपोर्ट रेंज) के ऑफिस से 8 अक्टूबर को जारी एक पत्र में साफ तौर पर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर और नई दिल्ली जिले की अन्य जगहों पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शनों का ज़िक्र किया गया है।
Burhan Wani को शहीद बताने वाले PDP नेता Abdul Kabir किश्तवाड़ में गिरफ्तार
जम्मू, नौ अक्टूबर किश्तवाड़ जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हिजबुल मुजाहिद्दीन कमांडर बुरहान वानी को ‘शहीद’ बताने वाले पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेता अब्दुल कबीर को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। किश्तवाड़ के उपायुक्त पंकज शर्मा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और इस संबंध में कानूनी कार्रवाई जारी है।’’ इससे पहले कबीर ने बुरहान वानी को ‘‘शहीद’’ कहकर नया विवाद खड़ा कर दिया था।
इसके साथ ही उन्होंने भाजपा के कुछ नेताओं पर मारे गए आतंकवादी के घर जाने और उसके परिवार को आर्थिक मदद देने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए थे। कश्मीर घाटी में कभी आतंकवाद का चेहरा रहा बुरहान वानी आठ जुलाई 2016 को दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के कोकरनाग इलाके में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया था। कबीर ने बृहस्पतिवार को यहां एक पार्टी कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से कहा, ‘‘बुरहान वानी के साथ जो हुआ मैंने उस पर कोई खास बात नहीं की थी।
मेरे कहने का मतलब यह था कि जब बुरहान वानी शहीद हुआ या मारा गया, तब उस समय हमारे भाजपा नेता उसके घर गए थे और उसके परिवार को मुआवजा दिया था। इसकी क्या वजह थी? यह आप खुद समझ सकते हैं।’’ जब उनसे पूछा गया कि क्या एक आतंकवादी को ‘‘शहीद’’ कहना सही है, तो कबीर ने कहा कि किसी व्यक्ति के लिए इस्तेमाल की जाने वाली शब्दावली अलग विषय है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारी अपनी बात है। हम किसी को शहीद कहें, मारा गया कहें या कोई और शब्द इस्तेमाल करें—यह एक अलग बात है। हमें आजादी है।
हम एक लोकतांत्रिक देश में रहते हैं।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या बुरहान वानी को शहीद कहना उनकी निजी राय है, कबीर ने सहमति जताते हुए कहा, ‘‘हां, यह मेरी निजी राय है।’’ कबीर ने यह भी दावा किया कि जब पीडीपी भाजपा के साथ गठबंधन सरकार में थी, तब उसने भाजपा को पूरी तरह से अपने चंगुल में रखा हुआ था। उन्होंने कहा, ‘‘2014 में जब जम्मू-कश्मीर में भाजपा हमारे साथ गठबंधन सरकार में थी, तब महबूबा मुफ्ती ने उन्हें सरकार में सिर उठाने का मौका तक नहीं दिया। आप जानते हैं कि बुरहान वानी के मामले में क्या हुआ।
आप यह भी जानते हैं कि नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा बेची गई बिजली परियोजना पर उस समय कोई सवाल नहीं उठा सका।’’ उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भाजपा को अनुच्छेद 370 को हटाने की बात तो दूर, उस पर चर्चा तक करने की इजाजत नहीं दी थी। पीडीपी नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा ने उनकी पार्टी की पीठ में छुरा घोंपा और सरकार गिरा दी। इस बीच, पीडीपी ने इस पूरे विवाद से खुद को अलग करने की कोशिश की है।
पार्टी प्रवक्ता वीरेंद्र सिंह सोनू ने कहा कि कबीर पार्टी के एक नेता हैं, न कि कोई पदाधिकारी। उन्होंने कहा, ‘‘यह उनकी निजी राय है, पार्टी का आधिकारिक रुख नहीं।’’ वहीं, पीडीपी के किश्तवाड़ जिलाध्यक्ष शेख नासिर ने कहा कि कबीर ने पार्टी कार्यक्रम के दौरान कोई विवादित बात नहीं कही थी, बल्कि बाद में पत्रकारों से अलग से बातचीत में यह टिप्पणी की थी।
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