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एलन मस्क की संपत्ति एक बार फिर 1 ट्रिलियन डॉलर से नीचे, स्पेसएक्स और टेस्ला शेयरों में गिरावट का असर

नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल एलन मस्क एक बार फिर ट्रिलियन डॉलर क्लब से बाहर हो गए हैं। स्पेसएक्स और टेस्ला के शेयरों में तेज गिरावट के चलते उनकी संपत्ति एक ही कारोबारी सत्र में 36.4 अरब डॉलर घट गई।

फोर्ब्स के अनुसार, गुरुवार (8 अक्टूबर) को मस्क की कुल संपत्ति घटकर 991.6 अरब डॉलर रह गई। उल्लेखनीय है कि उन्होंने केवल तीन दिन पहले ही दोबारा 1 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा पार किया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, स्पेसएक्स के शेयरों में लगभग 3.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों के बीच इस बात को लेकर चिंता बढ़ी कि कंपनी एनवीडिया के चिप्स खरीदने के लिए 40 अरब डॉलर जुटाने की योजना बना सकती है।

वहीं टेस्ला के शेयरों में भी 2 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी आई, जिससे मस्क की संपत्ति पर और दबाव बढ़ा।

मस्क ने पहली बार जून में 1 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति का आंकड़ा पार किया था, जब स्पेसएक्स सार्वजनिक बाजार में सूचीबद्ध हुई थी। उस समय उनकी अनुमानित संपत्ति लगभग 1.45 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई थी।

टेक्नोलॉजी शेयरों में आई व्यापक गिरावट का असर अन्य अरबपतियों पर भी पड़ा। एनवीडिया के सीईओ जेन्सन हुआंग और ओरेकल के सह-संस्थापक लैरी एलिसन की कुल संपत्ति में एक ही दिन में लगभग 15 अरब डॉलर की कमी आई।

हुआंग की अनुमानित संपत्ति 6.1 अरब डॉलर घटकर 199.3 अरब डॉलर रह गई, जिससे वह 200 अरब डॉलर के स्तर से नीचे आ गए। वहीं लैरी एलिसन की संपत्ति 8.9 अरब डॉलर घटकर 176.8 अरब डॉलर पर पहुंच गई।

फोर्ब्स की रियल-टाइम अरबपति सूची में हुआंग सातवें और एलिसन आठवें स्थान पर बने हुए हैं, हालांकि दोनों की संपत्ति में गुरुवार को उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।

बाजार में कमजोरी का असर अमेरिकी सूचकांकों पर भी दिखाई दिया। नैस्डैक-100 में 1.4 प्रतिशत की गिरावट आई, जो पिछले सात सप्ताह की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट रही। वहीं एसएंडपी 500 सूचकांक 0.5 प्रतिशत कमजोर हुआ।

विश्लेषकों के अनुसार, टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े शेयरों में बिकवाली बढ़ने के कारण निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई।

हालांकि भारतीय बाजार में शुक्रवार को आईटी शेयरों में मजबूती देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में निफ्टी आईटी सूचकांक 3 प्रतिशत से अधिक चढ़कर 28,600 के स्तर के पार पहुंच गया।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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AI ने दिलाई TCS को रफ्तार, शेयर 5% से ज्यादा उछलकर ₹2,193 पर पहुंचा, Infosys-Wipro-HCL भी चढ़े

TCS Share Price Today: भारतीय IT कंपनी के शेयरों में शुक्रवार 9 अक्टूबर को बड़ी तेजी देखी गई. ऐसा देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर एक्सपोर्टर कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के AI रेवेन्यू में तेज बढ़ोतरी की वजह से हुआ. इस तेजी से साफ पता चलता है कि इन्वेस्टर पारंपरिक IT सर्विसेज में मंदी के बजाय नई टेक्नोलॉजी को अपनाने पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं.

TCS का स्टॉक कितना बढ़ा?

इस सेक्टर में तेजी के सबसे बड़े ड्राइवर TCS के शेयर थे. ट्रेडिंग के दौरान, स्टॉक 5.6% बढ़कर ₹2,193 के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया. इंट्राडे हाई का मतलब है उस दिन स्टॉक की सबसे ज्यादा कीमत. सुबह 10:18 बजे तक, स्टॉक 5.2% बढ़कर ₹2,183 पर ट्रेड कर रहा था. TCS में इस तेजी ने मार्केट सेंटीमेंट को हवा दी, जिससे निफ्टी IT इंडेक्स 2.5% ऊपर चला गया.

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दूसरी IT कंपनियों को भी सपोर्ट मिला

TCS की बढ़त का असर पूरे सेक्टर पर पड़ा. सुबह की ट्रेडिंग में विप्रो, इंफोसिस और HCL टेक्नोलॉजीज के शेयर 1.5% से 3% तक बढ़त के साथ दिखे. इन्वेस्टर अब जेनरेटिव AI के जमाने में इन लीडिंग इंडियन टेक कंपनियों की ग्रोथ की संभावनाओं का फिर से मूल्यांकन कर रहे हैं.

AI ग्रोथ का नया इंजन बना

मार्केट की खुशी का मुख्य कारण TCS का AI से जुड़ा परफॉर्मेंस है. जुलाई-सितंबर तिमाही में, कंपनी का सालाना AI रेवेन्यू पिछली तिमाही की तुलना में लगभग 20% बढ़कर $3.1 बिलियन तक पहुंच गया. सालाना रेवेन्यू का मतलब है पूरे साल में एक तिमाही की कमाई का कैलकुलेशन. यह आंकड़ा दिखाता है कि दुनिया भर की कंपनियां अपने ऑपरेशन में मशीन लर्निंग और ऑटोमेशन को इंटीग्रेट करने के लिए AI-बेस्ड सर्विसेज़ की मांग तेजी से कर रही हैं.

एनालिस्ट क्या कहते हैं?

इंडस्ट्री एनालिस्ट के अनुसार, ये आंकड़े साबित करते हैं कि पिछले कुछ सालों में भारतीय कंपनियों द्वारा क्लाउड और AI क्षमताओं में किए गए भारी इन्वेस्टमेंट का फायदा मिल रहा है. इन नई टेक्नोलॉजी से TCS का भारी रेवेन्यू दूसरी घरेलू सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए एक मॉडल बन सकता है. इसका मतलब है कि भारतीय IT कंपनियां पुराने मेंटेनेंस के काम से आगे बढ़कर ज्यादा वैल्यू वाली टेक कंसल्टिंग की ओर बढ़ सकती हैं.

लेकिन पुराना बिजनेस अभी भी सुस्त है

अर्निंग्स रिपोर्ट में तस्वीर के दो पहलू दिखाए गए हैं. जहां AI सेगमेंट तेजी से बढ़ा, वहीं कंपनी का पुराना बिजनेस सतर्क रहा. पिछली तिमाही की तुलना में कॉन्स्टेंट करेंसी टर्म्स में टोटल रेवेन्यू सिर्फ 0.5% बढ़ा. कॉन्स्टेंट करेंसी ग्रोथ तब होती है जब डॉलर-रुपये के उतार-चढ़ाव का असर हटाने के बाद असली ग्रोथ को मापा जाता है.

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डील वैल्यू भी कमजोर रही

तिमाही के दौरान कंपनी द्वारा साइन की गई डील्स की टोटल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (TCV) $9.6 बिलियन थी, जबकि पिछले साल इसी समय में यह $10 बिलियन थी. इससे पता चलता है कि ग्लोबल आर्थिक अनिश्चितता के बीच क्लाइंट्स अपने लंबे समय के वैकल्पिक खर्च को लेकर सतर्क हैं.

असली मुश्किल क्या है?

इन अलग-अलग आंकड़ों ने इन्वेस्टर्स के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. असली चुनौती यह है कि ये बड़ी कंपनियां अपनी पुरानी सर्विसेज में गिरावट को कैसे संभालती हैं. जैसे-जैसे AI रूटीन कोडिंग, मेंटेनेंस और सपोर्ट टास्क को ऑटोमेट करता है, पारंपरिक IT सर्विसेज पर बढ़ते प्राइसिंग प्रेशर और घटती डिमांड का रिस्क बढ़ रहा है. लंबे समय तक प्रॉफिट बनाए रखने के लिए, इन कंपनियों को अपने AI बिज़नेस को इतनी तेजी से बढ़ाना होगा कि वे पुराने मॉडल की कमजोरियों को दूर कर सकें.

इन्वेस्टर्स ने किस पर दांव लगाया?

शुक्रवार के मार्केट रिएक्शन से पता चलता है कि वॉल स्ट्रीट और वॉल स्ट्रीट दोनों ही अभी भविष्य पर दांव लगाने को तैयार हैं. इन्वेस्टर्स पुराने रेवेन्यू में मौजूदा मंदी को नजरअंदाज कर रहे हैं और उन कंपनियों को फायदा दे रहे हैं जो टेक्नोलॉजी के नए, ज्यादा महंगे एरिया में सफल हो रही हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी अलग-अलग एनालिस्ट और ब्रोकरेज फर्मों की राय पर आधारित है. इसे निवेश की सलाह न माना जाए. शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा होता है, इसलिए निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.

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