Starlink विवाद: Scindia का Rahul Gandhi पर तंज- Congress को नहीं पता किधर जाना है, Left या Right
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 9 अक्टूबर को भारत में स्टारलिंक को काम करने का लाइसेंस देने के मामले में कांग्रेस पार्टी की राय की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार की पॉलिसी साफ़ है और तीन कंपनियों को लाइसेंस दिए गए हैं। नई दिल्ली में 'इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026' के 10वें एडिशन में बोलते हुए सिंधिया ने कहा कि मैंने पहले ही सरकार का रुख और पॉलिसी साफ़ कर दी है। मैंने आपको बताया है कि तीन कंपनियों के पास लाइसेंस है, सिर्फ़ एक कंपनी के पास नहीं। और जहाँ तक कांग्रेस पार्टी की बात है, तो मुझे समझ नहीं आता। मुझे नहीं लगता कि उन्हें खुद पता है कि वे किस तरफ़ जा रहे हैं—बाएँ या दाएँ। शुरू में उन्हें किसी खास व्यक्ति को लाइसेंस मिलने से दिक्कत थी।
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उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा फ्रेमवर्क को अंतिम रूप दिए जाने के बाद लाइसेंस धारकों को रेवेन्यू-शेयरिंग के आधार पर स्पेक्ट्रम आवंटित किया जाएगा, और सुरक्षा शर्तों को पूरा करने के बाद कंपनियां अलग-अलग अपना कामकाज शुरू कर सकेंगी। उन्होंने कहा कि अब उन्हें एक समस्या है, और वे उस व्यक्ति के साथ हो गए हैं जिसे लाइसेंस नहीं मिल रहा है। इसलिए मुझे नहीं पता कि उन्हें इस बात की स्पष्टता है या नहीं कि वे किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन कांग्रेस के साथ ऐसा ही होता है, और इसकी उम्मीद भी की जा सकती है। हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है। तीन कंपनियों को लाइसेंस मिला है। जब सरकार रेवेन्यू के आधार पर शुल्क प्रणाली तय कर लेगी, तो उन्हें स्पेक्ट्रम आवंटित कर दिया जाएगा, और जब वे अलग-अलग सुरक्षा शर्तों को पूरा कर लेंगी, तो वे अपना कामकाज शुरू कर सकेंगी।
ये टिप्पणियां SpaceX के CEO एलन मस्क द्वारा जताई गई चिंताओं के बाद आई हैं, जिन्होंने भारतीय बाजार में Starlink के प्रवेश से जुड़ी स्थिति को "चिंताजनक" बताया था। राहुल गांधी ने मस्क की पोस्ट का जवाब देते हुए आरोप लगाया था कि पांच साल तक भारतीय नियमों का पालन करने के बावजूद Starlink लाइसेंस हासिल करने में असमर्थ रही है। उन्होंने X पर लिखा कि भारत में आपका स्वागत है, एलन। उस दूसरे व्यक्ति के बारे में जानने तक इंतजार करें। मस्क ने जवाब दिया कि धन्यवाद, राहुल। यह वाकई चिंताजनक है।
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इस सार्वजनिक बातचीत ने रेगुलेटरी प्रक्रिया और मस्क के उस दावे पर बहस तेज कर दी है कि निहित स्वार्थ भारत में Starlink के कामकाज में बाधा डाल रहे हैं। उसी दिन, कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने राहुल गांधी और मस्क के बीच हुई बातचीत पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि गांधी की बातें "बहुत ज़्यादा व्यंग्य" से भरी थीं, जिनका मकसद यह दिखाना था कि कैसे केंद्र सरकार "मोनोपॉली (एकाधिकार) और ओलिगार्की (कुछ लोगों का शासन)" को बढ़ावा देती है। उन्होंने समझाया कि मैंने एलन मस्क और राहुल गांधी, दोनों की टिप्पणियाँ देखी हैं। राहुल गांधी की टिप्पणी बहुत बारीक और गहरे व्यंग्य से भरी है, और दुर्भाग्य से, ज़्यादातर लोग इसका मतलब नहीं समझ पाए। वे कांग्रेस नेता की उस आलोचना का ज़िक्र कर रहे थे जिसमें उन्होंने सरकार की नीतियाँ तय करने वाली प्रभावशाली कॉर्पोरेट कंपनियों पर सवाल उठाए थे।
सबका ध्यान CJP प्रोटेस्ट पर था इधर 15 अक्टूबर से लगने वाले MDR चार्ज पर आ गई बड़ी खबर, जाने अब क्या अपडेट आया?
सरकार यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के ज़रिए बड़े पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने को कुछ महीनों के लिए टालने पर विचार कर रही है। रॉयटर्स समाचार एजेंसी ने इंडस्ट्री के एक एग्जीक्यूटिव और बातचीत की जानकारी रखने वाले एक रेगुलेटरी अधिकारी के हवाले से बताया है कि 15 अक्टूबर से लागू होने वाली फीस अब जनवरी से लागू हो सकती है। मनीकंट्रोल ने सबसे पहले इसके लागू होने में देरी की खबर दी थी। हालांकि प्रभासाक्षी इस जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। नए MDR फ्रेमवर्क के तहत, ₹2,000 से ज़्यादा के UPI पेमेंट लेने वाले मर्चेंट्स को ट्रांज़ैक्शन वैल्यू का 0.4% फ़ीस देनी होगी। पर्सन-टू-पर्सन ट्रांसफ़र पर यह चार्ज नहीं लगेगा, और कुछ खास कैटेगरी में पेमेंट करने पर रकम चाहे कितनी भी हो, ₹5 की फ़्लैट फ़ीस लगेगी।
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इसे शुरू करने में देरी क्यों हो रही है?
रॉयटर्स को जानकारी देने वाले सूत्रों में से एक ने बताया कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया ने इसे शुरू करने में देरी करने के बारे में अभी तक कोई अंतिम फ़ैसला नहीं लिया है। इस पर फ़ैसला अगले कुछ दिनों में लिया जा सकता है। इसे लागू करने में देरी होने से पेमेंट कंपनियों को अपने सिस्टम अपडेट करने का मौका मिलेगा। रॉयटर्स ने अज्ञात सूत्रों के हवाले से बताया कि चूंकि अभी तय की गई तारीख भारत में त्योहारों के मौसम के दौरान पड़ रही है, इसलिए देरी से इससे जुड़ी दिक्कतें भी दूर हो जाएंगी।
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चार्ज का क्या चक्कर है?
संसद ने 11 अगस्त को 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026' को मंज़ूरी दी। इसके तहत 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007' की धारा 10A में बदलाव किया गया, ताकि सरकार को कुछ खास डिजिटल पेमेंट तरीकों पर चार्ज लगाने की इजाज़त मिल सके। पिछले महीने नया फ्रेमवर्क लागू होने के बाद, ₹2,000 से ज़्यादा के UPI पेमेंट पर दो तरह की फीस लगेगी। पहली फीस चार खास कैटेगरी रेलवे, टेलीकॉम सर्विस, इंश्योरेंस और फ्यूल में मर्चेंट को किए जाने वाले पेमेंट पर प्रति ट्रांज़ैक्शन ₹5 का फ्लैट MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) है। दूसरा नियम ₹2,000 से ज़्यादा के दूसरे पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI पेमेंट पर 0.4% का MDR लगाता है, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति ट्रांज़ैक्शन ₹300 है। उदाहरण के लिए, अगर रेलवे टिकट काउंटर, टेलीकॉम ऑपरेटर, इंश्योरेंस कंपनी या फ्यूल आउटलेट पर ₹10,000 का UPI पेमेंट किया जाता है, तो मर्चेंट से ₹5 का चार्ज लिया जाता है। अगर किसी दूसरे मर्चेंट को पेमेंट किया जाता है, तो चार्ज 0.4% यानी ₹40 होता है। UPI पेमेंट की चार कैटेगरी को इस चार्ज से छूट दी गई है – पर्सन-टू-पर्सन (P2P) UPI ट्रांसफर, ₹2,000 तक के P2M पेमेंट, पर्सन-टू-पर्सन मर्चेंट (P2PM) पेमेंट और सभी RuPay डेबिट कार्ड ट्रांज़ैक्शन। P2PM एक ऐसी कैटेगरी है जिसमें छोटे वेंडर शामिल हैं जो UPI QR के ज़रिए सीधे अपने बैंक अकाउंट में महीने में ₹1 लाख तक की रकम पाते हैं।
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