अस्पताल के गायनी OT को बनाया निशाना, देर रात बदमाशों ने मचाया उत्पात, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
जिला अस्पताल के MCH विंग में बने गायनी ओटी में देर रात कुछ अज्ञात बदमाशों ने अंदर घुसकर भारी तोड़फोड़ कर दी। बदमाशों ने ऑपरेशन थिएटर के अंदर रखी जरूरी मशीनों को काफी नुकसान पहुंचाया और वहां लगी बिजली की पूरी वायरिंग भी उखाड़ फेंकी। अस्पताल के इतने मुख्य और संवेदनशील हिस्से में हुई इस बड़ी वारदात से पूरे अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया है।
पीछे के दरवाजे से घुसे बदमाश
मिली जानकारी के मुताबिक, अज्ञात बदमाश गायनी वार्ड के पीछे वाले रास्ते से चोरी-छिपे ओटी के अंदर घुसे थे। अंदर दाखिल होते ही उन्होंने वहां रखे मेडिकल सामान और महंगी मशीनों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। जाते-जाते बदमाशों ने बिजली के सारे तार भी उखाड़ दिए।
अस्पताल के सभी सीसीटीवी कैमरे निकले बंद
वारदात की सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और जांच-पड़ताल शुरू की। लेकिन जब पुलिस ने आरोपियों का सुराग लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज देखने चाहे, तो अस्पताल के सभी कैमरे बंद मिले।
अस्पताल के ही किसी अंदरूनी शख्स पर गहराया शक
जिला अस्पताल के MCH विंग में दिन-रात मरीजों और उनके रिश्तेदारों की भीड़ रहती है। अस्पताल के बिल्कुल बीचों-बीच स्थित ओटी में जाकर इस तरह बेखौफ तोड़फोड़ कर देना सुरक्षा गार्डों की बड़ी लापरवाही को दिखाता है।
सिविल सर्जन ने थाने में दर्ज कराई लिखित शिकायत
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सिविल सर्जन डॉ. दीपारानी इशरानी ने सिटी कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दी है। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और आसपास के रास्तों की पड़ताल कर रही है।
उज्जैन में पितृपक्ष चतुर्दशी पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, गयाकोठा और सिद्धवट पर तर्पण कर रहे लोग
पितृपक्ष में पितरों के निमित्त दान और तर्पण करने का विशेष महत्व है। उज्जैन के गायकोठा और सिद्धनाथ घाट पर इस समय विशेष भीड़ देखने को मिलती है। परिजन अपने पितरों के श्राद्ध कर्म के लिए यहां पर आते हैं। आज चतुर्दशी पर यहां विशेष भीड़ देखने को मिल रही है।
अंकपात मार्ग स्थित गयाकोठा और भैरवगढ़ क्षेत्र स्थित सिद्धनाथ घाट पर तर्पण का विशेष महत्व माना गया है। गायकोठा तीर्थ को गया के समान ही फल देने वाला बताया जाता है। यही वजह है कि सुबह 4 बजे से ही यहां लोगों की भीड़ उमड़ रही है। सभी यहां अपने पूर्वजों की आत्मशांति के लिये पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म कर रहे हैं।
चतुर्दशी श्राद्ध का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं में चतुर्दशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु असामान्य परिस्थितियों में हुई है। चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 8 अक्टूबर को रात 10:15 बजे से हुई है और यह 9 अक्टूबर की रात 9: 35 बजे तक रहेगी।
सुबह 4 बजे से पहुंचे लोग
सिद्धनाथ घाट पर भगवान सिद्धवट मंदिर मौजूद है। आज आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुबह 4 बजे ही मंदिर के पट खोल दिए गए। सबसे पहले पुजारी मंडली ने पूर्वजों की आत्मशांति, जनकल्याण और सृष्टि कल्याण के लिए पूजा की। इसके बाद भक्तों द्वारा दूध अर्पित करने का सिलसिला शुरू हुआ।
लगी एक किलोमीटर लंबी लाइन
भगवान सिद्धवट का दूध से अभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं को काफी इंतजार करना पड़ रहा है। यहां लगभग 1 किलोमीटर लंबी लाइन लगी है, जिसमें लगने के बाद ही दूध अर्पित किया जा सकता है। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोगों ने तारों और पिंडदान भी किया है। यह सिलसिला रात 9 बजे होने वाली शयन आरती तक चलने वाला हैं।
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