उज्जैन में पितृपक्ष चतुर्दशी पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, गयाकोठा और सिद्धवट पर तर्पण कर रहे लोग
पितृपक्ष में पितरों के निमित्त दान और तर्पण करने का विशेष महत्व है। उज्जैन के गायकोठा और सिद्धनाथ घाट पर इस समय विशेष भीड़ देखने को मिलती है। परिजन अपने पितरों के श्राद्ध कर्म के लिए यहां पर आते हैं। आज चतुर्दशी पर यहां विशेष भीड़ देखने को मिल रही है।
अंकपात मार्ग स्थित गयाकोठा और भैरवगढ़ क्षेत्र स्थित सिद्धनाथ घाट पर तर्पण का विशेष महत्व माना गया है। गायकोठा तीर्थ को गया के समान ही फल देने वाला बताया जाता है। यही वजह है कि सुबह 4 बजे से ही यहां लोगों की भीड़ उमड़ रही है। सभी यहां अपने पूर्वजों की आत्मशांति के लिये पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म कर रहे हैं।
चतुर्दशी श्राद्ध का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं में चतुर्दशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु असामान्य परिस्थितियों में हुई है। चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 8 अक्टूबर को रात 10:15 बजे से हुई है और यह 9 अक्टूबर की रात 9: 35 बजे तक रहेगी।
सुबह 4 बजे से पहुंचे लोग
सिद्धनाथ घाट पर भगवान सिद्धवट मंदिर मौजूद है। आज आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुबह 4 बजे ही मंदिर के पट खोल दिए गए। सबसे पहले पुजारी मंडली ने पूर्वजों की आत्मशांति, जनकल्याण और सृष्टि कल्याण के लिए पूजा की। इसके बाद भक्तों द्वारा दूध अर्पित करने का सिलसिला शुरू हुआ।
लगी एक किलोमीटर लंबी लाइन
भगवान सिद्धवट का दूध से अभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं को काफी इंतजार करना पड़ रहा है। यहां लगभग 1 किलोमीटर लंबी लाइन लगी है, जिसमें लगने के बाद ही दूध अर्पित किया जा सकता है। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोगों ने तारों और पिंडदान भी किया है। यह सिलसिला रात 9 बजे होने वाली शयन आरती तक चलने वाला हैं।
दमोह रेलवे स्टेशन पर एक और यात्री की मौत, एक सप्ताह में तीसरी घटना से उठे सवाल, जानिए क्या है पूरा मामला?
दमोह रेलवे स्टेशन पर गुरुवार 8 अक्टूबर को मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत रामेश्वरम जा रही ट्रेन में एक यात्री की मौत हो गई। दरअसल ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचने के दौरान यात्री की तबीयत अचानक बिगड़ गई। आसपास मौजूद यात्रियों ने इसकी जानकारी रेलवे अधिकारियों को दी। सूचना मिलने पर रेलवे का अमला मौके पर पहुंचा और यात्री को इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के चलते ट्रेन करीब 15 मिनट तक रुकी रही।
दरअसल यात्री की पहचान और तबीयत बिगड़ने के कारण को लेकर फिलहाल स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। मौत की असली वजह पोस्टमार्टम और मेडिकल जांच के बाद ही पता चल सकेगी। घटना के बाद स्टेशन पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। रेलवे और प्रशासनिक अमले ने मौके पर पहुंचकर जरूरी कार्रवाई की।
मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन ट्रेन में यात्री की मौत
जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत श्रद्धालुओं को लेकर ट्रेन रामेश्वरम के लिए रवाना हुई थी। यात्रा के दौरान दमोह रेलवे स्टेशन पर एक यात्री की तबीयत बिगड़ गई। यात्रियों ने बिना देर किए रेलवे अधिकारियों को इसकी सूचना दी, जिसके बाद मदद के लिए अधिकारी मौके पर पहुंचे। यात्री की हालत ज्यादा बिगड़ने पर उसे एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच की, लेकिन यात्री को बचाया नहीं जा सका। उसे मृत घोषित कर दिया गया। फिलहाल यह साफ नहीं है कि यात्री को पहले से कोई बीमारी थी या ट्रेन में सफर के दौरान अचानक उसकी तबीयत खराब हुई थी।
एक सप्ताह में तीन यात्रियों की मौत
दरअसल दमोह रेलवे स्टेशन पर पिछले एक सप्ताह के दौरान तीन यात्रियों की मौत के मामले सामने आए हैं। इनमें 4 अक्टूबर, 6 अक्टूबर और अब 8 अक्टूबर को हुई घटनाएं शामिल हैं। लगातार सामने आए इन मामलों के चलते स्टेशन पर यात्रियों की तबीयत बिगड़ने और समय पर इलाज मिलने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 4 अक्टूबर को कामायनी एक्सप्रेस में सफर कर रही 34 वर्षीय महिला की तबीयत बिगड़ गई थी। ट्रेन के दमोह स्टेशन पहुंचने के बाद डॉक्टर ने महिला को मृत घोषित कर दिया था। इसके दो दिन बाद, 6 अक्टूबर को निजामुद्दीन एक्सप्रेस में 22 वर्षीय युवक बेहोशी की हालत में मिला था। उसे ट्रेन से उतारकर जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे भी मृत घोषित कर दिया। अब 8 अक्टूबर को मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत रामेश्वरम जा रही ट्रेन में एक और यात्री की मौत हो गई। तीनों घटनाएं अलग-अलग ट्रेनों में हुई हैं। हालांकि अभी तक ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है जिससे इन मौतों के बीच किसी साझा वजह की पुष्टि होती हो।
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