ओबामा के करीबी थे, अब ट्रम्प के खास बने जुकरबर्ग:राष्ट्रपति ने जेल भेजने की धमकी दी थी, अब साथ मिलकर AI के नियम बना रहे
मेटा चीफ मार्क जुकरबर्ग कभी अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के करीबी थे। 2021 में फेसबुक और इंस्टाग्राम ने ट्रम्प का अकाउंट बंद कर दिए, तो उन्होंने जुकरबर्ग को जेल भेजने की धमकी दी थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद जुकरबर्ग ने ट्रम्प से रिश्ते सुधार लिए हैं। अब जुकरबर्ग का प्रभाव AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े फैसलों में भी दिख रहा है। AI सुरक्षा समझौते का मसौदा तैयार करने में उनका बड़ा रोल है। जुकरबर्ग ने ट्रम्प से बिगड़े रिश्ते कैसे सुधारे 2021 में अमेरिकी संसद पर हमले के बाद फेसबुक और इंस्टाग्राम ने ट्रम्प के अकाउंट्स पर रोक लगा दी थी। कंपनी को आशंका थी कि ट्रम्प की पोस्ट से हिंसा और बढ़ सकती है। इस फैसले से ट्रम्प नाराज हो गए। उन्होंने जुकरबर्ग पर अपने खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया और उन्हें उम्रकैद तक की धमकी दी। दोनों के रिश्ते सुधरने की शुरुआत जुलाई 2024 में हुई। पेंसिल्वेनिया की एक चुनावी रैली में ट्रम्प पर जानलेवा हमला हुआ। इस घटना के बाद जुकरबर्ग ने कहा कि गोली लगने के बाद ट्रम्प का उठकर हाथ लहराना उनके जीवन में देखी गई सबसे शानदार चीजों में से एक था। जुकरबर्ग की इस तारीफ के कुछ हफ्ते बाद ट्रम्प ने भी उनके प्रति नरम रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि अब वे जुकरबर्ग को पहले से ज्यादा पसंद करते हैं। ट्रम्प के करीब आने के लिए क्या-क्या किया? ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद जुकरबर्ग ने उनसे रिश्ते सुधारने के लिए कई कदम उठाए। ट्रम्प से नजदीकी का जुकरबर्ग को फायदा मिला ट्रम्प और जुकरबर्ग की बढ़ती नजदीकी का असर सरकारी फैसलों पर भी दिख रहा है। जुकरबर्ग ने एनवीडिया के CEO जेंसन हुआंग के साथ मिलकर AI सुरक्षा समझौते का शुरुआती मसौदा तैयार किया। पिछले हफ्ते व्हाइट हाउस में ट्रम्प और टेक कंपनियों के प्रमुखों की बैठक में इसे अंतिम रूप दिया गया। समझौते का मकसद AI के लिए मानक तय करना, उन्हें लागू करना और उनकी जांच कराना है। जुकरबर्ग का मानना है कि AI की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को तकनीकी सुधारों से दूर किया जा सकता है। हालांकि, यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है और इसमें कंपनियों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। ट्रम्प से दोस्ती आगे चलकर भारी भी पड़ सकती है CNN के मुताबिक जुकरबर्ग को ट्रम्प के करीब आने का फायदा मिल रहा है, लेकिन इसके नुकसान भी हो सकते हैं। अगर नवंबर में डेमोक्रेटिक पार्टी को अमेरिकी संसद में बहुमत मिलता है या 2028 में उसका राष्ट्रपति बनता है, तो मेटा को कड़े सवालों का सामना करना पड़ सकता है। पिछले महीने डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने मेटा को लैटर लिखकर पूछा कि कंपनी ने रिपब्लिकन संगठनों और ट्रम्प की पसंदीदा परियोजनाओं को कितना पैसा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेटा ने ट्रम्प को खुश रखने के लिए भारी रकम खर्च की और अब उसे इसका फायदा मिल रहा है। ट्रम्प के कुछ पुराने सहयोगी भी जुकरबर्ग पर भरोसा नहीं करते। उन्हें लगता है कि जुकरबर्ग की बदली हुई राजनीति के पीछे कोई विचारधारा नहीं, बल्कि अपनी कंपनी को फायदा पहुंचाने की कोशिश है। यानी जुकरबर्ग ने कभी जिस ट्रम्प से टकराव मोल लिया था, आज उसी के साथ मिलकर AI के भविष्य से जुड़े फैसलों में भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन यह दोस्ती कितनी टिकेगी, इसका फैसला आने वाले चुनाव और अमेरिकी राजनीति का रुख करेगा। ---------------------- यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 2 लाख भारतवंशी वोटर्स के नाम कटे: मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प को हार का डर; 2024 में 65% ने विपक्ष को वोट दिया था अमेरिका की वोटर लिस्ट से 2 लाख भारतीय मूल के वोटर्स का नाम कट गया है। इन लोगों के नाम उन 26 राज्यों में काटे गए हैं, जहां ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी की सरकार है। पूरी खबर पढ़ें…
नीमच में पटवारियों का विरोध, स्वामित्व रजिस्ट्री विवाद में निलंबन पर फूटा गुस्सा, अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल शुरू
स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी भूमि की रजिस्ट्री निष्पादन को लेकर नीमच जिला प्रशासन और राजस्व अमला आमने-सामने आ गया है। जिले में कार्य में लापरवाही और धीमी प्रगति का हवाला देते हुए हाल ही में तीन पटवारियों के खिलाफ की गई निलंबन की दंडात्मक कार्रवाई के विरोध में मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने मोर्चा खोल दिया है। कार्रवाई को एकतरफा और विधि-विरुद्ध बताते हुए जिले भर के पटवारी शुक्रवार से अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल पर चले गए हैं। संघ के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा और स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक तीनों पटवारियों का निलंबन आदेश रद्द नहीं होता, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे।
नीमच जिले में स्वामित्व योजना के अंतर्गत आबादी भूमि के अभिलेख तैयार करने और पात्र हितग्राहियों की रजिस्ट्री निष्पादित करने को लेकर प्रशासनिक समीक्षा बैठक हुई थी। लक्ष्य पूरा न होने और काम में विलंब पाए जाने पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए हालिया समीक्षा के उपरांत संबंधित क्षेत्र के 3 पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। प्रशासनिक स्तर पर की गई इस अचानक कार्रवाई से पूरे राजस्व महकमे में आक्रोश फैल गया। पटवारियों का कहना है कि जमीनी हकीकत, पोर्टल की तकनीकी खामियों, सर्वर की दिक्कतों और आबादी क्षेत्र के सीमांकन में आने वाली व्यावहारिक विसंगतियों को समझे बिना ही कर्मचारियों को सीधे बलि का बकरा बनाया गया है।
प्रदेश स्तर पर भी उठ चुका है मुद्दा
मध्यप्रदेश पटवारी संघ के अनुसार, स्वामित्व रजिस्ट्री को लेकर पटवारियों पर दबाव बनाने और उन पर कार्रवाई करने का यह पहला मामला नहीं है। प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह के मनमाने आदेशों और दंडात्मक कदमों के खिलाफ संघ प्रांतीय स्तर पर शासन को पहले ही ज्ञापन सौंप चुका है। इसके बावजूद नीमच जिले में जमीनी वस्तुस्थिति की जांच किए बिना तीन कर्मचारियों को निलंबित करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत और दुर्भाग्यपूर्ण है।
कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन, कामकाज ठप
हड़ताल के पहले ही दिन नीमच, मनासा और जावद तहसील सहित जिले की सभी तहसीलों के पटवारी जिला मुख्यालय पर एकत्र हुए। पटवारियों ने एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। कलमबंद हड़ताल के चलते जिले के राजस्व न्यायालयों, नामांतरण, बंटवारा, ई-केवाईसी, गिरदावरी सत्यापन और सीमांकन सहित आम जनता से जुड़े तमाम राजस्व कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं।
निलंबन की कार्रवाई विधि विरुद्ध, वापसी पर अड़ा संघ
मध्यप्रदेश पटवारी संघ, नीमच के जिलाध्यक्ष दिलीप सिंह चुंडावत का कहना है कि स्वामित्व योजना में रजिस्ट्री निष्पादन को लेकर हमारे 3 पटवारी साथियों पर निलंबन की जो कार्रवाई की गई है, वह पूरी तरह से विधि-विरुद्ध और अन्यायपूर्ण है। तकनीकी समस्याओं और व्यावहारिक अड़चनों को नजरअंदाज कर सीधे कर्मचारियों को निलंबित कर देना कतई स्वीकार्य नहीं है। इस विषय पर पूरे प्रदेश में विरोध दर्ज कराया जा चुका है फिर भी नीमच में यह दंडात्मक रवैया अपनाया गया। जब तक हमारे तीनों साथियों का निलंबन आदेश ससम्मान वापस नहीं लिया जाता, तब तक जिले का कोई भी पटवारी काम पर नहीं लौटेगा। हमारी कलमबंद हड़ताल और धरना प्रदर्शन अनवरत जारी रहेगा।
कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट
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