सकारात्मक वैश्विक संकेतों से कीमती धातुओं को मिला सपोर्ट, सोने-चांदी में करीब 1.5 प्रतिशत तक की बढ़त
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और निवेशकों की बढ़ती खरीदारी के चलते हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को दोनों कीमती धातुओं, सोने और चांदी, में मजबूती लौटी है, और इनमें 1 प्रतिशत से ज्यादा तक की तेजी दर्ज की गई। अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों, डॉलर में नरमी और मध्य पूर्व से जुड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रमों ने कीमती धातुओं को समर्थन दिया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना दो महीने के निचले स्तर से उबरकर फिर मजबूती के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं घरेलू वायदा बाजार और सर्राफा बाजार में भी इसका सीधा असर देखने को मिला।
अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी एक्सचेंज कॉमेक्स पर सोने की कीमतों में करीब 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जिसके बाद यह लगभग 4,200 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया। इसी तरह चांदी भी मजबूत खरीदारी के दम पर 60 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार करती दिखाई दी, जिसमें करीब 2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर में नरमी और बॉन्ड यील्ड में कमी से सोने की सुरक्षित निवेश के रूप में मांग बढ़ी है। साथ ही निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगे की ब्याज दर नीति पर भी नजर बनाए हुए हैं।
वहीं, घरेलू बाजार की बात करें तो, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर भी शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में अच्छी तेजी देखने को मिली। शुक्रवार के शुरुआती कारोबार के दौरान दिसंबर डिलीवरी वाले सोने का भाव 1,51,200 रुपए प्रति 10 ग्राम के दिन के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव 1,49,610 रुपए से 1,590 रुपए यानी 1.06 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है।
वहीं, दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी ने 2,24,500 रुपए प्रति किलोग्राम का उच्च स्तर टच किया, जो पिछले बंद भाव 2,21,233 रुपए से 3,267 रुपए यानी 1.47 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है।
हालांकि खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 11 बजे) दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 1,493 रुपए यानी 1 प्रतिशत चढ़कर 1,51,103 रुपए प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता नजर आया, तो वहीं दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी 3,088 रुपए यानी 1.40 प्रतिशत की उछाल के साथ 2,24,321 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान, जिसमें उन्होंने नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर किसी सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार किया, ने बाजारों को कुछ राहत दी है।
हालांकि मध्य पूर्व की स्थिति अभी भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इसी वजह से सुरक्षित निवेश विकल्पों के रूप में सोने और चांदी की मांग बनी हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता भी कीमतों को प्रभावित कर रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि दशहरा, धनतेरस और दिवाली जैसे त्योहारों के नजदीक आने के साथ सोने-चांदी की मांग और बढ़ सकती है। भारत में त्योहारों और शादी-विवाह के मौसम में आभूषणों की खरीदारी बढ़ने से कीमतों को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है।
हालांकि निवेशकों को वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी ब्याज दरों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि आने वाले दिनों में इन्हीं कारकों के आधार पर सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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पटना में Cinepolis और Coca-Cola पर 85 हजार रुपये का जुर्माना, ज्यादा कीमत पर पानी बेचने पर एक्शन
Consumer Court on Cinepolis and Coca Cola: सिनेमाघरों में अपनी मनमर्जी चलाने और दर्शकों की जेब पर डाका डालने वाले मल्टीप्लेक्स संचालकों को पटना की एक अदालत ने कड़ा सबक सिखाया है. अक्सर देखा जाता है कि फिल्म देखने जाने वाले लोगों को बाहर से पानी तक ले जाने की अनुमति नहीं दी जाती और परिसर के अंदर उसी पानी को दो से तीन गुना अधिक दाम पर बेचा जाता है. इस मनमानी के खिलाफ एक जागरूक नागरिक ने हार नहीं मानी और करीब एक दशक तक कानूनी लड़ाई लड़ी. अब उपभोक्ता अदालत ने सिनेपॉलिस सिनेमा और प्रसिद्ध पेय कंपनी कोका कोला पर कुल 85 हजार रुपये का भारी जुर्माना लगाकर आम जनता के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है.
साल 2016 का है पूरा मामला
यह पूरा विवाद करीब दस साल पुराना है. पीड़ित रजत तिवारी 23 सितंबर 2016 को पटना स्थित सिनेपॉलिस सिनेमा हॉल में चर्चित फिल्म पिंक देखने पहुंचे थे. जब वह ऑडिटोरियम में प्रवेश कर रहे थे, तभी मुख्य द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक लिया. सुरक्षाकर्मियों ने साफ कह दिया कि सिनेमाहॉल के भीतर बाहर से लाई गई कोई भी खाद्य सामग्री या पानी की बोतल ले जाना सख्त मना है. रजत ने सुरक्षाकर्मियों से काफी बातचीत की और अपनी पानी की बोतल अंदर ले जाने का आग्रह किया, लेकिन सुरक्षा कर्मचारियों ने उनकी एक न सुनी और बोतल बाहर ही रखवा ली.
मजबूरी में खरीदना पड़ा महंगा पानी
सिनेमाहॉल के भीतर जाने के बाद जब रजत को प्यास लगी, तो उनके सामने परिसर में बने काउंटर से ही पानी खरीदने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा था. काउंटर पर मौजूद कर्मचारियों ने उन्हें किनले ब्रांड की पानी की बोतल दी. इस बोतल की कीमत 50 रुपये वसूली गई. सामान्य तौर पर बाजार में 20 रुपये में बिकने वाली पानी की बोतल के लिए ढाई गुना अधिक दाम चुकाना रजत को बिल्कुल रास नहीं आया. उन्होंने इस पूरे व्यवहार को दर्शकों का खुला शोषण माना. फिल्म देखने के बाद उन्होंने इस अनुचित व्यापारिक गतिविधि के खिलाफ चुप बैठने के बजाय कानूनी रास्ता चुनने का पक्का मन बनाया.
उपभोक्ता अदालत की चौखट पर पहुंचे दर्शक
रजत तिवारी ने अपने साथ हुए इस मानसिक उत्पीड़न और जबरन महंगा सामान बेचने की शिकायत पटना जिला उपभोक्ता आयोग के सामने दर्ज कराई. अपनी याचिका में उन्होंने कहा कि सिनेमाहॉल प्रबंधन दर्शकों को बुनियादी जरूरत यानी पानी लाने से रोकता है और फिर अपनी मनपसंद कंपनियों के साथ मिलकर अंदर कई गुना महंगे दामों पर पानी बेचता है. उन्होंने सिनेमाहॉल और पानी निर्माता कंपनी दोनों को पक्षकार बनाते हुए मानसिक प्रताड़ना के हर्जाने और मुकदमे के खर्च की मांग अदालत के सामने रखी.
कंपनियों ने पेश की अपनी सफाई
मुकदमे की सुनवाई के दौरान सिनेपॉलिस प्रबंधन और कोका कोला कंपनी ने खुद का बचाव करने के लिए कई तर्क रखे. सिनेपॉलिस की तरफ से दलील दी गई कि खाद्य पदार्थों और पानी की बोतलों की कीमत तय करने में सिनेमाहॉल का कोई हाथ नहीं होता है. जो दाम निर्माता कंपनी तय करती है, उसी आधार पर सामान बेचा जाता है. दूसरी तरफ कोका कोला कंपनी ने अपनी पैरवी करते हुए कहा कि उनके उत्पाद पूरी तरह से कानूनी मानकों और माप विज्ञान नियमों के तहत तैयार और बेचे जाते हैं. कंपनी का दावा था कि विशेष परिसरों के लिए अलग से पैकेजिंग और मूल्य निर्धारण के कानूनी प्रावधान मौजूद हैं.
कोर्ट ने खारिज किए दोनों के तर्क
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष प्रेमरंजन मिश्रा और सदस्य रजनीश कुमार की पीठ ने दोनों कंपनियों के तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया. अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि एक ही सामान के लिए दो अलग-अलग अधिकतम खुदरा मूल्य यानी एमआरपी तय करना पूरी तरह से गलत और ग्राहकों के साथ धोखा है. इसके साथ ही सिनेमाहॉल परिसर में दर्शक को पीने का साफ पानी ले जाने से रोकना किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता. कोर्ट ने दोनों कंपनियों को संयुक्त रूप से दोषी करार दिया.
लगाया 85 हजार का जुर्माना
उपभोक्ता अदालत ने अपने ऐतिहासिक आदेश में सिनेपॉलिस और कोका कोला को आदेश दिया कि वे शिकायतकर्ता रजत तिवारी को मानसिक परेशानी के एवज में 25 हजार रुपये का मुआवजा अदा करें. इसके अतिरिक्त उनके अदालती खर्च के लिए 10 हजार रुपये देने का निर्देश दिया गया. साथ ही अनुचित व्यापारिक लाभ कमाने पर रोक लगाने के मकसद से दोनों कंपनियों पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए इस राशि को राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने का आदेश सुनाया.
नियम तोड़ने पर ब्याज का प्रावधान
अदालत ने दोनों कंपनियों को यह पूरी राशि जमा करने के लिए 45 दिनों की मोहलत दी है. आयोग ने साफ चेतावनी दी है कि तय समय सीमा के भीतर आदेश का पालन न करने पर पूरी रकम पर ब्याज वसूला जाएगा. इसके साथ ही अदालत ने सभी पैकेज्ड खाद्य और पेय उत्पाद बेचने वालों को कड़ा निर्देश दिया है कि वे अपने हर उत्पाद पर एमआरपी साफ-साफ लिखें और एक ही उत्पाद के दो अलग-अलग दाम वसूलने से पूरी तरह परहेज करें. कोर्ट का यह फैसला उन लाखों दर्शकों के लिए बड़ी राहत है जो अक्सर मल्टीप्लेक्स में लूट का शिकार होते हैं.
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