आज अभिषेक शर्मा रांची में रचेंगे इतिहास, पूर्व वर्ल्ड चैंपियन कप्तान को पीछे छोड़कर हासिल करेंगे नंबर-1 का स्थान
Abhishek Sharma : अभिषेक शर्मा के पास आज एक सुनहरा मौका है, जहां वो एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर सकते हैं. अभिषेक शर्मा आज यानी 9 अक्टूबर को भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाले दूसरे टी20 मुकाबले में अपने नाम एक बड़ा रिकॉर्ड कर सकते हैं. इस रिकॉर्ड तक पहुंचने के लिए अभिषेक शर्मा को इंडियन क्रिकेट टीम के पूर्व वर्ल्ड चैंपियन कप्तान सूर्यकुमार यादव को पीछे छोड़ना होगा. तब जाकर वो झारखंड़ के रांची स्थिति जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम में बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर पाएंगे. अब अभिषेक कौन सा रिकॉर्ड अपने नाम करेंगे और सूर्यकुमार यादव को किस मामले में पीछे छोड़ेंगे आइए जानते हैं.
1-0 in Lucknow ✅ #TeamIndia with their ???????????????????????????? ???????????????????????? arrive in Ranchi! ????️#INDvWI | 2nd T20I ???? Fri, 9th Oct, 6 PM! pic.twitter.com/jl4YyBgiIB
— Star Sports (@StarSportsIndia) October 9, 2026
अभिषेक शर्मा के पास सूर्यकुमार यादव को पीछे छोड़ने का मौका
अभिषेक शर्मा के पास टी20 क्रिकेट में गेंदों के हिसाब से सबसे तेज 2000 रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम करने का मौका होगा. सूर्यकुमार यादव के नाम टी20 क्रिकेट में गेंद खेलने के हिसाब से सबसे तेज 2,000 रन बनाने का रिकॉर्ड है. सूर्यकुमार ने 1,164 गेंदों पर अपने 2,000 टी20 रन पूरे किए थे. अब अभिषेक शर्मा के पास रांची में भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले जाने वाले दूसरे टी20 मुकाबले में पूरा मौका होगा कि वो सूर्या को पीछे छोड़ सकें.
अब तक अभिषेक शर्मा 63 मैचों की 62 पारियों में 997 गेंदों का सामना कर 1,947 रन बना चुके हैं. अभिषेक के पास सूर्या का रिकॉर्ड तोड़ने और सबसे तेज 2,000 रन बनाने वाला टी20 बल्लेबाज बनने का मौका है. इसके लिए उन्हें बहुत कम गेंदें खेलनी होंगी, लेकिन अभिषेक जिस तरह की बल्लेबाजी करते हैं, अगले 20 से 25 गेंदों में वो अपने 2,000 रन पूरे कर सूर्यकुमार यादव का रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं.
Six-hitting at its absolute peak! ????
— Star Sports (@StarSportsIndia) October 8, 2026
Packed with bold aggression and audacious strokeplay, #AbhishekSharma & #IshanKishan rule the charts in clearing the fence! ????
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अभिषेक शर्मा इन दिनों शानदार लय में हैं. वो एशियन गेम्स 2026 में पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल में तूपानी अर्धशतकीय पारी खेलकर आए हैं. अभिषेक शर्मा ने अफगानिस्तान के खिलाफ एक शतक भी जड़ा था. उन्होंने इस सीरीज में वेस्टइंडीज के खिलाफ लखनऊ में खेले गए पहले टी20 मुकाबले में अभिषेक शर्मा अच्छे टच में दिखे थे, लेकिन 10 गेंदों पर 21 रन बनाकर आउट हो गए थे. अब अभिषेक शर्मा रांची में वह सूर्यकुमार यादव से आगे निकल पाते हैं या नहीं. ये तो आने वाले वक्त ही बताएगा.
अभिषेक इन पाकिस्तानी बल्लेबाजों को भी छोड़ेंगे पीछे
आपको बात दें कि, अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में सूर्यकुमार यादव के बाद सबसे तेज 2,000 रन बनाने का रिकॉर्ड पाकिस्तान के पूर्व कप्तान बाबर आजम के नाम है. बाबर ने 1,289 गेंद खेलकर अपने 2,000 रन पूरे किए थे. इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर भी पाकिस्तान के ही विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान हैं. रिजवान ने 2,000 टी20 रन 1,326 गेंदों पर पूरे किए थे. अभिषेक शर्मा के पास सूर्यकुमार यादव के साथ-साथ बाबर आजम और मोहम्मद रिजवान को भी पीछे छोड़ने का मौका है.
भारत और वेस्टइंडीज का स्क्वाड
भारत : अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेट कीपर), ईशान किशन, श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, नमन धीर, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव, मयंक यादव, रवि बिश्नोई, नीतीश कुमार रेड्डी, वैभव सूर्यवंशी, प्रिंस यादव.
वेस्टइंडीज : शाई होप (विकेट कीपर), कामिल पूरन, शिमरोन हेटमायर, रोवमैन पॉवेल, शेरफेन रदरफोर्ड, रोस्टन चेस, रोमारियो शेफर्ड, मैथ्यू फोर्ड, शमर स्प्रिंगर, अकील होसेन, शमर जोसेफ, गुडाकेश मोटी, कीमो पॉल, आमिर जांगू, क्वेंटिन सैम्पसन.
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कैंसर मरीजों को बड़ी राहत: दवाओं की कीमतों पर लगाम लगाएगी सरकार, सालाना 2,500 करोड़ रुपए तक की बचत का अनुमान
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। कैंसर उपचार को अधिक किफायती बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं की आपूर्ति और बिक्री पर लगने वाले व्यापारिक मार्जिन को सीमित करने को मंजूरी दे दी है। नई व्यवस्था के तहत इन दवाओं पर अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) का 30 प्रतिशत मार्जिन ही लिया जा सकेगा।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस कदम से कई कैंसर दवाओं की कीमतों में 70 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है और मरीजों को हर साल लगभग 2,500 करोड़ रुपए की बचत होगी। इससे इलाज पर होने वाला जेब से खर्च भी काफी घटने की उम्मीद है।
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि वर्तमान में आवश्यक कैंसर दवाएं, जो अनुसूचित सूची में शामिल हैं, पहले से ही सरकार द्वारा तय अधिकतम कीमतों के दायरे में आती हैं। हालांकि, बड़ी संख्या में ऐसी कैंसर दवाएं भी हैं जो इस सूची में शामिल नहीं हैं और उन पर प्रत्यक्ष मूल्य नियंत्रण लागू नहीं होता।
नई व्यवस्था के माध्यम से सरकार इन गैर-अनुसूचित दवाओं पर भी अप्रत्यक्ष मूल्य नियंत्रण लागू करेगी, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों तक पहुंचने से पहले सप्लाई चेन में अत्यधिक मार्जिन न जोड़ा जाए।
सरकार के अनुसार, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अंतर्गत एक विशेषज्ञ समिति उन दवाओं की सूची तैयार करेगी जिन्हें इस व्यवस्था के तहत शामिल किया जाएगा। इसके बाद राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) अंतिम अधिसूचना जारी करेगा।
बयान में आगे कहा गया है कि भारत में कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। अनुमान के अनुसार, प्रति एक लाख आबादी पर लगभग 60 लोग कैंसर से प्रभावित हैं। ऐसे में इलाज की ऊंची लागत कई परिवारों के लिए आर्थिक संकट का कारण बन जाती है।
एनपीपीए के विश्लेषण में पाया गया कि गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर औसतन 170 प्रतिशत तक मूल्य वृद्धि हो जाती है, जबकि कुछ मामलों में यह बढ़ोतरी 700 प्रतिशत से अधिक तक पहुंच जाती है। अर्थात दवा निर्माता से निकलने के बाद मरीज तक पहुंचने के दौरान कीमत कई गुना बढ़ जाती है।
इसके अलावा, एक ही दवा की कीमत खुदरा मेडिकल स्टोर, अस्पताल फार्मेसी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग पाई गई।
महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक सहित कई राज्यों के अधिकारियों, मरीज समूहों और सामाजिक संगठनों ने लंबे समय से कैंसर दवाओं की ऊंची कीमतों को लेकर चिंता जताई थी।
मुख्य आपत्ति यह थी कि दवाओं की खरीद कीमत और उपभोक्ताओं से लिए जाने वाले अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के बीच बहुत बड़ा अंतर है। सरकार का मानना है कि नई सीमा लागू होने से अनुचित मुनाफाखोरी पर रोक लगेगी और मरीजों को अधिक न्यायसंगत कीमतों पर दवाएं मिल सकेंगी।
मंत्रालय ने बयान में कहा कि सरकार ने इस फैसले के पीछे 2019 के अनुभव का भी उल्लेख किया है। फरवरी 2019 में सरकार के निर्देश पर एनपीपीए ने 42 गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन की सीमा तय की थी।
उस समय कुछ दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों में 91 प्रतिशत तक कमी आई थी। सरकार के अनुसार, उस कदम से 526 ब्रांडों पर सालाना लगभग 984 करोड़ रुपए की बचत हुई थी और कैंसर मरीजों पर आर्थिक बोझ कम हुआ था।
अब उसी मॉडल को व्यापक स्तर पर लागू करते हुए अधिक दवाओं को मूल्य सुरक्षा के दायरे में लाया जा रहा है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि मूल्य नियंत्रण लागू करने के साथ-साथ दवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी। गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं का उत्पादन करने वाली कंपनियों को अपने मौजूदा उत्पादन स्तर बनाए रखने होंगे।
नई व्यवस्था ब्रांडेड और जेनेरिक, दोनों प्रकार की दवाओं पर लागू होगी। इसके अलावा घरेलू और आयातित तथा पेटेंट और गैर-पेटेंट सभी श्रेणियों की दवाएं इसके दायरे में लाई जा सकेंगी।
--आईएएनएस
डीबीपी
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