अमेरिका में साइंस-टेक को बूस्ट, 6 बिलियन डॉलर के प्रोजेक्ट में साथ आएंगी टेक कंपनियां और यूनिवर्सिटीज
वॉशिंगटन, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिका में विज्ञान और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 6 अरब डॉलर से अधिक की योजनाओं का ऐलान किया है। इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, न्यूक्लियर-पावर्ड स्पेस एक्सप्लोरेशन और बायोमेडिकल साइंस में रिसर्च को तेज करने के लिए सरकारी एजेंसियों, टेक्नोलॉजी कंपनियों, यूनिवर्सिटीज और परोपकारी संस्थाओं को एक साथ लाया गया है।
साइंस: ए न्यू गोल्डन एज समिट में ये घोषणाएं की गईं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से उभरती हुई टेक्नोलॉजी में अमेरिकी लीडरशिप को मजबूत करने के लिए एक बड़े प्रोग्राम की रूपरेखा पेश की गई।
व्हाइट हाउस की एक फैक्ट शीट के अनुसार, इन पहलों में जेनेसिस मिशन के लिए 11 इंडस्ट्री पार्टनर्स से 2.4 बिलियन डॉलर के कंप्यूटिंग रिसोर्स और टेक्नोलॉजी सपोर्ट शामिल हैं। इस मिशन का मकसद वैज्ञानिक खोजों को तेज करने के लिए सुपरइंटेलिजेंस का इस्तेमाल करना है।
एनवीडिया ने 1 बिलियन डॉलर, एएमडी ने 500 मिलियन डॉलर और ओपनएआई ने 200 मिलियन डॉलर देने का वादा किया। एंथ्रोपिक और गूगल ने 150-150 मिलियन डॉलर देने का वादा किया, जबकि अन्य प्रतिभागियों में अमेजन वेब सर्विसेज, माइक्रोन और कई टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां शामिल थीं।
इससे ऊर्जा, हेल्थकेयर, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में वैज्ञानिक चुनौतियों पर काम कर रही 15 से अधिक फेडरल एजेंसियों को सपोर्ट मिलेगा। व्हाइट हाउस के साइंस एडवाइजर माइकल क्रैट्सियोस ने कहा, आज का दिन अमेरिकी वैज्ञानिक जगत के लिए उतना ही क्रांतिकारी है, जितना कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद फेडरल रिसर्च इकोसिस्टम को फिर से तैयार करने के समय था।
उन्होंने आगे कहा, आज घोषित की गई कोशिशें हमारे साइंस इकोसिस्टम में अरबों डॉलर का निवेश करेंगी ताकि अब मौजूद नए वैज्ञानिक अवसरों को साकार किया जा सके।
प्रशासन ने वैज्ञानिक कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और वर्कफोर्स ट्रेनिंग का विस्तार करने के लिए यूनिवर्सिटी, इंडस्ट्री और जॉर्जिया राज्य को शामिल करते हुए 1 बिलियन डॉलर के निवेश की भी घोषणा की।
10 राज्यों की 14 से अधिक यूनिवर्सिटी एक रीजनल कंप्यूटिंग कंसोर्टियम में भाग लेंगी, जबकि नॉर्थ और साउथ कैरोलिना की पांच यूनिवर्सिटी एक और रिसर्च कंप्यूटिंग हब स्थापित करेंगी। नेशनल साइंस फाउंडेशन और डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी ने एडवांस्ड वैज्ञानिक उपकरणों और ऑटोनॉमस लेबोरेटरी के लिए 100 मिलियन डॉलर से अधिक की घोषणा की।
क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में, एनर्जी डिपार्टमेंट ने 215 मिलियन डॉलर की एक प्रतियोगिता शुरू की, जिसका मकसद ऐसे फॉल्ट-टॉलरेंट क्वांटम कंप्यूटर विकसित करना है, जो वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण समस्याओं को हल करने में सक्षम हों। नासा और एनर्जी डिपार्टमेंट ने न्यूक्लियर-पावर्ड स्पेसक्राफ्ट और लूनर एनर्जी सिस्टम विकसित करने की योजनाओं की भी घोषणा की।
इन प्रोजेक्ट्स में स्पेस रिएक्टर-1 शामिल है, जो 2028 में मंगल मिशन के लिए एक न्यूक्लियर-पावर्ड स्पेसक्राफ्ट है, और लूनर रिएक्टर-1, जो चंद्रमा पर प्रस्तावित न्यूक्लियर फिशन रिएक्टर है। बायोमेडिकल रिसर्च को एक और बड़ा बढ़ावा मिला है। नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ, एनर्जी डिपार्टमेंट और बायोहब ने मिलकर सेल्स और बायोलॉजिकल सिस्टम्स के वर्चुअल मॉडल बनाने के लिए 1.8 अरब डॉलर का एक प्रोग्राम शुरू किया है।
बीमारियां कैसे पनपती हैं, इन प्रोग्रामों से बेहतर ढंग से समझने में आसानी होगी। प्रशासन ने जेनेसिस मिशन फेलोशिप के तहत 100 मिलियन डॉलर देने का भी ऐलान किया है। यह फेलोशिप ऐसे तेज रफ्तार डॉक्टोरल प्रोग्राम्स को सपोर्ट करेगी, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को साइंटिफिक और इंजीनियरिंग विषयों के साथ जोड़ा गया है।
अन्य पहलों में होनहार स्कूली छात्रों, शुरुआती करियर वाले रिसर्चर्स और पारंपरिक रिसर्च संस्थानों से बाहर काम करने वाले वैज्ञानिकों के लिए मौके शामिल हैं।
एक नए एक्स-लैब्स कंसोर्टियम को मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च टीमों को सपोर्ट करने के लिए इंडस्ट्री और परोपकारी संस्थाओं से 310 मिलियन डॉलर से ज्यादा की मदद मिलेगी।
व्हाइट हाउस ने कहा कि ये घोषणाएं पहले किए गए फेडरल निवेशों पर आधारित हैं। इनमें जेनेसिस मिशन को सपोर्ट करने के लिए 5 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता और स्वतंत्र रिसर्च लैबोरेटरीज के लिए नेशनल साइंस फाउंडेशन की 1.5 अरब डॉलर की पहल शामिल है।
व्हाइट हाउस ने इस प्रोग्राम को सरकार, इंडस्ट्री, यूनिवर्सिटीज और परोपकारी संस्थाओं के बीच एक साझेदारी बताया है। इसका मकसद अमेरिकी तकनीकी नेतृत्व को बनाए रखना और वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की एक नई पीढ़ी तैयार करना है।
--आईएएनएस
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जबलपुर में महिला सरपंच ने सचिव पर लगाए फर्जी बिल बनाने के आरोप, कलेक्टर से की शिकायत, धमकी देने का भी किया दावा
जबलपुर जिले के झलौन गांव की महिला सरपंच लक्ष्मी बाई ने पंचायत सचिव पुष्पराज सिंह लोधी पर विकास कार्यों में फर्जी बिल लगाने और धमकी देने के आरोप लगाए हैं। दरअसल गुरुवार को वह गांव से करीब 55 किलोमीटर दूर कलेक्ट्रेट पहुंचीं और कलेक्टर के नाम डिप्टी कलेक्टर को शिकायत सौंपी। वहीं जिला पंचायत CEO अभिषेक गहलोत ने शिकायत को गंभीर बताते हुए जांच कराने की बात कही है।
दरअसल महिला सरपंच का आरोप है कि गांव में विकास कार्यों के लिए सीमेंट, लोहा, गिट्टी और दूसरे सामान की खरीदी के बिल बढ़ाकर लगाए जा रहे हैं। उन्होंने गांव के व्यापारी संदीप जैन के साथ मिलकर फर्जी बिल तैयार करने का भी आरोप लगाया है। सरपंच के मुताबिक जब उन्होंने पंचों के साथ मिलकर इन कामों का विरोध किया तो उन्हें धमकी दी गई और कामकाज में अपनी मर्जी चलाने की बात कही गई।
झलौन पंचायत में फर्जी बिल का आरोप
वहीं लक्ष्मी बाई ने अपनी शिकायत में कहा कि पंचायत सचिव पुष्पराज सिंह लोधी गांव में अपनी मर्जी से काम करवा रहे हैं। उनके मुताबिक गांव में एक ही बड़ा व्यापारी संदीप जैन है जिससे पंचायत के कामों के लिए सामान खरीदा जाता है। सरपंच का आरोप है कि सीमेंट, लोहा, गिट्टी और अन्य सामग्री की खरीदी के बिल वास्तविक खर्च से कई गुना ज्यादा दिखाए जाते हैं। दरअसल महिला सरपंच ने दावा किया कि पंचायत में लगाए गए कई बिल फर्जी हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में पहले बिल तैयार कर दिए जाते थे और बाद में मोबाइल पर OTP आने के बाद उन पर दबाव बनाकर हस्ताक्षर करवाए जाते थे। सरपंच का कहना है कि उन्होंने जब पंचों के साथ मिलकर इस तरह के कामों पर सवाल उठाए तो उनकी बात नहीं सुनी गई।
बिलों की जांच करने की मांग
साथ ही शिकायत में मांग की गई है कि झलौन गांव में हुए विकास कार्यों और उनसे जुड़े बिलों की जांच की जाए। सरपंच का कहना है कि अगर खरीदी के रिकॉर्ड, बिल और मौके पर हुए कामों का मिलान किया जाए, तो कथित गड़बड़ियों का पता चल सकता है। फिलहाल ये सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। इनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
सचिव पर धमकी देने का भी लगाया आरोप
वहीं लक्ष्मी बाई के मुताबिक जब उन्होंने पंचायत के कामों में गड़बड़ी का विरोध किया, तो सचिव ने उनसे कहा कि वह पढ़ी-लिखी नहीं हैं और उन्हें ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत नहीं है। सरपंच का आरोप है कि जब उन्होंने कलेक्टर और CEO से शिकायत करने की बात कही तो जवाब मिला कि शिकायत करने से कुछ नहीं होगा और वह जहां चाहें शिकायत कर सकती हैं। महिला सरपंच ने सचिव पर दबंगई दिखाने का आरोप लगाते हुए कहा कि गांव में पंचायत के कामकाज पर उनका ही नियंत्रण रहता है। उन्होंने शिकायत में सचिव के पुराने विवाद का भी जिक्र किया। सरपंच के अनुसार, करीब चार साल पहले गांव में एक कार्यक्रम के दौरान फायरिंग की घटना हुई थी जिसके बाद सचिव को सस्पेंड भी किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सचिव अपने प्रभाव का हवाला देकर लोगों को डराते हैं।
रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई
वहीं महिला सरपंच की शिकायत पर जिला पंचायत CEO अभिषेक गहलोत ने इसे गंभीर मामला बताया है। उन्होंने कहा कि शिकायत की जांच कराई जाएगी। इसके लिए शहपुरा जनपद पंचायत के CEO को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। जांच में पंचायत के विकास कार्यों, खरीदी से जुड़े बिलों और दूसरे रिकॉर्ड की पड़ताल की जा सकती है। शिकायत में जिन बिलों को फर्जी बताया गया है उनकी जांच के दौरान यह देखना अहम होगा कि दर्ज खरीदी और मौके पर उपलब्ध सामग्री या किए गए काम में कोई अंतर है या नहीं। OTP के जरिए हस्ताक्षर करवाने के आरोपों की भी जांच जरूरी होगी।
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