आज भाद्रपद अमावस्या है, हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का खास महत्व है। भाद्रपद अमावस्या को कुशग्रहणी (कुशोत्पाटिनी) अमावस्या और पिठोरी अमावस्या भी कहा जाता है। यह अमावस्या पितरों के तर्पण और संतान की लंबी उम्र व सुख-समृद्धि के लिए समर्पित है तो आइए हम आपको भाद्रपद अमावस्या तिथि का महत्व एवं पूजा विधि के बारे में बताते हैं।
जानें भाद्रपद अमावस्या के बारे में
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व है। विशेष रूप से भाद्रपद माह की अमावस्या को पिठोरी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। यह दिन माताओं द्वारा अपने बच्चों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सुरक्षा के लिए व्रत रखने के लिए समर्पित होता है। पौराणिक शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद अमावस्या के दिन कुशा इकट्ठी की जाती है। इसे पिठौरा, कुशोत्पाटनी, कुशग्रहणी अमावस्या इत्यादि नामों से भी जाना जाता है। इस दिन सुहागिन स्त्रियां व्रत रखकर भगवान भोलेनाथ एवं देवी दुर्गा की पूजा करती है। यह दिन पितरों की तृप्ति, पिंड दान, तर्पण और वंश वृद्धि के लिए अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
अमावस्या की शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीया लगाने, पितरों का स्मरण, शिव जी और शनि देव की आराधना करने से जीवन में चारों तरफ लाभ मिलता है। इस वर्ष भाद्रपद अमावस्या की तिथि 11 सितंबर को है। भाद्रपद अमावस्या को स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है एवं पाप मिटते हैं। इस दिन नाराज पितरों को खुश करने और पितृ दोष की शांति के उपाय किए जाते हैं।
भाद्रपद अमावस्या में स्नान का शुभ मुहूर्त
पंडितों के अनुसार 11 सितंबर को भाद्रपद अमावस्या के दिन आप ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर सकते हैं क्योंकि यह नहाने का सबसे उत्तम समय होता है। भाद्रपद अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त 04:32 से 05:18 तक है। जो लोग ब्रह्म मुहूर्त में स्नान न कर पाएं, वे सूर्योदय के बाद भी स्नान कर सकते हैं। उसके बाद अपनी क्षमता के अुनसार दान करें।
भाद्रपद अमावस्या पर ये चीजें करें दान, होगा लाभ
भाद्रपद अमावस्या को स्नान करने के बाद आप किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को कपड़े का दान कर सकते है। इसके अलावा चावल, गेहूं, दाल, हरी सब्जियां, फल, अनाज, गुड़, बर्तन, छाता आदि का दान कर सकते हैं। दान के साथ कुछ पैसे भी दे सकते हैं।
भाद्रपद अमावस्या के दिन पितरों की नाराजगी दूर करने के उपाय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद अमावस्या पर सुबह स्नान के बाद पितरों का ध्यान करें और उनके निमित्त तर्पण करें। अन्न-वस्त्र का दान कर जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं। इसके अलावा गाय, कौआ, कुत्ता और अन्य जीवों को भी भोजन कराएं।
पितृ दोष से मुक्ति पाने का दिन
ज्योतिषीय दृष्टि से पितृ दोष होने पर व्यक्ति को करियर में बार-बार बाधा, आर्थिक अस्थिरता, पारिवारिक तनाव, संतान संबंधी चिंता या काम में अनावश्यक रुकावट जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।
भाद्रपद अमावस्या के दिन भूलकर भी न करें ये गलती
पंडितों के अनुसार भाद्रपद अमावस्या के दिन पितरों के नाम पर किए जाने वाले कर्म श्रद्धा और नियमपूर्वक करने चाहिए। दिखावे के लिए पूजा-पाठ करने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार तर्पण, दान और भोजन कराएं। इस दिन किसी का अपमान करना, झूठ बोलना, क्रोध करना या जानबूझकर किसी को कष्ट पहुंचाने की गलती न करें।
पितृ दोष मुक्ति के उपाय
अमावस्या के दिन स्नान के बाद पितरों का स्मरण कर जल, काले तिल और कुश से तर्पण करें। घर में पितरों का स्मरण करते हुए ॐ पितृभ्यः नमः मंत्र का जाप कर सकते हैं। परिवार की ओर से जाने-अनजाने हुई भूल के लिए पितरों से क्षमा प्रार्थना करें। इस दिन क्रोध, झूठ, अपमान और किसी जरूरतमंद को खाली हाथ लौटाने से बचें।
पितरों का इसलिए भी होता है आशीर्वाद
हिंदू परंपरा में पितरों को परिवार की वंश परंपरा का आधार माना गया है इसलिए अमावस्या जैसे अवसरों पर पूर्वजों का स्मरण केवल दोष दूर करने के लिए नहीं, बल्कि उनके प्रति आभार व्यक्त करने की परंपरा भी है। पूर्वजों का आशीर्वाद हो तो परिवारजन पर कष्ट नहीं आते।
भाद्रपद अमावस्या से जुड़ी पौराणिक कथा भी है खास
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में एक गांव में सात भाई रहते थे। उनके साथ उनकी सात पत्नियां भी रहती थीं जो हर साल भाद्रपद अमावस्या पर पिठोरी व्रत करती थीं। सबसे बड़े भाई की पत्नी ने जब पहली बार यह व्रत किया, तो उसके नवजात शिशु की मृत्यु हो गई। इसके बाद क्रमानुसार दूसरे, तीसरे और इसी तरह छह भाइयों की पत्नियों ने जब-जब यह व्रत किया, तो उनके यहां भी संतानों की अकाल मृत्यु जैसी घटनाएं होने लगीं। केवल सबसे छोटे (सातवें) भाई की पत्नी ने जब व्रत किया, तो उसके बच्चे सुरक्षित रहे। दुखी होकर उन छह बहुओं ने अपनी छोटी देवरानी से इसका कारण पूछा। छोटी बहू ने बताया कि माता पार्वती और षष्ठी देवी की सच्चे मन से पूजा न करने और विधि में त्रुटि होने के कारण ऐसा हुआ है। तब सभी बहुओं ने अपनी भूल का पश्चाताप किया और माता पार्वती (पिठोरी माता) की विधि-विधान से आटे की मूर्तियां बनाकर क्षमा-प्रार्थना के साथ दोबारा व्रत और पूजन किया। माता की कृपा से सभी के मरे हुए बच्चे जीवित हो गए और उनके घरों में खुशहाली लौट आई।
भाद्रपद अमावस्या दिन जरूर करें ये उपाय
शास्त्रों के अनुसार पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए अमावस्या के दिन पूजा-अर्चना करने के बाद मंदिर में या जरूरतमंदों को पितरों का ध्यान करते हुए अन्न, वस्त्र, जूते-चप्पल और छाते का दान करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस उपाय को करने से पितृ दोष की समस्या दूर होती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इसके अलावा रोजाना पहली रोटी गाय के लिए और आखिरी रोटी कुत्ते के लिए निकालें। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को नियमित रूप से करने से जीवन में किसी चीज की कमी नहीं होती है। पितरों के तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध के दौरान पितृ मंत्रों और पितृ चालीसा का पाठ करें। इससे पूर्वज प्रसन्न होते हैं और परिवार के सदस्यों पर अपनी कृपा बरसाते हैं।
- प्रज्ञा पाण्डेय
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प्रेग्नेंसी के दौरान अक्सर महिलाओं को चीजें भूलने या फिर याददाश्त कमजोर होने की शिकायत होती है। इसको आम भाषा में 'मॉम्नेसिया' या 'मॉमी ब्रेन' कहा जाता है। अब वैज्ञानिकों ने इसके पीछे का कारण पता लगाया है। लंबे समय से प्रेग्नेंट महिलाओं का यह मानना है कि वह प्रेग्नेंसी के दौरान छोटी-छोटी बातों को भूल जाती हैं, जैसे कमरे में आकर यह भूल जाना कि वह किस काम के लिए वहां आई थीं, या जरूरी चीजों को रखकर भूल जाना। लेकिन हाल ही में हुए एक नए शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि इसके पीछे दिमाग का एक खास न्यूरल सर्किट और हार्मोन्स जिम्मेदार होता है।
जाने 'मॉमी ब्रेन' और हार्मोन्स का कनेक्शन
महिलाओं के शरीर में प्रेग्नेंसी के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल काफी बढ़ जाता है। यह हार्मोन गर्भ में पलने वाले बच्चे के विकास के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। वहीं प्रेग्नेंसी के थर्ड ट्राइमेस्टर में इसका लेवल अपने चरम पर पहुंच जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि यह बढ़ा हुआ एस्ट्रोजन हार्मोन दिमाग के उस सर्किट को प्रभावित करता है, जोकि हाइपोथैलेमस को हिम्पोकैम्पस से भी जोड़ता है।
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हिम्पोकैम्पस दिमाग का वह हिस्सा होता है, जोकि हमारी याददाश्त और चीजों को याद रखने में अहम भूमिका निभाता है। जब एस्ट्रोजन का लेवल लंबे समय तक काफी ज्यादा रहता है, तो यह अस्थाई रूप से दिमाग के तालमेल को बाधित कर देता है, जिस कारण याददाश्त से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं।
जानिए कैसे हुई यह रिसर्च
वैज्ञानिकों ने पाया कि हाइपोथैलेमस के न्यूरॉन्स ज्यादा एस्ट्रोजन की वजह से हिप्पोकैम्पस की एक्टिविटी को स्लो कर देते हैं, जिससे याद करने की क्षमता पर असर पड़ता है।
चूहों पर किए गए परीक्षण में यह साबित हुआ कि बढ़े हुए एस्ट्रोजन लेवल से उनमें याददाश्त की कमी पाई गई। लेकिन इससे चूहे के मूड पर कोई निगेटिव असर नहीं पड़ा।
वहीं जब वैज्ञानिकों ने चूहों के दिमाग से उस खास न्यूरल लिंक को इन-एक्टिव किया गया तो, उनमें भी याददाश्त की समस्या ठीक हो गई।
वहीं इस शोध के दौरान 70 प्रेग्नेंट महिलाओं और गैर प्रेग्नेंट महिलाओं पर भी परीक्षण किया गया। जिससे यह साफ हो गया कि प्रेग्नेंसी के लास्ट महीनों में याददाश्त पर असर बढ़ते हार्मोन्स से जुड़ा है।
प्रेग्नेंसी के दौरान 'मॉमी ब्रेन' की वजह से होने वाली भूलने की समस्या अब सिर्फ मिथक नहीं, बल्कि इसके पीछे हार्मोनल वजह है। हालांकि यह स्थिति महिलाओं के रोजमर्रा के कामकाज और जीवन को थोड़ा प्रभावित कर सकता है। लेकिन यह पूरी तरह से अस्थायी होता है और डिलीवरी के बाद धीरे-धीरे ठीक हो जाता है। वैज्ञानिकों के इस रिसर्च से यह साफ हुआ कि यह शरीर में होने वाले प्राकृतिक बदलावों का एक सामान्य हिस्सा है, जिससे परेशान होने की जरूरत नहीं है।
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