इंडिगो टिकट आज से महंगी, फ्यूल चार्ज बढ़ाया:घरेलू उड़ानों में 1300, इंटरनेशनल में 10 हजार रुपए तक ज्यादा देने होंगे; 6 महीने में तीसरी बढ़ोतरी
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की फ्लाइट आज से महंगी हो गई हैं। एयरलाइन ने घरेलू उड़ानों में 1300 रुपए तक और इंटरनेशनल उड़ानों में 10 हजार रुपए तक एक्स्ट्रा फ्यूल चार्ज लगाने का ऐलान किया है। नई कीमतें 6 अक्टूबर रात 12:01 बजे से लागू हैं। इंडिगो ने छह महीने में तीसरी बार फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया है। इससे पहले एयरलाइन ने इस साल 14 मार्च और फिर 1 अप्रैल को किराया बढ़ाया था। एयरलाइन के मुताबिक, यह फैसला एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट फ्यूल महंगा होने की वजह से लिया गया है। जेट फ्यूल 1 अक्टूबर से ₹16 महंगा हुआ कंपनी ने किराया बढ़ाने का फैसला हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाला फ्यूल महंगा होने की वजह से लिया है। 1 अक्टूबर से घरेलू एयरलाइंस के लिए कीमत ₹121 से बढ़कर अब ₹137 हो गई है। यानी 1 लीटर ATF की कीमत 16 रुपए (करीब 13.2%) बढ़ गई है। तीन महीने में जेट फ्यूल ₹27.28 महंगा इंडिगो के अनुसार, पिछले एक ही महीने में जेट फ्यूल के दाम 14% से ज्यादा बढ़ चुके हैं। इसके चलते प्लेन में डलने वाला तेल अब पिछले 10 सालों में सबसे ज्यादा महंगा हो गया है। एयरलाइंस के लिए सबसे बड़ा खर्च होता है जेट-फ्यूल एयरलाइंस के लिए जेट-फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है। कुल ऑपरेटिंग खर्च में इसकी हिस्सेदारी 30% से 40% होती है। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें… एअर इंडिया की घरेलू फ्लाइट ₹399 महंगी: भारतीय एयरलाइंस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स का किराया 15% बढ़ाया; ईरान जंग से जेट फ्यूल के दाम दोगुने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब आम लोगों की जेब पर भी पड़ने लगा है। एअर इंडिया 12 मार्च से घरेलू फ्लाइट टिकटों पर 399 रुपये का फ्यूल सरचार्ज लगाएगी। यानी टिकट खरीदते समय अब आपको 399 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। वहीं, एअर इंडिया इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर भी सरचार्ज लगेगा। ब्लूमबर्ग ने भी अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी कि भारतीय एयरलांइस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराए में करीब 15% की बढ़ोतरी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती जंग और होर्मुज रूट प्रभावित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों और जेट फ्यूल के दाम में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। जिसका असर ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री पर भी दिखने लगा है। पूरी खबर पढ़ें…
GST-काउंसिल की मीटिंग 7 की जगह 8 अक्टूबर को होगी:ब्रिक्स सम्मेलन की वजह से दूसरी बार टली; GST कानून में सुधार की तैयारी
GST काउंसिल की 57वीं बैठक अब 7 अक्टूबर के बजाय 8 अक्टूबर को होगी। काउंसिल सचिवालय के मुताबिक, कुछ जरूरी वजहों से इस बैठक की तारीख को आगे बढ़ाया गया है। यह लगातार दूसरा मौका है जब इस बैठक का शेड्यूल बदला गया है। पहले यह बैठक 12 सितंबर को होने वाली थी, लेकिन दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स समिट की वजह से इसे टालकर 7 अक्टूबर किया गया था, जिसे अब एक दिन और आगे बढ़ा दिया गया है। टैक्स अधिकारियों से छिनेगा गिरफ्तारी का अधिकार GST काउंसिल की बैठक में देश के इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम में बड़े सुधारों को मंजूरी दे सकती है। नए प्रस्ताव के तहत टैक्स अधिकारियों से सीधे गिरफ्तार करने का अधिकार वापस लेने और फर्जीवाड़े के आपराधिक मामलों की सीमा बढ़ाने की तैयारी है। इसके अलावा, सितंबर 2025 में टैक्स दरों में बदलाव के बाद, सरकार अब नियमों को और आसान बनाकर कारोबारियों को राहत दे सकती है। जानिए इस बड़े बदलाव से जुड़ी हर जरूरी बात सवाल-जवाब में… सवाल: जीएसटी काउंसिल की बैठक में गिरफ्तारी से जुड़ा क्या बड़ा प्रस्ताव लाया जा रहा है? जवाब: नए प्रस्ताव के तहत सीजीएसटी (CGST) एक्ट की धारा 69 में संशोधन की तैयारी है। अब तक कमिश्नर लेवल की मंजूरी मिलने पर जीएसटी अधिकारी किसी व्यक्ति को सीधे गिरफ्तार कर सकते थे। नए बदलाव के बाद अधिकारियों से यह पावर वापस ले ली जाएगी। अब किसी भी गिरफ्तारी के लिए कोर्ट (न्यायिक मंजूरी) का आदेश अनिवार्य होगा। सवाल: क्रिमिनल प्रोसीडिंग्स की सीमा में क्या बदलाव होगा? जवाब: वर्तमान में 1 करोड़ रुपए से ज्यादा की टैक्स चोरी या फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम के मामलों में आपराधिक कार्रवाई और गिरफ्तारी की व्यवस्था है। प्रस्ताव के अनुसार, क्रिमिनल केस चलाने की इस लिमिट को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर सीधे ₹5 करोड़ करने की सिफारिश की गई है। यानी ₹5 करोड़ से कम के मामलों में आपराधिक केस दर्ज नहीं होगा। सवाल: क्या रूटीन टैक्स विवादों में भी अब जेल जाना पड़ सकता है? जवाब: नहीं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि क्लासिफिकेशन, वैल्यूएशन या इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के रूटीन विवादों को क्रिमिनल प्रोसीडिंग्स के दायरे से बाहर रखा जाएगा। कई बार किसी एक ट्रांजैक्शन की परिभाषा को लेकर बिजनेस और टैक्स अधिकारियों की राय अलग-अलग हो सकती है, ऐसे मामलों को अब क्रिमिनल ऑफेंस नहीं माना जाएगा। सवाल: जीएसटी अधिकारियों से अरेस्ट पावर वापस लेने की मुख्य वजह क्या है? जवाब: जब 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू हुआ था, तब फेक इनवॉइस और टैक्स चोरी पकड़ने के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम मजबूत नहीं था। इसलिए गिरफ्तारी का डर जरूरी था। अब जीएसटी का डेटा-ड्रिवन और ऑटोमेटेड इनवॉइस-मैचिंग सिस्टम बहुत मजबूत हो चुका है। सिस्टम ही फर्जी क्रेडिट को शुरुआत में ही पकड़ लेता है। इसके अलावा, गिरफ्तार किए गए अधिकतर लोगों को कोर्ट से आसानी से जमानत मिल जाती थी और कारोबारी इसे अधिकारियों द्वारा परेशान करने का जरिया मानते थे। सवाल: अगर अरेस्ट पावर हट जाएगी, तो सरकार टैक्स की रिकवरी कैसे करेगी? जवाब: अधिकारियों की गिरफ्तारी की पावर खत्म होने का मतलब टैक्स माफी बिल्कुल नहीं है। सरकार की टैक्स वसूली, ब्याज और पेनल्टी लगाने की सिविल पावर्स पूरी तरह से बरकरार रहेंगी। छोटे और रूटीन मामलों में टैक्सपेयर बकाया टैक्स, ब्याज और पेनल्टी चुकाकर मामले का निपटारा कर सकेंगे। सवाल: क्या गंभीर धोखाधड़ी या फर्जीवाड़े के मामलों में सजा की व्यवस्था खत्म हो जाएगी? जवाब: नहीं। जानबूझकर की गई बड़ी धोखाधड़ी और टैक्स चोरी के गंभीर मामलों में कोर्ट के जरिए मुकदमा चलाया जाएगा। हालांकि, सजा के प्रावधानों को भी व्यावहारिक बनाया जा रहा है। 24 में से 9 आपराधिक धाराओं को पूरी तरह खत्म करने और 11 को बरकरार रखने का प्रस्ताव है। न्यूनतम जेल की बाध्यता को हटाकर केवल जुर्माना लगाने का विकल्प भी कोर्ट को मिलेगा। साथ ही, मध्यम श्रेणी के अपराधों में अधिकतम सजा 3 साल से घटाकर 2 साल करने का प्रस्ताव है। सवाल: इस फैसले से कारोबारियों और व्यापारियों को क्या फायदा होगा? जवाब: कारोबारियों और व्यापारियों को 4 फायदे मिल सकते हैं। सवाल: टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन के काम करने के तरीके में क्या बदलाव आएगा? जवाब: एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह भारत के इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव है। अब टैक्स प्रवर्तन 'डराने-धमकाने और गिरफ्तारी' के बजाय 'टेक्नोलॉजी, डेटा और सिविल रिकवरी' पर आधारित होगा। जीएसटी अधिकारी पुलिस की तरह अरेस्ट करने के बजाय टैक्स वसूली पर ध्यान देंगे, जबकि गंभीर आपराधिक मामले जांच एजेंसियों और अदालतों के हवाले होंगे। सवाल: यह सुधार सरकार की किस बड़ी नीति का हिस्सा है? जवाब: यह कदम केंद्र सरकार के 'जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2026' और आर्थिक अपराधों को गैर-आपराधिक बनाने के अभियान का हिस्सा है। इससे पहले सितंबर 2025 में जीएसटी दरों में बड़ा बदलाव (GST 2.0) कर 5%, 18% और लक्जरी सामानों के लिए 40% का स्लैब बनाया गया था। अब दूसरे फेज में एडमिनिस्ट्रेशन को आसान बनाने पर जोर है। जानें क्या है सीजीएसटी कानून की धारा 69? जवाब: CGST कानून की धारा 69 टैक्स कमिश्नर को यह अधिकार देती है कि यदि उसके पास यह मानने का कारण हो कि किसी व्यक्ति ने निर्दिष्ट गंभीर टैक्स अपराध किए हैं, तो वह किसी अधिकारी को उस व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए अधिकृत कर सकता है। नए प्रस्ताव में इसी सीधे अधिकार को खत्म कर कोर्ट ऑर्डर से जोड़ने की बात कही गई है।
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