Delhi Police ने Rahul Gandhi और Priyanka Gandhi पर दर्ज कीं 4 FIR
नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला करने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा तथा अन्य के खिलाफ कम से कम चार प्राथमिकी दर्ज की हैं। पुलिस सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि बुधवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किए गए कांग्रेस के प्रदर्शन के संबंध में यह प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।
सूत्रों ने बताया कि कई नेताओं के अलावा, प्रदर्शन में भाग लेने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी मारपीट, सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन से रोकने और बीएनएसएस की धारा 163 के उल्लंघन से संबंधित धाराओं के तहत दर्ज की गई हैं। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान कुल 91 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें कई सांसद और नेता शामिल थे।
विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ के नेताओं के विरोध प्रदर्शन का राहुल गांधी ने नेतृत्व किया था जिसके बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी समेत कई सांसदों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। जनपथ स्थित एक दक्षिण भारतीय शाकाहारी रेस्तरां में दोपहर के भोजन के बाद जब विपक्षी नेता बसों में सवार होकर जंतर-मंतर पर अचानक धरने के लिए जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया, जिससे दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के बीच प्रियंका गांधी और अन्य महिला नेता संविधान की प्रति हाथ में लेकर सड़क पर लेट गईं, जिन्हें जबरन हटाकर पुलिस बसों में बिठाया गया।
विरोध प्रदर्शन करने वालों में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), राष्ट्रीय जनता दल, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और कुछ अन्य दलों के सांसद शामिल थे।
Elon Musk के अंबानी वाले सवाल पर बोले Rahul Gandhi, दूसरे व्यक्ति से मिलेंगे तो और पता चलेगा
नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेरिकी अरबपति एलन मस्क के भारत में स्टारलिंक को लाइसेंस मिलने में कथित देरी से जुड़े अंबानी संबंधी सवाल पर बृहस्पतिवार को कहा कि भारत में आपका स्वागत है, लेकिन ‘दूसरे व्यक्ति’ से मिलेंगे तो और पता चलेगा। राहुल गांधी ने दूसरे व्यक्ति के संबोधन में किसी का नाम नहीं लिया, हालांकि वह अदाणी समूह को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अक्सर हमला करते हैं। दरअसल, मस्क ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि स्टारलिंक को 165 से अधिक देशों में लाइसेंस प्राप्त है और उनकी कंपनी पिछले पांच वर्षों से भारत सरकार के हर कानून और आवश्यकता का पालन कर रही है।
उन्होंने सवाल किया कि इसके बावजूद भारत में स्टारलिंक को अब तक लाइसेंस क्यों नहीं मिला है। मस्क ने पोस्ट में उद्योगपति मुकेश अंबानी का जिक्र करते हुए पूछा, ‘‘क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?’’ राहुल गांधी ने मस्क की पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए लिखा, ‘‘भारत में आपका स्वागत है, एलन। दूसरे व्यक्ति से मिलेंगे तो और पता चलेगा।’’ इसके जवाब में मस्क ने कहा, ‘‘धन्यवाद, राहुल।
यह वास्तव में चिंताजनक है।’’ मस्क की स्टारलिंक भारत में उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए लाइसेंस हासिल करने की प्रक्रिया में है। उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत में सैटेलाइट इंटरनेट क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को लेकर भी चर्चा तेज है। सरकार ने इससे एक दिन पहले मस्क के इस आरोप पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी कि कुछ ‘‘कुलीन कारोबारी’’ भारत के बाजार पर ‘‘एकाधिकारवादी शिकंजा’’ बनाए रखने के लिए स्टारलिंक को रोक रहे हैं।
मस्क ने किसी कंपनी का नाम नहीं लिया था। दूरसंचार मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश में सैटकॉम सेवाओं के लिए सुरक्षा मानकों का अनुपालन प्रदर्शित करना हर लाइसेंसधारी के लिए अनिवार्य है। सरकार ने मस्क की स्टारलिंक, रिलायंस जियो की सैटेलाइट इकाई जियो सैटकॉम और भारती समर्थित यूटेलसैट वनवेब सहित तीन कंपनियों को लाइसेंस दिया है, लेकिन आवश्यक सुरक्षा आकलन और स्पेक्ट्रम संबंधी मंजूरी पूरी होने तक इनमें से कोई भी कंपनी वाणिज्यिक सेवाएं शुरू नहीं कर सकती।
दूरसंचार मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि तीनों लाइसेंसधारकों के संबंध में सुरक्षा आकलन की प्रक्रिया फिलहाल जारी है। संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा कि मामला गृह मंत्रालय से संबंधित है और किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं है। उन्होंने ‘इंडिया मोबाइल कांग्रेस’ से इतर संवाददाताओं से कहा, ‘‘दूरसंचार विभाग ने सभी सैटकॉम कंपनियों को लाइसेंस के साथ-साथ अस्थायी स्पेक्ट्रम भी जारी किया है।
उन्होंने कहा कि अब मामला सुरक्षा मंजूरी के लिए गृह मंत्रालय के पास लंबित है। मंजूरी मिलते ही उन्हें (कंपनियों को) यह मिल जाएगी। इसका किसी एक कंपनी से कोई लेना-देना नहीं है।
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