Delhi Traffic Police के कैमरों ने हर मिनट काटे 10 चालान, वसूली की दर बेहद कम
नयी दिल्ली, सात अक्टूबर दिल्ली के स्वचालित यातायात प्रवर्तन कैमरों ने इस साल के शुरुआती नौ महीनों के दौरान हर मिनट कम से कम 10 चालान काटे, जिनमें से लगभग आधे तय गति से अधिक रफ्तार में गाड़ी चलाने से संबंधित थे। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2021 से सितंबर 2026 के बीच कैमरों द्वारा जारी किए गए लगभग 79 प्रतिशत नोटिस का भुगतान नहीं किया गया। इस साल, लगाए गए 404 यातायात कैमरों द्वारा जारी किए गए नोटिसों में से पांच प्रतिशत से भी कम पर जुर्माने की वसूली हुई।
आंकड़ों से पता चला है कि इस अवधि के दौरान यातायात प्रवर्तन कैमरों द्वारा लगभग 3.26 करोड़ नोटिस जारी किए गए, जिनमें से लगभग 67 लाख यानी 21 प्रतिशत का भुगतान किया गया और लगभग 2.59 करोड़ नोटिस बकाया रह गए। छह साल की अवधि में, प्रति मिनट जारी किए गए ट्रैफ़िक चालान की सबसे ज़्यादा दर 2026 में दर्ज की गई। इस साल 30 सितंबर तक, दिल्ली यातायात पुलिस ने लगभग 30.8 लाख चालान मौके पर जारी किए, जबकि उनके कैमरों ने 40.6 लाख अतिरिक्त नोटिस जारी किए, जिससे कुल संख्या लगभग 71.4 लाख हो गई, यानी हर मिनट लगभग 18 चालान किये गए।
हालांकि, कैमरों द्वारा जारी किए गए नोटिस में पिछले कुछ वर्षों में गिरावट आई है। कैमरों द्वारा 2021 में लगभग 66 लाख चालान जारी किए गए थे, लेकिन 2022 में यह घटकर लगभग 59.9 लाख, 2023 में 56.7 लाख, 2024 में 51.8 लाख और 2025 में 51.6 लाख रह गए। इस साल सितंबर तक 40.6 लाख नोटिस जारी किए गए।
कैमरों ने सबसे ज्यादा चालान तय गति से अधिक रफ्तार के कारण जारी किये। अधिक गति से गाड़ी चलाने पर कार्रवाई लगभग पूरी तरह से कैमरों के जरिये की जाती है। इसके बाद कैमरे के जरिये अनुचित पार्किंग के चालान किए गये।
वर्ष 2026 में अब तक ऐसे लगभग 5.5 लाख नोटिस जारी किए गए हैं। इसके बाद कैमरों के जरिये बिना हेलमेट गाड़ी चलाने के लिए चालान काटे गए। इस श्रेणी में 2021 में लगभग 1.8 लाख चालान किए गए थे, जो 2025 में बढ़कर लगभग 5.2 लाख हो गए।
वर्ष 2026 में सितंबर तक लगभग 5.9 लाख नोटिस जारी किए गए हैं। इस बीच, लाल बत्ती पार करने के आरोप में 2021 में लगभग 11.6 लाख चालान किए गए थे, जो 2025 में घटकर लगभग 3.8 लाख रह गए। इस साल अब तक ऐसे लगभग 1.9 लाख चालान किए गए हैं।
‘स्टॉप-लाइन’ उल्लंघन के नोटिस भी 2021 में करीब 7.3 लाख से घटकर 2025 में लगभग 3.8 लाख रह गए। वैध प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसीसी) प्रमाण पत्र के बिना गाड़ी चलाने के चालान 2021 में लगभग 1.2 लाख चालान किए गए थे, जो 2025 में बढ़कर तकरीबन 8.6 लाख के हो गए। इस साल अब तक लगभग 4.1 लाख नोटिस जारी किए गए हैं।
बिना लाइसेंस गाड़ी चलाने के संबंधी चालान 2021 में करीब 80,000 थे, जो 2025 में बढ़कर करीब 5.2 लाख हो गए। इस साल अब तक ऐसे करीब 3.6 लाख चालान काटे जा चुके हैं। बिना बीमा के गाड़ी चलाने को लेकर 2021 में लगभग 73,000 चालान किए गए थे, जो 2025 में बढ़कर करीब 4.4 लाख हो गए और 2026 में इस नियम के उल्लंघन को लेकर अबतक लगभग 2.7 लाख चालान किए जा चुके हैं।
गंभीर यातायात उल्लंघनों में, शराब पीकर गाड़ी चलाने के लिए 2021 में लगभग 2,800 चालान किए गए और 2022 में 2,300, वर्ष 2023 में 16,200, वर्ष 2024 में 22,700 और 2025 में 25,600 चालान किए गए। इस साल सितंबर तक यह संख्या करीब 16,900 रही। खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाने के लिए इस अवधि के दौरान सालाना 16,500 से 29,300 के बीच चालान किए गए।
इस साल सितंबर तक लगभग 20,700 चालान जारी किए गए। हालांकि सीट-बेल्ट नहीं लगाने को लेकर 2021 में लगभग 75,000 चालान किए गए थे जो 2025 में से घटकर करीब 52,000 रह गए। वर्ष 2026 में अब तक लगभग 33,600 चालान जारी किए गए हैं।
वहीं, दिल्ली यातायात पुलिस ने 2021 से सितंबर 2026 के बीच लगभग 21,800 वाहनों को जब्त किया। कैमरों द्वारा जारी किए गए नोटिस पर जुर्माना वसूली की कम दर चिंता का विषय बनी हुई है। कैमरों के जरिये गए काटे गए चालान पर 2021 में लगभग 26 प्रतिशत ने जुर्माने का भुगतान किया गया था, जबकि 2023 में यह आंकड़ा लगभग 24 प्रतिशत था।
भुगतान दर 2025 में 15 प्रतिशत से कम और 2026 के शुरुआती नौ महीनों में पांच प्रतिशत कम रही है। इस साल, सितंबर तक कैमरों के जरिये जारी किए गए 40.6 लाख नोटिस में से केवल दो लाख का भुगतान किया गया है।
Delhi Police ने कॉजपा के 20 जुलाई संसद मार्च हिंसा में दर्ज की नयी FIR
नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने 20 जुलाई को राष्ट्रीय राजधानी में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) द्वारा बुलाए गए संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा की परिस्थितियों की जांच के लिए एक नयी प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। सूत्रों ने कहा कि जांच का मुख्य ध्यान हिंसा के पीछे किसी बड़ी साजिश पर होगा, जिसमें कथित उकसाने वालों की पहचान की जाएगी और यह जांच की जाएगी कि क्या यह हिंसा पूर्व नियोजित थी।
अपराध शाखा ने जंतर-मंतर पर कॉजपा के एक और प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से दो दिन पहले प्राथमिकी दर्ज की है। इस बार यह प्रदर्शन मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए किया जाएगा। पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि 10 अक्टूबर को किसी भी विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है।
उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर नयी दिल्ली जिले के कई थानों में दर्ज 17 प्राथमिकी रद्द कर दी गई थीं। केंद्र के अनुरोध पर, शीर्ष अदालत ने हालांकि उस समय दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन में मौजूद गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 व्यक्तियों के खिलाफ नयी प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति दी थी। नयी प्राथमिकी के संबंध में पुलिस सूत्र ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि अपराध शाखा की टीम इस बात की भी जांच करेंगी कि कॉजपा द्वारा 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च के आह्वान के बाद क्या आपराधिक तत्व प्रदर्शन में घुस गए थे।
सूत्र ने कहा, पुलिस घटनाओं के क्रम को फिर से तैयार करेगी, (विरोध प्रदर्शन में) मौजूद लोगों की भूमिका निर्धारित करेगी और उपद्रव के पहले और इसके दौरान आदान-प्रदान किए गए संदेशों की जांच करेगी। आपराधिक साजिश, साझा मंशा, लोक सेवकों पर हमला, तोड़फोड़ और दंगे से संबंधित भारतीय न्याय संहिता के कई प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। अधिकारी ने कहा कि जांच में उन लोगों की पहचान करने पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा जिन्होंने कथित तौर पर हिंसा को भड़काया था।
सूत्र ने कहा, हम जांच करेंगे कि उनमें से प्रत्येक ने क्या भूमिका निभाई, क्या उन्हें विरोध में शामिल होने के लिए कहा गया था या उन्होंने स्वयं भाग लिया था, और क्या वे हिंसा में शामिल थे। पुलिस ने कहा कि उकसाने वालों की पहचान करने और हिंसा की वजह बनने वाली परिस्थितियों को स्थापित करने के लिए प्राथमिकी दर्ज की गई है। कॉजपा के 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मी और छात्र प्रदर्शनकारी घायल हो गए थे, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था और सरकारी इमारतों को विकृत किया गया था।
सूत्र ने बताया कि पुलिस ने इन सभी घटनाओं का संज्ञान लिया है। अपराध शाखा उन 2,873 लोगों की भूमिका की भी जांच करेगी, जिनके बारे में पुलिस ने कहा था कि विरोध प्रदर्शन के दौरान फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (चेहरा पहचानने वाली प्रणाली) के जरिए उनकी पहचान आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के रूप में की गई थी। पुलिस ने यह भी कहा कि उसका एफसीआर लगभग 50 प्रतिशत सटीक है।
दिल्ली में 20 जुलाई को कॉजपा के नेतृत्व वाले संसद चलो मार्च में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुई थीं। सुरक्षाबलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया था और आंसू गैस के गोले छोड़े थे।
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