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दिवाली-छठ पर घर आने वालों की टेंशन खत्म! मुंबई-पुणे से गोरखपुर के लिए स्पेशल ट्रेनें, जानें टाइमिंग-रूट

दिवाली और छठ पूजा पर घर आने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने बड़ा राहत प्लान तैयार किया है. त्योहारों की भीड़ को देखते हुए मुंबई और पुणे से गोरखपुर के लिए फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी.

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GST Council Reforms: करदाताओं की गिरफ्तारी का नियम खत्म, पांच करोड़ तक की राहत

नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर जीएसटी परिषद ने बृहस्पतिवार को सुधारों को आगे बढ़ाते हुए कर प्रशासन में व्यापक बदलावों को मंजूरी दी। इसके तहत जीएसटी अधिकारियों का करदाताओं को गिरफ्तार करने का अधिकार समाप्त करने के साथ आपराधिक अभियोजन की सीमा बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये कर दी गई है। साथ ही ज्यादातर दावों के लिए तेज ‘रिफंड’ की व्यवस्था की गई है।

परिषद ने छोटे आपूर्तिकर्ताओं के लिए ई-कॉमर्स मंचों पर पंजीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने को मंजूरी दी है। इसमें जीएसटी पंजीकरण में बदलाव के लिए सरल प्रक्रिया, जुर्माने में कमी और इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावों के लिए बिल मिलान व्यवस्था की ओर बढ़ने के संबंध में अधिकारियों की एक समिति का गठन शामिल है। अधिकारियों की यह समिति तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी।

समिति ऐसे वास्तविक खरीदार को संरक्षण देने के मुद्दे की जांच करेगी, जिसके पास उचित बिल है, जिसने माल प्राप्त कर लिया है और अपने आपूर्तिकर्ता को पूरा भुगतान कर दिया है। परिषद ने जीएसटी नोटिस जारी करने के लिए 10,000 रुपये की न्यूनतम सीमा को भी मंजूरी दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि जीएसटी 2.0 के तहत प्रक्रिया संबंधी सुधार भरोसे के सिद्धांत पर आधारित हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सुधार एक्सप्रेस’ का हिस्सा है।

ये सुधार एक अप्रैल, 2027 से लागू किए जाएंगे। सीतारमण ने कहा, ‘‘कंपनियों पर भरोसा करना होगा। करदाताओं पर भरोसा करना होगा।

और कंपनियों के बीच भी भरोसा होना चाहिए। अगर वे ऐसा करते हैं तो हमें बहुत ज्यादा दखल देने की जरूरत नहीं होनी चाहिए...। जीएसटी की अगली पीढ़ी के सुधारों में दर और प्रक्रिया, दोनों से जुड़े 99 प्रतिशत मुद्दों का समाधान कर दिया गया है।” सीतारमण की अध्यक्षता और राज्यों के वित्त मंत्रियों वाली परिषद की बैठक कर दरों को युक्तिसंगत बनाने के एक साल से कुछ अधिक समय बाद हुई।

उन्होंने कहा कि जीएसटी की दरें अब स्थिर हो गई हैं और पिछले साल घोषित दरों में बदलाव के बावजूद राजस्व में लगातार वृद्धि हो रही है। सीतारमण ने जीएसटी व्यवस्था के तहत सुधारों के दूसरे चरण की घोषणा करते हुए कहा कि प्रक्रिया संबंधी सुधार अगले एक साल में व्यवस्थित हो जाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि परिषद ने तेजी से रिफंड देने पर सहमति जताई है।

इसके तहत रिफंड आवेदन की प्राप्ति की पुष्टि की अवधि 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी जाएगी। यदि 10 दिन के भीतर न तो प्राप्ति की पुष्टि की जाती है और न ही कमी संबंधी सूचना जारी की जाती है, तो आवेदन को प्राप्त हुआ माना जाएगा। सीतारमण ने कहा, ‘‘जोखिम आकलन के आधार पर प्रणाली के जरिये 90 प्रतिशत दावों को प्राप्ति की पुष्टि के तीन कार्यदिवस के भीतर मंजूरी मिलने की उम्मीद है।’’ उन्होंने कहा कि इससे रिफंड स्वतः मिलने लगेगा और कंपनियों की कार्यशील पूंजी में वृद्धि होगी।

मंत्री ने कहा कि परिषद ने पांच करोड़ रुपये तक के कारोबार वाले और केवल उपभोक्ताओं को आपूर्ति करने वाले कारोबारियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत साल में केवल एक बार रिटर्न दाखिल करना होगा और तिमाही आधार पर कर का भुगतान करना होगा। इसकी विस्तृत रूपरेखा पर परिषद की अगली बैठक से पहले फैसला किया जाएगा।

ये सुधार अप्रत्यक्ष करों के प्रवर्तन के तरीके में महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। गिरफ्तारी का अधिकार खत्म किया जाना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। मौजूदा केंद्रीय जीएसटी कानून की धारा 69 के तहत आयुक्त को निर्धारित शर्तों के अंतर्गत केंद्रीय कर अधिकारी को कुछ अपराधों के संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार करने की अनुमति देने का अधिकार है।

इस बदलाव से कर वसूली और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रभावी रूप से अलग कर दिया गया है। कर अधिकारी कर, ब्याज और लागू जुर्माने का आकलन और वसूली जारी रखेंगे, लेकिन सामान्य कर विवाद में जांच के स्तर पर करदाता को गिरफ्तारी का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह बदलाव जीएसटी प्रशासन को ‘फेसलेस’ यानी अधिकारियों से सीधे संपर्क के बिना और प्रौद्योगिकी आधारित बनाने की व्यापक पहल का भी हिस्सा है।

इसका उद्देश्य करदाताओं और अधिकारियों के बीच अनावश्यक संपर्क की गुंजाइश कम करना, विभिन्न क्षेत्रों में एकरूपता बढ़ाना और अधिकारियों के विवेकाधिकार को सीमित करना है। कंपनियों के लिए इसका मतलब यह हो सकता है कि जीएसटी अनुपालन व्यक्तिगत अधिकारियों के रवैये पर कम और रिटर्न, बिल, ई-वे बिल, इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावों तथा अन्य डिजिटल रिकॉर्ड से मिलने वाले आंकड़ों पर अधिक निर्भर होगा। ये फैसले जुलाई 2017 में जीएसटी लागू किए जाने के समय बनाई गई प्रवर्तन व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव को प्रतिबिंबित करते हैं।

परिषद की एक अन्य प्रमुख सिफारिश यह है कि कर्मचारियों के लिए लिए गए स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर संबंधित कंपनियों के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट उपलब्ध होगा। दूरसंचार टावर और कारखाने के बाहर बिछाई गई पाइपलाइन पर भी इनपुट टैक्स क्रेडिट उपलब्ध होगा। इन क्षेत्रों के लिए ये बड़े खर्च की मदें हैं।

परिषद ने मुफ्त नमूनों और ऐसे माल के नष्ट होने की स्थिति में भी इनपुट टैक्स क्रेडिट की सिफारिश की है, जिसकी उपयोग अवधि समाप्त हो गई हो और कानून के तहत उसे नष्ट करना जरूरी हो। परिषद ने परिवहन के दौरान माल के मामले में सिफारिश की है कि वाहन को केवल विशेष खुफिया सूचना के आधार पर रोका जाए। वाहन रोकने के फैसले को संयुक्त आयुक्त या उससे ऊपर के स्तर के अधिकारी से पहले ही मंजूरी लेनी होगी।

माल जिस राज्य से चला है और जिस राज्य में पहुंचना है, केवल उन्हीं राज्यों को सामान की जांच करने की अनुमति होगी। मार्ग में पड़ने वाले अन्य राज्य वाहन को नहीं रोक सकेंगे। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) के तहत पंजीकृत और कई राज्यों में कारोबार करने वाले करीब दो लाख करदाताओं के लिए केंद्रीकृत आकलन व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है।

फिलहाल सीजीएसटी क्षेत्राधिकार में करीब 69.5 लाख ऐसे करदाता हैं जो केवल सीजीएसटी के तहत आते हैं। इनमें से करीब दो लाख करदाता एक राज्य के भीतर या अलग-अलग राज्यों में कई सीजीएसटी क्षेत्राधिकार के तहत आते हैं। सीतारमण ने कहा, ‘‘हमारा इरादा आने वाले समय में कई सीजीएसटी क्षेत्राधिकार वाले इन करदाताओं के लिए केंद्रीकृत कर प्रशासन लाने का है।

इसमें सीजीएसटी से जुड़े सभी कार्यों के लिए एकीकृत व्यवस्था होगी।’’ वित्त मंत्री ने कहा कि अगली पीढ़ी की जीएसटी रूपरेखा के तहत किए गए प्रक्रिया संबंधी सुधार अगले एक साल में व्यवस्थित हो जाएंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि इन बदलावों से कारोबार करना आसान होगा और केंद्र तथा राज्यों का राजस्व भी बेहतर बना रहेगा। उन्होंने कहा कि पिछले साल की गई कर दरों में कटौती से राजस्व में कोई कमी नहीं आई है।

कर संग्रह लगातार बढ़ा है।

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