GST Council ने खत्म की कर अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति, 5 करोड़ रुपये हुई अभियोजन सीमा
नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर जीएसटी परिषद ने बृहस्पतिवार को व्यापक सुधारों की दिशा में कदम उठाया। इसके तहत कर अधिकारियों की गिरफ्तारी का अधिकार खत्म करने और अभियोजन की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने को मंजूरी दी गयी। इसके साथ ही करदाताओं के लिए तेजी से और बड़े पैमाने पर स्वचालित रिफंड की व्यवस्था शुरू करने का भी फैसला किया गया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की 57वीं बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि सामान्य जुर्माने को भी 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करने का फैसला किया गया है। जीएसटी परिषद द्वारा मंजूर बदलाव एक अप्रैल, 2027 से लागू किए जाएंगे। परिषद ने यह प्रस्ताव भी मंजूर किया कि देर से रिटर्न दाखिल करने, कोई गलती करने या कर भुगतान में देरी करने वाले करदाता से केवल बकाया कर की वसूली, ब्याज और अनुपातिक जुर्माना ही लिया जाएगा।
इसके अलावा कोई अन्य कार्रवाई नहीं होगी। सीतारमण ने कहा कि परिषद ने एक अन्य महत्वपूर्ण सिफारिश के तहत उलट शुल्क ढांचे के तहत रिफंड का लाभ इनपुट (कच्चे माल) सेवाओं तक बढ़ाने का फैसला किया है। यह बदलाव एक नवंबर, 2026 या उसके बाद लिए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट पर लागू होगा।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार कई राज्यों में पंजीकृत केंद्रीय माल एवं सेवा कर (सीजीएसटी) करदाताओं के लिए ‘फेसलेस’ यानी करदाताओं और अधिकारियों के आमने-सामने आये बिना कर आकलन की व्यवस्था शुरू करने की योजना है। सीतारमण ने कहा कि जीएसटी में गिरफ्तारी की शक्ति खत्म कर दी जाएगी और अभियोजन की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही 10,000 रुपये से कम की राशि वाले मामलों में कोई नोटिस जारी नहीं किया जाएगा।
सीतारमण की अध्यक्षता और राज्यों के वित्त मंत्रियों वाली परिषद ने न्यूनतम सजा को भी खत्म करने की सिफारिश की है। साथ ही मामले में जुर्माना, कारावास या दोनों में से क्या सजा दी जाए, यह न्यायिक विवेक पर छोड़ दिया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि जहां कोई विशेष जुर्माना निर्धारित नहीं है, वहां लागू होने वाले सामान्य जुर्माने को भी 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बैठक में जीएसटी की किसी भी दर में बदलाव नहीं किया गया है। परिषद की सिफारिशें एक अप्रैल से प्रभावी होंगी। एक सवाल के जवाब में सीतारमण ने कहा कि जीएसटी परिषद ने मुख्य रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) से जुड़ी विसंगतियों को दूर कर लिया है और उलट शुल्क ढांचे की समस्या का समाधान कर दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मुझे नहीं लगता कि अब कारोबार सुगमता या विसंगतियों और दरों के लिहाज से बुनियादी मुद्दे लंबित हैं। आप कह सकते हैं कि चाहे वे दर से जुड़े हों या प्रक्रिया से, अगली पीढ़ी के जीएसटी के 99 प्रतिशत मुद्दों का समाधान हो चुका है।’’ वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी सुधार की प्रक्रिया भरोसे के सिद्धांत पर आधारित रही है। उन्होंने कहा, ‘‘कारोबारियों पर भरोसा करना होगा।
करदाताओं पर भरोसा करना होगा। और अगर कंपनियां आपस में विश्वास के साथ काम करती हैं, तो हमें जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
होर्मुज में टैंकर हमलों के बाद Crude Oil में उछाल Brent Crude 105 डॉलर पार पहुंचा
तेल बाजार में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों पर बढ़ते हमलों की खबरों और अमेरिका के खाड़ी तट पर तूफान की तैयारी के बीच कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर गई हैं। ब्रेंट कच्चा तेल फिर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, ब्रेंट कच्चा तेल 105.02 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। यह बुधवार के बंद भाव से 4.81% से अधिक की बढ़त है। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चा तेल 92.69 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव से करीब 5% ज्यादा है।
तेल की कीमतों में यह उछाल ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले ही अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की ओर से कच्चे तेल और ईंधन के भंडार को बाजार में लाने की संभावित योजना की जानकारी सामने आई थी। G-7 देशों ने पिछले सप्ताह करीब 100 मिलियन बैरल कच्चे तेल और ईंधन जारी करने पर सहमति जताई थी। इससे बाजार में यह उम्मीद बनी थी कि अतिरिक्त आपूर्ति से कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
हालांकि, बाजार के जानकारों का मानना है कि इस संभावित आपूर्ति का असर पहले ही कीमतों में काफी हद तक शामिल हो चुका है। ऐसे में ईरान से जुड़ी नई घटनाओं ने तेल बाजार की चिंता बढ़ा दी है। खबरों के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों पर हमले पहले की तुलना में ज्यादा हो गए हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना के नेतृत्व में चलने वाले एक सूचना तंत्र से मिले आंकड़ों में 28 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच ही करीब 12 हमलों की जानकारी सामने आई है। इन घटनाओं का सीधा असर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले टैंकरों की आवाजाही पर पड़ा है।
गौरतलब है कि दुनिया के तेल व्यापार के लिए होर्मुज स्ट्रेट बेहद अहम है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को इस रास्ते से टैंकरों की आवाजाही जुलाई के अंत के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई।
दूसरी तरफ, अमेरिका के खाड़ी तट पर भी मौसम ने तेल आपूर्ति को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। वहां तूफान के आने से पहले तेल उत्पादकों ने कुछ उत्पादन बंद करना शुरू कर दिया है। रिफाइनरियों को भी संभावित असर से निपटने के लिए तैयार किया जा रहा है। इससे आने वाले दिनों में कच्चे तेल और ईंधन की उपलब्धता पर दबाव पड़ सकता है।
एएनजेड के विश्लेषक डेनियल हाइन्स ने रॉयटर्स से कहा कि पहले ऐसे हमलों के बाद फारस की खाड़ी से तेल की आपूर्ति कम हुई है। लेकिन इस बार उत्पादक अपने टैंकरों को नुकसान पहुंचने का जोखिम उठाकर भी तेल भेजने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक तेल पहुंचाने के लिए उनके पास फिलहाल कोई आसान विकल्प नहीं है।
बता दें कि अगर होर्मुज मार्ग पर तनाव लंबे समय तक बना रहता है और अमेरिकी खाड़ी क्षेत्र में मौसम संबंधी व्यवधान बढ़ता है, तो इसका असर कच्चे तेल के साथ पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि बाजार की नजर अब ईरान से जुड़े घटनाक्रम और वैश्विक तेल आपूर्ति की स्थिति पर टिकी हुई हैं।
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